बच्चों में स्किन की बीमारी, जो बन सकती है पेरेंट्स का सिरदर्द

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Update Date जून 6, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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नए पेरेंट्स के लिए अनेकों नए अनुभवों में से एक बच्चों में त्वचा की समस्याएं भी हो सकती हैं। पेरेंट बनने के बाद ही लोगों को पता लगता हैं कि बच्चों को त्वचा की बहुत सी परेशानियां हो सकती हैं। बच्चों में स्कीन की बीमारी बहुत सामान्य हैं। लेकिन, कई गंभीर त्वचा की समस्याएं भी बच्चों को अपना शिकार बना सकती हैं। ऐसे में इनके बारे में जानकारी रखना जरूरी हो जाता है। बच्चों को शुरुआती एक साल में कई तरह के अलग-अलग चकत्ते, धब्बे और निशानों का सामना करना पड़ सकता है।

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बच्चों में स्किन की बीमारी है मुंहासे भी

बच्चों में मुहांसे

छोटे बच्चों में  स्किन की बीमारी होना बहुत आम हैं। लगभग 40 प्रतिशत शिशुओं को मुंहासे होते हैं, जो आमतौर पर दो से तीन सप्ताह की उम्र तक आते हैं और अक्सर तब तक रह सकते हैं, जब तक बच्चा चार से छह महीने का नहीं हो जाता। ये पिंपल मां के हॉर्मोन के कारण होते हैं, जो अभी भी बच्चे के खून में होते हैं, जिसके कारण बच्चे की स्कीन पर लाल धब्बे दिखाई देते हैं। अच्छी बात यह है कि अगर आप इन पिंपल्स को छूते नहीं हैं, तो ये स्थाई निशान नहीं छोड़ते। इन लाल दानों को नोचें, खरोंचे या साबुन से साफ न करें और न ही इन पर लोशन लगाएं। बस इसे रोजाना दो या तीन बार पानी से धोएं। इन दानों पर किसी भी तरह की अडल्ट क्रीम या दवाई का इस्तेमाल न करें। बच्चों में स्किन की बीमारियां होने का मुख्य कारण साफ-सफाई की कमी हो सकता है, तो ऐसे में बच्चे की हाइजीन का खास ख्याल रखें।

क्रैडल कैप भी है बच्चों में स्किन की बीमारी

बच्चों में स्किन की बीमारी होने पर वे बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। बच्चों में ऐसी ही एक स्किन की बीमारी है क्रैडल कैप। इसमें बच्चे के सिर पर कुछ क्रस्टी येलो स्केल, गहरे लाल चकत्ते और रूसी जैसे गुच्छे दिख सकते हैं। ये ही क्रैडल कैप कहलाते हैं। बच्चों के स्कल पर होने वाला सेबोरिक डर्मेटाइटिस (जिसे बच्चों और अडल्ट में डैंड्रफ कहा जाता है) यह पहले तीन महीनों में शिशुओं में बहुत आम है और एक साल तक रह सकता है। यह सिबेसियस ग्लांड्स (sebaceous glands) की वजह से होता है। क्रैडल कैप ज्यादा हानिकारक नहीं होता लेकिन, अगर आप बच्चे के सिर पर सफेद गुच्छे नहीं देखना चाहते, तो डेड स्कीन को हटाने के लिए पेट्रोलियम जेली या मिनरल ऑयल से बच्चे के सिर की मालिश कर सकते हैं। इसके बाद तेल को धोने के लिए अच्छी तरह से शैम्पू करें। आपके डॉक्टर ऐसी परेशानी के लिए स्पेशल शैंपू इस्तेमाल करने को कह सकते हैं। अगर आप ऐसे शैंपू का इस्तेमाल करते हैं, तो वह टीयर फ्री होना चाहिए।

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बच्चों में स्कीन की बीमारी है ड्राई स्कीन भी

ड्राई स्कीन

बच्चों में स्किन की बीमारी होना बहुत आम हैं और इन्हीं में ड्राई स्किन भी शामिल है। बहुत से लोगों को परतदार, ड्राई स्कीन की परेशानी होती है और बच्चे भी हमसे अलग नहीं होते। छोटे बच्चे वास्तव में इस परेशानी के लिए ज्यादा सेंसिटिव होते हैं। सूखी त्वचा के खिलाफ आपके लिए सबसे जरूरी है उन्हें हाइड्रेटेड रखना। यह भी सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे को स्तन के दूध या फॉर्मूला से सही मात्रा में लिक्विड मिल रहा है। बच्चे को नहाने के बाद एक हाइपोएलर्जेनिक लोशन लगाएं लेकिन साबुन से बच्चे को ज्यादा देर तक न नहलाएं। इससे त्वचा की परेशानी और बढ़ सकती हैं। अपने बच्चे के कमरे में नमी बनाए रखें। अगर ड्राई पैच फैलने लगते हैं, तो दरार या दर्दनाक खुजली शुरू हो जाती है। ऐसे में अपने बच्चे के डॉक्टर से बात करें।

