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सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स से जुड़ी संपूर्ण जानकारी पाना है, तो पढ़ लें ये आर्टिकल!

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स से जुड़ी संपूर्ण जानकारी पाना है, तो पढ़ लें ये आर्टिकल!

नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार कई लोगों को सिर्फ रेग्यूलर डायट से शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है। ऐसे में सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स का सहारा लिया जाता है। अमेरिका की आधी आबादी कंप्लीट न्यूट्रिएंट्स के लिए सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स (Synthetic nutrients) का सहारा लेते हैं, लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स का सेवन शरीर के लिए अच्छा विकल्प है? ऐसे में सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients) से जुड़ी पूरी जानकारी आपसे इस आर्टिकल में शेयर करेंगे।

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients) क्या हैं?

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients)

सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स दो अलग-अलग तरह के पोषक तत्व है, जो इस प्रकार हैं:

नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Natural nutrients)- नैचुरल न्यूट्रिएंट्स यानी प्राकृतिक पोषक तत्व। ये डायट में शामिल खाने-पीने की चीजों से प्राप्त किया जाता है।

सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स (Synthetic nutrients)- ये अर्टिफिशियल तरीके से तैयार किये गए पोषक तत्व होते हैं। सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स में व्हॉल फूड सप्लिमेंट्स (Whole food supplements) नहीं होते हैं।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FSSAI) द्वारा किये गए एक सर्वे के अनुसार भारतीयों में प्रोटीन (Protein), विटामिन डी (Vitamin-D), आयरन (Iron), विटामिन बी-12 (Vitamin-B-12) एवं फोलेट (Folate) कमी प्रायः देखी जाती है। ऐसे में सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स का सेवन तेजी से किया जाता है, लेकिन इनके सेवन से नुकसान भी पहुंचता है। भारतीयों में माइक्रोन्यूट्रियंट की कमी चिंता का विषय भी बना हुआ है, लेकिन हम आपके लिए कुछ आसान सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients) जुड़े जानकारी लेकर आएं, जिससे आप चाहें, तो शरीर को पोषक तत्वों की कमी से बचा सकते हैं।

और पढ़ें : शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं, ये टॉप 10 विटामिन डी सप्लिमेंट्स

नैचुरल न्यूट्रिएंट्स के लिए कौन-कौन से खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए?

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients) में नैचुरल न्यूट्रिएंट्स का सेवन अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। इसलिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। जैसे:

1. ताजे फल और सब्जियां (Fresh fruits & vegetables)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स-Synthetic and Natural nutrients

नियमित फल और सब्जियों के सेवन से शरीर में फाइबर (Fiber), विटामिन (Vitamin) एवं खनिज (Minerals) की पूर्ति होती है। इससे हृदय रोग (Heart problem), कैंसर (Cancer), मधुमेह (Diabetes), गठिया (Arthritis) और मस्तिष्क से जुड़ी परेशानियों (Brain problem) से बचने में मदद मिल सकती है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार नियमित रूप से ताजे फल और सब्जियां के सेवन से दिल से जुड़ी परेशानियों को 4 से 7 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसलिए सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स की तुलना में नैचुरल न्यूट्रिएंट्स पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

2. ऑयली मछली (Oily Fish)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients)

नैचुरल न्यूट्रिएंट्स में शामिल ऑयली फिश अत्यधिक पौष्टिक माना जाता है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार जब 40,000 पुरुषों पर किये गए रिसर्च के अनुसार जिन लोगों को प्रत्येक दिन मछली का सेवन करवाया गया, उनमें 15 प्रतिशत तक दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हुआ। रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि मछली में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स (Omega-3 fatty acids) सेहत और हृदय के लिए लाभकारी होता है।

और पढ़ें : मछली खाने के फायदे जानकर हो जाएंगे हैरान, कम होता है दिल की बीमारियों का खतरा

3. बीन्स और फलियां (Beans and Legumes)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients)

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार हाई सॉल्यूब्ल फाइबर में विटामिन (Vitamins), मिनिरल्स (Minerals) एवं एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidants) की प्रचुर मात्रा सेहत के लिए लाभकारी होता है। बीन्स और फलियां (Beans and Legumes) में मौजूद हाई सॉल्यूब्ल फाइबर दिल की बीमारी (Heart disease), डायबिटीज (Diabetes) और कैंसर (Cancers) जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में सहायक होते हैं। नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (National Institute of Health) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना संतुलित मात्रा में बीन्स, मटर एवं चने के सेवन से बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) लेवल को कम करने में मदद मिलती है

4. नट्स और सीड्स (Nuts and Seeds)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients)

नट्स और सीड्स बेस्ट नैचुरल न्यूट्रिएंट्स माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidants), मिनरल्स (Minerals) और हेल्दी फैट्स (Healthy fats) सेहतमंद रहने के लिए आवश्यक होते हैं। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार नियमित रूप से नट्स और सीड्स (Nuts and Seeds) के सेवन से हार्ट डिजीज को 28 प्रतिशत और डायबिटीज के खतरे को 22 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स की लिस्ट में खासकर के शामिल नट्स और सीड्स हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है।

5. साबुत अनाज (Whole Grains)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients)

