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पेट में होने वाले डुओडेनल कैंसर के लक्षणों को पहचानना है मुश्किल, जानिए इसके बारे में विस्तार से

    पेट में होने वाले डुओडेनल कैंसर के लक्षणों को पहचानना है मुश्किल, जानिए इसके बारे में विस्तार से

    डुओडेनम (Duodenum) स्मॉल इंटेस्टाइन के पहले और सबसे सबसे छोटे भाग को कहा जाता है। यह पेट और जिजूनम (Jejunum) के बीच में होता है। अगर बात की जाए जिजूनम की, तो यह स्मॉल इंटेस्टाइन का अगला पोरशन होता है। डुओडेनम का आकार हॉर्सशू यानी घोड़े की नाल जैसा होता है। डुओडेनम, डायजेस्टिव प्रोसेस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज हम बात करने वाले हैं डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) के बारे में जिसकी शुरुआत स्मॉल इंटेस्टाइन के इस पार्ट से होती है। जैसे-जैसे यह ट्यूमर बढ़ता है, इससे रोगी के डायजेस्टिव में समस्या होने लगती है। इसके लक्षण हो सकते हैं जी मिचलाना, पेट में दर्द या कब्ज आदि। आइए जानें डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) के बारे में विस्तार से।

    डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) क्या है?

    जैसे कि पहले ही बताया गया है कि डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) एक तरह का रेयर कैंसर है, जो स्मॉल इंटेस्टाइन में फॉर्म होता है। इसके लक्षण अस्पष्ट होते हैं, जिससे इसका जल्दी निदान मुश्किल हो सकता है। इस ट्यूमर के कारण इंटेस्टाइन सही तरीके से फूड को डायजेस्ट नहीं कर पाता है और फूड को इंटेस्टाइन के माध्यम से पास करने से ब्लॉक कर देता है। इसके शुरुआती स्टेजेज में मरीज को कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। लेकिन, जब इंटेस्टाइनल ट्यूमर ग्रो होता है, आपको ऐसे लक्षण नजर आ सकते हैं जो पाचन तंत्र के प्रभावित होने पर नजर आते हैं जैसे जी मिचलाना, कब्ज या एब्डोमिनल क्रैम्प्स आदि। अब जानिए क्या हैं इसके प्रकार?

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    डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) के प्रकार

    डुओडेनम में कई प्रकार के सेल्स होते हैं, इसलिए कैंसर की कई वैरायटी यहां से शुरू हो सकती हैं। इस कैंसर के चार मुख्य प्रकार हैं:

    • एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma): एडेनोकार्सिनोमा उन सेल्स को प्रभावित करता है, जो केमिकल, एंजाइम और अन्य उन फ्लुइड्स को प्रोड्यूज करते हैं जो फूड को ब्रेक-डाउन करते हैं।
    • कार्सिनॉयड ट्यूमर (Carcinoid tumors): यह ट्यूमर धीरे से ग्रो होते हैं। यह अधिकतर गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) से शुरु होते हैं और पूरे शरीर में फैल जाते हैं।
    • लिंफोमा (Lymphoma): लिंफोमा उन इम्यून सिस्टम सेल्स में शुरू होता है, जो इंफेक्शन से फाइट करते हैं।
      सार्कोमा (Sarcoma): सार्कोमा की शुरुआत बोन्स या सॉफ्ट टिश्यूज से होती है जैसे मसल्स या ब्लड वेसल्स। सबसे सामान्य गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल सार्कोमा है गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर।(Gastrointestinal stromal tumor)। अब जानते हैं डुओडेनल कैंसर( Duodenal Cancer) के लक्षणों के बारे में।

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    डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) के क्या हैं लक्षण?

    डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) के लक्षण अक्सर अस्पष्ट होते हैं। रोगी को इन लक्षणों की पहचान तब तक नहीं होती है जब तक कैंसर ग्रो न हो गया हो। इसके लक्षणों में यह सब शामिल है:

    जैसे ही डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) बदतर होता है, इसके लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

    • एनीमिया (Anemia): एनीमिया की समस्या तब होती है, जब रोगी में रेड ब्लड सेल्स की मात्रा कम होती है। इससे रोगी को थका हुआ या कमजोर महसूस हो सकता है। यह तब हो सकता है जब इंटेस्टाइन में ट्यूमर से खून बहने लगे।
    • गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑब्स्ट्रक्शन (Gastrointestinal obstruction): यह समस्या तब होती है जब ट्यूमर बहुत बड़ा हो जाता है, जिससे इंटेस्टाइन से किसी भी चीज का पास होना मुश्किल हो जाता है।.
    • पीलिया (Jaundice): जब डुओडेनम में ट्यूमर से बाइल डक्ट ब्लॉक हो जाता है, तो एक बाइल पिग्मेंट जिसे बिलीरुबिन (Bilirubin) कहा जाता है, यह बिल्ड होना शुरू हो जाता है। इससे स्किन और आंखों का सफेद हिस्सा येलो हो जाता है। अब जानिए इस कैंसर के कारणों के बारे में।

    डुओडेनल कैंसर,Duodenal Cancer

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    डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) के क्या हैं कारण?

