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क्या सामान्य है डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट की समस्या?

क्या सामान्य है डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट की समस्या?

अगर आप यह सोचती हैं कि सारी परेशानियां सिर्फ प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान ही होती हैं और बच्चे के जन्म के बाद आप एकदम से नॉर्मल हो जाएंगी, तो आप बिल्कुल गलत सोच रही हैं, क्योंकि बच्चे के जन्म के बाद भी महिलाओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में से एक है डिलीवरी के बाब्लड क्लॉट (Blood clot after delivery)। दरअसल, डिलीवरी के बाद 6 हफ्ते तक महिला का शरीर रिकवर होता है। इस दौरान थोड़ी ब्‍लीडिंग होना सामान्य है, इसे लोचिया (lochia) या खून के थक्‍के कहते हैं। हालांकि यदि डिलीवरी के बाद खून के थक्के ज्यादा आ रहे हैं तो इसे नजरअंदाज करने की भूल न करें। डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट (Blood clot after delivery) होना कितना सामान्य है जानिए इस आर्टिकल में।

डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट क्या है? (Blood clots after delivery)

आमतौर पर डिलीवरी (Delivery) के बाद गर्भाशय लाइनिंग (Uterine lining) गिरने और प्लेसेंटा के अलग होने की वजह से ब्‍लीडिंग होती है। नॉर्मल डिलीवरी में बर्थ कैनाल के टिशू को नुकसान पहुंच सकता है जिससे ब्‍लीडिंग हो सकती है। बच्चे के जन्म के बाद तो ब्लीडिंग होती ही है। इसके अलावा जो ब्लड डिलीवरी के तुरंत बाद नहीं निकल पाता है, कुछ हफ्तों के अंदर डिलीवरी के बाद खून के थक्के (Blood clots after birth) के रूप में निकलने लगता है। ब्लीडिंग यदि सामान्य तो चिंता की कोई बात नहीं है, लेकिन डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट (Blood clot after delivery) यदि ज्यादा हो रहा है तो आपको एक बार डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। दुर्लभ मामलों में डिलीवरी के शरीर के अंदर नसों (veins) में ब्लड क्लॉट (blood clots) होने लगता है, जो जानलेवा स्थिति है।

और पढ़ें- पोस्टनेटल विटामिन्स? क्या आप जानते हैं इनका महत्व?

डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट के सामान्‍य लक्षण (Symptoms of blood clots after birth)

डिलीवरी के बाद खून के थक्के आना सामान्य है, लेकिन यह हर महिला में अलग होता है यानी किसी को 3-4 दिनों बाद ब्लड क्लॉट (Blood clots) आते हैं तो किसी को हफ्ते भर बाद। यह कितने दिनों तक रहता है इसके बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन आपके लिए यह जानना जरूरी है कि डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट (Blood clots after birth) के सामान्य लक्षण क्या है ताकि किसी तरह के असामान्य लक्षण दिखने पर आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर सकें।

जन्म के बाद के पहले 24 घंटे- बच्चे के जन्म के बाद (After delivery) के 24 घंटों में आमतौर पर महिलाओं को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग (Heavy bleeding) होती है। इतनी ही हर घंटे पैड बदलने की जरूरत पड़ती है। इस दौरान थोड़े ब्लड क्लॉट भी आते है जिनका साइज बड़ा या छोटा हो सकता है।

2-6 दिन बाद- इस दौरान ब्लीडिंग (Bleeding) थोड़ी कम हो जाती है और ब्लड का कलर भी गाढ़े लाल से ब्राउन या हल्का पिंक हो जाता है। लेकिन इस दौरान भी खून के छोटे-छोटे थक्के निकल सकते हैं।

7-10 दिन बाद- आमतौर पर डिलीवरी के हफ्तेभर बाद महिलाओं को बहुत कम ब्लीडिंग होती है और इस दौरान उन्हें रोजाना पैड लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ती, हालांकि कुछ महिलाओं को अभी भी ज्यादा ब्लीडिंग और ब्लड क्लॉट (Blood clot) हो सकता है।

11-14 दिन बाद- डिलीवरी 10 दिनों के बाद ब्लीडिंग बहुत कम हो जाती है। सामान्य रूप से तो ब्लीडिंग कम ही होनी चाहिए, लेकिन आपको यदि अधिक ब्लीडिंग (Heavy bleeding) हो रही है तो एक बार डॉक्टर से परामर्श कर लें।

3-4 हफ्ते बाद- कुछ महिलाओं में इतने दिनों बाद ब्लीडिंग बिल्कुल बंद हो जाती है और कुछ को हल्का लाल रंग का डिस्चार्ज (Red discharge) होता है। कई महिलाओं के तो दोबारा पीरियड्स (Periods) भी शुरू हो जाते हैं।

5-6 हफ्ते बाद- इतने दिनों बाद ब्‍लीडिंग पूरी तरह से रुक जानी चाहिए, हालांकि कभी-कभी लाल या पीले रंग का स्पॉट दिखना सामान्य है, लेकिन आपको यदि अभी भी हैवी ब्लीडिंग हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लें।

आमतौर पर देखा गया है कि डिलीवरी के बाद (After delivery) के कुछ दिनों तक सुबह, दूध पिलाने के बाद (After breastfeeding) और एक्‍सरसाइज के बाद अक्‍सर महिलाओं को ब्‍लीडिंग होने लगती है। महिलाओं को डिलीवरी के बाद कम से कम 6 हफ्ते तक पैड ही इस्तेमाल करना चाहिए टैम्पून (Tampons) या कोई अन्य चीज वजायना (Vagina) में नहीं डालनी चाहिए, कुछ महिलाओं को और अधिक दिनों तक ऐसा करने की जरूरत पड़ सकती है। डिलीवरी के 4 से 6 हफ्ते बाद महिला को सामान्य चेकअप के लिए एक बार डॉक्टर से मिलना चाहिए। यदि किसी तरह की जटिलता है या सिजेरियन डिलीवरी (Cesarean delivery) हुई है तो और पहले डॉक्टर से मिलने की जरूरत है।

और पढ़ें- पोस्टपार्टम साइकोसिस : प्रसव के बाद डिप्रेशन की इस बीमारी को सामान्य न समझें!

आपको कब डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है?

Blood clot after delivery- डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट

डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट (Blood clot after delivery) होना सामान्य है, लेकिन कुछ मामलों में इससे गंभीर परेशानी हो सकती है। इसलिए निम्न लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

– सांस लेने में दिक्‍कत (Shortness of breathe)

– 100.4 डिग्री फॉरेन्हाइट से ज्यादा बुखार

वजायनल डिस्‍चार्ज (Vaginal) से दुर्गंध आना

– पेरिनियम (Perineum) या पेट में टांके अलग हो जाना

सिरदर्द (Headache)

– एक घंटे में एक से ज्‍यादा बार पैड बदलना

– डिलीवरी के 24 घंटे बाद बहुत बड़े साइज के खून के थक्‍के (Blood clot) आना

इनमें से किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर के पास जाना बहुत जरूरी है, वरना इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट के गंभीर लक्षण (Signs of a dangerous blood clot after delivery)

गर्भवती महिलाएं (Pregnant women) और बच्चे को तुरंत जन्म देने वाली महिलाओं में डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep vein thrombosis) का जोखिम रहता है। यदि डिलीवरी के बाद नसों (Vein) के अंदर ब्लड क्लॉट होता है तो शरीर से खुद से ठीक नहीं कर सकता। कभी-कभी ये क्लॉट नसों के अंदर ही निकलकर फेफड़ों (Lungs) तक पहुंच जाते है जिसे पलमनेरी इम्बोलिज्म (Pulmonary embolism) कहते हैं।

मस्तिष्क (Brain) या हृदय की धमनियों (Arteries) में ब्लड क्लॉट होने पर स्ट्रोक या हार्ट अटैक भी आ सकता है, हालांकि ऐसा दुर्लभ ही होता है।

क्योंकि डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट (Blood clot after delivery) खासतौर पर नसों के अंदर ब्लड क्लॉट होने का जोखिम रहता है। ऐसे मं महिलाओं को उन लक्षणों और संकेतों के बारे में पता होना चाहिए तो जानलेवा साबित हो सके हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं-

  • दर्द (Pain), लालिमा, सूजन (Swelling) और एक पैर में गर्माहट महसूस होना जो डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep vein thrombosis) का संकेत हो सकता है।
  • सांस लेने में दिक्कत (trouble breathing)
  • सीने में दर्द (chest pain)
  • चक्कर आना या बेहोशी (dizziness or fainting)
  • ठंड लगना या चिपचिपी त्वचा (chills or clammy skin)
  • दिल की धड़कन तेज होना (rapid heart rate)

और पढ़ें- फोलिक एसिड और फोलेट में क्या है अंतर?

क्या डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट से बचा जा सकता है? (Blood clots after delivery Prevention)

Blood clot after delivery- डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट

डिलीवरी के बाद खून के थक्के (Blood clots after birth) बनना सामान्य है इसे पूरी तरह से नहीं रोका जा सकता है। हालांकि शरीर के अंदर होने वाले जानलेवा ब्लड क्लॉट की जटिलताओं से बचा जा सकता है।

  • एक ही जगह बैठने की बजाय चलती-फिरती रहें।
  • ब्लड क्लॉट के निजी जोखिम कारकों के बारे में जागरूक रहें और इस बारे में डॉक्टर को बताएं।
  • एक्सरसाइज तभी करें जब डॉक्टर आपकी इसकी इजाजत दे।
  • डिलीवरी के बाद डॉक्टर जब भी चेकअप के लिए बुलाएं तो जरूर जाएं।
  • गंभीर ब्लड क्लॉट के लक्षणों के बारे में जानकारी होना चाहिए।

डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट से बचने के उपाय

बच्चे के जन्म क बाद थोड़ा ब्लड क्लॉट होना तो सामान्य है जिसे आप रोक नहीं सकती है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर हैवी ब्लीडिंग या डिलीवरी के बाद ज्यादा खून के थक्के जाने से रोक सकती हैं।

  • पानी खूब पीएं और फाइबर युक्त चीजें खाएं जिससे मल त्याग में दिक्कत न हो। यदि मल सख्त हो जाता है और पेट साफ नहीं होता तो इससे टांकों को नुकसान पहुंच सकता है।
  • डिलीवरी के तुरंत बाद बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी न करें। डॉक्टर की सलाह पर अमल करें। ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी ब्लीडिंग बढ़ा सकती है।
  • लेटते और बैठते समय पैरों को ऊंचा रखें।
  • ब्‍लीडिंग रोकने और इंफेक्शन के जोखिम को कम करने के लिए टांकों को हाथ से न छुएं और बार-बार हाथ धोती रहें।

डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट का उपचार (Blood clots after delivery treatment)

डिलीवरी के बाद होने वाली हैवी ब्लीडिंग के दौरान कुछ महिलाएं बड़े सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करती हैं। बाजार में स्पेशल कूलिंग मटीरियल (Special cooling material) वाले कई पैड्स मौजूद हैं जो पोस्टपार्टम सूजन (Postpartum swelling) कम करने में मदद करते हैं।

यदि आपको लंबे समय तक हैवी ब्लीडिंग और डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट (Blood clots after delivery) की समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर संभावित प्लेसेंटा (Placenta) के टुकड़े का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) करेगा। प्रेग्नेंसी (pregnancy) के दौरान प्लेसेंटा (Placenta) के जरिए ही भ्रूण को पोषण मिलता है। प्रसव के बाद पूरा प्लेसेंटा डिलिवर्ड होना चाहिए। यदि इसका छोटा सा टुकड़ा भी गर्भाशय में रह जाता है तो गर्भाशय (uterus) ठीक से दब नहीं पाता और प्रेग्नेंसी से पहले की स्थिति में लौट नहीं पाता है। इसकी वजह से ब्लीडिंग होने लगती है।

