जानें बच्चों में पीलिया होने के लक्षण और उसका उपचार

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जनवरी 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

अक्सर देखा जाता है कि नवजात बच्चों का शरीर जन्म के बाद पीला पड़ने लगता है। उनकी त्वचा और आंख का सफेद हिस्सा यानी स्क्लेरा पीला पड़ने लगता है। यही बच्चों में पीलिया (Jaundice) के संकेत हैं। यह खून में पिग्‍मेंट (बिलीरुबिन) की मात्रा बढ़ने के कारण होता है। हालांकि, पीलिया की समस्या नवजात बच्चों में सामान्य है और इससे कोई खतरा नहीं होता है। कम ही मामलों में इससे बच्चों को खतरा होता है। बच्चों में पीलिया होना यूं तो आम है और ये खुद से ठीक भी हो जाता है। ऐसे में जब तक बच्चे को पीलिया रहता है, तब तक डॉक्टर नवजात शिशु को निगरानी में रख सकते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि 10 में से हर छह नवजात शिशु को पीलिया होता है। इसका खतरा ज्यादातर उन बच्चों में बढ़ जाता है, जो समय से पहले जन्म लेते हैं। तकरीबन 80 प्रतिशत प्रीमैच्योर बेबी को पीलिये की शिकायत होती है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि बच्चों को पीलिया क्यों होता है और इसका इलाज कैसे किया जाता है।

यह भी पढ़ें : Duphaston : डुफास्टोन क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

इस वजह से पीला पड़ जाता है नवजात बच्चे का चेहरा और आंख

बच्चों में पीलिया होने के कारण

बच्चों में पीलिया होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बताने जा रहे हैं :

आमतौर पर लाल रक्त कोशिकाएं (red blood cells) सामान्य प्रक्रिया के तहत टूट कर बिलीरुबिन बनाती हैं। इसके बाद लिवर इस बिलीरुबिन को प्रोसेस करता है। जब बच्चा मां के पेट में होता है तब बच्चे के शरीर का बिलीरुबिन मां का लिवर साफ करता है। लेकिन जब बच्चा जन्म लेता है तो यह काम स्वयं इसका लिवर करता है। लेकिन अगर बच्चे का लिवर ठीक ढंग से काम न करे या उसका विकास सही नहीं हुआ हो तो भी यह समस्या उत्पन्न होती है। ऐसा मां से बच्चे का पर्याप्त दूध नहीं मिल पाने के कारण भी होता है।

यह भी पढ़ें : दिखाई दे ये लक्षण, तो हो सकता है नवजात शिशु को पीलिया

नवजात और अन्य बच्चों में पीलिया होने के कारण

  • Hemolytic anemia यानी एक तरह की खून की कमी जिससे रेड ब्लड सेल्स तेजी से टूटते हैं और पीलिया हो जाता है।
  • हैपेटाइटिस ए, बी या सी जिसकी वजह से हीमोलिटिक पीलिया होता है।
  • शरीर में बिलीरुबिन की अधिकता शिशुओं में पीलिया होने का अहम कारण होता है। आपको बता दें कि लिवर खून से बिलीरुबिन के प्रभाव को कर करने या फिर साफ करने काम करता है। फिर इसे आंतों तक पहुंचा देता है, लेकिन नवजात शिशु का लिवर ठीक से विकसित नहीं होता, जिस कारण वह बिलीरुबिन को फिल्टर करने में सक्षम नहीं होता। यही कारण है कि शिशु में इसकी मात्रा बढ़ जाती है और उसे पीलिया हो जाता है।
  • अगर लिवर से जुड़ी पित्त वाहिका (bile duct) में खराब और रुकावट हो जिससे बिलीरुबिन बाहर नहीं निकल पा रहा हो।
  • कुछ महिलाओं के स्तनों में ठीक से दूध नहीं बन पाता, जिस कारण शिशु को पर्याप्त पोषण न मिल पाने के कारण जॉन्डिस हो सकता है।
  • ब्लड संबंधी कारणों से भी बच्चे को पीलिया हो सकता है। ऐसा तब होता है, जब मां और बच्चे का ब्लड ग्रुप अलग-अलग होता है। इस स्थिति में मां के शरीर से ऐसे एंटीबॉडीज निकलते हैं, जो फीटस के रेड ब्लड सेक्स को मार देते हैं। ये शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा को बढ़ाते हैं, जिससे बच्चा पीलिये के साथ जन्म लेता है।

यह भी पढ़ें : Enterogermina : एंटरोजर्मिना क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

बच्चों में पीलिया होने के लक्षण क्या हैं?

पीलिया का प्रमुख लक्षण शरीर का पीला पड़ना है, जो पीले तत्व बिलीरुबिन की अत्यधिक मात्रा की वजह से होता है। शुरुआत में चेहरा पीला पड़ता है जिसके बाद यह शरीर के अन्य हिस्सों में जैसे सीना, पेट, हाथ और पैर पर फैलता है।

बच्चों में पीलिया का उपचार कैसे किया जाता है?

