पेरेंटिंग स्टाइल पर भी निर्भर है आपके बच्चे का विकास

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जनवरी 9, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आपकी पेरेंटिंग स्टाइल से यह तय होता है कि आपके बच्चे का विकास कैसे होगा। साथ ही आपकी पेरेंटिग स्टाइल पर ही निर्भर करता है कि आपका बच्चा अपने बारे में कैसा महसूस करता है। यह सुनिश्चित करना जरुरी है कि आपका पेरेंटिंग स्टाइल उसके विकास को सर्पोट करें। आप जिस तरह से अपने बच्चे के साथ बातचीत करते हैं, आप उसे कैसे अनुशासित करते हैं, यह उसके पूरे जीवन को प्रभावित करेगा। बच्चों के पहले टीचर उनके मां-बाप होते हैं इसलिए आपका पेरेंटिंग स्टाइल आपके बच्चे के बारे में बहुत कुछ बताता है। आइए जानते हैं अलग-अलग पेरेंटिंग स्टाइल के बारे में…

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शोधकर्ता के अनुसार चार तरह के पेरेंटिंग स्टाइल होते हैंः

  1. ऑथोरिटेरियन पेरेंटिंग (Authoritarian Parenting)
  2. ऑथोरिटेटिव पेरेंटिंग (Authoritative Parenting)
  3. परमिसिव पेरेंटिंग (Permissive Parenting)
  4. अनइंन्वॉल्व पेरेंटिंग (Uninvolved Parenting)

हर पेरेंटिंग स्टाइल से बच्चों को पालने के लिए एक अलग दृष्टिकोण होता है और कई अलग-अलग विशेषताओं द्वारा पहचाना जा सकता है।

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ऑथोरिटेरियन पेरेंटिंग स्टाइल(Authoritarian Parenting)

ऑथोरिटेरियन माता-पिता का मानना है कि बच्चों को बिना किसी अपवाद के नियमों का पालन करना चाहिए। ऑथोरिटेरियन माता-पिता यह कहने के लिए मशहूर हैं, “क्योंकि मैंने ऐसा कहा था इसलिए,” जब एक बच्चा इन नियमों के बारे में सवाल उठाता है, तो उन्हें बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं होती और उनका ध्यान केवल बच्चों को आज्ञाकारी बनाने पर होता है। वे बच्चों को समस्या सुलझाने की चुनौतियों या बाधाओं में शामिल होने की परमिशन नहीं देते। इसके बजाय वे नियम बनाते हैं और एक बच्चे की राय जानें बिना परिणामों को घोषित कर देते हैं।

ऑथोरिटेरियन माता-पिता अनुशासन के बजाय दंड का उपयोग कर सकते हैं। इसलिए किसी बच्चे को बेहतर विकल्प बनाने के तरीके सिखाने के बजाय, वे बच्चों को उनकी गलतियों के लिए गलत महसूस करवाते हैं। इन पेरेंट्स की अपने बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रहती हैं जिस वजह से ये बच्चों के लिए सख्त नियम बनाकर रखते हैं।

ऑथोरिटेरियन माता-पिता अपने बच्चों को कोई ऑप्शन नहीं देते। उनका सिर्फ एक नियम होता है जो मैंने कह दिया बस वहीं अंतिम निर्णय है। वो उस विषय बर ज्यादा बात नहीं करते। ये लोग शायद ही कभी अपने बच्चों को उनकी पसंद का कार्य करने की अनुमति देते हैं।

जो बच्चे सख्त ऑथोरिटेरियन माता-पिता के साथ बड़े होते हैं, वे ज्यादातर नियमों का पालन करते हैं। लेकिन, उनको आज्ञाकारी बनाने के लिए माता-पिता को काफी मेहनत करनी पड़ती है।

ऑथोरिटेटिव पेरेंटिंग स्टाइल (Authoritative Parenting)

ऑथोरिटेटिव माता-पिता भी नियम के पक्के होते हैं और वे परिणाम का ध्यान भी रखते हैं, लेकिन ये पेरेंट अपने बच्चों की राय को भी ध्यान में रखते हैं। वे अपने बच्चों की भावनाओं को मानते हैं, साथ ही यह भी स्पष्ट करते हैं कि जो भी हो हर बात के इंचार्ज एडल्ट ही हैं।

