ऐल्कलाइन डायट (Alkaline diet) क्या है? फॉलो करने से पहले जान लें इसके फायदे और नुकसान

By Medically reviewed by Dr. Pooja Bhardwaj

ऐल्कलाइन डायट के पीछे का सिद्धांत खाने के तरीके को ठीक कर पीएच संतुलित करना है। इसके अंतर्गत मांस, डेयरी प्रोडक्ट, मिठाई, कैफीन,अल्कोहल,आर्टिफिशियल और प्रोजन प्रोडक्ट्स से परहेज और ताजा फल और सब्जियों तथा नट्स और बीजों का अधिक सेवन आता है। बात यहीं खत्म नहीं होती। ऐल्कलाइन डायट के भी कुछ फायदे और कमियां हैं। इन फायदे और कमियों पर बात करने से पहले हमें पीएच और इसकी कार्यप्रणाली को समझना होगा।   

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पीएच और इससे जुड़े तथ्य:

  • पीएच किसी पदार्थ में अम्ल या क्षार के स्तर को मापने वाली इकाई होती है। शरीर में सात से कम मूल्य अम्ल का व सात से ऊपर मूल्य क्षार (एल्काई) का संकेत देता है। गौरतलब है कि खुद क्षार एक ऐसा रसायन है जो अम्ल के साथ अभिक्रिया करने पर लवण बनाता है। क्षार का पीएच मान सात से अधिक होता है।
  • शरीर में अधिकांश रोगों की शुरुआत अम्ल और क्षार के असंतुलन से होती है। यदि इसको संतुलित कर लिया जाए तो रोग खत्म हो सकते हैं। 
  • इंसान के शरीर में लगभग 80 प्रतिशत क्षार तथा 20 प्रतिशत अम्ल होता है। जब यह रेशियों बिगड़ जाता है तो रोग शरीर को घेरने लगते हैं। इस अनुपात को सही रख कर शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। 
  • अधिकतर खाद्य पदार्थों जैसे, नींबू, संतरा पत्तेदार सब्जियां, नारियल,अंकुरित अनाज, खजूर,अंजीर व कुछ मेवा आदि में क्षार पाया जाता है।
  • अंडे, मांस, पनीर, मक्खन, पका हुआ भोजन, चीनी व इससे बने पदार्थ, कॉफी, चाय, मैंदा, नमक, चॉकलेट, तंबाकू, सोड़ा, वेजिटेबल ऑइल, एल्कोहॉल, तेल से बनी चीजें आदि में अम्ल अधिक होता है।  
  • जैसे- जैसे हम अम्लीय भोजन का अधिक मात्रा में सेवन करने लगते हैं सेहत के लिए परेशानियां भी बढ़ती चली जातीं हैं।     
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ऐल्कलाइन डायट के लाभ:

  • ऐल्कलाइन डायट का सारा उदृदेश्य शरीर के पीएच स्तर के संतुलन को कायम रखना होता है।
  • हमारा शरीर अम्लीय हो जाने पर बीमारियों का घर बन जाता है और रोग ऐसे में शरीर को घेर लते हैं।
  • विशेषज्ञ भी इस खुराक की सिफारिश करते हैं क्योंकि इसे नियमित रूप से लेना आसान होता है। 
  • कोशिकाओं को सुचारू रूप से काम करने योग्य बनने के लिए शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर कर इसे डीटॉक्स करना बेहद जरूरी होता है, और ऐल्कलाइन डायट ऐसा करने में कारगर होती है।
  • इसके अलावा ऐल्कलाइन डायट जबड़ों को यथा स्थान सुदृढ़ बनाए रखने में सहायक होती है और दर्द के एहसास को घटाती है।
  • यह डायट वृद्धावस्था की रफ्तार को भी कम करती है। यह खाने के पाचन में भी मददगार होती है। कुल मिलाकर आपको एक स्वस्थ और छरहरी काया देने में ऐल्कलाइन डायट बड़े काम की है। 

किसी पदार्थ में अम्ल या क्षार के स्तर को मापने की इकाई को पीएच कहा जाता है,और ऐल्कलाइन डाइट अर्थात क्षारीय भोजन से हमारे शरीर का पीएच प्रभावित होता है। पीएच का संतुलन और असंतुलन शरीर पर क्रमशः अच्छा और बुरा प्रभाव डालता है। इसलिए इसका संतुलन में रहना बेहद जरूरी है। इसी तरह ऐल्कलाइन डायट का हमारे शरीर पर भी अच्छा और बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसको अच्छी तरह से जानने समझने के बाद ही फॉलो करना चाहिए।