बचे हुए प्लेसेंटा को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशान किया जा सकता है जिसे डायलेशन (dilation) और करेटेज (curettage) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में खास तरह के उपकरण के जरिए गर्भाशय (uterus) में बचे प्लेसेंटा (Placenta) के टुकड़े को निकाला जाता है।

यदि यूटरस में प्लेसेंटा का कोई टुकड़ा नहीं है तो हो सकता है किसी तरह का कट हो जो ठीक नहीं हुआ है और इसकी वजह से ब्लीडिंग हो रही है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देता है।

डिलीवरी के बाद खून के थक्के (Blood clots after delivery) बनने का एक अन्य कारण हो सकता है यूटराइन एटोनी (Uterine atony) या गर्भाशय पहले प्लेसेंटा से जुड़ी रक्तवाहिकाओं (Blood vessels) पर सिकुड़ने या दबने में असफल रहता है। इससे ब्लीडिंग (Bleeding) और खून के थक्के (Blood clots) हो विकसित हो सकते हैं।

ब्लड क्लॉट के साथ यूटराइन एटोनी (Uterine atony) के उपचार के लिए डॉक्टर उसे निकाल सकता है। इसके अलावा गर्भाशय (Uterus) को सिकुड़ने और ब्लीडिंग कम करने के लिए वह कुछ दवा भी दे सकता है।

और पढ़ें- गर्भावस्था में क्यों जरूरी है कोलीन सप्लिमेंट्स लेना?

पोस्टपार्टम हेमरेज या अधिक ब्लीडिंग क्यों होती है? (Postpartum hemorrhage or excessive bleeding)

पोस्टपार्टम हेमरेज या अधिक ब्लीडिंग कई कारणों से हो सकती है, यदि यह लगातार जारी रहती है तो मरीजे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। बच्चे के जन्म के बाद होने वाली जटिलताओं में पोस्टपार्टम हेमरेज (Postpartum haemorrhage) मुख्य है। इसके कारणों में शामिल है-

  • गर्भाशय नहीं सिकुड़ना और दबता जैसा कि इसे होना चाहिए।
  • बर्थ कैनाल (birth canal), सर्विक्स (cervix) और दूसरे हिस्से में इंजरी
  • क्लॉटिंग की समस्या (clotting problems)
  • प्लेसेंटा (Placenta) का कुछ हिस्सा अभी भी गर्भाशय (Uterus) से जुड़ा होना

पोस्टपार्टम हेमरेज का उपचार (Treatment for postpartum haemorrhage)

पोस्टपार्टम हेमरेज के उपचार के तरीकों में शामिल है-

  • गर्भाशय को सिकुड़ने में मदद के लिए डॉक्टर एक प्रक्रिया के तहत हाथ से यूट्रस पर दबाव डालता है।
  • ब्लीडिंग रोकने के लिए गर्भाशय के अंदर एक बलून डालता है।
  • ऑक्सिटोसिन (oxytocin ) या इससे मिलती-जुलती दवा देता है जो गर्भाशय को सिकुड़ने में मदद करती है।
  • गर्भाशय की धमनियों (arteries of the uterus) में ब्लड फ्लो रोकने के लिए खास प्रक्रिया अपनाना।
  • खून की कमी दूर करने के लिए खून चढ़ाना (Blood transfusion)
  • गंभीर मामलों में सर्जरी के जरिए गर्भाशय भी हटाया जा सकता है।

डिलीवरी के बाद ब्लड क्लॉट (Blood clots after delivery) सामान्य है और इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है, लेकिन ब्लीडिंग यदि लंबे समय तक हो या ब्लड क्लॉट की समस्या बहुत दिनों तक रहती है, तो डॉक्टर से जरूर मिलें और अपनी समस्या बताएं। साथ ही डॉक्टर की सलाह पर अमल करना भी जरूरी है।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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