ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी शरीर के किस अंग को सबसे ज्यादा डैमेज करती है?

By Medically reviewed by Dr. Pranali Patil

दुनियां में हर 10 में से चौथा व्यक्ति कभी न कभी ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी का शिकार हो जाता है। आंकड़ों के मुताबिक 60 साल की उम्र से बड़े लोगों में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी ही होती है। विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक का शिकार होने वाले लगभग 70 फिसदी लोगों को अंधेपन और बहरेपन की समस्या हो जाती है।

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ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी क्या है?

अगर अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून न पहुंचे तो उसके कारण व्यक्ति को स्ट्रोक (Stroke) हो सकता है। मस्तिष्क में खून का प्रवाह ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। यह बिल्कुल उसी तरह है जैसे, दिल में जब खून की आपूर्ति होती है उसके कारण दिल का दौरा पड़ सकता है। हेमोराफिक स्ट्रोक तब होता है जब आपके मस्तिष्क में रक्त वाहिका लीक या डैमेज हो जाती है।ठीक इसी तरह अगर मस्तिष्क में खून का प्रवाह न हो तो ‘मस्तिष्क का दौरा‘ या मस्तिष्काघात या ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी हो सकती है।

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ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण क्या हैं?

मस्तिष्काघात के लक्षण आसानी से पहचानें जा सकते हैंः

  • अचानक से शरीर के किसे हिस्से का काम करना बंद कर देना
  • अचानक बेहोश होना
  • अचानक से बोलने में परेशानी होना
  • अचानक से एक या दोनों आंखों से दिखाई ने देना
  • अचानक से किसी की कही बात समझने में परेशानी होना
  • अचानक से बहुत तेज सिरदर्द होना
  • चक्कर आना

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‘मस्तिष्क का दौरा’ या मस्तिष्काघात आने का कारण क्या है?

ऐसी कई स्वास्थ्य स्थितियां हैं, जिनके कारण मस्तिष्क का दौरा आ सकता है। जिसके लिए हाई ब्लड प्रेशर, बहुत ज्यादा स्मोकिंग या एल्कोहॉल पीने की आदत, दिल से जुड़े रोग, हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल और डायबिटीज मुख्य कारण हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में आनुवांशिक या जन्मजात स्थितियां भी ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी का कारण हो सकती हैं।

कब आता है मस्तिष्क का दौरा?

निम्न स्थितियों के होने पर मस्तिष्क का दौरा आ सकता हैः

  • मस्तिष्क के किसी हिस्से अचानक से खून की आपूर्ति
  • मस्तिष्क में किसी खून की नस का फटना, जिसके कारण मस्तिष्क में अचानक ब्लीडिंग होने लगती है
  • मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास की जगह में खून भरना
  • मस्तिष्क की कोशिकाओं का डैमेज होना।

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मस्तिष्काघात शरीर के किन अंगों को नुकसान कर सकता है?

हमारे शरीर के सभी अंगों के कार्यों को मस्तिष्क नियंत्रित करता है। लेकिन ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी के कारण मस्तिष्क में खून का प्रवाह होना बंद हो जाता है। स्ट्रोक के कारण शरीर के किस अंग पर प्रभाव पड़ेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि स्ट्रोक शरीर के किस अंग को नियंत्रित करने वाली मस्तिष्क की नस पर पड़ता है। उदाहर के लिए, अगर ब्रेन स्ट्रोक दिल के कार्यों की देखरेख करने वाले नस को प्रभावित करता है, तो इसके कारण दिल कार्य करना बंद कर सकता है। जिससे जान भी जा सकती है।
एक दूसरे उदाहरण के तौर पर, अगर स्ट्रोक मस्तिष्क की पीछे की ओर होता है, तो आंखों से जुड़ी समस्या हो सकती है।

1. संचार प्रणाली (Circulatory system)

ब्रेन में ब्लीडिंग होने के कारण संचार प्रणाली (Circulatory system) डैमेज हो सकती है। हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या स्मोकिंग इसका मुख्य कारण हो सकता है। इसे रक्तस्रावी स्ट्रोक या इस्कीमिक स्ट्रोक (Ischemic stroke) भी कहा जाता है। अगर मस्तिष्क के दौरे के कारण सर्क्युलेटरी सिस्टम डैमेज होता है, तो दूसरा स्ट्रोक आने या दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है।

