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कार्बोहाइड्रेट का पाचन कैसे होता है? जानिए क्यों है जरूरी शरीर के लिए कार्ब्स

कार्बोहाइड्रेट का पाचन कैसे होता है? जानिए क्यों है जरूरी शरीर के लिए कार्ब्स

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार का सवेन करना जरूरी होता है। इसके लिए कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। कार्बोहाइड्रेट इन्हीं में से एक जरूरी तत्व है। हमारी सेहत के लिए यह कई तरह से फायदेमंद है। यह लेख कार्बोहाइड्रेट के बारे में ही है। इसमें हम आपको कार्बोहाइड्रेट पाचन, अवशोषण, एंजाइम, प्रक्रिया से लेकर हाई कार्ब्स खाद्य पदार्थों के बारे में बताएंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि अनहेल्दी और हेल्दी कार्ब्स क्या हैं?

कार्बोहाइड्रेट किसे कहते हैं? (Carbohydrate)

कार्बोहाइड्रेट दिनभर के मानसिक और शारीरिक कार्यों के लिए शरीर को ऊर्जा देते हैं। कार्बोहाइड्रेट को पचाने या मेटाबोलाइज करने से खाद्य पदार्थ शर्करा में टूट जाते हैं, जिन्हें सैकराइड्स (saccharides) भी कहा जाता है। ये मॉलेक्यूल्स मुंह में डाइजेस्ट होने लगते हैं। इनका इस्तेमाल शरीर के माध्यम से सामान्य कोशिका के फंक्शन से लेकर सेल ग्रोथ और रिपेयर तक में किया जाता है। आपने शायद सुना होगा कि कुछ कार्बोहाइड्रेट को “गुड कार्ब्स” माना जाता है, जबकि अन्य को “बैड कार्ब्स” कहा जाता है।

और पढ़ें : कार्बोहाइड्रेट से परहेज करना, शरीर में इन समस्याओं को देता है दावत

कार्बोहाइड्रेट के प्रकार (Carbohydrate types)

कार्बोहाइड्रेट के तीन मुख्य प्रकार होते हैं।

  • स्टार्च या कॉम्प्लेक्स कार्ब्स (complex carbs)
  • शुगर या सिंपल कार्ब्स (simple carbs)
  • फाइबर (fiber)

सिंपल और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट दोनों ग्लूकोज (रक्त शर्करा) में टूट जाते हैं। एक सिंपल कार्ब वह होता है जिसमें एक या दो शुगर मॉलेक्यूल्स होते हैं, जबकि एक कॉम्प्लेक्स कार्ब में तीन या अधिक शुगर मॉलेक्यूल्स होते हैं। दूसरी ओर, फाइबर हेल्दी कार्ब्स (healthy carbs) में पाया जाता है, लेकिन यह पचता नहीं है। यह दिल के स्वास्थ्य और वेट मैनेजमेंट (weight management) के लिए अच्छा माना जाता है।

और पढ़ें : रिसर्च: हाई फाइबर फूड हार्ट डिजीज और डायबिटीज को दूर कर सकता है

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत क्या हैं? (Sources of Carbohydrate)

जटिल यानी कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट के अच्छे स्रोतों में शामिल हैं:

फाइबर कई हेल्दी कार्ब्स में पाया जाता है जैसे:

कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)

  • फल (सेब, केला, संतरा, स्ट्रॉबेरी आदि)
  • सब्जियां (ब्रोकली, चुकंदर, हरी मटर आदि)
  • साबुत अनाज
  • बीन्स आदि

फाइबर युक्त, कॉम्प्लेक्स और सिंपल कार्ब्स का सेवन करना आपको बीमारी से बचा सकता है और संतुलित वजन बनाए रखने में भी मदद कर सकता है। इन कार्ब्स में ज्यादातर विटामिन और मिनरल्स शामिल हैं। वहीं, आपको प्रोसेस्ड और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स से दूर रहना चाहिए क्योंकि ये कैलोरी में अधिक होते हैं पोषण में कम। इससे लोगों को वजन बढ़ने की समस्या हो सकती हो। यहां तक ​​कि मोटापे से संबंधित स्थितियों के विकास में भी योगदान कर सकते हैं, जैसे कि टाइप 2 डायबिटीज और हृदय रोग

और पढ़ें : क्या आप जानते हैं वजन, बीपी और कोलेस्ट्रोल बढ़ने से इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बढ़ सकता है?

कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ कौन से हैं? (Carbohydrate Rich food)

यहां कार्बोहाइड्रेट चार्ट में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल किया गया है जिनका सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा साबित होगा। जैसे-

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत : ब्राउन राइस

इसकी 100 ग्राम मात्रा में 78 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। ब्राउन राइस आपकी सेहत के लिहाज से कई मायनों में फायदेमंद होते हैं। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट ब्लड शुगर की मात्रा को कम कर सकता है। नतीजन, डायबिटीज को कंट्रोल करने में यह हेल्पफुल हो सकता है।

मसूर की दाल

इसकी 100 ग्राम मात्रा में 57.14 ग्राम कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है। इसके साथ ही मसूर की दाल फाइबर, पोटैशियम, फोलिक एसिड और प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत है।

और पढ़ें : 10 फूड्स जिनमें कम होती है कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) की मात्रा

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत : आलू

आलू में कार्बोहाइड्रेट स्टार्च के रूप में मौजूद होता है। 100 ग्राम आलू में 17.57 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। अपनी कार्बोहाइड्रेट डाइट चार्ट में इसे भी शामिल करें। हालांकि, आपको बता दें कि आलू को फ्राइड की तुलना में बेक्ड या उबला हुआ खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।

कुट्टू

कुट्टू की 100 ग्राम मात्रा में 71.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। कुट्टू में एंटीइंफ्मेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-कैंसर प्रॉपर्टीज होती हैं। कुट्टू के आटे का उपयोग आप कई तरह की रेसिपीज बनाने के लिए कर सकते हैं।

और पढ़ें : कुट्टू का आटा इस्तेमाल कर रहे हैं तो, जानें यह जरूरी बातें

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत : केला

प्रति 100 ग्राम केले में कार्बोहाइड्रेट की 78.57 ग्राम मात्रा होती है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सबसे ज्यादा ऊर्जा किसमें होती है? तो उनके लिए बता दें कि केला एक सुपर एनर्जी फूड है। एक्सपर्ट्स वर्कआउट से पहले एक केला खाने की सलाह देते हैं ताकि आपको पर्याप्त एनर्जी मिल सके और आप बेहतर तरीके से वर्कआउट करें। इस सुपर एनर्जी फूड में कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ विटामिन-सी, विटामिन-बी 6, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं।

और पढ़ें : विटामिन-बी की कमी होने पर खाएं ये चीजें

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत : ओट्स

इसके 100 ग्राम में कार्बोहाइड्रेट की 67.5 ग्राम मात्रा पाई जाती है। ओट्स में कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ आयरन, फाइबर, प्रोटीन जैसे कई नुट्रिशन्स होते हैं। ये सभी नुट्रिशन्स हार्ट प्रॉब्लम, कोलेस्ट्रोल, डायबिटीज जैसी हेल्थ कंडीशंस में फायदेमंद होते हैं। इसके साथ ही पाचन संबंधी समस्याओं जैसे दस्त और कब्ज में इसका सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।

किडनी बीन्स यानी राजमा

इसकी 100 ग्राम मात्रा में 15.38 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। ये बीन्स बॉडी से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। खराब कोलेस्ट्रोल दिल की बिमारियों सहित कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत : गेहूं

प्रति 100 ग्राम गेहूं में 33.36 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। साथ ही विटामिन-बी, फाइटोकेमिकल्स, फाइबर जैसे पोषक तत्व भी इसमें पाए जाते हैं। ये सभी टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने और कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

और पढ़ें : Digestive Disorder: जानिए क्या है पाचन संबंधी विकार और लक्षण?

क्विनोआ

डायबिटीज पेशेंट्स के लिए क्विनोआ अच्छा आहार माना जाता है। सिर्फ 100 ग्राम क्विनोआ 28.57 ग्राम कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। यह बॉडी में गुड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में हेल्पफुल होता है।

चने या छोले

स्टार्च, प्रोटीन, पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, फाइबर, विटामिन के साथ-साथ मिनरल्स जैसे; मैग्नीशियम, फोलेट, कैल्शियम और पोटैशियम से भरपूर छोले या चने की 100 ग्राम मात्रा में 27.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। ये सभी पोषक तत्व डाइजेशन संबंधी परेशानियों को दूर रखने के साथ ही मोटापा और डायबिटीज की संभावना भी कम कर सकते हैं।

और पढ़ें : हार्ट अटैक के बाद डायट का रखें खास ख्याल! जानें क्या खाएं और क्या न खाएं

कार्बोहाइड्रेट हमारे लिए क्यों फायदेमंद है? (Carbohydrate benefits)

कार्बोहाइड्रेट आपके शरीर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत हैं: ये आपके मस्तिष्क, किडनी, हृदय की मांसपेशियों और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को फ्यूल देने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, फाइबर एक कार्बोहाइड्रेट है जो डाइजेशन में सहायता करता है और ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखता है। जब आप अपने आहार में पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट नहीं लेते हैं तो आपको कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। कार्बोहाइड्रेट की कमी वाले आहार के कारण सिरदर्द, थकान, कमजोरी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, मतली, कब्ज, शरीर में विटामिन और मिनरल की कमी हो सकती है।

और पढ़ें : इन 8 फूड से शरीर में पूरी होगी विटामिन-सी की कमी

कार्बोहाइड्रेट का पाचन कैसे होता है? (Digestion of carbohydrates)

आपके द्वारा खाए जाने वाले सभी भोजन आपके पाचन तंत्र से गुजरते हैं, ताकि ये टूटकर शरीर द्वारा नियमित कामों के लिए इस्तेमाल किए जा सके। कार्बोहाइड्रेट का काम मुंह में पाचन क्रिया से शुरू होता है और कोलन से निष्कासन के साथ खत्म होता है। खाना खाने और अपशिष्ट भोजन के बाहर निकलने के बीच बहुत सी प्रक्रियाएं बॉडी में होती हैं।

मुंह में कार्बोहाइड्रेट का पाचन

जैसे ही भोजन मुंह में जाता है, कार्बोहाइड्रेट का कार्य शुरू हो जाता है। मुंह के जरिए ही कार्बोहाइड्रेट, खाद्य पदार्थों को छोटे-छोटे टुकड़ों में कर देता है। वहीं, मौखिक गुहा में मौजूद लार ग्रंथियां सलाइवा का स्राव करती हैं जिनसे सलाइवा एमाइलेज नामक एक एंजाइम रिलीज होता है। जो आपके द्वारा खाए जा रहे कार्बोहाइड्रेट में शर्करा की टूटने की प्रक्रिया शुरू करता है।

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कार्बोहाइड्रेट का पाचन : पेट

जब कार्बोहाइड्रेट पेट में पहुँचते हैं तो कोई और रासायनिक विखंडन नहीं होता है क्योंकि एमाइलेज एंजाइम पेट की अम्लीय स्थितियों में काम नहीं करता है। दरअसल, पेट में कम पीएच लार एमाइलेज को निष्क्रिय कर देता है, इसलिए पेट में पहुंचने पर यह काम नहीं करता है। हालांकि, पेट में मैकेनिकल डाइजेशन ज्यादा होने के साथ ही यहां थोड़ा बहुत कार्बोहाइड्रेट का केमिकल डाइजेशन भी होता है। कार्बोहाइड्रेट आपके अन्नप्रणाली के माध्यम से आपके पेट में जाते हैं। इस स्तर पर, भोजन को चाइम कहा जाता है। इससे पहले कि भोजन पाचन क्रिया में आगे बढ़ता है आपका पेट, चाइम में बैक्टीरिया को मारने के लिए एसिड बनाता है।

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कार्बोहाइड्रेट का पाचन : छोटी आंत, अग्न्याशय और यकृत

चाइम पेट से छोटी आंत के पहले भाग में जाता है, जिसे ग्रहणी कहा जाता है। यह पैंक्रियाज को पैंक्रिअटिक एमाइलेज रिलीज करने के लिए प्रेरित करता है। यह एंजाइम चाइम को डेक्सट्रिन (dextrin) और माल्टोज (maltose) में तोड़ देता है। वहां से, छोटी आंत की दीवार लैक्टेज (lactase), सुक्रेज (sucrase) और माल्टेस (maltase) बनाने लगती है। ये एंजाइम शुगर को मोनोसेकेराइड या सिंगल शुगर में तोड़ते हैं। ये शुगर्स छोटी आंत में अवशोषित हो जाते हैं। एक बार जब वे अवशोषित हो जाते हैं, तो लिवर द्वारा उन्हें और भी अधिक प्रोसेस्ड किए जाते हैं और ग्लाइकोजन के रूप में संग्रहीत होते हैं। अन्य ग्लूकोज को ब्लडस्ट्रीम द्वारा शरीर के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है।

हॉर्मोन इंसुलिन पैंक्रियाज से जारी होता है और ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में उपयोग करने की अनुमति देता है।