साबुत अनाज में फाइबर, विटामिन बी, आयरन, मैग्नीशियम और सेलेनियम जैसे कई अन्य पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं, जो कैंसर (Cancer), हृदय रोग, मधुमेह और मोटापा की समस्या से आपको बचाये रखने में सहायक होते हैं। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार साबुत अनाज (Whole Grains) का सेवन नियमित करने से शारीरिक लाभ मिलता है।

इन 5 अलग-अलग तरह नैचुरल न्यूट्रिएंट्स का सेवन करने शरीर के फिटनेस को बनाये रखने के साथ-साथ हृदय रोग एवं डायबिटीज जैसी कई अन्य गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। इसीलिए सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स, इनदोनों में नैचुरल खाने-पीने की चीजों की सलाह विशेष रूप से दी जाती है।

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients) अर्टिफिशियल तरीके से तैयार किये गए पोषक तत्व होते हैं। सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स में व्हॉल फूड सप्लिमेंट्स (Whole food supplements) नहीं होते हैं। इसलिए इनके सेवन से दूरी ही बनाये रखना चाहिए, लेकिन इन सिंथेटिक सप्लिमेंट्स या सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स कब लिया जा सकता है, यह समझना बेहद जरूरी है।

और पढ़ें : सिंथेटिक दवाओं से छुड़ाना हो पीछा, तो थामें आयुर्वेद का दामन

किन लोगों को सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स का सेवन करना चाहिए?

सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स (Synthetic nutrients) की अपनी अलग-अलग भूमिका होती है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार निम्नलिखित लोगों को सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स (Synthetic nutrients) के सेवन की सलाह दी जा सकती है। जैसे:

बुजुर्ग (Elderly)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and natural nutrients)

बुजुर्गों में विशेष रूप से विटामिन-डी (Vitamin D) की कमी होती है और उन्हें विटामिन-बी 12 (Vitamin B12) और कैल्शियम (Calcium) की आवश्यकता भी ज्यादा होती है। ऐसी स्थिति में सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स दोनों के सेवन की सलाह दी जा सकती है, लेकिन इसका निर्णय डॉक्टर व्यक्ति और उनके हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर करते हैं।

और पढ़ें : Vitamin E : विटामिन-ई क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

वीगन और वेजिटेरियन (Vegans and vegetarians)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and natural nutrients)

वीगन और वेजिटेरियन डायट फॉलो करने वाले लोगों में विटामिन-बी-12 (Vitamin B12), कैल्शियम (Calcium), जिंक (Zinc), आयरन (Iron) एवं विटामिन-डी (Vitamin-D) की कमी का खतरा बना रहता है, ऐसे सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स के सेवन की सलाह दी जा सकती है।

प्रेग्नेंट या ब्रेस्टफीडिंग (Pregnant and breastfeeding)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and natural nutrients)

गर्भवती महिलाओं या स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को एक्स्ट्रा सप्लिमेंट्स की आवश्यकता पड़ सकती है, क्योंकि इनमें विटामिन-डी (Vitamin-D) और विटामिन-ए (Vitamin-A) की कमी हो सकती है। अगर विटामिन-डी या विटामिन-ए की कमी होती है, तो डॉक्टर सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स उनके शरीर के आवश्यकता अनुसार लेने की सलाह दे सकते हैं।

गर्भधारण करने वाली महिलाएं (Women of childbearing age)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and natural nutrients)

गर्भधारण करने वाली महिलाओं को फोलिक एसिड सप्लिमेंट्स (Folic Acid Supplement) के सेवन की सलाह दी जाती है। फॉलिक एसिड लेने की सलाह महिला के हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर सलाह दी जाती है।

सेहतमंद रहने के लिए क्या खाएं और कब खाएं यह जानना बेहद जरूरी है। इसलिए नीचे दिए इस वीडियो लिंक को क्लिक करें और डायट से जुड़ी पूरी जानकारी जानिए।

न्यूट्रिशन की कमी (Nutrient deficiencies)

सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and Natural nutrients)

कुछ लोगों में न्यूट्रिशन की कमी खासकर आयरन की कमी होने लगती है। ऐसे स्थिति में आयरन सप्लिमेंट्स (Iron supplements) लेने की सलाह दी जाती है। दरअसल आयरन की कमी की वजह से एनीमिया (Anaemia) का खतरा बढ़ जाता है।

इन ऊपर बताई गई स्थितियों में सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स के सेवन की सलाह दी जा सकती है।

और पढ़ें : Megaloblastic Anemia: मेगालोब्लास्टिक एनीमिया क्या है? जानिए इसके लक्षण और इलाज

नोट: बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक न्यूट्रिएंट्स या सिंथेटिक सप्लिमेंट्स का सेवन अपनी मर्जी से ना करें। जबतक इन न्यूट्रिएंट्स को लेने की सलाह आपके हेल्थ एक्सपर्ट ना करें तबतक किसी के भी कहने पर इन्हें अपने आहार का हिस्सा ना बनायें।

अगर आप सिंथेटिक और नैचुरल न्यूट्रिएंट्स (Synthetic and natural nutrients) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में भी पूछ सकते हैं, लेकिन अगर आप इनके सेवन से जुड़ी जानकारी जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा, क्योंकि आपके मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखकर सप्लिमेंट्स लेने की सलाह देंगे।

नीचे दिए इस क्विज को खेलिए और हेल्दी फूड एवं हेल्दी हेल्दी ड्रिंक्स से जुड़ी आपकी जानकारी कितनी है सही और गलत ये जानिए।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 16/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड