नवजात शिशु की नींद के पैटर्न को अपने शेड्यूल के हिसाब से बदलें

Medically reviewed by | By

Update Date अप्रैल 7, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
Share now

नवजात शिशु की नींद का समय ही नए पेरेंट्स के लिए उनके खुद के लिए बचा थोड़ा समय रह जाता है। यह समय उनके लिए आराम करने और अन्य जरूरी काम निपटाने का मौका होता है। यह वो समय है जब शायद वे खुद झपकी ले लेते हैं? सभी पेरेंट्स इस बात से सहमत होंगे कि पेरेंटिंग कोई आसान काम नहीं है और साथ ही आपको अपना सारा काम और यहां तक कि अपनी खाने की आदतों को भी बच्चों के सोने के लिहाज से बदलनी पड़ जाती हैं। ऐसे में खुद को थोड़ा समय देने के लिए आप बच्चे की नींद के पैटर्न में बदलाव कर सकते हैं।

ये भी पढ़ेंः क्यों है बेबी ऑयल बच्चों के लिए जरूरी?

नवजात शिशु की नींद के लिए सामान्य टिप्स

नवजात शिशु की नींद क्यों जरूरी है?

जब एक बच्चा सोता है, तो उसके अंदर बहुत से बायोलॉजिकल प्रोसेस होते हैंः

ये भी पढ़ेंः बच्चों में शर्मीलापन नहीं है कोई परेशानी, दें उन्हें उनका ‘मी-टाइम’

इन वजहों से बदलता है नवजात शिशु की नींद का पैटर्न

  • हर बच्चे की उम्र, परिपक्वता और उनके विकास की गति सोने के समय में बदलाव का कारण होती है।
  • बच्चों के सोते समय घर में और क्या चल रहा है, यह भी नवजात शिशु की नींद के पैटर्न पर असर डालता है।
  • माता-पिता बच्चे को दिन में कितनी देर सुलाते हैं यह भी उनकी नींद के पैटर्न पर असर डालता है।
  • परिवार की लाइफस्टाइल भी नवजात शिशु की नींद को प्रभावित करती है।
  • एक्टिव बच्चे शारीरिक रूप से अधिक थक जाते हैं और सोना चाहते हैं।
  • घर में होने वाला शोर भी नवजात शिशु की नींद के पैटर्न के लिए जिम्मेदार है।
  • आहार और दूध का सेवन। जिन बच्चों को भूख ज्यादा लगती है वे जल्दी जाग जाते हैं। प्रोटीन और आयरन बच्चे के दिमाग और उनके विकास के लिए जरूरी हैं।

ये भी पढ़ेंः बच्चों की मजबूत हड्डियों के लिए बचपन से ही दें उनकी डायट पर ध्यान

बच्चों की दिन की नींद किस उम्र से होती है कम

आम तौर पर 14 महीने की उम्र बच्चा दिन में कम सोने लगता है। कुछ टॉडलर्स इससे कम उम्र में दिन में सोना छोड़ देते हैं और कुछ इससे बड़े होने के बाद भी दिन में सोना जारी रखते हैं। लेकिन, आमतौर पर बच्चों के लिए 14 महीने को दिन की नींद छोड़ने के लिए औसत आयु माना जाता है। एक सामान्य पैटर्न यह है कि सुबह की नींद थोड़ी देर से आती है। दोपहर की नींद पहले आती है और शाम की नींद को दोपहर के भोजन के बाद एक साथ दिया जाता है।

दो बार सुलाने की बजाए जब आप बच्चे को एक बार सुलाते हैं, तो कुछ दिन ऐसे होंगे जब आपका बच्चा और सोना चाहेगा। कुछ दिनों में वे एक नींद के लिए पूरी तरह से कंफर्टेबल हो जाते हैं।  जब वे विकास के दौर से गुजर रहे होते हैं, तो उनके अधिक थके होने की संभावना होती है। आप देखते हैं कि जब वो दिन में नहीं सोते, तो उन्हे रात में थोड़ा जल्दी सोने की जरूरत होती है या अगर वे सुबह बहुत जल्दी उठते हैं, तो उन्हें दिन में दो बार सोने की जरूरत होती है।

नवजात शिशु की नींद के लिए माता-पिता को फ्लेक्सिबल रहना पड़चा है। बच्चे को दो बार से एक बार सुलाने के लिए माता-पिता को अच्छी तरह से मैनेज करने में अधिक समय और थोड़ी संवेदनशीलता की जरूरत होती है।

ये भी पढ़ेंः बच्चों के साथ ट्रैवल करते हुए भूल कर भी न करें ये गलतियां

नवजात शिशु की नींद में बदलाव लाने के जरूरी टिप्स

  •  अगर आपका बच्चा लगभग 14 महीने का है और अभी भी दो टाईम की नींद ले रहा है, तो ऐसे संकेतों को देखें कि वह कब एक टाइम की नींद को छोड़ने के लिए तैयार हैं। जब बच्चा एक ही टाइम सोता है, तो वह देर तक सोता है, जिससे पेरेंट्स को ज्यादा समय मिलता है।
  • अगर आपका बच्चा सोने के समय बिल्कुल एक्टिव और सतर्क रहता है, तो उनके इशारों को समझें, वह दिन में सोना छोड़ने के लिए तैयार हैं।
  • जब नवजात शिशु की नींद में बदलवा करना हो, तो दोपहर का भोजन जल्दी कराएं और फिर अपने बच्चे को सुलाएं।
  • बच्चों को दोपहर का भोजन लगभग 11 से 12 बजे के बीच कराएं और फिर कुछ घंटों की नींद उनके स्लीपिंग पैटर्न को बदलने में मदद करती है।
  • अगर आपके बच्चे को दौड़ना या चलना पसंद है, तो उसे सुबह या शाम को जागने के बाद उसे चलने दें।
  • अगर वे दिन में दो बार नींद ले रहे हैं या वे दोपहर 3 बजे के बाद जाग रहे हैं, तो वे रात को सोने के लिए अनिच्छुक हो सकते हैं।
  • दिन और रात दोनों समय सोने के लिए एक ही रूटिन को फॉलो करें। कंसिस्टेंसी जरूरी है।
  • अपने टॉडलर के थके हुए इशारों के प्रति संवेदनशील रहें। वे आपको बताएंगे कि उन्हें अभी भी कितनी नींद की जरूरत है।
  • अपने बच्चे की नींद और रूटिन के लिए फ्लेक्सिबल रहें।

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में नवजात शिशु की नींद से जुड़ी हर जानकारी देने की कोशिश की गई है। यदि आप इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी पाना चाहते हैं तो अपना सवाल कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं। हम अपने एक्सपर्ट्स से आपके सवाल का जवाब दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा यह भी आप हमें कमेंट सेक्शन में बता सकते हैं।

और पढ़ेंः 

बच्चों के इशारे कैसे समझें, होती है उनकी अपनी अलग भाषा

बच्चों का पहला दांत निकलने पर कैसे रखना है उनका ख्याल, सोचा है?

बच्चों का लार गिराना है जरूरी, लेकिन एक उम्र तक ही ठीक

ब्रेन एक्टिविटीज से बच्चों को बनाएं क्रिएटिव, सीखेंगे जरूरी स्किल्स

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"