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प्रेग्नेंसी में IBS : आपकी थोड़ी सी कोशिश से मिल सकता है समस्या में आराम!

प्रेग्नेंसी में IBS : आपकी थोड़ी सी कोशिश से मिल सकता है समस्या में आराम! 

क्या आप भी मॉम-टू-बी हो? क्या आपके पेट में दर्द की शिकायत रहती है या ऐंठन की आपका पेट फूला हुआ महसूस होता है? क्या आपके बॉवेल मूवमेंट में कोई बदलाव हैं? तो, आपको विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए, क्योंकि यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (Irritable bowel syndrome) हो सकता है। प्रेग्नेंसी में IBS (आईबीएस) (IBS in pregnancy), यह गर्भावस्था के दौरान आमतौर पर होने वाली स्थिति है। यह क्रॉनिक बन सकती है, क्योंकि ये आपकी बड़ी आंत को प्रभावित करती है। जी हाँ, आपने सही सुना है! यह स्थिति गर्भवती महिलाओं की मानसिक शांति छीनकर उन्हें कठिनाई का सामना करने पर मजबूर कर सकती है। शीघ्र उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle changes) कर प्रेग्नेंसी में IBS (आईबीएस) यानि इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से निपटने में मदद मिल सकती है। आइये जानते हैं गर्भावस्था में इस समस्या से बचने के लिए क्या किया जा सकता है और कैसे खुद को स्वस्थ रखा जा सकता है।
आगे बढ़ने से पहले आपको कुछ बातें और जान लेनी चाहिए। इसमें से एक है कि गर्भावस्था एक सुखद एहसास लेकर आ सकती है लेकिन यह चुनौतीपूर्ण भी है! अगर आप गर्भवती हैं, तो आपको अपना पूरा ध्यान रखना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्भावस्था आपको हर तरह के अनुभव और यहां तक कि असुविधा भी महसूस करवाएगी, जो आपके लिए तकलीफदेह हो सकती है। आप सोने में कठिनाइयों से लेकर, मॉर्निंग सिकनेस (Morning sickness), मतली, इर्रिटेशन, उल्टी, अपच (Indigestion), दस्त (Diarrhea) और यहां तक कि कब्ज से पीड़ित हो सकती हैं। इतना ही नहीं बल्कि आप अपने बॉवेल मूवमेंट में भी बदलाव देख सकती हैं। एक बार जब आप इन परिवर्तनों को नोटिस करती हैं, तो आपको तुरंत एक विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए, क्योंकि यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम हो सकता है। लेकिन, इसी के साथ आपको ये बात भी याद रखनी चाहिए कि प्रत्येक गर्भावस्था अलग है। कुछ महिलाओं को इसका अनुभव हो सकता है या कुछ को नहीं। इसलिए इस समस्या के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइये जानते हैं क्या होती है प्रेग्नेंसी में IBS (आईबीएस) की तकलीफ।
और पढ़ें: प्रेग्नेंसी में जरूरी बातें, इनको न करें अनदेखा

क्या है प्रेग्नेंसी में IBS (आईबीएस) की तकलीफ? (IBS in pregnancy)

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की तकलीफ एक क्रॉनिक बॉवेल इशू के रूप में जानी जाती है, जिसमें पेट में ऐंठन (Stomach cramps) , सूजन, पेट फूलना और कब्ज (Constipation) या यहां तक कि दस्त भी हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को इन लक्षणों के कारण तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इस स्थिति के होने से पेट में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, बेचैनी हो सकती है और बहुत सारी असुविधाएं हो सकती हैं। ये स्थिति क्यों होती है, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन इस स्थिति का अब तक कोई निश्चित इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। प्रेग्नेंसी में IBS (आईबीएस) (IBS in pregnancy) की तकलीफ को इस जीवनशैली में बदलाव लाकर बेहतर बनाया जा सकता है और इसके लक्षणों से उबरा जा सकता है।

प्रेग्नेंसी और IBS (आईबीएस) का क्या संबंध है?

