Scoliosis : स्कोलियोसिस क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और उपाय

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Update Date जनवरी 7, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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स्कोलियोसिस (Scoliosis) क्या है?

स्कोलियोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रीढ़ की हड्डी एक तरफ घूम जाती है। रीढ़ की हड्डी के घुमाव (वक्रता) को डिग्री से मापा जाता है। यह कोण जितना बड़ा होता है, स्कोलियोसिस उतना ही गंभीर होता है। अगर बच्चे का विकास धीमे हो रहा है और उसकी रीढ़ वक्रता 30 डिग्री से नीचे है, तो उन पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती है क्योंकि यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति बहुत खराब हो सकती है। यदि स्पाइनल वक्रता 50 से 75 डिग्री है, तो डॉक्टर प्रभावशाली थेरिपी का उपयोग कर सकते हैं।  स्कोलियोसिस (Scoliosis) आमतौर पर बचपन में शुरू होता है, जिसकी स्थिति उम्र के साथ बिगड़ सकती है।

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स्कोलियोसिस (Scoliosis) कितना सामान्य है ?

यह किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन, दस वर्ष की उम्र के बाद इसके होने की अधिक संभावना होती है। इसके कारणों को कम कर के इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस पर, अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें।

स्कोलियोसिस (Scoliosis) के क्या लक्षण हैं?

  • इस स्थिति में बच्चों में कुछ खास लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन कंधे बराबर न होना, सिर का दोनों कंधों के बीच में न होकर एक तरफ होना, कूल्हे की हड्डियां बराबर सही जगह पर न होना और पसलियों का असामान्य रूप से बाहर होना आदि इसके मुख्य लक्षण हैं। इसके अलावा, बच्चे का कूल्हा असमान रूप से विकसित होगा और एक तरफ झुक जाएगा।
  • वयस्कों में स्कोलियोसिस का सबसे सामान्य लक्षण रीढ़ में तेज दर्द है। इसके अलावा, इसके अन्य लक्षणों में शामिल हैं: लंबाई कम होना, पसलियों का बढ़ना या कमर के आकार में बदलाव (वजन बढ़े बिना) आदि। इसमें कमर का आकार जितना बदलता है, स्थिति उतनी ही गंभीर होती है।
  • जब रीढ़ की हड्डी गंभीरता से झुकती है, तो रोगी को थकान और रीढ़ की हड्डी में दर्द महसूस होता है। स्कोलियोसिस भावनात्मक समस्याओं का कारण भी बनता है, खासकर किशोरों के लिए।

ऊपर बताए गए लक्षणों में से आपको कोई भी दिखे, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

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स्कोलियोसिस (Scoliosis) लक्षण क्या है?

स्कोलियोसिस के कारणों की आमतौर पर पहचान नहीं की जाती है लेकिन, आनुवांशिक कारक भी इसे अधिक प्रभावित कर सकते हैं। वयस्कों में यह स्थिति जन्मजात के कारण भी हो सकती है:

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डॉक्टर को ​कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको रीढ़ की हड्डी में किसी भी तरह का असामान्य लक्षण का पता चलता है, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत है।

यदि रीढ़ की हड्डी में थोड़ा झुकाव हुआ है, तो आप इस असामान्यता को नहीं पहचान पाएंगे लेकिन, अन्य लोग ऐसे लक्षणों को देख सकते हैं। इसलिए, अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के सीधे खड़े होने पर उनकी रीढ़ की हड्डी सीधी न लगे तो आप उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने को कहें।

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किन चीजों से बढ़ सकता है स्कोलियोसिस (Scoliosis) का खतरा ?

  • यदि आपके परिवार में कोई स्कोलियोसिस से पीड़ित हैं, तो आपको इसका का खतरा अधिक है।
  • बहुत से लोग अभी भी मानते हैं कि गलत तरीके से चलना, गलत आसन, कुपोषण या गलत व्यायाम करने से स्कोलियोसिस का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन यह गलत है। हालांकि ये कारक स्कोलियोसिस के होने का कारण नहीं बनते हैं, लेकिन ये आपको अन्य बीमारियों जैसे सूजन या रीढ़ की हड्डी में चोट आदि से बचा सकते हैं।

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

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कैसे करें ​स्कोलियोसिस (Scoliosis) का उपचार ?

डॉक्टर कुछ क्लिनिकल टेस्ट और रीढ़ का एक्स-रे कर के स्कोलियोसिस का निदान करते हैं। इसका पता जितना जल्दी चल जाता है उसका इलाज उतना सही होता है।

  • विकास के दौरान जो हड्डियां झुकती हैं, वे न ही दर्द का कारण बनती हैं और न ही उन्हें उपचार की आवश्यकता होती है। गंभीर स्थिति में जल्द से जल्द इलाज किया जाना चाहिए।
  • हालांकि इस स्वास्थ्य-स्थिति को किसी भी चिकित्सा या डायट प्लान से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन, दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर आपको एनाल्जेसिक और एंटी-इंफ्लमेट्री दवा दे सकते हैं।
  • डॉक्टर स्कोलियोसिस की देख—रेख के लिए नियमित रूप से एक्स-रे करवाते हैं और हड्डियों के टेढ़ेपन को बढ़ने से रोकने हैं, इसके लिए ब्रेसिज का उपयोग करते हैं, लेकिन यह टेढ़ी हो चुकी हड्डियों को ठीक नहीं कर सकता है। वायर ब्रेसिज के उपयोग से बच्चों में सर्जरी को लगभग 70 प्रतिशत तक रोका जा सकता है।
  • आमतौर पर स्कोलियोसिस (Scoliosis) की गंभीरता को कम करने के लिए और स्थिति को बदतर होने से रोकने के लिए डॉक्टर सर्जरी का सुझाव दे सकते हैं। सर्जरी करने से पहले, स्थिति का कारण पीठ का दर्द या अन्य बीमारियां तो नहीं हैं इसके लिए कुछ जांच लिखते हैं।

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जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार

जीवनशैली में बदलाव और कुछ घरेलू उपचार आपको इस बीमारी से निपटने में मदद कर सकते हैं:

  • डॉक्टर के निर्देशानुसार दी हुई बेल्ट पहनें।
  • फिजियोथेरिपी करवाएं, हालांकि यह प्रक्रिया दर्दनाक हो सकती है।
  • हार न मानें क्योंकि डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली चिकित्सा कई वर्ष या उससे अधिक समय ले सकती है।
  • बच्चों में स्कोलियोसिस (Scoliosis) की शुरुआती जटिलताओं को जानने के लिए डॉक्टरों द्वारा बताए गए परीक्षण को नियमित रूप से करवाएं।
  • अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल है, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना ना भूलें।
  • बादाम, पालक, काले बींस, ओट्स, पीनट बटर, एवोकैडो और आलू जैसे फूड आइटम में विटामिन डी की मात्रा प्रचुर मात्रा में होती हैं। 
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, केला, शलजम का साग, गोभी, पालक और ब्रोकोली, विटामिन के से भरपूर होते हैं। कोलन में बैक्टीरिया से विटामिन के की थोड़ी मात्रा बनती है लेकिन, यह पता नहीं है कि हमारा शरीर में इसका कितना उत्पादन और उपयोग करने में सक्षम हैं। इस कारण बाहर से अलग-अलग खाने के जरिए विटामिन के लेना जरूरी है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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