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डिओडरेंट के नुकसान से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां, हो सकता है कैंसर तक

डिओडरेंट के नुकसान से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां, हो सकता है कैंसर तक

तन की दुर्गंध या पसीने की वजह से शरीर से आने वाले बदबू को कम करने के लिए अधिकतर लोग एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट का इस्तेमाल करते हैं। एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के कई ब्रांड हैं और यह कई प्रकार में आसानी से मार्केट में उपलब्ध हैं। एंटीपर्सपिरेंट्स जहां शरीर से बहने वाले पसीने को सोखने का काम करता है, वहीं, डिओडरेंट त्वचा की अम्लता को बढ़ाकर गंध रोकने का काम करता है। हालांकि, एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के नुकसान भी काफी हो सकते हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) जहां डिओडरेंट को कॉस्मेटिक मानता है। वहीं, एंटीपर्सपिरेंट को एक दवा। इस लेख में जानेंगे डिओडरेंट के नुकसान और उनसे बचने का तरीका।

एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के बीच क्या अंतर है?

एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के नुकसान या फायदे समझने से पहले दोनों के बीच का अंतर जानना बेदह जरूरी है। देखा जाए, तो एक बड़ी जनसंख्या के तौर पर लोग एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट का इस्तेमाल करते हैं। जिनमें से सिर्फ कुछ ही लोगों को एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के बीच का अंतर पता होगा। इसे आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैंः

  • डिओडरेंट तन की गंध को नियंत्रित करते हैं, पसीना नहीं।
  • एंटीपर्सपिरेंट पसीने के उत्पादन को कम करता है, लेकिन यह बदबू नहीं दूर करता है।
  • डिओडोरेंट और एंटीपर्सपिरेंट का इस्तेमाल एक साथ किया जा सकता है। जिसका परिणाम काफी बेहतर होता है। इसके लिए पहले अपने बगल की त्वचा पर एंटीपर्सपिरेंट का इस्तेमाल करें। फिर डिओडोरेंट का इस्तेमाल करें।

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एंटीपर्सपिरेंट क्या है?

एंटीपर्सपिरेंट ऐसे उत्पाद हैं जिनका इस्तेमाल शरीर से पसीना बहने की क्रिया को कम करना होता है। एंटीपर्सपिरेंट का इस्तेमाल करने से पसीने कम होता है, जिससे तन की बदबू का कारण बनने वाले बैक्टीरिया का विकास कम हो जाता है। एंटीपर्सपिरेंट को एफडीए द्वारा ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है। क्योंकि यह एक दवा के तौर पर शरीर में पसीना बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। एंटीपर्सपिरेंट बनाने के लिए कुछ दवाओं के मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें एल्युमिनियम क्लोराइड, एल्युमिनियम क्लोरोहाईड्रेट कॉम्प्लेक्स और एल्युमिनियम जिरकोनॉक्स कॉम्प्लेक्स शामिल हो सकते हैं।

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एंटीपर्सपिरेंट कैसे काम करता है?

एंटीपर्सपिरेंट को हमेशा त्वचा पर लगाया जाता है। इसे स्प्रे या रब करके त्वचा पर लगाया जाता है। जब एंटीपर्सपिरेंट को त्वचा की सतह पर लगाया जाता है, तो इसके एंटीपर्सपिरेंट एक्टिव इंग्रेडिएंट्स पसीने या नमी वाली जगह की त्वचा की सतह पर घुल जाते हैं और एक तरह के जेल में परिवर्तित हो जाते हैं जो पसीने की ग्रंथि के ऊपर एक लेयर की तरह बन जाता है और त्वचा की सतह पर बनने वाले पसीने की मात्रा को काफी कम करता है। यह लेयर नहाने, पानी से धोने या पोछने पर साफ हो जाती है। एंटीपर्सपिरेंट्स सिर्फ अंडरआर्म या जहां इसे लगाया गया है वहां की त्वचा की सतह पर पसीने को कम करता है और पसीने के तापमान (थर्मोरेग्यूलेशन) को नियंत्रित करने के लिए शरीर की प्राकृतिक क्षमता को प्रभावित नहीं करता है। बता दें कि हमारे शरीर में दो से पांच मिलियन पसीने की ग्रंथियां होती हैं, जिनमें से कुछ अंडरआर्म्स में स्थित होती हैं। हालांकि, यह शरीर के पसीने का केवल एक प्रतिशत ही पसीना उत्पादन करती हैं।

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डिओडरेंट क्या है?

डिओडरेंट को कई अलग-अलग तरीके से कहा जाता है। जैसे, डिओडोरेंट, डियोड्रेंट, डियोडरेंट। हालांकि, अंग्रेजी में इसकी स्पेलिंग Deodorant एक ही होती है। लोग अपनी सहूलियत और स्थानीय नामों के अनुसार इसे बोलना पसंद करते हैं। डिओडरेंट आमतौर पर एक कॉस्मेटिक होता है। जिसका इस्तेमाल सामान्य रूप से अंडरआर्म्स के पसीने की बदबू को खुशबू में बदलने के लिए किया जाता है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने डिओडोरेंट्स को सौंदर्य प्रसाधन के रूप में ही वर्गीकृत किया है। यह अलग-अलग प्रकार और खुशबुओं में उपलब्ध होता है। डिओडरेंट के इस्तेमाल से शरीर को फ्रेश रखने और खुशबूदार बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, डिओडरेंट के नुकसान भी हैं जिनकी जानकारी आपको आगे मिलेगी।

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डिओडरेंट कैसे काम करता है?