और पढ़ें : Insulin Glargine: इंसुलिन ग्लारजीन क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

कार्बोहाइड्रेट का पाचन : कोलन या बड़ी आंत

इन पाचन प्रक्रियाओं के बाद जो कुछ भी बचा है वह कोलन में जाता है और फिर इंटेस्टिनल बैक्टीरिया द्वारा इसको ब्रेक डाउन किया जाता है। फाइबर कई कार्बोहाइड्रेट में पाया जाता है और शरीर द्वारा पच नहीं पाता है। जिसकी वजह से यह कोलन तक पहुंचता है और फिर आपके स्टूल पास करने की क्रिया के द्वारा निष्कासित किया जाता है।

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कार्बोहाइड्रेट पाचन फैक्ट्स एक नजर में (Carbohydrates digestion facts)

  • कार्बोहाइड्रेट पाचन का मुख्य काम पॉलीसेकेराइड (polysaccharides) और डिसैकेराइड्स (disaccharides) को मोनोसेकेराइड (monosaccharides) में तोड़ना है, जिसे रक्तप्रवाह में अवशोषित किया जा सके।
  • कुछ भोज्य पदार्थ खाने के बाद, उन्हें मोनोसेकेराइड में तोड़ने के लिए पाचन तंत्र को कोई खास क्रिया नहीं करनी पड़ती है, क्योंकि वे आसनी से अवशोषित होते हैं। जैसे;अंगूर
  • अंगूर या दूध जैसे भोजन में मौजूद डिसैकेराइड्स (Disaccharides) पाचन तंत्र (मोनोसैकराइड्स, ग्लूकोज और फ्रुक्टोज) में आसनी से टूट जाते हैं।
  • भोजन में स्टार्च ग्लूकोज मोलेक्यूल्स, डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में टूट जाते हैं।
  • भोजन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र में एंजाइम से पचता नहीं है। हालांकि, कुछ डाइट्री फाइबर बड़ी आंत में गट माइक्रोब्स द्वारा फर्मेंट किए जाते हैं।

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कार्बोहाइड्रेट पाचन (Carbohydrate digestion) को प्रभावित करने वाली कुछ मेडिकल कंडिशन

कुछ चिकित्सा स्थितियां हैं जो कार्बोहाइड्रेट पाचन और अवशोषण की प्रक्रिया को बाधित कर सकती हैं। आमतौर पर ये स्थितियां दुर्लभ और आनुवांशिक हैं।

गैलेक्टोसिमिया (Galactosemia)

यह एक आनुवांशिक विकार है जो शरीर सिंपल शुगर गैलेक्टोज (galactose) को कैसे प्रोसेस करता है? इसको प्रभावित करता है। शुगर जो एक बड़े शर्करा का हिस्सा है जिसे लैक्टोज कहा जाता है जो दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों में पाया जाता है। यह ब्लड में शर्करा के बहुत अधिक होने का कारण बनता है, जिससे लिवर डैमेज, लर्निंग डिसैबिलिटीज और प्रजनन संबंधी समस्याएं जैसी जटिलताएं होती हैं।

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पाइरूवेट मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर (Pyruvate metabolism disorders)

पाइरूवेट डिहाइड्रोजनेज की कमी पाइरूवेट चयापचय विकारों के अंतर्गत आने वाला एक अनुवांशिक विकार है। यह रक्तप्रवाह में लैक्टिक एसिड के निर्माण का कारण बनता है। बचपन से ही इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। उनमे शामिल है:

  • सुस्ती
  • उचित पोषण न मिलना
  • तेजी से साँस लेना
  • खराब मांसपेशी टोन
  • आंखों का मूवमेंट असामान्य होना

अधिक कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन लेने के बाद लक्षण बदतर हो सकते हैं।

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फ्रुक्टोज का खराब अवशोषण (Fructose malabsorption)

इस स्थिति को डाइट्री फ्रुक्टोज इनटॉलेरेंस (dietary fructose intolerance) भी कहा जाता है। इसकी वजह से शरीर, फलों और सब्जियों, शहद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से शुगर फ्रुक्टोज को कैसे तोड़ता है? यह प्रभावित होता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं:

  • जी मिचलाना
  • दस्त
  • अत्यंत थकावट

और पढ़ें : दांतों में ब्रेसेस लगवाने के बाद बचें इन खाद्य पदार्थों के सेवन से

म्यूकोपोलिसेकेरीडोसिस (Mucopolysaccharidoses)

