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सेकेंड बेबी प्लानिंग के पहले इन 5 बातों का जानना है जरूरी

सेकेंड बेबी प्लानिंग के पहले इन 5 बातों का जानना है जरूरी

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार सेकेंड बेबी प्लानिंग 24 महीने (दो साल) के बाद करना चाहिए। हालांकि कई दूसरी रिसर्च में कहा गया है कि 12 से 18 महीने के बाद भी सेकेंड बेबी प्लानिंग की जा सकती हैं। सेकेंड प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले महिला को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

सेकेंड बेबी प्लानिंग के पहले किन बातों का रखें ध्यान?

1.फिजिकल हेल्थ (Physical health)

प्रेग्नेंसी में शरीर में कई बदलाव होते हैं। यदि आपकी पहली प्रेग्नेंसी में बहुत समय नहीं हुआ है तो दूसरी प्रेग्नेंसी को प्लान करने से पहले आपको इस बात का ध्यान देना होगा कि आपने पूरी तरह से रिकवर किया है या नहीं।

2. वजन संतुलित रखें (Weight balance)

सेकेंड बेबी प्लानिंग, हो या पहले शिशु की प्लानिंग या बिना प्रेग्नेंसी प्लानिंग के भी वजन संतुलित रखना बेहद जरूरी है। हम बात कर रहें हैं सेकेंड बेबी प्लानिंग की तो अगर आप दूसरे बच्चे की प्लानिंग कर रहीं हैं तो कम से कम 6 महीने पहले से बॉडी वेट चेक करवाएं। गर्भावस्था के दौरान सामान्य फिट महिला का वजन 11 से 16 किलो तक बढ़ता है। गर्भवती महिला अगर अंडर वेट या ओवर वेट है तो ऐसी स्थिति में वजन भी उसी अनुसार बढ़ेगा। इसलिए प्रेग्नेंसी के 6 महीने पहले ही अपने वजन को संतुलित रखना शुरू कर दें। सेंट लुइस यूनिवेर्सिटी के अनुसार पहली प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का वजन कैसा था उसका असर दूसरी प्रेग्नेंसी पर भी पड़ता है।

और पढ़ें- हेल्थ इंश्योरेंस से पर्याप्त स्पेस तक प्रेग्नेंसी के लिए जरूरी है इस तरह की फाइनेंशियल प्लानिंग

3. फिटनेस का ख्याल रखें (Take care of fitness)

दूसरे बच्चे की प्लानिंग और फिटनेस को लेकर सतर्क रहना थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि इस दौरान आप अपने शिशु का भी ख्याल रखती है, स्तनपान करवाती हैं। इन सब के बीच अगर आप सेकेंड बेबी प्लानिंग कर रहीं हैं तो फिट रहने की कोशिश करना थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन ऐसा करना बेहद जरूरी है। फिट रहने से आप स्ट्राॅन्ग होने के साथ ही दूसरी गर्भवस्था के दौरान भी स्वस्थ रहेंगी।

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4. पौष्टिक आहार का सेवन करें (Eat nutritious food)

सेकेंड प्रेग्नेंसी की प्लानिंग के साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन भी शुरू कर दें।

बेबी प्लानिंग के दौरान निम्नलिखित आहार का सेवन अवश्य करें।

  • फैट (Fat)
  • मीट (Meat)
  • पोल्ट्री (Poultry)
  • बीन्स (Beans)
  • ग्रेन्स (Grains)

इन आहार को डेली रूटीन में शामिल करें। वैसे डायटीशियन की मदद से अन्य खाद्य पदार्थों की सलाह दी जा सकती हैं।

और पढ़ें: जान लें कि क्यों जरूरी है दूसरा बच्चा?

सेकेंड बेबी प्लानिंग कर रहीं हैं तो निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन न करें-

  • मटर (Peas)
  • सोया (Soya)
  • आर्टिफिशियल स्वीटनर (Artificial Sweetner)
  • अत्यधिक मात्रा में शुगर (Excessive amount of sugar)
  • कॉर्न सीरप (Corn syrup)
  • कैफीन (Caffeine)

4. आहार में सप्लिमेंट्स शामिल करें (Include supplements in your diet)

शरीर में कई तरह के विटामिन और खनिज तत्व की आवश्यकता होती है। हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए आयरन, मैग्नेशियम, जिंक, विटेक्स के साथ ही विटामिन-ए, विटामिन-डी, विटामिन-बी 6 और विटामिन-सी की सही मात्रा शरीर में होना जरूरी है। ब्लड टेस्ट की मदद से आसानी से शरीर में होने वाली कमी की जानकारी मिल सकती है।

5. आपकी उम्र (Your age)

जैसे जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है वैसे वैसे अंडों की संख्या में कमी आती जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक लड़की दो मिलियन अंडों के साथ पैदा होती है। समय के साथ ये अंडे कम होते जाते हैं, जिससे मिसकैरेज और जेनेटिक डिफेक्ट होने का खतरा बढ़ता जाता है।

और पढ़ें- क्या प्रेग्नेंसी के दौरान एमनियोसेंटेसिस टेस्ट करवाना सेफ है?