जब भी शरीर पसीना बहाता है, तो पसीने में कई तरह के बैक्टेरिया होते हैं, जो गंध पैदा करते हैं। डिओडरेंट लगाने से इसी गंध को कम करने में मदद मिलती है। डिओडरेंट कैसे काम करता है जानने के बाद आइए जानते हैं डिओडरेंट के नुकसान।

जानिए एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के नुकसान

क्या सच में एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के नुकसान इतने हैं कि इससे कैंसर हो सकता है?

इंटरनेट पर ऐसे कई दावे किए गए हैं कि एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के नुकसान इतने हैं कि इससे कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा हो सकता है। हालांकि, किसी के पास भी ऐसा कोई ठोस सबूत या उचित शोध नहीं है, जो इस तथ्य की पुष्टि कर सके। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) के अनुसार, आमतौर पर लोग अंडरआर्म्स को शेव या वैक्स करते हैं। जिसके कारण अंडरआर्म्स की त्वचा और आस-पास की त्वचा संक्रमित हो सकती है। हालांकि, बहुत ही कम स्थितियों में शेविंग करना कैंसर का कारण बन सकता है। अगर शेविंग करते समय जंग लगे ब्लेड या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए गए ब्लेड या बहुत ही पुराने ब्लेड और गंदे ब्लेड का इस्तेमाल किए जाए, तो यह इंफेक्शन और कैंसर होने जैसे खतरे का कारण बन सकता है, लेकिन अगर शेविंग करने के सुरक्षित नियमों के तरीकों को ध्यान में रखकर शेविंग की जाए, तो यह पूरी तरह से सुरक्षित होता है।

हालांकि, एफडीए के अनुसार, पैराबेंस के कारण कैंसर का जोखिम हो सकता है। एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट के नुकसान से बचने के लिए हमेशा पैराबेंस मुक्त एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट का ही इस्तेमाल करें। अब तो आप समझ गए होंगे कि डिओडरेंट के नुकसान इतने नहीं है कि उससे कैंसर हो।

कब और शरीर के किन अंगों पर एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट का इस्तेमाल करना चाहिए?

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सिर्फ यहां पर ही लगाएं और रोकें डिओडरेंट के नुकसान

एक्सपर्ट्स की मानें, तो एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट का इस्तेमाल सिर्फ कांख यानी अंडरआर्म्स की त्वचा पर ही किया जाना चाहिए। हालांकि, कई महिलाएं और पुरुष गर्दन के साथ-साथ स्तनों के नीचे, जांघों और गुप्तांगों के पसीनों को कम करने के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसा करना पूरी तरह से गलत और असुरक्षित हो सकता है। शरीर के गुप्तांग की त्वचा काफी शुष्क हो सकती है। ऐसे में एंटीपर्सपिरेंट और डिओडरेंट में इस्तेमाल किए गए तत्वों के कारण उनमें खुजली और दानों की समस्या हो सकती है। ऐसे अंगों की दुर्गंध दूर करने के लिए आप बेबी पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप इस तरह के डिओडरेंट के नुकसान रोकना चाहते हैं तो इन बातों का ध्यान रखें।

कब लगाएं एंटीपर्सपिरेंट?

नहाने के बाद शरीर का पानी पोछने के बाद अंडरआर्म्स की त्वचा पर एंटीपर्सपिरेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा आपको जब भी लगे कि आपके बगल में बहुत ज्यादा पसीना आ रहा है, आप तब भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कब लगाएं डिओडरेंट?

नहाने के बाद शरीर का पानी पोछने के बाद अंडरआर्म्स की त्वचा पर डिओडरेंट का इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि, डिओडरेंट का इस्तेमाल आप जरूरत महसूस करने पर कभी भी कर सकते हैं। डिओडरेंट का नुकसान से बचने के लिए वही इसका इस्तेमाल करें। जहां बताया गया है।

हमें पसीना क्यों आता है?

आमतौर पर हम जब कोई शरीर को थकाने वाला कार्य करते हैं या गर्म तापमान में रहते हैं, तो हमारे शरीर से पसीने का रिसाव होता है। हमारे शरीर के लिए पसीना एक आवश्यक और प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है जो हमारे पैदा होने के तुरंत बाद शुरू हो जाती है। पसीना आना, हमारे शरीर को ठंडा रखने का एक तंत्र होता है। आपने देखा भी होगा कि एक्सरसाइज के दौरान या कड़ी मेहनत करने के दौरान, बहुत ज्यादा तनाव के कारण भी पसीना आ जाता है। सामान्य तौर पर इस तरह की सभी क्रियाओं के दौरान शरीर की मांसपेशियों को नसों पर जोर पड़ता है, जिसे आराम दिलाने के लिए पसीना आता है।

हमें आशा है कि डिओडरेंट के नुकसान और इसका इस्तेमाल कैसे करें विषय पर लिखा गया यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा। डिओडरेंट के नुकसान को लेकर अगर आपका कोई सवाल है तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

How does deodorant prevent us from sweating under our armpits? scienceline.ucsb.edu/getkey.php?key=2333 Accessed on 23 March, 2020.

Antiperspirant Safety:fda.gov/cosmetics/resources-consumers-cosmetics/cosmetics-safety-qa-personal-care-products  Accessed on 23 March, 2020.

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Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/07/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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