हंटर सिंड्रोम एक जेनेटिक डिसऑर्डर है जो म्यूकोपोलिसेकेरीडोसिस (MPSs) के अंतर्गत आता है। यह आमतौर पर दो और चार साल की उम्र के बीच शुरू होता है और यह एक एंजाइम के मिस होने के कारण होता है जो कार्बोहाइड्रेट को नहीं तोड़ पाता है। फिजिकल एबिलिटीज, ऍपेरेन्स, मानसिक विकास और ऑर्गन फंक्शन सभी इस विकार से प्रभावित हो सकते हैं।

और पढ़ें : कुछ खाद्य पदार्थ बॉडी ऑर्गन जैसे क्यों दिखते हैं?

अनहेल्दी हाई-कार्ब आहार में शामिल खाद्य पदार्थ (Unhealthy carb)

कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)

खराब हाई-कार्ब डाइट दुनिया भर में खाए जाने वाले अनहेल्दी डाइट में से एक है। आमतौर पर प्रोसेस्ड फूड्स जैसे कि सफेद ब्रेड, पास्ता, पिज्जा, हॉट डॉग, डेली मीट और रेडी-टू-ईट स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित होते हैं। अस्वास्थ्यकर आहार में अतिरिक्त शर्करा युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कैंडी, फास्ट फूड और तले हुए खाद्य पदार्थ, जैसे फ्रेंच फ्राइज, फ्राइड चिकन, जंक फूड आदि शामिल हैं। ये अनहेल्दी हाई कार्ब्स फूड्स आपके स्वास्थ्य की समस्याओं जैसे कि टाइप 2 मधुमेह, ओबेसिटी और हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एन्ड प्रिवेंशन की माने तो मोटापा कई और स्वास्थ्य मुद्दों का कारण बन सकता है, जिसमें शामिल हैं:

  • गर्भधारण में कठिनाई और अन्य स्त्रीरोग संबंधी समस्याएं
  • गॉलब्लैडर डिजीज
  • रक्तचाप बढ़ना
  • बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
  • स्ट्रोक का खतरा बढ़ना
  • विभिन्न प्रकार के कैंसर के लिए जोखिम में वृद्धि
  • ट्राइग्लिसराइड के स्तर में वृद्धि
  • लिवर डिजीज
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस और अन्य जॉइंट्स समस्याएं
  • श्वसन संबंधी समस्याएं, जैसे स्लीप एपनिया आदि

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एक दिन में कितना कार्बोहाइड्रेट लेना चाहिए?

अमेरिकी आहार संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार, आपके शरीर के लिए कैलोरी का 45 से 65% कार्बोहाइड्रेट जरूरी होता है। एक व्यक्ति को हर दिन 2,000 कैलोरी की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि प्रतिदिन आपको 225 से 335 ग्राम कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। हालाँकि, आपकी कार्ब की मात्रा आपकी व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर अलग-अलग होगी। जैसे एक प्रेग्नेंट लेडी को प्रतिदिन कम से कम 175 ग्राम कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है। वहीं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए 210 ग्राम है।

यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के अनुसार वयस्कों को दिन भर में कम से कम 130 ग्राम कार्ब्स का सेवन करना ही चाहिए। डाइट्री गाइडलाइन्स फॉर अमेरिकन्स के अनुसार, महिलाओं को रोजाना 25 ग्राम फाइबर जबकि पुरुषों को रोजाना 38 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए।

क्या कार्बोहाइड्रेट से मोटापा बढ़ता है?

यदि आप अपनी बॉडी की जरूरत से ज्यादा खाते हैं तो कोई भी भोजन आपका वजन बढ़ा सकता है। फिर चाहे आपका आहार वसा में अधिक हो या कार्बोहाइड्रेट में। कार्बोहाइड्रेट में वसा की तुलना में कम कैलोरी होती है। स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों की होलग्रेन वैरायटी फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। फाइबर में उच्च खाद्य पदार्थ आपको पेट भरे होने का एहसास दिलाते हैं। लेकिन, हाई शुगर फूड्स अक्सर कैलोरी में उच्च होते हैं, और इन खाद्य पदार्थों को खाने से आप अक्सर अधिक वजन की समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं।

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मुझे किन कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना चाहिए?