मंगोलियन स्पॉट भी है बच्चों में स्किन की बीमारी

मंगोलियन स्पॉट

बच्चों में स्किन की बीमारी होने पर यह पहचानना भी मुश्किल काम होता है कि आखिर यह कौन सी बीमारी है। इसके लिए डॉक्टर की मदद लेने की जरूरत होती है। वहीं मंगोलियन स्पॉट को भी खुद से पहचानना मुश्किल होता है। अफ्रीकी, एशियाई और भारतीय वंश के बच्चों में सबसे आम यह ग्रे-ब्लू पैच स्कीन वेरियेशन में कुछ बदलाव के कारण होते हैं, जिसे मंगोलियन स्पॉट कहा जाता है। आमतौर पर ये पहले साल के अंदर ही दिखाई देते हैं और उसके बाद गायब हो जाते हैं। ये एक बड़ी चोट की तरह दिखते हैं। लेकिन, ये बिल्कुल भी दर्द नहीं करते। यह एक छोटे दाने से लेकर छह इंच या उससे बड़े हो सकते हैं। मंगोलियाई स्पॉट आमतौर पर बच्चे की पीठ, उनके हिप्स और पैरों पर दिखाई देते हैं। ये बच्चे को किसी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाते इसलिए इसके इलाज को लेकर माता-पिता को परेशान होने की जरूरत नहीं होती।

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बच्चों में स्किन की बीमारी है डायपर रैश भी

Diaper rash

बच्चों में स्किन की बीमारी कई बार डायपर के कारण भी हो सकती है। क्या आपके बच्चे के हिप्स पर लाल और उभरे रैश हैं? यह उसे डायपर रैश होने की आशंका को बढ़ा देते हैं। बच्चों में त्वचा की जलन आमतौर पर बहुत अधिक नमी, बहुत कम हवा और यूरिन और मल से भरे डायपर, वाइप्स और साबुन जैसे आम प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण होती है। इसके बचाव का सबसे अच्छा तरीका उसके डायपर को हमेशा बदलकर साफ और सूखा रखना है। अगर आपको बच्चे के हिप्स पर एक दाना दिखता है, तो नए डायपर को लगाने से  पहले बच्चे के हिप्स को कम से कम दस मिनट के लिए खुला रखें। वाइप्स की जगह नहाने के दौरान जेंटल सोप का उपयोग करें। अगर आपको दो या तीन दिनों में सुधार नहीं दिखता है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

हीट रैश भी है बच्चों में स्किन की बीमारी

हीट रैश

मौसम के कारण भी बच्चों में स्किन की बीमारी हो सकती है। ऐसे में बच्चों को हीट रैश हो जाते हैं। ये रैश चेहरे, गर्दन, आर्मपिट और पीठ पर छोटे लाल धब्बे के रूप में दिखाई देते हैं। यह तब होता है जब पसीना एक जगह पर इकट्ठा हो जाता है। हालांकि, गर्मी के दाने आमतौर पर एक हफ्ते के अंदर खुद ही खत्म हो जाते हैं। यह बच्चे को खुजली और असहज महसूस करवा सकते हैं। इसमें बच्चों को नहलाना जरूरी होता है और नहलाना इसका आसान इलाज भी है। बच्चे को नहलाने के बाद पाउडर या लोशन लगाने से बचें, जो पसीने को बहने से रोक सकते हैं।

बच्चों में स्किन की बीमारी है डर्मेटाइटिस भी

बच्चों में डर्मेटाइटिस त्वचा पर लाल, पपड़ीदार पैच के रूप में दिखाई दे सकता है। यह अक्सर उनके शुरुआती कुछ महीनों के दौरान दिखाई देता है। यह एक आम समस्या है और इसका इलाज भी आसानी से किया जा सकता है। कई बच्चों में डर्मेटाइटिस अपने आप ठीक हो जाता है। वहीं अगर आपको यह शंका है कि आपके बच्चे की खुजली, जलन और दाने डर्मेटाइटिस हो सकते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें वे आपको बताएंगे कि आपके बच्चे को आखिर समस्या क्या है। बच्चों में डर्मेटाइटिस की समस्या को इस आर्टिकल में समझें।

बच्चों में स्किन की बीमारी जितनी सामान्य है, इनके इलाज भी उतने ही आसान हैं। हालांकि, कुछ बीमारियां लंबे समय तक बच्चे को परेशान कर सकती हैं। लेकिन, इससे घबराएं नहीं और बच्चे के डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चों की स्कीन की बीमारियां कई बार घरेलू उपायों से ठीक की जा सकती हैं। लेकिन, कई बार इनके लिए डॉक्टर की सलाह लेनी पड़ सकती है।

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