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क्या फर्टिलिटी पर पड़ता है उम्र का असर?

क्या फर्टिलिटी पर पड़ता है उम्र का असर?

अपने आसपास आपने बहुत से ऐसे कपल्स को देखा होगा, जो लेट शादी के बाद जब बच्चे की प्लानिंग करते हैं तो कंसीव नहीं कर पातें या दूसरी तरह समस्याओं को सामना करना पड़ता है। दरअसल, डॉक्टर्स भी मानते हैं कि 35 साल की उम्र के बाद बच्चे की प्लानिंग करने में मुश्किलें आती हैं, इसका साफ मतलब है कि उम्र और फर्टिलिटी (Age and Fertility) एक-दूसरे से संबंधित है। ऐसा नहीं है कि 30 या 40 की उम्र में कोई कपल्स माता-पिता नहीं बन सकते, लेकिन इतना जरूर है कि इसकी संभावना कम हो जाती है। उम्र और फर्टिलिटी (Age and Fertility) एक-दूसरे से कैसे संबंधित है जानिए इस आर्टिकल में।

उम्र फर्टिलिटी को प्रभावित क्यों करती है?

उम्र और फर्टिलिटी (Age and Fertility) का एक-दूसरे से गहरा संबंध है। उम्र बढ़ने के साथ ही फर्टिलिटी कम होने लगतीहै। आमतौर पर 35 की उम्र के बाद अंडाणुओं ( eggs) की संख्या और गुणवता दोनों ही कम होने लगती है। प्यूबर्टी (puberty) से लेकर मेनोपॉज (menopause) तक हर महीने एक अंडाणु ओवरी (ovaries) से आपके गर्भ में भेजा जाता है। गर्भ में जब अंडाणु स्पर्म से मिलकर निषेचित होते हैं तो आप प्रेग्नेंट होती हैं। यदि आपको लगता है कि महिलाओं के शरीर में हर महीने नए अंडाणु बनते हैं तो आप गलता है। दरअसल, यह जन्म से ही महिलाओं के शरीर में स्टोर होते हैं और जैसे-जैसे उम्र ढलती हैं, अंडाणुओं की उम्र भी बढ़ने लगती है जिससे फर्टिलिटी कम हो जाती है।

बढ़ती उम्र और स्पर्म (Age and sperm)

उम्र बढ़ने के साथ न सिर्फ महिलाओं के अंडाणुओं की गुणवता पर असर पड़ता है, बल्कि 40 की उम्र के बाद पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी में भी गिरावट आने लगती है। अधिकांश पुरुष हर दिन लाखों स्पर्म का उत्पादन करते हैं, लेकिन 40 की उम्र के बाद हेल्दी स्पर्म की संख्या लगातार कम होने लगती है।

अधिक उम्र के पुरुषों के पिता न बन पाने के अन्य कारणों में शामिल हैं-

और पढ़ें- अबॉर्शन के बाद कब करें गर्भधारण? कहीं ये सवाल आपके मन में भी तो नहीं!

उम्र के अनुसार प्रेग्नेंट होने में कितना समय लगता है?

age and fertility- उम्र और फर्टिलिटी

उम्र बढ़ने के साथ ही प्रेग्नेंसी की संभावना कम होती जाती है क्योंकि उम्र और फर्टिलिटी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

एक अध्ययन के अनुसार नियमित रूप से अनप्रोटेक्टेड सेक्स (unprotected sex) करने पर-

30 साल तक की उम्र की 10 में से 7 महिलाएं एक साल के अंदर कंसीव कर लेती हैं

35 साल की उम्र तक की करीब 10 में से 6 महिलाएं एक साल के अंदर गर्भाधान कर लेती हैं।

40 साल की उम्र तक की करीब 10 में से 4 महिलाएं एक साल के अंदर गर्भधान कर लेती हैं।

फर्टिलिटी (fertility) से जुड़ी समस्याओं के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकेत हैं, लेकिन कई बार इसका सटीक कारण पता नहीं चल पाता है जिसे “अनएक्प्लेन्ड इनफर्टिलिटी (unexplained infertility’)” कहते हैं। 20 की उम्र में अनएक्प्लेन्ड इनफर्टिलिटी की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन 35 की उम्र के बाद यही महिलाओं में इनफर्टिलिटी का मुख्य कारण बन सकती है। ऐसे में कपल IVF (in vitro fertilization) की मदद ले सकते हैं। यदि आपकी उम्र 35 साल से अधिक है और आप एक साल से कोशिश करने के बाद भी कंसीव नहीं कर पा रही हैं, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है। यदि आपको एंडोमेट्रियोसिस(endometriosis), पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (polycystic ovary syndrome) या थायरॉइड (thyroid) जैसी कोई समस्या है तो आपको जल्दी इस बारे में डॉक्टर से परामर्श लेने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे फर्टिलिटी प्रभावित होती है। एक बात और याद रखिए कि सिर्फ उम्र ही फर्टिलिटी को प्रभावित नहीं करती है, बल्कि स्मोकिंग (Smoking), एल्कोहल (alcohol), ड्रग्स का इस्तेमाल, मोटापा और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज (sexually transmitted diseases) का असर भी फर्टिलिटी पर पड़ता है और कंसीव करना मुश्किल हो जाता है

मेरी उम्र प्रेग्नेंसी को कैसे प्रभावित कर सकती है? (How age affects pregnancy)

ऐसा नहीं है कि 35 या 40 की उम्र में महिलाएं स्वस्थ बच्चे को जन्म नहीं दे सकतीं, लेकिन हां इसकी संभावना कम उम्र की महिलाओं से घट जरूर जाती है, साथ ही अधिक उम्र में मां बनने वाली महिलाओं में कई तरह की जटिलाओं के अलावा मिसकैरिज (miscarriage) का खतरा भी बढ़ जाता है।

बढ़ती उम्र के अनुसार मिसकैरिज का खतरा

30 साल से कम 10 में से 1 महिला को मिसकैरिज का खतरा रहता है

35-39 के बीच 10 में से 2 प्रेग्नेंसी का अंत मिसकैरिज से हो सकता है

45 के बाद 5 में से एक महिला के मिसकैरिज का डर रहता है।

40 साल से अधिक उम्र की प्रेग्टनेंट महिलाओं में इन स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी अधिक होता है-

  • हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) और प्रेग्नेंसी में डायबिटीज (जेस्टेशनल डायबिटीज (gestational diabetes)
  • जुड़वा या एक साथ तीन बच्चे होना जिससे जटिलताएं बढ़ सकती हैं
  • प्री-एक्लाम्पशिया (pre-eclampsia) प्रेग्नेंसी की ऐसी स्थिति जो मां और बच्चा दोनों के लिए खतरनाक होती है
  • लंबा लेबर या सिजेरियन (caesarean) की अधिक संभावना
  • स्टिल बर्थ (stillbirth)
  • बच्चे के डाउन सिंड्रोम से पीड़ित होने की अधिक संभावना।

और पढ़ें- जानें 50 प्लस के बाद प्रेग्नेंसी प्लानिंग में होने वाले रिस्क और किन बातों का रखें ध्यान

क्या 40 के बाद प्रेग्नेंट होने पर मुझे अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है?

जी हां, 40 के बाद प्रेग्नेंसी में कई तरह की कॉम्पिलकेशन्स हो सकती हैं, इसलिए आपकी गाइनाक्लोजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर आपको कुछ जरूरी सलाह देंगे। क्योंकि आपमें जटिलताओं का जोखिम अधिक होता है इसलिए सामान्य प्रेग्नेंसी टेस्ट से अधिक टेस्ट की सलाह डॉक्टर दे सकते हैं, जिससे आपकी और बच्चे की सेहत के बारे में पता लगाया जा सके। आपको अतिरिक्त स्कैन, ब्लड टेस्ट और दूसरे टेस्ट करवाने पड़ सकते हैं प्री-एक्लाम्पशिया (pre-eclampsia) के जोखिम को देखते हुए। बहुत जरूरी है कि आप डॉक्टर की सलाह पर अमल करें, क्योंकि उम्र बढ़ने पर प्रेग्नेंसी में जोखिम भी बढ़ जाता है।

हेल्दी लेट प्रेग्नेंसी सुनिश्चित करने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? (What can I do to make sure I have a healthy late pregnancy)

किसी भी उम्र में प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले जरूरी है कि आप सुनिश्चित कर लें कि आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इसके लिए आपको निम्न काम करने होंगे-

