NIDDM पेशेंट्स में एक्सरसाइज के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस में सुधार होता है या नहीं?

    NIDDM पेशेंट्स में एक्सरसाइज के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस में सुधार होता है या नहीं?

    डायबिटीज यानी वो रोग, जिसमें रोगी का ब्लड ग्लूकोज लेवल सामान्य से अधिक बढ़ जाता है या रोगी का शरीर इसका ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इसके कई प्रकार हैं और उनमें से इसके गंभीर प्रकार को टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) कहा है। इसे NIDDM के नाम से भी जाना जाता है। डायबिटीज के लक्षणों से राहत पाने के लिए व्यायाम को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आज हम आपको जानकारी देने वाले हैं NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट (Glucose tolerance improvement after exercise in NIDDM patients) के बारे में। किंतु, NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट (Glucose tolerance improvement after exercise in NIDDM patients) से पहले NIDDM और ग्लूकोज टॉलरेंस के बारे में जान लेते हैं।

    NIDDM: पाएं इसके बारे में पूरी जानकारी (NIDDM)

    जैसा की पहले ही बताया गया है NIDDM डायबिटीज का एक प्रकार है। NIDDM की फुल फॉर्म है नॉन-इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज (Non-insulin-dependent diabetes), जो दिनों- दिन आम होती जा रही है। यह डायबिटीज सामान्य होने के साथ ही बेहद गंभीर भी है। इसके लक्षण हैं लगातार मूत्र त्याग, बार-बार भूख लगना, थकावट, दृष्टि का धुंधला होना, अधिक प्यास लगना आदि। हालांकि, कुछ मामलों में रोगी में इसका कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। यह रोग एक लाइफलॉन्ग डिजीज है और टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) से पीड़ित लोगों को इंसुलिन रेजिस्टेंस माना जाता है।

    यही नहीं, यह रोग मिडल एज या बुजुर्गों में होने की संभावना अधिक रहती है। लेकिन, बच्चों और टीनएजर्स को भी यह बीमारी प्रभावित कर सकती है खासतौर पर चाइल्डहुड ओबेसिटी से पीड़ित लोगों को। जीवनशैली में हेल्दी बदलाव जैसे सही आहार का सेवन, व्यायाम, वजन का सही होना आदि से NIDDM यानी नॉन-इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज (Non-insulin-dependent diabetes) के लक्षणों से राहत पाई जा सके। अब बात करते हैं NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट के बारे में। लेकिन, इससे पहले ग्लूकोज टॉलरेंस के बारे में जानकारी भी जरूरी है।

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    ग्लूकोज टॉलरेंस क्या है? (Glucose tolerance)

    ग्लूकोज टॉलरेंस को ग्लूकोज लोड के डिस्पोज की क्षमता के रूप में परिभाषित किया गया है और ग्लूकोज टॉलरेंस को ग्लूकोज डिस्पोजल के लिए इंपेयर्ड एबिलिटी के रूप में भी जाना जाता है। ग्लूकोज यानी शुगर हमारी बॉडी एनर्जी का मुख्य सोर्स है। हमें अपने आहार में माध्यम से ग्लूकोज प्राप्त होती है, जो ब्लड के माध्यम से हमारे पूरे शरीर यानी सेल्स तक पहुंचता है। जब यह ग्लूकोज ब्लड से मिलता है, तो इसे ब्लड ग्लूकोज और ब्लड शुगर के नाम से जाना जाता है। वहीं, इंसुलिन एक हार्मोन है जो ब्लड से ग्लूकोज को सेल्स तक पहुंचाता है। इससे हमें एनर्जी मिलती है और हमारा शरीर सही से काम कर पाता है। लेकिन, ब्लड शुगर लेवल (Blood glucose level) का संतुलित न होना एक बड़ी समस्या का कारण बन सकता है।

    हाय ब्लड ग्लूकोज लेवल (Blood glucose level) कई जटिलताओं का कारण भी बन सकता है जैसे किडनी, हार्ट या आई प्रॉब्लम आदि। हमारा शरीर ब्लड ग्लूकोज के प्रति किस तरह से रिस्पांस कर रहा है, इसके लिए ग्लूकोज टोलरेंस टेस्ट (OGTT) किया जाता है। अब जान लेते हैं NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट (Glucose tolerance improvement after exercise in NIDDM patients) के बारे में।

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    NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट (Glucose tolerance improvement after exercise in NIDDM patients)

