पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव : बच्चों को दे सकते हैं राहत की सांस!

    पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव : बच्चों को दे सकते हैं राहत की सांस!

    कई बार बच्चे उनके आसपास की चीजों की वजह से यह हेल्थ इशू का सामना करते हैं। इन्हीं समस्याओं में से एक समस्या है आईबीएस यानी इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (Irritable bowel syndrome) की। यह समस्या बच्चे को तकलीफ में डाल सकती है, जिसका समय रहते इलाज करना बेहद जरूरी माना जाता है। यदि समय पर आईबीएस का इलाज न किया जाए, तो बच्चे के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Pediatric IBS) फायदेमंद हो सकते हैं। पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव एक ऐसा इलाज है, जो आमतौर पर बच्चों को नहीं दिया जाता। लेकिन यदि किसी बच्चे में आईबीएस की समस्या जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो डॉक्टर पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives) का इस्तेमाल भी करते हैं। आइए सबसे पहले जानते हैं बच्चे में आईबीएस (IBS) की समस्या आखिर कैसे होती है।

    और पढ़ें: क्या हैं पाचन समस्याएं कैसे करें इन समस्याओं का निदान?

    इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम क्या है? (Irritable bowel syndrome)

    इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम एक ऐसी समस्या है, जिसमें आपकी बड़ी आंत में इरिटेशन की समस्या होती है, जिसकी वजह से आपके बॉवेल मूवमेंट पर असर पड़ता है। जिसकी वजह से आपको ब्लोटिंग, कॉन्स्टिपेशन और डायरिया जैसी समस्या होती है। जब बच्चों में इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या होती है, तो यह ज्यादा तकलीफदायक साबित हो सकती है। क्योंकि बच्चे अपनी तकलीफ को ठीक ढंग से नहीं समझा पाते, जिसकी वजह से इसका पता लगा पाना बहुत मुश्किल साबित होता है।

    समय के साथ यह समस्या और भी गंभीर होती चली जाती है। यदि समय पर इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का इलाज न कराया जाए, तो इसके लिए मेडिसिन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Pediatric IBS) के इस्तेमाल की जरूरत पड़ती है। लेकिन बच्चों में आईबीएस की समस्या को पहचानने के लिए उसके लक्षणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं इन लक्षणों के बारे में।

    पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव देने से पहले समझें इन लक्षणों को (Symptoms of IBS)

    पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Pediatric IBS) के इस्तेमाल की जरूरत ना पड़े, इसलिए आपको समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। बच्चों में आईबीएस की समस्या में अक्सर पेट में दर्द, मरोड़, ब्लोटिंग, डायरिया, कॉन्स्टिपेशन (Abdominal pain, cramps, bloating, diarrhea, constipation) जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं। लेकिन इसके अलावा बच्चे को यह तकलीफें भी हो सकती हैं –

    और पढ़ें: एंजाइम क्या है: एंजाइम का पाचन के साथ क्या संबंध है?

    इन लक्षणों के चलते कई बार बच्चा ठीक ढंग से नहीं खा पाता और उसे बॉवेल मूवमेंट में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Pediatric IBS) का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ती है। लेकिन बच्चों में आईबीएस (IBS) किन कारणों से होता है, यह जानना भी आपके लिए बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं बच्चों में आईबीएस के क्या कारण हो सकते हैं।

    पीडियाट्रिक आईबीएस के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं ये कारण (Causes of IBS)

    बच्चों में आईबीएस के असल कारणों के बारे में अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है। कई बार फैमिली हिस्ट्री की वजह से भी बच्चों को यह तकलीफ हो सकती है। लेकिन कुछ फ़ैक्टर्ज़ हैं, जो आईबीएस का कारण बन सकते हैं। आइए जानते हैं इन फ़ैक्टर्स के बारे में।

    कई बार स्ट्रेसफुल वातावरण होने की वजह से भी बच्चों में डायजेस्टिव इशू (Digestive issue) देखे जाते हैं। इसकी वजह से बच्चों में आईबीएस होते हुए देखा गया है। कई बार स्कूल से हो रहे तनाव या फैमिली में चल रही समस्याओं की वजह से बच्चों में आईबीएस (IBS) के सिम्टम्स देखे गए हैं। इसके अलावा बच्चों में आईबीएस के ये कारण भी हो सकते हैं –

    • हाय फैट डायट
    • शुगर युक्त ड्रिंक्स
    • जरूरत से ज्यादा खाना
    • स्पाइसी फूड

    और पढ़ें: क्या होती हैं पेट की बीमारियां? क्या हैं इनके खतरे?

    इन कारणों के चलते बच्चों में आईबीएस (IBS) की समस्या देखी गई है। लेकिन इसका समय रहते इलाज करना बेहद जरूरी होता है। यदि समय पर इस समस्या को ठीक ना किया जाए, तो भविष्य में पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Paediatric IBS) का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ सकती है। आइए जानते हैं इस समस्या का निदान किस तरह किया जा सकता है। जैसा कि हमने पहले बताया, बच्चों में आईबीएस की समस्या और भी मुसीबतें खड़ी कर सकती हैं। बच्चों की उम्र की वजह से वह अपनी समस्या को ठीक ढंग से नहीं बता पाते, इसलिए माता पिता के लिए जरूरी हो जाता है कि उनके लक्षणों पर ध्यान देकर समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं।

