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जानें गर्भावस्था में मोटापा कैसे बन सकता है दुश्मन?

जानें गर्भावस्था में मोटापा कैसे बन सकता है दुश्मन?

गर्भावस्था में मोटापा कपल्स के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़े हुए फैट के कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गर्भावस्था में मोटापा आपकी फर्टिलिटी को इफेक्ट करने के साथ ही बढ़े हुए वजन के कारण हार्ट डिजीज, डायबिटीज, बैक और ज्वाइंट्स पेन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। प्रेग्नेंसी से पहले मोटापा कंसीव करने में समस्या पैदा कर सकता है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि किस तरह से मोटापा प्रेग्नेंसी को प्रभावित करता है।

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मोटापे के कारण हार्मोन पर पड़ता है इफेक्ट

अगर आपका बॉडी मास इंडेक्स ओवरवेट कैटेगिरी में ( BMI -30 से ज्यादा) है तो इसे मोटापे की श्रेणी में रखा जाएगा। बॉडी में नैचुरल हार्मोन बदल जाने के कारण फर्टिलिटी पर इफेक्ट पड़ता है। अगर मोटापे के दौरान महिला ने कंसीव भी कर लिया तो आगे चलकर प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational diabetes), हाइपरटेंशन और प्रीमैच्योर लेबर की समस्या हो सकती है।

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जानिए आप मोटे हैं या नहीं

मोटापे से मतलब शरीर में अतिरिक्त चर्बी से है। माप का आधार हाइट और वेट होता है। बॉडी मास इडेक्ट (BMI) की हेल्प से शरीर के मोटापे को मेजर किया जाता है। अगर आपको अपनी हाइट और वेट का सही अंदाजा है तो।

बीएमआई वेट स्टेटस

18.5 से कम अंडरवेट
18.5-24 नॉर्मल
25.0-29.9 ओवर वेट
30.0-34.9 मोटापा (क्लास फर्स्ट)
35.0-39.9 मोटापा (क्लास सेकेंड)
40.0 या उससे अधिक अत्यधिक मोटापा (क्लास थर्ड)

गर्भावस्था में मोटापा कर सकता है असिस्टेड प्रेग्नेंसी को प्रभावित

मोटापे के कारण नैचुरल और असिस्टेड प्रेग्नेंसी यानी रिप्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी (आईवीएफ) से होने वाली प्रेग्नेंसी भी प्रभावित हो सकती है। मोटापे के कारण महिलाओं में एग की क्वालिटी खराब हो सकती है। एग की क्वालिटी खराब हो जाने के कारण मिसकैरिज का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है। अगर कंसीव करने से पहले ही सेहत पर ध्यान दिया जाए तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है।

ठीक ऐसा ही पुरुषों के साथ भी होता है। मोटापे के कारण पुरुषों के स्पर्म की क्वालिटी भी खराब हो सकती है। आईवीएफ के दौरान खराब क्वालिटी के स्पर्म ठीक से परफॉर्म नहीं कर पाते हैं। ऐसे में ICSI आईवीएफ का सहारा लेना पड़ सकता है। ICSI-आईवीएफ एक प्रक्रिया है जिसके तहत फर्टिलाइजेशन के लिए एग में एक स्पर्म इंजेक्ट किया जाता है। ये प्रॉसेस सामान्य रूप से फैलोपियन ट्यूब या फिर इन विट्रो फर्टिलाइजेशन की प्रॉसेस के दौरान एक डिश में की जाती है। ICSI-आईवीएफ की प्रक्रिया उन कपल्स के लिए बेहतर मानी जाती है जिनमें मेल इनफर्टिलिटी की समस्या होती है।

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गर्भावस्था में मोटापा के इस पहलू को भी जानें

अगर आपको लग रहा है कि गर्भावस्था और मोटापे को सिर्फ महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है तो ये गलत है। मोटापा गर्भावस्था को प्रभावित करता है, लेकिन महिला और पुरुष दोनों का ही मोटापा कंसीव करने के दौरान समस्या खड़ी कर सकता है। मोटापे के कारण पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या हो जाती है। मोटापे के कारण पुरुषों में भी कई बीमारियां हो सकती हैं जो इनफर्टिलिटी को बढ़ाने का काम करती है।

अगर पुरुष या महिला समय रहते मोटापा कम कर ले तो संभावित समस्याओं से बचा जा सकता है। पुरुषों में अधिक मोटापे के कारण स्पर्म काउंट में कमी हो जाती है। स्पर्म काउंट में कमी के कारण इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गर्भावस्था और मोटापा अगर एक साथ है तो होने वाले बच्चे की डिलिवरी के समय खतरा बढ़ सकता है।

गर्भावस्था में मोटापा कैसे प्रभावित करता है?

प्रेग्नेंसी के दौरान अगर आपको मोटापे की समस्या है तो गर्भावस्था में कॉम्प्लिकेशन होने की संभावना बढ़ जाती है। गर्भावस्था और मोटापा अगर साथ हैं तो डिलिवरी के दौरान समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। महिलाओं का ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। वजायनल डिलिवरी में भी परेशानी आ सकती है। मां के अधिक मोटापे के कारण होने वाले बच्चे का वजन भी बढ़ सकता है। बच्चे का वजन बढ़ जाने से वजायनल डिलिवरी के दौरान समस्या हो सकती है।

  • मिसकैरिज का रिस्क, स्टिलबर्थ का रिस्क
  • जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational diabetes)
  • प्रेग्नेंसी के दौरान कॉम्प्लिकेशन हाई ब्लड प्रेशर और किसी अन्य ऑर्गन के डैमेज हो जाने से बढ़ सकता है। इसमें किडनी को खतरा भी शामिल है।
  • कार्डिएक डिस्फंक्शन (Cardiac dysfunction)
  • स्लीप एप्निया
  • डिफिकल्ट वजायनल डिलिवरी
  • वाउंड इंफेक्शन

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गर्भावस्था में मोटापा है तो इन बातों का रखें ध्यान

आपको सुरक्षित गर्भावस्था के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। कंसीव करने से पहले कपल्स को एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। डॉक्टर आपको प्रीनेटल विटामिन सजेस्ट करेगा। अगर मोटापे की समस्या है तो हेल्थ केयर प्रोवाइडर या डाइटीशियन की हेल्प से वेट को कंट्रोल करने की सलाह दी जा सकती है। प्रीनेटल विजिट की हेल्प से आपकी हेल्थ और होने वाले बेबी की हेल्थ का चेकअप किया जा सकता है। इस दौरान कुछ मेडिकल कंडिशन जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्लीप एप्नीया आदि की जांच की जाती है।

हेल्थ पर देना होगा ध्यान

सुरक्षित गर्भावस्था के लिए होने वाले पैरेंट्स को अपनी हेल्थ पर जरूर ध्यान देना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान ऐसे फूड को अवॉयड करना चाहिए जो वेट को बढ़ाने का काम करते हैं। प्रेग्नेंसी से पहले और गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड सप्लिमेंट जरूर लें। साथ ही आयरन, कैल्शियम और दूसरे जरूरी सप्लिमेंट्स को रोजाना लें। अगर आपको कोई हेल्थ कंडिशन है तो इसके बारे में डॉक्टर से संपर्क करने के बाद रोजाना दवा लेना न भूलें। रोजाना हेल्थ एक्टिविटी करना सेहत के लिए अच्छा रहेगा। प्रेग्नेंसी के दौरान एल्कोहॉल, ड्रग्स से दूरी बनना सही रहेगा। कोई भी मेडिसिन लेने से पहले डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। फिर चाहे वह हर्बल प्रोडक्ट ही क्यों न हो।

गर्भावस्था में मोटापे से संबंधित अगर आपके मन में कोई भी प्रश्न हो तो उचित रहेगा कि एक बार डॉक्टर से संपर्क करें। बिना किसी जानकारी के कदम न उठाएं। आप प्रेग्नेंसी के दौरान डायट, एक्सरसाइज या फिर मेडिसिन से जुड़ी किसी भी बात पर आपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। गर्भावस्था में मोटापा कम करने से संभावित किसी भी प्रकार की समस्या से बचा जा सकता है और होने वाले बच्चे को भी मोटापे से बचाया जा सकता है।

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और गर्भावस्था में मोटापा से संबंधित जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

 

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सायकल लेंथ

28 दिन

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सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/08/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड