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कीटो फ्लू क्या है और इससे कैसे बच सकते हैं?

कीटो फ्लू क्या है और इससे कैसे बच सकते हैं?

कीटोजेनिक डायट को वजन घटाने और स्वस्थ रहने की एक प्राकृतिक डायट मानी जाती है। इस डायट में काफी कम कार्बोहाइड्रेड होता है, वहीं फैट व प्रोटीन की मात्रा भरपूर होती है। खाने पीने में फेरबदल करने से कई लोगों में साइड इफेक्ट भी देखने को मिलते हैं। बता दें कि कीटो फ्लू को कार्ब फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। जब कोई व्यक्ति इस डायट को अपनाता है तो उसमें कई प्रकार की समस्याएं देखने को मिलती हैं। इसे कीटो फ्लू भी कहा जाता है। जानते हैं उनके बारे में।

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कीटो डायट से कीटो फ्लू

जब कोई व्यक्ति कीटो डायट अपनाता है तो उस स्थिति में उसमें कई प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं। यह लक्षण ठीक वैसे ही है जैसे किसी को फ्लू होने पर होते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब हम कम कार्बोहाइड्रेड का सेवन करते हैं और नई डायट को अपनाते हैं तो शरीर में कुछ बदलाव आते हैं। कार्बोहाइड्रेड का सेवन कम करने के कारण हमारा शरीर ग्लूकोज बनाने की बजाय कीटोन्स (ketones) तैयार करता है। फैट के टूटने से कीटोन्स बायोप्रोडक्ट के रूप में काम करता है।

शरीर को एनर्जी पहुंचाने में कीटोजेनिक डायट अहम भूमिका अदा करती है। सामान्य तौर पर जब शरीर में ग्लूकोज नहीं रहता उस स्थिति में शरीर के फैट से ही एनर्जी मिलती है। वहीं फैट से एनर्जी निकले की प्रक्रिया को ही कीटोसिस (ketosis) कहा जाता है। ऐसा उस स्थिति में भी होता है जब कोई उपवास रखे या भूखमरी से पीड़ित हो। वहीं काफी कम कार्बोहाइड्रेड भोजन का सेवन करके भी कीटोएसिस को पाया जा सकता है।

कीटोजेनिक डायट को अपनाकर सामान्य तौर पर रोजाना 50 ग्राम वजन को घटाया जा सकता है। खानपान के इस बदलाव के कारण शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ठीक वैसे ही जैसे किसी नशा करने वाले व्यक्ति को कैफीन के लिए होती है।

लोगों को क्यों होता है कीटो फ्लू का एहसास

कार्बोहाइड्रेड शरीर में ग्लूकोज के रूप में एनर्जी पहुंचाता है। जब हम कार्बोहाइड्रेड का सेवन कम कर देते हैं तो उस स्थिति में ग्लूकोज शरीर में एनर्जी न पहुंचा फैट शरीर में शक्ति पहुंचाने का काम करते हैं। कीटोजेनिक डायट अपनाने के बाद ऐसे लोगों को ज्यादा समस्या होती है जो पास्ता, सोड़ा और चीनी युक्त खाद्य पदार्थों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करते थे।

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कीटो फ्लू के लक्षण

सामान्य से कम कार्ब डायट को अपनाने से शरीर में कई प्रकार के बदलाव देखने को मिलते हैं। वहीं हमारा शरीर इस प्रकार की डायट को अपनाने के लिए कुछ समय लेता है। अलग अलग लोगों में अलग अलग प्रकार के लक्षण देखने को मिल सकते हैं। जिनमें जी मचलाना, उल्टी आना, कब्जियत, डायरिया, हेडेक (सिर दर्द), अच्छा न महसूस होना (irritability), कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिर चकराना, एकाग्रता का कम होना, पेट दर्द, सोने में दिक्कत, चीनी का ज्यादा से ज्यादा सेवन जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

सामान्य तौर पर कीटो फ्लू के लक्षण उन लोगों में देखने को मिलते हैं जिन्होंने हाल ही में कीटोजेनिक डायट अपनाई हो। वहीं सप्ताहभर होते-होते लक्षण भी कम दिखने लगते हैं। वहीं कुछ केस में लंबे समय तक कीटो फ्लू के लक्षणों का अहसास होता है।

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कीटो फ्लू से ऐसे पाएं छुटकारा :

पानी बचा सकता है कीटो फ्लू से

कीटो फ्लू आपको परेशानी में डाल सकता हैं। ऐसे में कुछ तरीकों को अपनाकर परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जिनमें पानी की भरपूर मात्रा लेना। इससे लक्षणों को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। क्योंकि कीटो डायट अपनाने से डिहाइड्रेशन का खतरा भी रहता है। बता दें कि कार्बोहाइड्रेड के कारण ही गायकोजेन (glycogen) निकलता है, वहीं यह शरीर में पानी की नियमित मात्रा को बनाकर रखता है। वहीं जब इस डायट को अपनाते हुए कार्बोहाइड्रेड का सेवन कम कर देते हैं तो उस स्थिति में गायकोजेन की कम मात्रा बन पाती है और शरीर में पानी नहीं रुकता है। वहीं पानी का सेवन करने से मांसपेशियों में ऐंठन और थकान जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है। जब कीटो फ्लू के कारण आप डायरिया से पीड़ित हो जाए तो उस स्थिति में पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन शरीर में पानी की कमी की मात्रा को बैलेंस करने का काम करता है।

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कठिन व्यायाम करने से बचें

स्वस्थ रहने के लिए एक्सरसाइज (व्यायाम) बेहद जरूरी है। इसलिए जरूरी है कि समय-समय पर अपना वजन भी नापते रहें। वहीं कीटो फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर कठिन व्यायाम करने से परहेज करना चाहिए। कीटोजेनिक डायट अपनाने के कारण शुरुआत के सप्ताह में लोगों में थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, पेट में अपच की समस्या देखने को मिलती है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने शरीर को थोड़ा आराम दें। कोशिश करनी चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा साइकिल चलाना, दौड़ना और वेट लिफ्टिंग यदि आप करते हो तो उसे भी कम कर देना चाहिए। वहीं तब तक कम मेहनत करना चाहिए जब तक आपका शरीर नई डायट का आदि नहीं हो जाता। इस समय वाॅकिंग, योगा और कुछ समय के लिए साइकिल चलाने से आप स्वस्थ महसूस करेंगे।

इलेक्ट्रोलाइट को कम कर कीटो फ्लृ के लक्षणों से पाएं निजात

इलेक्ट्रोलाइट का सेवन कम करके कीटो फ्लू के लक्षणों को कम किया जा सकता है। जब कोई कीटोजेनिक डायट लेता है तो उस स्थिथि में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है। इंसुलिन का काम शरीर की रक्त कोशिकाओं से ग्लूकोज लेकर शरीर के अन्य हिस्सों को भेजना है। ऐसे में जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है तो हमारी किडनी शरीर से अत्यधिक सोडियम रिलीज करती है। वहीं कीटो डायट को अपनाते वक्त कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें पोटेशियम होता है उसका सेवन वर्जित होता है। स्वादानुसार नमक का सेवन कर शरीर में पोटेशियम की मात्रा ले सकते हैं वहीं कीटो फ्रेंडली फूड्स में ऐसी हरी पत्ती वाली सब्जियां होती हैं जिनके सेवन से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बना रहता है।

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कीटाे फ्लू से बचने के लिए पूरी नींद लेना है बेहद जरूरी

कीटोजेनिक डायट अपनाने वाले लोगों की सबसे ज्यादा और समस्या यही रहती है कि उन्हें थकान लगती है और काफी इरीटेशन भी महसूस होती है। वहीं कम नींद लेने के कारण शरीर में स्ट्रेस हाॅर्मोन कोरीसोल (corisol) निकलता है। जो हमारे मूड को खराब करने के साथ कीटो फ्लू के लक्षणों को बढ़ा सकता है। ऐसे में आप भी इस प्रकार के बुरे लक्षणों से गुजर रहे हों तो उस स्थिति में जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा नींद लें।

वहीं कोशिश करें कि कम से कम कैफीन का सेवन करें। वहीं आप यदि दिन में कैफीन युक्त के पदार्थों का सेवन करते हैं तो उस स्थिति में ही आपको नींद नहीं आती है। यदि आप रात में कैफीन का सेवन करते हैं तो नींद आने में परेशानी हो सकती है। अच्छी नींद लेने के लिए जरूरी है कि अपने मोबाइल फोन को स्विच ऑफ कर दें वहीं कम्प्यूटर और टीवी की लाइट को भी बंद कर दें। कोशिश करें कि आपके बेडरूम में अंधेरा हो, जिससे आपको बेहतर नींद आ सके। अच्छे से नहाएं, जी हां अच्छी नींद के लिए जरूरी है कि रोजाना अच्छे से स्नान किया जाए। वहीं रोजाना सुबह जल्दी उठने से जल्दी नींद भी आती है। इसलिए जरूरी है कि जल्दी उठने की प्रक्रिया को जीवन शैली में शामिल किया जाए।

कीटो फ्लू से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा फैट का करें सेवन

कीटोजेनिक डायट अपनाने के बाद कुकीज, ब्रेड, पास्ता इत्यादि का भी सेवन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा फैट युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करें। ऐसा करने से आपको ज्यादा खाने की इच्छा नहीं करेगी। वहीं शोध से पता चला है कि लो कार्ब डायट अपनाने से हाई कार्ब डायट की तुलना में मीठा खाद्य पदार्थ का सेवन करने की कम इच्छा करती है। जिन लोगों को कीटोजेनिक डायट अपनाने में परेशानी आ रही है उन्हें धीरे-धीरे करके कार्बोहाइड्रेड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। ना कि एक ही बार में कम कर देना चाहिए। जब हम धीरे धीरे कार्बोहाइड्रेड को खानपान से कम करेंगे तो उस स्थिति में इस कमी को पूरा करने के लिए हम फैट और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ का ज्यादा से ज्यादा सेवन करेंगे। ताकि कीटो फ्लू के लक्षणों को कम किया जा सकें।

ऐसे करें कीटो फ्लू से खुद का बचाव

  • यदि किसी को कीटो फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों तो जरूरी है कि उन्हें पानी व नमक का सेवन बढ़ा देना चाहिए।
  • ज्यादा से ज्याद वसा (fat) युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • फिजिकल एक्टिविटी को थोड़ा बढ़ा देना चाहिए।
  • हर समय और लगातार खाना का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • ऐसा कर कीटो फ्लू से बचाव किया जा सकता है।

कीटो डायट हमें बचा सकती है संक्रमण से भी

हालिया दिनों में किए गए शोध यह बताते हैं कि कीटो डायट इंफ्लूएंजा के संक्रमण से बचाने में हमारी मदद कर सकती हैं। येल यूनिवर्सिटी के साइंस इम्युनोलाजी में छपे एक जरनल के अनुसार यह पाया गया कि कीटोजेनिक डायट (kitogenic diet) (कार्बोहाइड्रेड की कम मात्रा और वसा और माड्रेट प्रोटीन से भरपूर) में यूज किए गए खाद्य पदार्थ दूसरे कार्बोहाइड्रेड खाद्य पदार्थ की तुलना में संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

बता दें कि शोधकर्ताओं ने इंफ्लूएंजा से पीड़ित लोगों को कीटो डायट पर रखा। वहीं इंफ्लूएंजा से पीड़ित दूसरे ग्रुप को 58 फीसदी कार्बोहाइड्रेड के साथ सामान्य डायट पर रखा। नतीजे चौकाने वाले थे। जिनको किटोजेनिक डायट पर रखा था उनमें गामा डेल्टा टी सेल्स के रिजल्ट दिखे, यह एक प्रकार का रोग प्रतिरोधक क्षमता वाला सेल्स है, इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले सेल्स लंग्स के ऊपरी सतर पर म्यूकस (mucus) उत्पन्न कर रहे थे। वहीं जिनको कार्बोहाइड्रेड डायट पर रखा था उनमें ऐसे लक्षण नहीं देखने को मिले। शोधकर्ताओं के अनुसार म्यूकस का बढ़ना यह दर्शाता है कि ये शरीर को वायरस व फ्लू से लड़ने में सक्षम बनाते हैं।

ऐसे काम करती है कीटो डायट

कीटोजेनिक खान-पान के तरीके से जैसे-जैसे कार्बोहाइड्रेड का सेवन करते जाते हैं वैसे-वैसे तेजी से हमारा वजन भी बढ़ने लगता है। जैसे ब्रेड, पास्ता और मीठा खाने के साथ मीट, डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करने से ज्यादा कार्बोहाइड्रेड मिलता है। इस प्रकार की डायट लेने से हमारा शरीर कीटोसिस (kitosis) की श्रेणी में पहुंच जाता है। ऐसे में शरीर में ग्लूकोज की कमी होने पर यह ईंधन का काम करता है।

इस प्रकार के खानपान को अपनाने से हमारे शरीर में ब्लड शुगर लेवल बना रहता है। खासतौर से टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को इसे अपनाने से फायदा पहुंचता है। फरवरी 2017 में किए गए शोध से पता चला है कि कीटो डायट अपनाने से कैंसर के मरीजों में ट्यूमर को कम किया जा सकता है।

साल 2017 में ही दाविस के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में किए गए शोध से पता चला है कि जो व्यक्ति हाई फैट डायट लेते हैं वो हाई कार्ब डायट लेने वालों की तुलना में 13 फीसदी ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं।

इन लोगों को नहीं अपनानी चाहिए कीटोजेनिक डायट

गर्भवती महिलाओं के साथ बच्चों, शिशु को दूध पिलाने वाली माताओं को कीटोजेनिक डायट नहीं अपनाना चाहिए। वहीं उन मरीजों को भी इस डायट को नहीं अपनाना चाहिए जिन्हें किडनी संबंधी बीमारी है। वहीं डायबिटीज के मरीजों को भी इस प्रकार की डायट से दूरी बनाकर रखना चाहिए।

हमें उम्मीद है कि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगा होगा। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, उपचार और निदान प्रदान नहीं करता।

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सूत्र

Can the Keto Diet Help Fight the Flu?https://www.everydayhealth.com/cold-flu/can-the-keto-diet-help-fight-the-flu/Accessed  3rd April 2020

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What is keto flu?/ https://www.health.harvard.edu/blog/what-is-keto-flu-2018101815052/Accessed On 3 April 2020

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Satish singh द्वारा लिखित
अपडेटेड 08/04/2020
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