    डॉक्टर अक्सर माता-पिता से फैमिली हिस्ट्री जानकर बच्चों के लक्षणों पर ध्यान देते हैं। इसके अलावा बच्चों की शारीरिक जांच भी की जाती है। कुछ गंभीर मामलों में लैब टेस्ट कराने की भी जरूरत पड़ती है, जिसके बाद पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives) प्रिसक्राइब किए जा सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर बच्चों के लिए खानपान में बदलाव के साथ-साथ प्रोबायोटिक और अलग-अलग तरह की थेरेपी की भी सलाह दे सकते हैं। आइए अब जानते हैं पीडियाट्रिक आईबीएस में लैग्जेटिव का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।

    और पढ़ें: अगर बार-बार बीमार पड़ता है आपका बच्चा, तो उसे हो सकती है ये परेशानी

    पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव : ये उपाय भी जानना है जरूरी (Laxatives for Pediatric IBS)

    पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Paediatric IBS)

    जब समय रहते बच्चों में आईबीएस की समस्या का निवारण नहीं होता, तो यह गंभीर तकलीफ में परिवर्तित हो जाती है। पाचन तंत्र के ठीक से काम ना करने की वजह से कोलोन में स्टूल जमा होने लगता है। जिसकी वजह से ब्लॉकेज बढ़ जाता है और यह समस्या आईबीएस (IBS) में परिवर्तित हो जाती है। इस समस्या के चलते पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे पेट में जमा ब्लॉकेज को साफ किया जा सके और बच्चा बेहतर महसूस कर सके। पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Pediatric IBS) के इस्तेमाल के बाद कई बार बच्चे की सेहत में सुधार होता है और बच्चा ठीक ढंग से खाने लगता है, जिससे उसके शरीर की इम्यूनिटी बेहतर होती है और उसका शारीरिक विकास ठीक ढंग से हो पाता है। लेकिन पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव का इस्तेमाल माता पिता को अपनी मर्जी से नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे की सेहत को बड़ा नुकसान हो सकता है। कुछ खास तरह की स्थितियों में ही पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए माता-पता को बिना डॉक्टर से कंसल्ट किए पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आइए अब जानते हैं कि पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव के इस्तेमाल के साथ-साथ बच्चे की लाइफस्टाइल और डायट में किस तरह के बदलाव किए जाने चाहिए।

    और पढ़ें: Chronic fatigue syndrome: क्रोनिक फटीग सिंड्रोम क्या है?

    बच्चे में आईबीएस (IBS) की समस्या हो, तो डायजेस्टिव सिस्टम ख़राब होना आम बात है। लेकिन यदि यह तकलीफ बार-बार हो रही हो और बच्चा बार-बार इसके चलते बीमार पड़ रहा हो, तो आपको बच्चे की लाइफस्टाइल और डायट में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है। यह बदलाव इस तरह किए जा सकते हैं –

    • पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Pediatric IBS) का इस्तेमाल की जरूरत ना पड़े, इसके लिए आपको बच्चे को घर पर बना हेल्दी आहार देना चाहिए। ज्यादा चीनी युक्त और तला भुना, मसालेदार, जंक फूड बच्चे के पेट के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। इसलिए बच्चे को इस तरह के जंक फूड से दूर रखना चाहिए।इसके साथ ही उन्हें हेल्दी पेय पदार्थ पिलाना चाहिए, जिससे बच्चा हायड्रेट रहे।
    • अक्सर बच्चे जल्दी जल्दी खाना खाने की कोशिश करते हैं। जल्दी-जल्दी खाने की वजह से खाना ठीक ढंग से नहीं पचता और इसकी वजह से डायजेस्टिव प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। पाचन शक्ति कमजोर होने की वजह से बच्चे में आगे चलकर आईबीएस (IBS) की समस्या देखी जाती है। इसलिए बच्चों को धीरे-धीरे चबाकर खाना सिखाना चाहिए।
    • बच्चों के लिए फिजिकल एक्टिविटी बेहद जरूरी है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी मानी जाती है। बच्चों को पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं से बचाने के लिए उन्हें रोजाना व्यायाम करने की आदत डालनी चाहिए। आज के दौर में टेक्नोलॉजी के चलते बच्चे आउटडोर गेम से दूर होते चले जा रहे हैं, जो उनकी सेहत पर सीधा असर डाल रही है। इसलिए बच्चों को सायकलिंग, स्विमिंग जैसे अन्य आउटडोर गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

    और पढ़ें: किन कारणों से शुरू हो सकती है लीकी गट की परेशानी?

    बच्चों में आईबीएस की समस्या एक गंभीर समस्या मानी जाती है, जिसकी वजह से बच्चे के शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के विकास में बाधा उत्पन्न होती है। अगर यह समस्या समय के साथ बढ़ती है, तो पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव (Laxatives for Pediatric IBS) के इस्तेमाल की जरूरत पड़ती है। ऐसी स्थिति आपके बच्चे के साथ ना आए, इसके लिए आपको समय-समय पर बच्चे के शारीरिक परिवर्तनों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। जिससे आप समय पर लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर से सलाह ले सकें। साथ ही जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह के बाद पीडियाट्रिक आईबीएस में लेक्जेटिव का इस्तेमाल भी कर सकें। ऐसा करने से बच्चे की सेहत को नुकसान होने से बचाया जा सकता है और समय रहते बच्चा बेहतर महसूस कर सकता है।

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    लेखक की तस्वीर badge
    Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/12/2021 को
    डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड