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डिलिवरी के बाद कमर दर्द से राहत के लिए क्या करना चाहिए?

डिलिवरी के बाद कमर दर्द से राहत के लिए क्या करना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान शरीर में आए हॉर्मोनल बदलाव लिगामेंट्स और जोड़ों को ढीला कर देते हैं। साथ ही पेट की मांसपेशियों में तनाव भी लाते हैं जो बैठने और चलने को प्रभावित करते हैं। लेबर के दौरान शारीरिक तनाव पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न करता है जिसके कारण डिलिवरी के बाद कुछ महीनों तक पीठ व कमर में दर्द बना रह सकता है। ऐसा माना जाता है कि जिन महिलाओं को गर्भावस्था में पीठ दर्द या कमर दर्द होता है उन्हें डिलिवरी के बाद कमर दर्द (Postpartum back pain) की शिकायत रहती है।

महिलाओं को डिलिवरी के बाद कमर दर्द की शिकायत क्यों बनी रहती है?

डिलिवरी के बाद पीठ और कमर में दर्द होने के कारण

घबराने की कोई बात नहीं है। शोध कहते हैं कि लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं बच्चे होने के बाद पहले कुछ महीनों में पीठ दर्द से पीड़ित रहती हैं। इससे बचने और राहत के लिए समझने की कोशिश करें कि ऐसा क्यों होता है।

1. गर्भावस्था के दौरान आपका गर्भाशय फैलता है और पेट की मांसपेशियों को कमजोर करता है। प्रेग्नेंसी के दौरान लोअर स्पाइन आगे की तरफ खिंचती है, जिससे आपकी पीठ पर दबाव पड़ता है। जो डिलिवरी के बाद कमर दर्द का कारण बन सकता है।

2. गर्भावस्था के दौरान आपके बैठने व उठने की गलत मुद्रा आपके कमर दर्द को डिलिवरी बाद तक होने का कारण हो सकती है। इसलिए डिलिवरी के बाद कमर दर्द से बचना चाहती हैं तो गर्भावस्था के दौरान ही इस बात का ध्यान रखें।

3. बढ़े हुए हॉर्मोन से भी कमर और पीठ दर्द हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर शिशु को आसानी से बाहर लाने के लिए पेल्विक बोन लिगामेंट्स और जोड़ों को ढीला करने के लिए प्रोजेस्टेरोन और रिलैक्सिंग हॉर्मोन रिलीज होते हैं। ये हॉर्मोन शरीर में डिलिवरी के कुछ दिन बाद तक बने रहते हैं। जिससे प्रसव के बाद कमर दर्द होता है।

4. यदि आपका वजन अधिक हो गया है तो यह पीठ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है जिससे पुराने दर्द उभर सकते हैं। डिलिवरी के बाद पीठ दर्द का यह कारण शायद आपको पता न हो।

5. आपका शरीर गर्भावस्था के दौरान और बाद में बहुत परिवर्तन से गुजरता है और प्रसव की प्रक्रिया के बहुत थकाऊ होने के कारण यह आपकी पीठ के निचले हिस्से को तनाव में डालता है। इसलिए डिलिवरी के बाद कमर दर्द थोड़े दिन तक रह सकता है।

और पढ़ें: डिलिवरी के बाद बॉडी को शेप में लाने के लिए महिलाएं करती हैं ये गलतियां

डिलिवरी के बाद कमर दर्द से कैसे बचें?

प्रसव के बाद पीठ दर्द से राहत पाने के लिए आप इन आसान तरीकों को अपना सकती हैं:

1. वॉक दिलाएगी डिलिवरी के बाद कमर दर्द से राहत

सामान्य स्थिति में भी पीठ दर्द होने पर वॉक करना फायदेमंद माना जाता है। पीठ दर्द, कमर दर्द और किसी जोड़ों के दर्द में चलना सबसे सुरक्षित व्यायाम है। डिलिवरी के बाद कमर दर्द में भी वॉक करना राहत दिलाएंगा। आप नॉर्मल डिलिवरी के तुरंत बाद या सी-सेक्शन के बाद भी वॉक करना शुरू कर सकते हैं। आप अपनी स्ट्रेच्ड मसल्स को मजबूत करने के लिए योग का विकल्प भी चुन सकती हैं। बस एक बार इस बारे में डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें।

और पढ़ें :गर्भावस्था के दौरान स्ट्रेच मार्क्स: इन घरेलू उपचार से मिलेगा आराम

2. पेल्विक टिल्ट एक्सरसाइज अपनाएं और डिलिवरी के बाद होने वाले कमर दर्द से राहत पाएं

अपने डॉक्टर से डिलिवरी के बाद पीठ दर्द के बारे में बात करें और यदि वह सलाह दे तो आप पेल्विक टिल्ट एक्सरसाइज से शुरुआत कर सकती हैं। यह डिलिवरी के बाद दर्द से राहत देने में लाभदायक साबित होगी। आप पेल्विक टिल्ट्स के लिए इन बातों को ध्यान में रखें:

• अपने घुटनों के बल फर्श पर अपनी पीठ के तरफ से लेट जाएं।

• अपने पैरों को फर्श या जमीन पर सपाट रखें।

• अपने पेट की मांसपेशियों को कस लें और अपनी पेल्विक को थोड़ा ऊपर की ओर उठाएं।

• 10 सेकंड के लिए इसे होल्ड करके रहें।

• इसे कुछ बार दोहराएं।

याद रखें किसी प्रकार की असुविधा महसूस होने पर रुक जाएं। यदि आपने सिजेरियन के जरिए शिशु को जन्म दिया है तो आपको इस अभ्यास को शुरू करने के लिए कम-से-कम छह सप्ताह तक इंतजार करना पड़ सकता है।

और पढ़ें : शिशु को उठाते वक्त रखें इन बातों रखें ध्यान, नहीं होगा कमर दर्द

3. शरीर के सामान्य वजन को बनाए रखें

प्रसव के एक महीने बाद अपने सामान्य वजन को वापस लाने की कोशिश करें। गर्भावस्था के बाद एक सही आहार बहुत महत्वपूर्ण है यह एक आदर्श वजन बनाए रखने में मदद करेगा।

4. नी-पिलो का इस्तेमाल

सोते समय अपने कूल्हों को अलाइन करने के लिए घुटनों के बीच तकिया रखें। यह आपकी नींद में खलल डालने वाले दर्द को रोकेगा। इससे डिलिवरी के बाद कमर दर्द में भी राहत मिलती है। मार्केट में कई प्रकार के प्रेग्नेंसी पिलो उपलब्ध है जिन्हें आप गर्भावस्था के दौरान और डिलिवरी के बाद यूज कर सकती हैं। इनका उपयोग आपको डिलिवरी के बाद होने वाले कमर और पीठ दर्द में राहत देगा।

5. भारी चीजों को उठाना बंद करें

प्रसव के बाद भारी वस्तुओं को न उठाएं, क्योंकि इससे आपकी पीठ की मांसपेशियों और जोड़ों पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। आगे चलकर डिलिवरी के बाद कमर दर्द को बढ़ा सकता है।

6. समय-समय पर आराम करें

आप चाहे शारीरिक रूप से जितनी भी एक्टिव रहें अपने शरीर को रेस्ट देना बहुत जरूरी है। सही समय पर आराम करना डिलिवरी के बाद कमर दर्द से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण है।

8. हाई-हील्स को कहें ‘नो’

आमतौर पर भी ऐसा है कि हाई-हील्स के ज्यादा इस्तेमाल से महिलाओं में कमर और पीठ दर्द की शिकायत रहती है। आप तो फिर भी नौ महीने की नाजुक परिस्थितियों से उबरी हैं। अतः डिलिवरी के बाद कुछ महीनों के लिए अपनी हाई-हील्स को न पहनें। इससे डिलिवरी के बाद कमर दर्द में बहुत कमी आएगी।

और पढ़ें: नॉर्मल डिलिवरी केयर में इन बातों का रखें विशेष ख्याल

9. गुनगुने पानी से नहाएं और डिलिवरी के बाद कमर दर्द से राहत पाएं

प्रसव के बाद कुछ दिन तक ठंडे पानी में स्नान करने से बचें। क्योंकि यह मांसपेशियों में और खिंचाव ला सकता है और पीठ दर्द को अधिक गंभीर बना सकता है। प्रसव के बाद गर्म पानी से स्नान करने से आपकी तनी हुई मांसपेशियों को आराम मिलेगा। जिससे डिलिवरी के बाद दर्द से राहत पा सकेंगी।

10. गर्म पानी से सिकाई

डिलिवरी के बाद कमर व पीठ दर्द से राहत पाने के लिए आप गर्म पानी की सिकाई कर सकती हैं। इसके लिए गर्म पानी वाले बैग (Hot Water Bag) का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, कपड़े को गर्म पानी में निचोड़कर कमर पर रख सकती हैं। आराम न मिलने तक यह प्रक्रिया दोहराएं।

ऊपर बताए गए उपायों को अपनाकर डिलिवरी के बाद होने वाले कमर दर्द से राहत प्राप्त की जा सकती है, लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा हो रहा है और घरेलू उपाय अपनाने पर भी ठीक नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करें।

हम उम्मीद करते हैं कि डिलिवरी के बाद कमर दर्द विषय पर आधारित यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। यहां हमने दर्द के कारण के साथ उपचार देकर इस विषय को पूरी तरह समझाने की कोशिश की है। किसी प्रकार की शंका होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, उपचार और निदान प्रदान नहीं करता।

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सूत्र
लेखक की तस्वीर
Nikhil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 31/08/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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