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्रेग्नेंसी में IBS (आईबीएस) (IBS in pregnancy) के कारण जठरांत्र (Gastrointestinal) संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें मॉर्निंग सिकनेस, हार्टबर्न (Heartburn) और कब्ज जैसी समस्याओं का समावेश किया गया है। इसलिए आपके लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि आप जो खाती हैं उस पर ध्यान दें। आप अपने विशेषज्ञ की मदद ले सकती हैं जो आपको खाद्य पदार्थों के बारे में मार्गदर्शन देगा।

प्रेग्नेंसी में IBS (आईबीएस) का क्या कारण है? (Causes of IBS in pregnancy)

क्या आप जानती हैं, तनाव के स्तर में वृद्धि, गर्भावस्था में होनेवाली हॉर्मोनल एंग्जायटी, हॉर्मोनल असंतुलन, यहां तक कि पेट और आंतों पर गर्भाशय के अंदर बढ़ते बच्चे का दबाव, जैसे कारण आपको प्रेग्नेंसी में आईबीएस की तकलीफ दे सकते हैं। इसके अलावा डेयरी उत्पाद (Dairy Products), मूंगफली, फूलगोभी, चुकंदर और यहां तक कि ब्रॉक्ली भी आईबीएस (IBS) का एक कारण हो सकते हैं। यही नहीं, शराब, कैफीन का सेवन, हैवी मील या मसालेदार और तैलीय खाना, खाना स्किप करना और गर्भावस्था के दौरान आयरन की गोलियां लेना, जिसके कारण आपको कब्ज की दिक्कत होती है, ये सभी इस तकलीफदेह स्थिति को आमंत्रित कर सकते हैं।

प्रेग्नेंसी में दिखाई देनेवाले IBS (आईबीएस) के लक्षण (IBS Symptoms)

Pregnancy and IBS

प्रेग्नेंसी में दिखाई देनेवाले IBS (आईबीएस) (IBS in pregnancy) के लक्षण अलग-अलग ट्राइमेस्टर के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। यदि महिला अपनी गर्भावस्था की पहली तिमाही में है, तो उसे आईबीएस में इर्रिटेशन, एसिडिटी (Acidity) और यहां तक कि दस्त की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, कब्ज भी परेशान करने वाले लक्षणों में से एक है जो गर्भवती महिलाओं को उसकी अंतिम तिमाही में तकलीफ का कारण बन सकता है। मल के साथ बलगम, पेट में दर्द और भी कुछ सामान्य लक्षण जैसे सूजन, पेट फूलना और गैस की समस्या (Gas Problem) भी गर्भवती महिला को परेशान कर सकती है। यदि आप ऐसे लक्षणों को नोटिस कर रही हैं, तो बिना किसी देरी के, आपको उपचार के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
और पढ़ें: जानिए क्या है प्रेग्नेंसी और ओरल हेल्थ कनेक्शन

प्रेग्नेंसी में IBS (आईबीएस) का निदान (Diagnosis of IBS in pregnancy)

इस स्थिति के निदान में सहायता के लिए कोई विशिष्ट टेस्ट्स उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन, डॉक्टर कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) के जरिये, मल में मौजूद रक्त की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा ब्लड टेस्ट के अलावा डॉक्टर एनीमिया (Anemia), टिशू डैमेज और सीलिएक रोग का पता लगा सकते हैं। निदान होने के बाद आपको तत्काल उपचार शुरू करना चाहिए।

IBS (आईबीएस) का प्रेग्नेंसी पर प्रभाव

क्या आप जानते हैं कि IBS गर्भावस्था की जटिलताओं को बढ़ा सकता है और यह आपको कई तरह से प्रभावित कर सकता है? यह स्थिति लंबे समय तक रहने पर आपको डायरिया हो सकता है, जो आगे चलकर डिहाइड्रेशन और प्रीटर्म लेबर (Dehydration and Preterm Labor) का कारण बनती है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान IBS (IBS in pregnancy) के कारण कब्ज से आपको मलाशय के रक्तस्राव और बवासीर का खतरा हो सकता है। यह पैल्विक मांसपेशियों के लिए भी परेशानी का सबब बनता है और यह स्थिति बच्चे के जन्म के दौरान बिगड़ सकती है। गर्भावस्था के दौरान आईबीएस होने से गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है।

प्रेग्नेंसी में आईबीएस कैसे आपको करता है परेशान?