ऑथोरिटेटिव माता-पिता बच्चों के समय और एनर्जी का इस्तेमाल कर उनकी व्यवहार समस्याओं पर लगाम लगाने की कोशिश करते हैं। वे पॉजिटिव डिसिप्लीन के लिए अलग-अलग पैंतरों का इस्तेमाल करते हैं। वे उनके अच्छे व्यवहार के लिए बच्चों की तारीफ के साथ-साथ उन्हें इनाम देकर उनका मनोबल बढ़ाते हैं।

ऑथोरिटेटिव पेरेंटिंग से पाले गए बच्चे खुश और सफल होते हैं। वे निर्णय लेने और अपने दम पर खतरों काे सहने में भी बेहतर होते हैं।

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परमिसिव पेरेंटिंग स्टाइल (Permissive Parenting)

परमिसिव माता-पिता उदार होते हैं। जब कोई गंभीर समस्या होती है तभी वह कोई कदम उठाते हैं। वे काफी क्षमाशील हैं और वे “बच्चे बच्चे ही रहेंगें” का रवैया अपनाते हैं। वे बहुत कम ही परिणाम की बात करते हैं। अगर  कोई बच्चा उनसे विनती करें, तो वह बच्चे को माफ कर उन्हें दोबारा मौका दे सकते हैं।

परमिसिव माता-पिता आमतौर पर एक माता-पिता की भूमिका से अधिक एक दोस्त की भूमिका निभाते हैं। वे अक्सर अपने बच्चों को उनके साथ अपनी समस्याओं के बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन वे अपने बच्चों में आमतौर पर बुरे विकल्पों या बुरे व्यवहार को रोकने का ज्यादा प्रयास नहीं करते हैं।

परमिसिव माता-पिता अपने बच्चों के व्यवहार को नियंत्रित या विनियमित नहीं करते हैं। इसलिए उनके बच्चे स्वीकार्य व्यवहार के बारे में कम जानते हैं। इनका गुस्से पर नियंत्रण नहीं होता है और साथ ही इनमें व्यवहार संबंधी समस्याएं अधिक होती हैं। तनावपूर्ण परिस्थितियों में ये अत्यधिक गुस्सा हो जाते हैं।

जो बच्चे परमिसिव माता-पिता के साथ बड़े होते हैं, वे पढ़ाई-लिखाई में ज्यादा संघर्ष करते हैं। वे अधिक व्यवहार संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं क्योंकि वे एडमिनिस्ट्रेशन और नियमों को ज्यादा महत्व नहीं देते हैं। ऐसे बच्चों में ज्यादातर आत्म-सम्मान की कमी होती है और वे दुखी रहते हैं।

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अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग स्टाइल (Uninvolved Parenting)

अन-इंवॉल्वड माता-पिता बच्चों से खुद को बढ़ाने की उम्मीद करते हैं। वे बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में ज्यादा समय या ऊर्जा नहीं लगाते हैं। अन-इंवॉल्वड माता-पिता बेपरवाह हो सकते हैं लेकिन वे ऐसा जानबूझकर नहीं करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य या दूसरे कारणों की वजह से माता-पिता बच्चे की शारीरिक या भावनात्मक जरूरतों की देखभाल करने में सक्षम नहीं हो पातें।

किसी अन-इंवॉल्वड माता-पिता को बाल विकास के बारे में कम जानकारी होती है और कभी-कभी वे दूसरी समस्याओं से परेशान होते हैं, जैसे  ऑफिस का काम, बिलों का भुगतान, घर का खर्चा चलाना, परिवार की टेंशन, किसी बीमारी को लेकर चिंता आदि।

अन-इंवॉल्वड माता-पिता के बच्चों में आत्म सम्मान की कमी होती है। वे स्कूल में खराब प्रदर्शन करते हैं। उन्हें अक्सर व्यवहार संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कभी-कभी माता-पिता केवल एक श्रेणी में फिट नहीं होते हैं। ऐसे में आप कभी अधिक परमिसिव होते हैं और कभी-कभी आप अधिक ऑथोरिटेटिव होते हैं। अच्छे माता-पिता होने के लिए समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ, आप अपने बच्चे के साथ एक सकारात्मक संबंध बनाए रख सकते हैं। इसके साथ भी आप अपने बच्चे के साथ स्वस्थ तरीके से अपना अधिकार दिखा सकते हैं।

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में पेरेंटिंग स्टाइल से जुड़ी हर जरूरी जानकारी देने की कोशिश की गई है। यदि आप इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी पाना चाहते हैं तो आप कमेंट सेक्शन में अपना सवाल पूछ सकते हैं। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा यह भी आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं।

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