बच्चों के शरीर में फाइबर की कमी को कैसे करें पूरा?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 17, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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जब आप अपने बच्चों को स्वस्थ खाने के बारे में सोचते हैं तो आप वसा, कैलोरी और गुड फैट‌्स की तरफ ध्यान देते हैं। लेकिन एक और खाद्य पदार्थ है जिस पर विचार करने के लिए आपको जरूरत हो सकती है। साथ ही यह बच्चों को नियमित हेल्दी रखने में मदद करता है। यह है फाइबर! बच्चे के विकास में फाइबर भी आपके सबसे अच्छे पोषक तत्वों में से एक हो सकता है। फाइबर ग्लूकोज और इंसुलिन के स्तर को स्थिर रखता है। बच्चों के लिए फाइबर फूड का क्या महत्व है और फाइबर युक्त भोजन का लाभ क्या है, आप इस बारे में इस आर्टिकल के माध्यम से जान सकते हैं।

बच्चों के लिए फाइबर फूड : फाइबर युक्त भोजन का लाभ

कैसे फाइबर स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है?

शोध से पता चलता है कि जब बच्चे अधिक फाइबर वाले खाना खाते हैं, तो वे कम वसा और शुगर खाते हैं। यह अतिरिक्त वसा को होने से रोकने में उपयुक्त हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ में कैलोरी कम होती है। यह पचने में लंबा समय लेता है। फाइबर के अन्य लाभों में ग्लूकोज और इंसुलिन के स्तर को स्थिर रखना शामिल है, जो शरीर को अनावश्यक वसा के भंडारण से रोकता है।

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कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलता है

हमारा शरीर कार्बोहाइड्रेट्स को ब्लड शुगर (या ग्लूकोज) में परिवर्तित करता है, जो हमारे ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। जब हम साधारण कार्ब्स खाते हैं जो पचाने में आसान होते हैं (जैसे व्हाइट ब्रेड और प्लेन शुगर), तो ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर बढ़ता है, जिससे शरीर वसा के रूप में इसे स्टोर करता है।

दूसरी ओर फाइबर युक्त कार्ब्स पचाने में आसान नहीं होते हैं, इसलिए वे इस शुगर और इंसुलिन के बढ़ने का कारण नहीं बनते हैं। नतीजतन, जब बच्चे फाइबर खाते हैं, तो अतिरिक्त वसा को स्टोर करने के लिए शरीर को संकेत नहीं मिलता है।

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बच्चों के लिए फाइबर फूड : फाइबर के लाभ

फाइबर की कमी से बच्चों में कब्ज की समस्या

बच्चों के लिए फाइबर बहुत जरूरी होता है, ये तो आप जान ही गए होंगे लेकिन क्या आपको पता है कि बच्चों में फाइबर की कमी से कब्ज की समस्या भी हो सकती है। चार से पांच साल के बच्चों में कब्ज की समस्या आम हो सकती है। वैसे तो जो बच्चे फॉर्मुला मिल्क पीते हैं, उनमे भी कब्ज की समस्या हो सकती है। फॉर्मुला मिल्क आसानी से डायजेस्ट नहीं हो पाता है इसलिए कब्ज की समस्या हो सकती है। जब बच्चों के आहार में लगातार बदलाव किया जाता है तो भी उन्हें कब्ज की समस्या से जूझना पड़ सकता है। बच्चों के आहार में जब भी बदलाव करना है तो अचानक से न करें बल्कि धीमे-धीमे आहार में बदलाव करें। जब तक बच्चे दूध का सेवन करते हैं, उनका पाचन आसानी से हो जाता है लेकिन ठोस आहार की शुरूआत करने पर उन्हें पेट संबंधि समस्याओं से भी जूझना पड़ सकता है। आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अगर आपके बच्चे ने दूध के साथ ही ठोस आहार लेना शुरू कर दिया है तो ये बहुत जरूरी है कि आप उसे फाइबर युक्त खाना भी दें। फाइबर की उचित मात्रा बच्चों को कब्ज की समस्या से बचा सकती है। साथ ही जो बच्चे कम मात्रा में पानी पीते हैं, उन्हें भी कब्ज की समस्या हो सकती है। शरीर में कम मात्रा में लिक्विड पहुंचने से बच्चों में कॉन्स्टिपेशन की समस्या हो सकती है। आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से भी परामर्श कर सकते हैं।

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बच्चों को कितने फाइबर की होती है जरूरत है 