  • जितना हो सके अपने BMI लेवल को हेल्दी बनाए रखें।
  • गर्भाधान (conception) से करीब 2 महीने पहले से ही फॉलिक एसिड लेना शुरू कर दें।
  • नियमित रूप से फिजिकल एक्विटी (physical activity) करें।
  • हेल्दी, बैलेंस डायट लें।
  • स्मोकिंग और एल्कोहल का सेवन बंद कर दें।
  • कैफीन का सेवन कम करें, हर दिन 200mg से कम।
  • किसी अन्य तरह की स्वसाथ्य समस्या होने पर इस बारे में डॉक्टर से बात करें
  • यदि आपको लगता है कि आप सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज के जोखिम पर है तो इसकी जांच अवश्य करवाएं।
  • हर 3 साल में सर्वाइकल स्क्रीनिंग (cervical screening) करवाएं।
  • सुनिश्चित करें कि आपको MMR वैक्सिनेशन लगी हो।

गर्भावस्था और जन्म से जुड़े जोखिम (Pregnancy and birth risks)

चूंकि उम्र बढ़ने के साथ स्पर्म और अंडाणुओं की गुणवता खराब हो जाती है, जेनेटिक मरेटियल को भी नुकसान पहुंचता है इस वजह से बड़ी उम्र के कपल्स के बच्चों में जन्मजात दोष (birth defects) और जेनेटिक असमान्यताओं (genetic abnormalities) का जोखिम बढ़ जाता है। कम उम्र के पिता की तुलना में 40 साल से अधिक उम्र के पिता के बच्चों में मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का खतरा अधिक होता है।

एक अनुमान के मुताबिक, 30 साल तक की उम्र की 400 में से एक और 40 साल की उम्र की 100 में से एक महिला में क्रोमोसोमल (या आनुवांशिक) असामान्यता वाले बच्चे होने का जोखिम होता है। युवा महिलाओं की तुलना में बड़ी उम्र की महिलाओं में मिसकैरिज, प्रेग्नेंसी और जन्म के दौरान जटिलताओं की संभावना अधिक होती है। अधिक उम्र की महिलाओं में जेस्टेशनेल डायबिटीज (gestational diabetes), प्लेसेंटा प्रीविया (placenta previa), प्लेसेंटा एबरप्शन (placental abruption), स्टिल बर्थ (still birth) और सिजेरियन (caesarean) का जोखिम कम उम्र की महिलाओं से अधिक होता है।

और पढ़ें- सेकेंड्री इनफर्टिलिटी क्या है? इससे कैसे निपटें?

बच्चे होने की संभावना को कैसे बढ़ाया जा सकता है? (How to improve your chances of having a baby)

यदि आप अभी बच्चे की प्लानिंग नहीं करना चाहते हैं, लेकिन बाद में बच्चा चाहते हैं, तो अभी से कुछ हेल्दी विकल्प अपनाकर हेल्दी बेबी की संभावना को बढ़ा सकते हैं-

  • हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना
  • हेल्दी गर्भाधान उपकरण (conception tool)
  • स्मोकिंग और एल्कोहल से दूरी बनाएं
  • वजन नियंत्रित रखें
  • चाय/कॉफी का सीमित सेवन
  • रेग्युलर एक्सरसाइज और योग

इंफर्टिलिटी का उपचार (Infertility treatment)

age and fertility- उम्र और फर्टिलिटी

बढ़ती उम्र और फर्टिलिटी प्रॉब्ल्म की वजह से यदि आप मां नहीं बन पा रही हैं, तो मॉर्डन साइंस में इसके लिए कई उपचार उपलब्ध हैं।

असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (Assisted Reproductive Technologies)

आपकी इंफर्टिलिटी का कारण जानने के बाद डॉक्टर आपको विशेष उपचार की सलाह देगा। कई बार इसके कारणों का सटीक पता नहीं चल पाता है और ऐसे में यदि पारंपरिक उपचार से फायदा नहीं होता है तो डॉक्टर आपको एडवांस फर्टिलिटी थेरेपी जैसे इंट्रायूटराइन इनसेमिनेशन (IUI) या इनविट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) की सलाह दे सकता है।

इंट्रायूटराइन इनसेमिनेशन (IUI) उपचार में ओवरी में ढेर सारे अंडाणु के विकास के लिए दवा दी जाती है। जब यह अंडाणु ओवल्यूट होने के लिए तैयार होते हैं तो पार्टनर का साफ किया हुआ स्पर्म सीधे महिला के गर्भाशय में डाला जा सकता है। इसमें ज्यादा तकलीफ नहीं होती है।

इनविट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक में महिला के अंडाणुओं और पुरुष के स्पर्म को निकालकर बाहर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है और इसके बाद उसे महिला के गर्भ में डाला जाता है। यदि पुरुष पार्टनर के स्पर्म की क्वालिटी अच्छी नहीं है, तो डोनर स्पर्म का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, यदि कपल चाहे तो। किसी भी तरह के उपचार की सफलता पर भी उम्र का असर पड़ता है। 40 से अधिक उम्र की महिलाओं में इंट्रायूटराइन इनसेमिनेशन (IUI) उपचार की सफलता दर प्रति साइकल 5 प्रतिशत है जबकि 35 से 40 के बीच की महिलाओं में 10 फीसदी। IVF उपचार अधिक प्रभावशाली माना जाता है, लेकिन 40 से अधिक उम्र की महिलाओं में इसकी सफलता दर कम है।

एग डोनेशन (Egg Donation)

40 साल से अधिक उम्र की महिलाएं या जो मेनोपॉज में पहुंचने के बाद मां बनना चाहती हैं, उनके लिए उपचार के तरीके भी सीमित हो जाते हैं। ऐसी महिलाओं के लिए एग डोनेशन अच्छा विकल्प हो सकता है। इस प्रक्रिया में किसी कम उम्र की महिला के अंडाणुओं को लिया जाता है, इसके लिए उस महिला को भी दवा दी जाती है ताकि कई एग बन सके और जिस महिला के शरीर में फर्टिलाइज भ्रूण को डाला जाना है उसे भी हार्मोन्स के इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि उसका शरीर भ्रूण को स्वीकार कर सके। डोनर एग को महिला के पार्टनर के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता और उसके बाद उसे महिला के शरीर में डाला जाता है। यदि फर्टिलाइज भ्रूण एक से अधिक है तो उसे फ्रीज करके आगे कभी इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रख दिया जाता है। यह प्रक्रिया उन महिलाओं के लिए वरदान है जो अधिक उम्र में मातृत्व का अनुभव करना चाहती हैं।

और पढ़ें- नपुंसकता और बांझपन में क्या है अंतर, जानने के लिए पढ़ें

फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन (Fertility Preservation)

जो महिलाएं 30 या 40 की उम्र के बाद फैमिली प्लानिंग करना चाहती हैं वह फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन कर सकती है। इसमें IVF के बाद भ्रूण को फ्रीज करना या एग फ्रीजिंग शामिल है, जिसका बाद में इस्तेमाल गर्भाधान के लिए किया जा सकते है। भ्रूण फ्रीजिंग की सफलता अधिक है, लेकिन इसके लिए महिला के पुरुष साथी या डोनर स्पर्म का होना जरूरी है। फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन के लिए एग फ्रीजिंग नई तकनीक है जो सफलता का दावा करती है।

महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ ही उनके प्रेग्नेंट होने की संभावना घटने लगती है, क्योंकि उम्र और फर्टिलिटी एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। आमतौर पर 20 से 30 साल के बीच मां बनना सबसे अच्छा माना जाता है। मगर जो महिलाएं 35 या 40 के बाद मां बनना चाहती हैं, उन्हें पहले ही इस बारे में डॉक्टर से सारी जानकारी जुटा लेनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की जटिलता से बचा जा सके। इसके अलावा वह एग फ्रीजिंग जैसी तकनीक के जरिए भी अपने अंडे को भविष्य के लिए फ्रीज कर सकती हैं और जब मां बनना चाहे इनका इस्तेमाल कर सकती हैं। भले ही तकनीक ने बड़ी उम्र में मां बनने वाली महिलाओं की मुश्किलें थोड़ी कम कर दी है, लेकिन आज भी डॉक्टर 20 से 30 के बीच मां बनने को सही मानते हैं, क्योंकि इस समय जटिलताओं की संभावना कम होती है।

 

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अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 06/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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