6. दवाओं की जांच करें (Recheck your medications)

पहली डिलिवरी के बाद महिलाएं कुछ दवाइयों का सेवन करती हैं। उन दवाओं में शामिल हैं।

  • विटामिन-ए स्किन क्रीम (Vitamin A Screen Cream)
  • नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेटरी (Non steroid anti inflammatory)
  • अस्थमा की दवा (Asthma medications)
  • ब्लड प्रेशर की दवा (Blood pressure medicines)
  • थायरॉइड की दवाएं (Thyroid medicines)
  • एंटी-सायकॉटिक और एंटी सीजर मेडिसिन (Anti-Psychotic and Anti Caesar Medicine)
  • साइटोक्सान (Cytoxan)
  • डोमपेरिडोने (Domperidone)

ऊपर बताई गई दवाओं का सेवन अगर आप कर रहीं हैं तो सेकेंड बेबी प्लानिंग में आपको परेशानी हो सकती हैं।

7. फाइनेंशल प्लानिंग (Financial planning)

दूसरा बेबी प्लान कर रहे हैं तो खर्च का बढ़ना लाजमी है। परिवार को बड़ाने से पहले फाइनेंशल प्लानिंग करना न भूलें। इसके लिए आप कुछ समय पहले से प्लानिंग करना शुरू कर दें। बच्चे के नाम पर फंड जमा करना शुरू कर दें। जरूरत पड़ने पर आप इन पैसों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

8. पहले बच्चे पर ध्यान देना न भूलें

आप अपने पहले बच्चे से भले ही कितना प्यार क्यों न करते हो, लेकिन कई पेरेंट्स दूसरे बच्चे की प्लानिंग के वक्त उसको समय देना भूल जाते हैं। पति पत्नी का सारा ध्यान एक दूसरे पर होता है जो बच्चे को बुरा महसूस कराने लगता है। कई बार बच्चे मन ही मन अपने भाई या बहन से चिढ़ने लगते हैं। इसलिए दूसरे बच्चे के लिए प्लानिंग करते वक्त पहले बच्चे को अहमियत देना न भूलें।

सेकेंड बेबी प्लानिंग में होने वाली सहूलियतें

बेबी मूवमेंट का अहसास होना (Feeling of baby movement)

पहली प्रेग्नेंसी के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी में मां अपने शिशु के मूवमेंट को आसानी से महसूस कर पाती है। दूसरी प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिलाएं ज्यादा एक्टिव रहती हैं।

थकावट को लेकर परेशान न होना (Don’t take stress for tiredness)

प्रेग्नेंसी के शुरुआत के साथ ही शरीर में हॉर्मोनल बदलाव के कारण कई बदलाव आते हैं। इस दौरान प्रोजेस्ट्रोन लेवल के बढ़े होने के कारण पहली प्रेग्नेंसी जैसी ही थकावट होती है, लेकिन इस दौरान गर्भवती महिला थकान से अवगत होती हैं इसलिए आसानी से इसका सामना कर लेती हैं।

और पढ़ें : क्या होती है बेबी ड्रॉपिंग? प्रेग्नेंसी के दौरान कब होता है इसका अहसास?

बेबी बंप (Baby bump)

पहली प्रेग्नेंसी की तुलना में दूसरी बार प्रेग्नेंसी में बेबी बंप कुछ कम हो सकता है क्योंकि पहली गर्भावस्था के समय एब्डॉमेन स्ट्रेच हो चुका होता है।

इन सहूलियतों के साथ ही दूसरे बच्चे के कुछ दूसरे फायदे भी होते हैं। जैसे-

  • पहले शिशु को भाई-बहन का प्यार मिल जाता है।
  • ज्यादा बच्चों की चाहत पूरी हो जाती है।
  • बेटे या बेटी की चाह रखने वाले कपल्स की इच्छा इस बार पूरी हो सकती है।

और पढ़ें: न्यू मॉम का बजट अब नहीं बिगड़ेगा, कुछ इस तरह से करें प्लानिंग

हम उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में सेकेंड बेबी प्लानिंग से जुड़ी जानकारी देने की कोशिश की गई है। यदि आपका इस लेख से जुड़़ा कोई सवाल है तो आप कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं। हम अपने एक्सपर्ट्स द्वारा आपके सवालों के उत्तर दिलाने का पूरा प्रयास करेंगे। अगर आप सेकेंड बेबी प्लानिंग कर रहीं और इससे जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहती हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

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अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

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सूत्र

How does a second pregnancy differ from the first?: https://www.tommys.org/pregnancy-information/im-pregnant/midwives-answer/how-does-second-pregnancy-differ-first Accessed August 04, 2020

Birth of a Second Child: https://kidshealth.org/en/parents/second-child.html Accessed August 04, 2020

Determinants of second pregnancy among pregnant women: a hospital-based cross-sectional survey in China: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5372152/ Accessed August 04, 2020

Second pregnancies among teenage mothers.: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/6667732 Accessed August 04, 2020

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/08/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड