बच्चों के विकास का बाधा बन सकता है चाइल्ड लेबर, जानें कैसे

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) का मानना था कि, ‘हमारे बच्चे वो बुनियाद हैं, जिसपर हमारा भविष्य बनेगा। यह किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति हैं।‘ वहीं, अमेरिकी सिंगर व्हिटनी ह्यूस्टन (Whitney Houston) का कहना था कि, ‘मेरा मानना है कि बच्चे हमारा भविष्य हैं। उन्हें बेहतर तरीके से शिक्षित करना चाहिए और नेतृत्व करने देना चाहिए।’ महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के भी यही विचार थे, लेकिन भारत में असलियत इन विचारों से काफी हद तक अलग रही और कह सकते हैं कि, काफी हद तक कड़वी भी रही। यह कड़वाहट थी, चाइल्ड लेबर (Child Labour in India) यानी बाल श्रम और चाइल्ड लेबर के दुष्प्रभाव के रूप में बच्चों का बर्बाद होता बचपन।

चाइल्ड लेबर के दुष्प्रभाव – भारत में हालात

आज हम चाइल्ड लेबर की बात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि हर साल 12 जून को वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर (World Day Against Child Labour) मनाया जाता है। यूनाइटेड नेशन के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 21 करोड़ 80 लाख बच्चे बाल श्रम के शिकार हैं, जिनमें से अधिकतर फुल-टाइम काम कर रहे हैं। भारत में 2011 की जनगणना के मुताबिक, 5 से 14 साल की उम्र तक के करीब 43 लाख 53 हजार बच्चे आज भी चाइल्ड लेबर के दुष्प्रभाव को झेल रहे हैं। हालांकि, यह स्थिति 21वीं सदी की शुरुआत से काफी संतोषजनक है, क्योंकि 2001 की जनगणना के मुताबिक, देश में 25.2 करोड़ में से करीब 1.26 करोड़ बच्चे बाल श्रम कर रहे थे, वहीं 2004-05 में हुए नेशनल सर्वे में यह आंकड़ा 90.75 लाख था। भारत सरकार ने देश में बच्चों के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए चाइल्ड लेबर का जड़ से खत्म करने के लिए कई प्रभावशाली कदम उठाए।

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बाल श्रम क्या है? (What is Child Labour?)

यूएन द्वारा दी गई परिभाषा के मुताबिक, चाइल्ड लेबर वो कार्य है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए किसी बच्चे द्वारा किया जाता है। यह कार्य या तो बच्चे को स्कूली शिक्षा से वंचित कर देता है या एकसाथ स्कूली शिक्षा और काम के बोझ को झेलने पर मजबूर कर देता है। इससे बच्चे के शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक विकास में बाधा पड़ती है।

चाइल्ड लेबर के दुष्प्रभाव क्या हैं?

बाल श्रम की वजह से बच्चों पर मानसिक व शारीरिक कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। जो कि, उनके वर्तमान के साथ-साथ भविष्य को भी पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं। तो आइए, ऐसे ही कुछ चाइल्ड लेबर के दुष्प्रभाव के बारे में जानते हैं।

चाइल्ड ट्रैफिकिंग

चाइल्ड लेबर का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव यह है कि, यह चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसे जघन्य अपराध को बढ़ावा देता है। बचपन में उन्हें उनके घर, गांव, शहर या देश से अगवा करके दूर किसी दूसरे क्षेत्र में बेच दिया जाता है। जहां, उनके स्वास्थ्य या देखभाल को नजरअंदाज करके बाल मजदूरी करवाई जाती है। यह उनके अधिकारों का हनन है, जो कि कानूनी अपराध है। इससे बच्चे न सिर्फ मासूमियत खोते जाते हैं, बल्कि विकासशील उम्र के फायदे से वंचित होते जाते हैं।

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बच्चों के विकास में बाधा

बचपन की उम्र बच्चों के लिए मानसिक, शारीरिक और शैक्षिक विकास की होती है। लेकिन, इस उम्र में काम का बोझ या फैक्ट्री, रसायन वाली जगह आदि खतरनाक जगहों पर कार्य करने के नकारात्मक प्रभाव की वजह से उन्हें शारीरिक या स्वास्थ्य खतरे होने के साथ ही शैक्षिक विकास और मानसिक विकास से वंचित होना पड़ता है। वह दुनिया को समझने या देखने का सुनहरा मौका खो देते हैं और बाल मजदूरी के दलदल में फंस जाते हैं। चाइल्ड लेबर के दुष्प्रभावों में यह काफी खराब असर है, जिसका नुकसान उन्हें जिंदगीभर उठाना पड़ता है।

बच्चों को डिप्रेशन

बाल श्रम की वजह से बच्चों में अवसाद यानी डिप्रेशन की दिक्कत हो सकती है। दिनभर काम करने, आराम न मिलने, हिंसा सहने और अपनी उम्र के दूसरे बच्चों से अलग जिंदगी होने की वजह से उन्हें डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। डिप्रेशन की वजह से कम उम्र में ही उन्हें दूसरी खतरनाक बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

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बाल श्रम से शारीरिक चोट का खतरा

बाल मजदूरी में अधिकतर लोग बच्चों को खतरनाक कार्यों में लगा देते हैं, जैसे- भारी सामान उठाना, खतरनाक मशीनों के साथ कार्य करना, रसायन या गैस आदि जगहों पर कार्य करना। इससे उन्हें शारीरिक चोट का खतरा काफी होता है। क्योंकि, एक वयस्क और मानसिक रूप से विकसित इंसान के मुकाबले वह कार्य करने में असक्षम होते हैं। अज्ञानता होने की वजह से उन्हें ऐसी जगहों पर कार्य करते हुए बरतीं जाने वाली सावधानी के बारे में पता नहीं होता।

बचपन में ही नशे की लत

बाल श्रम का एक और खतरनाक प्रभाव यह है कि, यह बच्चों को नशे जैसी खतरनाक आदत लगा सकता है। क्योंकि, बच्चे एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण से दूर रहते हैं, उनसे बाल मजदूरी करवाने वाले लोग ही कई बार उन्हें खतरनाक नशीले पदार्थों की आदत पड़वा देते हैं, ताकि उनकी कुछ सोचने-समझने की क्षमता खत्म हो जाए और वो वैसा ही करते रहे, जैसा कि वह लोग कहते हैं। नशे की आदत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, जो कि जानलेवा रूप भी ले सकती है।

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डर का कारण

चाइल्ड लेबर के दुष्प्रभाव में बच्चे के मन में डर भी हो सकता है। क्योंकि, लोग उनके मन में इतना डर भर देते हैं कि, वह कुछ भी करने से पहले कई बार सोचते हैं। उनसे कोई गलती हो जाने पर मारना-पीटना, कई-कई दिनों तक भूखा रखना आदि जैसी प्रताड़ना की जाती है। इन घटनाओं की वजह से उनके मन में गंभीर डर बैठ जाता है, जो कि जिंदगीभर उनका पीछा कर सकता है। यह डर उनके मानसिक विकास को रोक सकता है और वह धीरे-धीरे तनाव, अवसाद जैसी समस्याओं का शिकार भी हो सकते हैं। कई बार, बच्चों के साथ यौन शोषण जैसा घिनौना काम भी किया जाता है।

कुपोषण

बाल मजदूरी करवाने वाले लोग बच्चों के स्वास्थ्य पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते। उन्हें पर्याप्त खाना नहीं दिया जाता। जिस वजह से उनके शरीर में पोषण की कमी होने लगती है, यह कमी उनमें कुपोषण का कारण बनता है। जिससे उनके शारीरिक विकास में बाधा हो जाती है, उनमें स्टेमिना, मसल्स स्ट्रेंथ, हड्डियों की मजबूती आदि खत्म हो जाती है, जिससे उन्हें किसी आम बीमारी या संक्रमण से भी जानलेवा परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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