आमतौर पर बच्चों में पीलिया एक से दो हफ्तों में ठीक हो जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में डॉक्टर बच्चे के लिए निम्नलिखित उपचार कर सकता है:

  1. अतिरिक्त स्तनपान: इसमें बच्चे को ज्यादा से ज्यादा मां का दूध पिलाया जाता है। इसकी वजह से बच्चा अधिक मलत्याग करत है। इसकी मदद से शरीर से अत्यधिक बिलीरुबिन तेजी से बाहर निकलता है।
  2. डॉक्टर बच्चे को एक खास तरह की लाइट यानी ब्लू-ग्रीन लाइट के नीचे रखते हैं, जिसकी मदद से बिलीरुबिन पेशाब के साथ निकल जाता है। इसे फोटोथेरिपी कहा जाता है। इस थेरिपी के दौरान शिशु की आंखों पर एक पट्टी लगा दी जाती है, जिससे उसकी आंखें सुरक्षित रहें। शिशु को आराम देने के लिए हर तीन से चार घंटे में आधे घंटे के लिए इस प्रक्रिया को बंद किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान मां अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती है।
  3. ब्लड ट्रांसफ्यूजन: अगर उपरोक्त में से कोई भी उपचार से बच्चे को फायदा न हो तो फिर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की मदद ली जाती है। इसमें डॉक्टर धीरे-धीरे बच्चे के शरीर से कम-कम मात्रा में खून निकालकर डोनर के खून से बदल देते हैं।
  4. अगर बच्चे को पीलिया मां के ब्लड ग्रुप अलग होने की वजह से होता है, तो इसका उपचार करने के लिए इम्यूनोग्लोबुलीन इंजेक्शन भी लगाया जाता है। इस इंजेक्शन से शिशु के शरीर से एंटीबॉडीज कम होने लगते हैं, जिससे पीलिये से राहत मिलती है।

यह भी पढ़ें : शराब ना पीने से भी हो सकता नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज

बच्चों में पीलिया होने से जुड़े मिथक क्या हैं?

आपने आज तक यही सुना होगा कि पीलिया होने पर पीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। लेकिन आपको बता दें कि ये सरासर एक मिथक है। पीला खाने से या पीला कपड़ा पहनने से पीलिया बढ़ता है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

कुछ लोग मानते हैं कि पीलिया होने पर शिशु को घर में लाइट के नीचे रखने से उसे ठीक किया जा सकता है। यह भी सरासर एक मिथक है। बल्कि ऐसा करने से बच्चे को लाइट के नीचे नग्न अवस्था में लिटाने के कारण उसे बुखार आ सकता है और उसे ठंड भी लग सकती है। ध्यान रहे कि घर में बच्चे को लाइट के नीचे रखना फोटोथेरिपी का विकल्प नहीं है, क्योंकि फोटोथेरिपी के दौरान ऐसी वेवलेंथ निकलती है, जो केवल अस्पतालों में ही मिल सकती है।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल है, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना न भूलें।

और पढ़ें :-

Enteroquinol : एन्टेरोक्विनोल क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

वयस्कों में पीलिया के ऐसे दिखते हैं लक्षण

पीलिया (Jaundice) में भूल कर भी न खाएं ये 6 चीजें

Jaundice : क्या होता है पीलिया? जानें इसके कारण लक्षण और उपाय

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy

संबंधित लेख:

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    Coldact: कोल्डैक्ट क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

    कोल्डैक्ट कैप्सूल्स की जानकारी in hindi इसके डोज, उपयोग, सावधानी और चेतावनी के साथ साइड इफेक्ट्स, रिएक्शन, स्टोरेज को जानने के लिए पढ़ें यह आर्टिकल।

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Satish singh
    दवाइयां A-Z, ड्रग्स और हर्बल जून 29, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

    पीलिया का आयुर्वेद इलाज क्या है? जॉन्डिस होने पर क्या करें, क्या न करें?

    आयुर्वेद में पीलिया का इलाज, आयुर्वेद में पीलिया का इलाज, पीलिया की आयुर्वेदिक दवा, पीलिया के लक्षण, जॉन्डिस ट्रीटमेंट, पीलिया के कारण..पीलिया में गन्ने का रस, बीटरूट जूस..Ayurvedic Treatment for jaundice in hindi

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
    के द्वारा लिखा गया Shikha Patel
    हेल्थ टिप्स, स्वस्थ जीवन जून 18, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    Cifran CTH : सिफ्रान सीटीएच क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

    सिफ्रान सीटीएच की जानकारी in hindi, सिफ्रान सीटीएच के साइड इफेक्ट क्या है, सिप्रोफ्लॉक्सासिन और टिनिडाजोल दवा किस काम में आती है, रिएक्शन, उपयोग, Cifran CTH.

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
    दवाइयां A-Z, ड्रग्स और हर्बल जून 15, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें

    Viral Fever: वायरल फीवर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

    जानिए वायरल फीवर के कारण, वायरल फीवर का उपचार, बुखार क्या हैं, बुखार के लक्षण क्या हैं, Viral Fever के घरेलू उपचार, Viral Fever के जोखिम फैक्टर।

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Ankita Mishra
    हेल्थ कंडिशन्स, स्वास्थ्य ज्ञान A-Z जून 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    Recommended for you

    Breastfeeding quiz

    Quiz: स्तनपान के दौरान कैसा हो महिला का खानपान, जानने के लिए खेलें ये क्विज

    के द्वारा लिखा गया Manjari Khare
    प्रकाशित हुआ अगस्त 28, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
    अल्लर्सेट कोल्ड टैबलेट Allercet Cold Tablet

    Allercet Cold Tablet : अल्लर्सेट कोल्ड टैबलेट क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
    प्रकाशित हुआ अगस्त 27, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
    How to Care for your Newborn during the First Month - नवजात की पहले महीने में देखभाल वीडियो

    पहले महीने में नवजात को कैसी मिले देखभाल

    के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
    प्रकाशित हुआ अगस्त 1, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
    वायल बुखार के घरेलू उपाय

    वायरल बुखार के घरेलू उपाय, जानें इस बीमारी से कैसे पायें निजात

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Satish singh
    प्रकाशित हुआ जुलाई 14, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें