सेकेंड बेबी के लिए खुद को कैसे करेंगी प्रिपेयर?

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

सेकेंड बेबी की प्रिपरेशन करते समय मन में ज्यादा सवाल नहीं होते हैं क्योंकि महिलाएं जब पहली बार मां बनती हैं तो कुछ परिस्थितियां बहुत कठिन लग सकती हैं। सेकेंड बेबी की प्रिपरेशन के वक्त थोड़ा वक्त बच सकता है। सेकेंड बेबी के बारे में सोच रहे हैं तो कुछ चीजें तो वहीं फॉलो करनी होंगी जो आप पहले कर चुके हैं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आपके साथ एक बच्चा भी है और दूसरे बच्चे के लिए आपको तैयारी करनी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार सेकेंड बेबी प्लानिंग 24 महीने (दो साल) के बाद करना चाहिए। हालांकि कई दूसरी रिसर्च में कहा गया है कि 12 से 18 महीने के बाद भी सेकेंड बेबी प्लानिंग की जा सकती हैं। सेकेंड प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले महिला को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जानिए दूसरे बेबी के लिए किस तरह से प्रिपरेशन करनी चाहिए?

यह भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले इंफेक्शन हो सकते हैं खतरनाक, न करें इग्नोर

चेकअप के लिए जाए

अगर आपने और आपके पार्टनर ने सेंकेंड बेबी के लिए सोच लिया है तो कंसीव करने से पहले कुछ टेस्ट कराने होंगे। एक महिला के शरीर में ब्लड टेस्ट की हेल्प से आयरन, कैल्शियम, थायरॉइड व अन्य जांच की जाती है। ऐसा करना इसलिए जरूरी होता है ताकि महिला को स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दे सके। ब्लड टेस्ट की हेल्प से शरीर में जिस भी चीज की कमी होगी, डॉक्टर सप्लिमेंट के जरिए उसे बैलेंस करने की कोशिश करेंगे

पीरियड्स का रखें ध्यान

कंसीव करने के लिए ऑव्युलेशन का सही समय पता होना बहुत जरूरी होता है। अगर कपल्स में फर्टिलिटी को लेकर कोई समस्या नहीं है तो एक साल के अंदर कंसीव किया जा सकता है। अगर गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग किया जा रहा है तो उसे बंद करने के बाद पीरियड्स का इंतजार करें। आप चाहे तो इसमें डॉक्टर की हेल्प ले सकती हैं।

यह भी पढ़ें : सरोगेट मदर का चुनाव कैसे करें?

सेहत का रखें ध्यान

पहली प्रेग्नेंसी के बाद अक्सर महिलाएं अपने पुराने शेप को वापस पाना चाहती हैं। इसी चाह में वो जिम भी करती है। कुछ समय बाद जिम छोड़ भी देती है। ऐसा करने से शरीर में मोटापा आ सकता है। सेकेंड बेबी प्रिपरेशन करने से पहले बॉडी को शेप में लाना बहुत जरूरी है। अगर हो सके तो इसके लिए ट्रेनर की हेल्प भी ली जा सकती है। स्टडी में ये बात भी सामने आई है कि मोटापे की वजह से इनफर्टिलिटी की समस्या हो जाती है। ये बात पार्टनर पर भी लागू होती है। अगर पार्टनर का वेट ज्यादा है तो ये भी फर्टिलिटी में समस्या उत्पन्न कर सकता है।

अगर नहीं हो रहा है कंसीव

अगर सेकेंड टाइम कंसीव नहीं कर पा रहे हैं तो ट्रीटमेंट लेना सही रहेगा। एक साल कोशिश करने के बाद भी अगर कपल कंसीव नहीं कर पा रहा है तो आईवीएफ का सहारा लिया जा सकता है। आईवीएफ के लिए डॉक्टर से पहले राय लेना जरूरी है।

यह भी पढ़ें : 4 में से 1 महिला करती है दूसरे बच्चे की प्लानिंग, जानें इसके फायदे और चुनौतियां