राष्ट्रीय आहार और पोषण सर्वेक्षण के डेटा दर्शाता है कि डाइट में अधिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ, फल, सब्जियां ज्यादा और चॉकलेट, बिस्किट, पेस्ट्री, केक, कोल्ड ड्रिंक्स जैसे पदार्थों को कम से कम शामिल करना चाहिए। फल, सब्जियां, दालें और स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ (विशेष रूप से उच्च फाइबर) पोषक तत्वों (जैसे विटामिन और खनिज) से भरपूर होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।

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कार्बोहाइड्रेट लेने का अबसे अच्छा समय क्या है?

अधिकांश खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट होते हैं। यदि आप एक स्वस्थ व्यक्ति हैं, तो दिन भर में अपने प्रत्येक भोजन के साथ कुछ कार्ब्स आप ले सकते हैं।लेकिन, अगर आप दिन के शुरुआत में कार्ब्स का सेवन करते हैं तो यह हेल्थ के लिए बेहतर हो सकता है:

  • वजन कम करना या रक्त शर्करा को सुधारना : शाम को कार्ब्स का बड़ा हिस्सा लेना रक्त शर्करा में वृद्धि कर सकता है। दरअसल, शाम के समय ज्यादातर लोग कम मूवमेंट करते हैं जिससे शरीर में वसा के रूप में ऊर्जा का अवशोषण कम होता है। नतीजन, शरीर में अतिरिक्त ग्लूकोज संग्रहीत होता है।
  • व्यायाम के दौरान : यदि आप सुबह एक घंटे से कम समय तक व्यायाम करते हैं, तो खाली पेट व्यायाम करना ठीक है। लेकिन अगर आप एक घंटे से अधिक समय हाई इंटेंसिटी वर्कआउट करते हैं, तो आपको प्री-वर्कआउट डाइट की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में आपको एनर्जी देने के लिए कार्ब्स से अच्छा क्या ही होगा?
  • नींद में परेशानी : रात के खाने में कार्ब्स लेने से आपकी नींद प्रभावित हो सकती है। जब भोजन डाइजेशन प्रक्रिया में हो और आप सोने चले जाते हैं तो आपको हार्ट बर्न की समस्या हो सकती है।

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क्या लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) वाले खाद्य पदार्थ खाने से वजन कम करने में मदद मिल सकती है?

ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों के लिए एक रेटिंग प्रणाली है। यह बताता है कि प्रत्येक भोजन आपके ब्लड में ग्लूकोज (शर्करा) के स्तर को कितनी जल्दी प्रभावित करता है।

कुछ लो जीआई फूड्स (खाद्य पदार्थ जो शरीर द्वारा धीरे-धीरे अवशोषित होते हैं), जैसे कि साबुत अनाज, फल, सब्जियां, बीन्स और दाल, ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें हमें स्वस्थ, संतुलित आहार के हिस्से के रूप में खाना चाहिए। हालांकि, सभी लो जीआई फूड्स हेल्दी नहीं होते हैं। जैसे- चॉकलेट की जीआई वैल्यू कम है और तरबूज उच्च जीआई खाद्य पदार्थ हैं, फिर भी स्वस्थ हैं।

और पढ़ें : इन हाई ब्लड प्रेशर फूड्स को अपनाकर हाइपरटेंशन को दूर भगाएं!

क्या लो कार्ब डाइट डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छी होती है?

कई स्टडीज से पता चलता है कि टाइप -2 डायबिटीज वाले अधिकांश लोगों के लिए कम कार्ब डाइट सुरक्षित और प्रभावी होती है। लो कार्ब्स डाइट वजन घटाने, मधुमेह नियंत्रण और अन्य जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद करती है। यह सलाह दी जाती है कि कम-कार्ब वाले आहार लेने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर बात करें क्योंकि यह टाइप 2 मधुमेह वाले सभी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है।

शरीर को ठीक ढंग से काम करने के लिए कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है। स्वस्थ सम्पूर्ण खाद्य पदार्थों से भरपूर डाइट से आपको दिन भर के काम के लिए पर्याप्त फ्यूल मिल सकता है। फल और सब्जियों की तरह कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट की निश्चित मात्रा को आहार शामिल करना सुनिश्चित करें। बेशक, आपकी ऊंचाई, वजन और गतिविधि स्तर के आधार पर कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सबके लिए अलग-अलग होती है। आपकी विशिष्ट कार्बोहाइड्रेट आवश्यकताओं और कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के लिए, यह सलाह दी जाती है कि आप आहार विशेषज्ञ से बात करें।

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सूत्र

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Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 10/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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