    एक्सपर्ट्स को भी इस बारे में जानकारी नहीं है कि डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) के कारण क्या हैं। ऐसा माना जाता है कि यह कैंसर उन स्मॉल ग्रोथस यानी पोलिप्स (polyps) से शुरू होता है, जो इंटेस्टाइन के इनर लायनिंग में बनते हैं। एक्सपर्ट्स को पोलिप्स (Polyps) के कारणों के बारे में भी जानकारी नहीं है। लेकिन कुछ चीजों से इनका रिस्क बढ़ सकता है, जैसे:

    इसके साथ ही लिंग यानी सेक्स भी इसका एक रिस्क फैक्टर है। डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) की संभावना महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक रहती है। अब जान लेते हैं कि किस तरह से संभव है इस परेशानी का निदान?

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    कैसे हो सकता है इस कैंसर का निदान?

    जैसे कि पहले ही बताया गया है कि इस कैंसर का निदान आमतौर पर लेटर स्टेजेज में होता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसके लक्षण अन्य कंडिशंस के जैसे भी हो सकते हैं। डॉक्टर कैंसर के निदान के लिए एक प्रोसेस का इस्तेमाल करते हैं, जिसे स्टेजिंग कहा जाता है, जो इस प्रकार है:

    • स्टेज 0 से 1 का अर्थ है रोगी में कैंसर शरीर के केवल एक हिस्से में है।
    • डुओडेनल कैंसर के स्टेज 2 से 3 का मतलब है कि कैंसर मसल्स के माध्यम से फैल गया है या रीजनल लिम्फ नोड्स सहित आस-पास के अंगों में आक्रमण कर रहा है।
    • स्टेज 4 का अर्थ है कि कैंसर बॉडी के दूर के भागों तक फैल गया है।

    कैंसर के निदान और स्टेज को पहचाने के लिए डॉक्टर कई टेस्ट्स कराने की सलाह दे सकते हैं, जैसे:

    • इमेजिंग टेस्ट्स (Imaging tests): जैसे एमआरआइ और सीटी स्कैन आदि। ताकि, गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) की डिटेल्ड पिक्चर ली जा सके।
    • अपर एंडोस्कोपी (Upper endoscopy): इसमें स्मॉल और फ्लेक्सिबल ट्यूमर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें कैमरा लगा होता है। ताकि, गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के अंदर की तस्वीर ली जा सके।
    • बेरियम स्वालो टेस्ट (Barium swallow test): इस टेस्ट में रोगी स्मॉल अमाउंट में एक केमिकल को निगलते हैं, जिससे अपर गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) को विस्तृत रूप से एक्स-रे पर देखा जा सकता है।
    • बॉयोप्सी (Biopsy): बॉयोप्सी से गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के टिश्यू का छोटा पार्ट निकाला जाता है और कैंसर की जांच के लिए इसे लेबोरेटरी में एक्जामिन किया जाता है। अब जानिए इसके ट्रीटमेंट के बारे में।

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    डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) का उपचार किस तरह से होता है?

    इस कैंसर का ट्रीटमेंट प्लान कैंसर स्टेज पर निर्भर करता है। इसके साथ ही डॉक्टर इस कंडिशन में इन ट्रीटमेंट प्लान्स की सलाह दे सकते हैं:

    • सर्जरी (Surgery): सर्जन हेल्दी टिश्यू को इन्टेक्ट रखते हुए जितना संभव हो ट्यूमर को हटा देते हैं। गंभीर मामलों में, रोगी को व्हिपल प्रोसीजर (Whipple procedure) से गुजरना पड़सकता है। जिसमें सर्जन रोगी के डुओडेनम (duodenum), गॉलब्लेडर (gallbladder) और आपके पैंक्रियाज के एक छोटे से हिस्से को हटा देते हैं।
    • कीमोथेरेपी (Chemotherapy): कीमोथेरेपी में उन मेडिकेशन्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर के फास्ट-ग्रोइंग सेल्स को डिस्ट्रॉय कर देती हैं जैसे कैंसर सेल्स। कीमोथेरेपी का इस्तेमाल कई बार ट्रीटमेंट के रूप में किया जाता है।
    • रेडिएशन थेरेपी (Radiation therapy): रेडिएशन थेरेपी में रेडिएशन बीम्स को रोगी के गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) में डायरेक्ट किया जाता है। इससे ट्यूमर सेल्स सिकुड़ जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। जानिए डुओडेनल कैंसर से कैसे बचा जा सकते हैं?

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    इस कैंसर से इस तरह से बचें?

    डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) से बचाव का कोई गारंटीड तरीका नहीं है। लेकिन, इन स्टेप्स से गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) कैंसर के ओवरआल रिस्क कम किया जा सकता है, जैसे:

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    अगर इस कैंसर का निदान शुरुआती स्टेज में हो जाए, तो इसका उपचार संभव है। लेटर स्टेजेज में इसका निदान करना जोखिम भरा हो सकता है। उम्मीद है कि डुओडेनल कैंसर (Duodenal Cancer) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। नियमित चेक-अप से इस कैंसर का निदान होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आपको गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट सिम्पटम्स हैं या आपकी डायजेस्टिव हैबिट्स में बदलाव हो रहा है, तो डॉक्टर से तुरंत बार करें। अगर आपके परिवार में इस कैंसर की हिस्ट्री है, तो इसके जल्दी निदान के लिए डॉक्टर नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट्स के लिए कह सकते हैं। अगर इसके बारे में आपके मन में कोई भी सवाल है, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/05/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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