प्रेग्नेंसी हॉर्मोन्स के चलते आईबीएस की समस्या आपको गंभीर स्थिति में डाल सकती है। गर्भवती महिलाओं में पाचन, मतली, कब्ज, सूजन, गैस, इर्रिटेशन या एसिडिटी जैसे पाचन से संबंधित समस्याएं हो सकती है। बढ़ते बच्चे के साथ बॉवेल मूवमेंट में बदलाव के कारण इंटेस्टाइन और डायजेस्टिव सिस्टम (Intestine and Digestive Systems) पर दबाव बन सकता है।
और पढ़ें: गर्भावस्था में लिनिया नाइग्रा: क्या ये प्रेग्नेंसी में त्वचा संबधी बीमारी है?

प्रेग्नेंसी में आईबीएस का कैसे करें इलाज? (Treatment of IBS)

प्रेग्नेंसी में आईबीएस (IBS in pregnancy) का इलाज करने के लिए आपको कुछ बातों का ख्याल रखने की जरूरत पड़ेगी। जैसे –
  • सही उपचार के लिए आपको गर्भावस्था के दौरान उपयुक्त दवाओं के बारे में प्रसव पूर्व चिकित्सक और यहां तक कि अपने गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट से परामर्श करना होगा। केवल डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा लेना याद रखें। खुद का इलाज करते हुए दवाएं ना लें, क्योंकि ये समस्याएं पैदा कर सकती है। आपको ओवर-द-काउंटर दवा (Over-the-counter medicine) से बचना होगा। कुछ दवाएं आपके लिए सुरक्षित नहीं होंगी, इसलिए आपका डॉक्टर यह तय करेगा कि आपको क्या सूट करता है और क्या नहीं।
  • आईबीएस के लक्षणों से निपटने के लिए संतुलित आहार लेना चाहिए। छोटे मील लें और उन्हें समय-समय पर लेते रहें। दिन भर में भरपूर पानी पिएं। एसिडिटी, हार्टबर्न, सूजन और गैस से बचने के लिए तैलीय, प्रोसेस्ड, जंक, फैटी और मसालेदार भोजन खाने से बचें। बेकरी और डेयरी उत्पादों से दूर रहें। शराब, धूम्रपान और यहां तक कि एरियेटेड पेय ना पियें। अपने आहार में बहुत सारा फाइबर (Fiber) लें। स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, संतरा, ककड़ी, गाजर, पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, और फलियां खाएं। लेकिन, फाइबर (Fiber) जरूरत से ज्यादा ना लें। सही मात्रा में भोजन करें। घर में पका हुआ भोजन करने की कोशिश करें।
  • इसके अलावा, अपने आहार में कुछ प्रोबायोटिक्स (Probiotics) लेने का प्रयास करें। ऐसा करने से आपको अपने पेट के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
  • IBS के साथ प्रेग्नेंसी में आपको रोजाना व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। लेकिन, ये व्यायाम किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करें। हल्के व्यायाम (Exercise) चुनें और खुद को स्ट्रेन न दें। व्यायाम करना आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए फायदेमंद होगा। खुश रहने और तनाव मुक्त रहने के लिए ध्यान लगाएं।
आईबीएस एक परेशान करनेवाली स्थिति है, लेकिन इस समस्या में सजग रहकर और बेहतर लाइफस्टाइल फॉलो करके आप प्रेग्नेंसी में हेल्दी रह सकती हैं और बिना किसी परेशानी के मात्तृत्व को एन्जॉय कर सकती हैं।
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डॉ माधुरी बुरांडे लाहा द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 06/04/2021 को
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