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ऐल्कलाइन डायट की कमियां:

  • ऐल्कलाइन डायट के बारे में रिसर्च सीमित ही हैं। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ ऐल्कलाइन डायट को पूरी तरह से अनावश्यक बताते हैं, क्योंकि हमारा शरीर स्वतः ही स्वाभाविक रूप से पीएच संतुलन बनाए रखने के लिए बना होता है। 
  • अगर बात ऐल्कलाइन डायट की मदद से मोटापा कम करने की हो तो इसके साथ एक और शंका है कि हो सकता है कि आप ऐल्कलाइन डायट के साथ वजन कम कर ही ना पाएं।
  • आप ऐसे कई लोगों को देख सकते हैं जो शाकाहारी हैं और स्वच्छ आहार आपनाने के बाद भी वजन कम नहीं कर पाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आमतौर पर वे ऐल्कलाइन डायट के साथ अति कर देते हैं।
  • वजन कम करने के लिए केवल खराब भोजन बंद करना व बेहतर आहार लेना काफी नहीं होता है। इसके लिए आपको अपने शरीर की आवश्यकताओं के हिसाब से खाने की जरूरत होती है, ना ही कम और ना ही ज्यादा।

वेजीटेरियन डायट, नॉन वेजीटेरियन डायट के साथ क्रैब डायट का चलन भी बढ़ चुका है। क्रैब डायट का चलन विदेशों में अधिक होता है। भारत में भी क्रैब डायट का चलन बढ़ चुका है। क्रैब डायट से जहां एक ओर शरीर को फायदा पहुंचता है, वहीं दूसरी ओर क्रैब डायट कुछ लोगों के लिए समस्या भी खड़ी कर सकती है। अब हम इस आर्टिकल के माध्यम से क्रैब डायट से शरीर को पहुंचने वाले फायदे के बारे में जानते हैं।

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क्रैब डायट के फायदे

क्रैब डायट में लॉन्ग चेन ओमेगा-3 फैटी एसिड

  • विटामिन और मिनरल रिच क्रैब मीट में फैट की कमी होती है। साथ ही इसमे लॉन्ग चेन ओमेगा-3 पॉलीअनसैचुरेड एसिड भी पाया जाता है। क्रैब डायट से शरीर को बहुत फायदा पहुंचता है।
  • क्रैब डायट लेने से हार्ट डिजीज से प्रोटक्शन होता है और साथ ही ब्रेन डेवलपमेंट के लिए भी इनसेक्ट प्रोटीन डायट फायदेमंद होती है। रिचर्स में ये बात भी सामने आई है कि ओमेगा-3 एग्रेसिव बिहेवियर से बचाने का काम करता है।
  • क्रैब डायट में पाए जाने वाला ओमेगा-3 आम नहीं होता है, इसकी लॉन्ग चेन हेल्थ के लिए बेनीफीशियल होती है। ये शरीर में जल्दी से अब्जॉर्व हो जाती है। ओमेगा-3 की शॉर्ट चेन वेजीटेब्ल्स और ऑयल में पाई जाती है। इसे लॉन्ग चेन में बदलने में समय लगता है।
  • 100 ग्राम क्रैब से यूके की एक तिहाई जनता को ओमेगा-3 प्राप्त होता है।
  •  क्रैब डायट  में न्यूट्रिशनल वैल्यू अधिक होती है। विटामिन-बी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, जिंक, अल्फा लिनोलेनिक एसिड और ओमेगा -3 फैटी एसिड की अधिकता के कारण ये खाने युक्त डायट है।
  • क्रैब डायट ईकोफ्रेंडली होती हैं। इनसेक्ट का फूड कन्वर्जन हाई होता है, इसलिए इन्हें पालने में भी दिक्कत नहीं होती है।

हम उम्मीद करते हैं कि ऐल्कलाइन डायट और क्रेब डायट पर आधारित यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। इन दोनों डायट के अपने फायदे हैं। आप अपनी जरूरत के हिसाब से इसे फॉलो कर सकते हैं, लेकिन इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से बात करना सही होगा। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर या डायटीशियन से बात करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, उपचार और निदान प्रदान नहीं करता।

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