यह जानने के लिए कि आपके टॉडलर को फाइबर की कितनी जरूरत है, इस फॉर्मूले का पालन करें: आपके बच्चे की उम्र + पांच = यह प्रत्येक दिन उसे जितने फाइबर ग्राम की जरूरत है। इसलिए अगर आपका बच्चा दो साल का है, तो उसे रोजाना सात ग्राम फाइबर की जरूरत होती है। अपने बच्चे के आहार में इसके हिस्से को बढ़ाते समय, धीरे-धीरे फाइबर से भरे खाद्य पदार्थों को बढ़ाएं, जो आप उसे हर दिन देते हैं। साथ ही उसे फाइबर को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत सारे तरल पदार्थ पीने के लिए प्रोत्साहित करें।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड किडनी डिजीज के अनुसार 1 से 18 साल के बच्चों को एक दिन में 6 से 31 ग्राम तक फाइबर की जरूरत होती है। हम आपको यहां पर कुछ फूड के साथ ही उनसे मिलने वाली फाइबर की मात्रा के बारे में भी बता रहे हैं, ताकि आप बच्चों को उनका पसंदीदा फूड दे सके।

ओटमील से करें दिन की शुरूआत

अगर आपको ये समझ नहीं आ रहा है कि बच्चे कि दिन कि शुरूआत किस फूड से करनी चाहिए तो हम आपको यहां कुछ फूड के नाम बताने जा रहे हैं जो बच्चे के शरीर में फाइबर की कमी को पूरा करने का काम करेगा। बच्चे के दिन की शुरूआत आप उसे ओटमील या दलिया खिलाकर कर सकती हैं। बच्चों को नमकीन दलिया बहुत पसंद आती है और साथ ही ये शरीर को पोषण देने का काम करती है। अगर फाइबर की मात्रा की बात करें तो प्रति कप ओटमील में लगभग 4 ग्राम फाइबर शामिल होता है। अगर बच्चे को दालचीनी या किशमिश पसंद है तो आप ओटमील में इसे डाल सकती हैं।

सेब का सेवन

सेब और केला बच्चों को पसंद होता है। आप बच्चों को दिन में एक सेब जरूर खिलाएं। एक सेब में 3.6 ग्राम फाइबर होता है। अगर बच्चे को पीनट बटर (1.6 ग्राम के) पसंद है तो आप एप्पल के साथ उसे दें ताकि फाइबर की मात्रा बढ़ जाए। आप बच्चे को एक मीडियम साइज केला यानी बनाना भी दे सकते हैं। मीडियम साइज बनाना में 3.1 ग्राम फाइबर होता है। एक बात का ध्यान रखें कि बच्चे को जबरदस्ती खिलाने की कोशिश न करें। बच्चे जबरदस्ती खिलाने पर वॉमिट कर सकते है। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि बच्चे को क्या खाना पसंद है और क्या नहीं। आप चाहे तो बच्चे के लिए ऐसी डिश भी बना सकती हैं, जो उसे पसंद आए। आप चाहे तो बच्चे को सेब की खीर भी बनाकर दे सकती हैं।

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व्होल ग्रेन पास्ता

बच्चों को पास्ता खाना बहुत पसंद होता है। आप चाहे तो होममेड मैक्रोनी भी बना सकती हैं और बच्चे को डिनर में दे सकती हैं। करीब आधा कप मैक्रोनी में 2 ग्राम फाइबर होता है। इस बात का ध्यान रखें कि मैदे से बनी पास्ता का यूज न करें क्योंकि इसमे पोषण तत्व न के बराबर होते हैं। आप बच्चे के लिए होममेड मैक्रोनी बनाते समय उनके फेवरेट फूड भी एड कर सकते हैं।

हरी मटर और स्वीट पटैटो

हरी मटर में का सेवन फाइबर की कमी पूरा करता है। आप मीडियम साइज मटर को स्किन के साथ पका कर या उबाल कर बच्चे को दे सकते हैं। मटर में 5.5 ग्राम फाइबर होता है। आप चाहे तो मटर के साथ ही स्वीट पटैटो को मैश करके भी दे सकती हैं। स्वीट पटैटो में 3.8 ग्राम फाइबर होता है।

यहां आपके बच्चे के आहार में फाइबर को फिट करने के कुछ स्मार्ट और आसान तरीके बताए गए हैं:

टोस्ट, सैंडविच, रैप्स या बर्रिटोस बनाते समय, सफेद साबूत अनाज के ब्रेड को चुनें।

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बच्चों के लिए फाइबर फूड :  फाइबर के लिए ऐसे अनाज चुनें