अपना हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज करें चेक

हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज में प्रेग्नेंसी और बेबी भी कवर होता है। आप चाहे तो पहले भी हेल्थ इंश्योरेंस प्रोवाइडर से इस बारे में बात कर सकते हैं। ऐसा करने से आपका बजट गड़बड़ नहीं होगा।

डबल स्ट्रोलर करें यूज

अगर पहला बच्चा दो साल से कम का है तो सेकेंड बेबी की प्रिपरेशन करते समय डबल स्ट्रोलर ही लें। डबल स्ट्रोलर की हेल्प से पहला और दूसरा बच्चा, दोनों एक साथ घूमने जा सकेंगे। अगर आप ऐसा नहीं करेंगी तो हो सकता है कि पहले बच्चे को अच्छा न लगे। साथ ही उसे बाहर लेकर जाने में भी समस्या हो सकती है।

सप्लिमेंट्स को भी करें शामिल

शरीर में कई तरह के विटामिन और खनिज तत्व की आवश्यकता होती है। हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए आयरन, मैग्नेशियम, जिंक, विटेक्स के साथ ही विटामिन-ए, विटामिन-डी, विटामिन-बी 6 और विटामिन-सी की सही मात्रा शरीर में होना जरूरी है। ब्लड टेस्ट की मदद से आसानी से शरीर में होने वाली कमी की जानकारी मिल सकती है।

यह भी पढ़ें : गर्भनिरोधक दवा से शिशु को हो सकती है सांस की परेशानी, और भी हैं नुकसान

सेकेंड बेबी की प्रिपरेशन के दौरान जरूरी बातें

  • दूसरे बच्चे के लिए चेकलिस्ट बनाएं। चेकलिस्ट में उन चीजों को शामिल करें जो आपको हॉस्पिटल जाने से पहले ले कर जानी है।
  • हॉस्पिटल जाने से पहले तीन बैग पैक करें। एक बैग में आपका सामान और दूसरे बैग में आपके पार्टनर का और एक में होने वाले बच्चे का। ये तैयारी ड्यू डेट के करीब एक से दो महीने पहले कर लेनी चाहिए।
  • आने वाले मेहमान के लिए भी कपड़ें पैक करना न भूलें।
  • आपको हॉस्पिटल में चादर, एक्ट्रा गाउन जरूर रखना चाहिए। अगर साफ सूती कपड़ा हो तो उसे भी साथ में रख लें। हॉस्पिटल में कई बार साफ सूती कपड़ें की जरूरत पड़ सकती है।
  • डायपर, नर्सिंग ब्रा, ब्रेस्ट पंप आदि रखना न भूलें। अपने करीबी रिश्तेदारों को हॉस्पिटल में बुला सकते हैं। ऐसा करने से आपको सहायता भी मिलेगी और आपके पार्टनर को परेशानी भी नहीं होगी। पार्टनर के जरूरी समान को पैक करना बिल्कुल न भूलें।
  • सेकेंड बेबी के आने के बाद एक मां का सारा समय दूसरे बच्चे में जाता है। ऐसे में जरूरी है कि आप पहले से ही इस बात की तैयारी कर लें कि किस तरह से दूसरे बच्चे को संभालना है। आप चाहे तो मां या फिर मदर-इन-लॉ से भी इस बारे में बात कर सकती हैं।

सेकेंड बेबी की प्रिपरेशन करते समय आप चाहे तो अपनी मां से हेल्प ले सकती है। साथ ही किसी तरह की मेडिकल प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें। घरवालों के सहयोग से दूसरे बच्चे की प्लानिंग करने में मदद मिलती है।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

और पढ़ें :

मां और शिशु दोनों के लिए बेहद जरूरी है प्री-प्रेग्नेंसी चेकअप

कैसा हो मिसकैरिज के बाद आहार?

दूसरे बच्चे में 18 महीने का गैप रखना क्यों है जरूरी?

क्या एबॉर्शन और मिसकैरिज के बाद हो सकती है हेल्दी प्रेग्नेंसी?

अभी शेयर करें

रिव्यू की तारीख दिसम्बर 4, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया दिसम्बर 5, 2019

शायद आपको यह भी अच्छा लगे