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2. श्वशन प्रणाली (Respiratory system)

यह ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी के सामान्य लक्षणों में से एक हो सकता है। अगर मस्तिष्क का दौरा खाने और निगलने को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के क्षेत्र को नुकसान पहुंचाता है, तो श्वशन प्रणाली (Respiratory system) कार्य करना बंद कर सकती है या इसके कार्य करने की क्रिया में किसी तरह की परेशानी आ सकती है। इसे  अपच  (Indigestion) भी कहा जाता है। इसके कारण भोजन, फूड पाइप में जाने में असमर्थ हो जाते हैं और कुछ जो भी खाने पर वो वायुमार्ग में से होते हुए फेफड़ों में इकठ्ठे होने लगते हैं। इससे संक्रमण और निमोनिया का भी खतरा बढ़ सकता है।

3. तंत्रिका तंत्र (nervous system)

तंत्रिका तंत्र (nervous system) शरीर से मस्तिष्क तक आगे और पीछे सिग्नल भेजने का कार्य करती है। यह मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और पूरे शरीर में तंत्रिकाओं से मिलकर बना होता है। अगर ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी के कारण यह डैमेज होता है तो यह ब्रेन को सिंग्नल देना बंद कर सकता है। जिससे शरीर के अंग सही रूप से कार्य करना बंद कर सकते हैं।

अगर ब्रेन स्ट्रोक नर्वस सिस्टम को डैमेज करती है, तो इसके बाद किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधियों या खेलों को खेलते समय आपको सामान्य से अधिक दर्द का एहसास हो सकता है। क्योंकि, ब्रेन स्ट्रोक के कारण तंत्रिका तंत्र डैमेज होने के बाद मस्तिष्क ठंडी या गर्मी जैसे संवेदनाओं को पहले की तरह नहीं समझ पाता है।

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4. प्रजनन प्रणाली (Reproductive system)

अगर स्ट्रोक के कारण प्रजनन प्रणाली डैमेज होती है, तो आप सेक्स का अनुभव कैसे करते हैं या आपका शरीर सेक्स के बारे में कैसा महसूस करता है, इसमें बदलाव आ सकता है। आपमें डिप्रेशन के भी लक्षण हो सकते हैं।

5. पाचन तंत्र

दिमाग के दौरे के कारण अगर मस्तिष्क का आंतों को नियंत्रित करने वाला हिस्सा प्रभावित होता है, तो पाचन तंत्र (Digestive system) खराब हो सकता है। डाइजेस्टिव सिस्टम डैमेज होने के कारण कब्ज की समस्या, पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं पी पाने की समस्या या शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं होने की समस्या हो सकती है।

6. मूत्र प्रणाली

स्ट्रोक के कारण हुए नुकसान से मस्तिष्क और मूत्राशय को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों के बीच का संचार टूट जाता है। ऐसा होने पर बार-बार पेशाब लगने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, खांसते समय या सोते हुए भी आप पेशाब पर नियंत्रण रख पाने में असमर्थ हो सकते हैं।

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7. मस्क्यूलर सिस्टम (Muscular system)

मांसपेशियों कितनी डैमेज हो सकती हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि ब्रेन स्ट्रोक मस्तिष्क के किस हिस्से में आया है।

आमतौर पर देखा जाए तो स्ट्रोक हमेशा ब्रेन के सिर्फ एक ही हिस्से को डैमेज करता है। अगर मस्तिष्क का दौरा ब्रेन के बाईं हिस्से को डैमेज करता है तो, शरीर के दाईं तरफ के अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण शरीर के दाएं हिस्से में लकवे की भी समस्या हो सकती है।

रिसर्च की मानें तो हर साल ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी के लगभग 15 लाख नए मामले देखे जाते हैं। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि ब्रेन स्ट्रोक की बीमारी होने वाले हर 100 में से लगभग 25 रोगियों की उम्र 40 साल से छोटी होती है।

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