जो पूरे गेहूं या जई जिनमें प्रति सेवारत कम-से-कम तीन ग्राम फाइबर होते हैं। यदि आपका बच्चा केवल मीठा अनाज खाता हैतो इसे थोड़ा उच्च फाइबर वाले अनाज के साथ मिलाएं और इसे उच्च फाइबर वाले फल जैसे किशमिश, रसभरी या आम के साथ मिलाएं। धीरे-धीरे फाइबर-युक्त अनाज की मात्रा बढ़ाएं।

अनाज वाले वॉफल या पेन-केक्स दें, जिनमें नियमित रूप से अधिक मौजूद होता है। पूरे अनाज या अनाजों का मिश्रण का उपयोग करके अपने बच्चे के लिए फाइबर युक्त भोजन बना सकते हैं। थोड़ा मेपल सिरप आपके बच्चे को नए स्वाद के लिए इस्तेमाल करने में लाभ पहुंचा सकता है।

  • सफेद के बजाए फाइबर से भरे ब्राउन राइस परोसें। 
  • पास्ता चुनें जो पूरे गेहूं से बना हो, फिर फाइबर से भरपूर डिनर के लिए कुछ वेजीज को सॉस के साथ परोसें।
  • चोकर को बर्गरमीटबॉल या मीट लोफ में मिलाएं।
  • हमेशा डिब्बाबंद ताजे फल का चयन करें। क्योंकि इनमें फाइबर कम और बहुत शुगर होता है। सेब या नाशपाती जैसे फल काटते समय खाल को न भूलें, क्योंकि इनमें फाइबर होता है।
  • जामुन और कुछ चोकर के साथ दही परोसें।
  • फ्राइज छोड़ें और ओवन बेक्ड आलू वेजेज परोसें।

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दाल में होता है भरपूर फाइबर

बच्चों के लिए फाइबर फूड में आप दाल शामिल कर सकते हैं। दाल में प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर भी काफी मात्रा में होता है। अगर आपका बच्चा सीधे नहीं खाता है, तो आप उसे इसका सूप बनाकर दे सकते हें या उबली हुई दाल को सलाद में इस्तेमाल कर सकते हैं। दाल में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और फाइबर की काफी मात्रा में पाए जाते हैं।  इस कारण यह बच्चों के लिए एनर्जी का एक अच्छा सोर्स साबित हो सकता है। साथ ही पेट इसे पचाने में काफी समय लेता है, तो ऐसे में यह लंबे समय तक एनर्जी देता है।

फाइबर से भरपूर होते हैं फ्लेक्सीड

बच्चों की डायट में फ्लेक्सीड को शामिल करना एक अच्छा ऑप्शन है। इसे आप बच्चों के लिए स्मूदी या उनके ब्रेकफास्ट में सीरियल्स में शामिल कर सकते हैं। साथ ही कई  न्यूट्रीशनिस्ट सलाह देते हैं कि बच्चों के लिए साबुत बीज पचाने में दिक्कत हो सकती है, तो ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चों को इन्हें पीस कर खिला सकते हैं। पिसे हुए फ्लेक्सीड को मफिन, कुकीज, ब्रेड और आटे में मिला सकते हैं।

बच्चों को फाइबर युक्त फूड देने से पहले कुछ बातों का रखें ख्याल

बच्चों को फाइबर युक्त भोजन देते समय यह भी ध्यान रखें कि इसकी अधिकता भी बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चों को इसे देते समय कुछ बातों का ख्याल रखें। जान लें कि फाइबर आंतों से पानी को खींचता है, जिससे शरीर में पानी की कमी जैसी स्थिति बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को हाइड्रेटेड रखें क्योंकि बच्चों के विकास के लिए फाइबर की भी जरूरत होती है। साथ ही जानें कुछ फूड्स जिनमें फाइबर की मात्रा पाई जाती है और बच्चों के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।फाइबर के सभी शानदार गुणों के साथ, यह आपके बच्चे के आहार में बहुत जरूरी है। 

बच्चों की डायट में फाइबर के लिए क्या शामिल करना चाहिए, आप इस बारे में डॉक्टर से भी राय ले सकती हैं। बच्चों के खानपान को लेकर हमेशा सजग रहना चाहिए। अगर पोषण की कमी होती है तो बच्चों में विभिन्न प्रकार के रोग भी जन्म ले सकते हैं। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

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