    एक्सरसाइज डायबिटीज को मैनेज करने के लिए कई तरह से लाभदायक है जैसे ग्लूकोज अपटेक में, इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने और ग्लूकोज टॉलरेंस को बढ़ाने में आदि। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (American Diabetes Association) की मानें, तो प्रीडायबिटीज या डायबिटीज से पीड़ित लोगों को हर हफ्ते 150 मिनट मॉडरेट-इंटेंसिटी एक्सरसाइज या 90 मिनट्स तक गंभीर व्यायाम करना चाहिए। एक्सरसाइज से ग्लूकोज टॉलरेंस सुधर सकती है। इंपेयर्ड ग्लूकोज की स्थिति में एक्सरसाइज करना बेहद लाभदायक है। इंपेयर्ड ग्लूकोज एक प्रीडायबिटिक स्टेट है। यह नार्मल ग्लूकोज टॉलरेंस (Normal glucose tolerance) और डायग्नोज्ड डायबिटीज (Diagnosed diabetes) के बीच की स्थिति है। यानी, अगर आपके ग्लूकोज टॉलरेंस में समस्या है तो आप प्रीडायबिटीज स्टेज की स्थिति में हैं। यानी, NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट (Glucose tolerance improvement after exercise in NIDDM patients) महसूस करते हैं। आइए, जानते हैं इसके बारे में और अधिक।

    NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट,Glucose Tolerance Improvement After exercise In NIDDM Patients
    NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट,Glucose Tolerance Improvement After exercise In NIDDM Patients

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    NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट (Glucose tolerance improvement after exercise in NIDDM patients): क्या कहती है स्टडी, जानिए

    अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (American Diabetes Association) द्वारा एक स्टडी की गई। यह स्टडी दस ऐसे लोगों पर की गई जिनमें से सात लोगों को माइल्ड नॉन-इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज (Non-insulin-dependent diabetes) की समस्या थी और तीन को इम्पेयर्ड ग्लूकोज टॉलरेंस की समस्या थी। स्टडी के लिए उन्हें सात दिनों तक व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। इसके बाद ऐसा पाया गया कि सात दिनों तक व्यायाम करने से उनके शरीर के वजन या अधिकतम ऑक्सीजन की मात्रा में कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ। लेकिन, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि नियमित रूप से और लम्बे समय तक व्यायाम करने से डायबिटीज में लाभ होता है यानी इससे व्यक्ति की ग्लूकोज टॉलरेंस सुधरती है।

    यानी, नियमित और गंभीर एक्सरसाइज करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होती है और माइल्ड NIDDM.से पीड़ित लोगों की ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूव होती है। यही नहीं, एक हफ्ते तक व्यायाम करने से माइल्ड नॉन-इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज (Non-insulin-dependent diabetes) के रोगियों में ग्लूकोज टॉलरेंस थोड़ी सुधर सकती है, लेकिन इसके लिए नियमित व्यायाम करना जरूरी है। यह तो थी जानकारी NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट (Glucose tolerance improvement after exercise in NIDDM patients) के बारे में। अब व्यायाम के साथ ही NIDDM रोगियों को डायबिटीज के लक्षणों से राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए, जानें।

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    नॉन-इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज (Non-insulin-dependent diabetes) की स्थिति में किन चीजों का रखें ध्यान?

    नॉन-इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज (Non-insulin-dependent diabetes) यानी वो डायबिटीज जिसमें रोगी को इंसुलिन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इस डायबिटीज को मैनेज करने के लिए व्यायाम करना तो जरूरी है ही, इसके साथ ही कई अन्य चीजों का भी ध्यान रखना चाहिए, जैसे:

    • अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो आप अपने खानपान का खास ख्याल रखें। अपने आहार में फल, सब्जी और अनाज आदि को शामिल करें। इसके साथ ही अपने डॉक्टर और डायटीशियन की सलाह अवश्य लें।
    • अपने वजन को सही बनाए रखें। अगर आपका वजन अधिक है, तो उसे कम करने के उपाय सोचें जैसे अपने खानपान का ध्यान रखें, व्यायाम करें आदि।
    • तनाव से बचें। तनाव को डायबिटीज का एक रिस्क फैक्टर माना जाता है। ऐसे में तनाव से बचना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप मेडिटेशन या योगा करें, म्यूजिक सुनें आदि। इसके साथ ही अपनी नींद को भी पूरा करें।
    • डायबिटीज की समस्या के लक्षणों से राहत पाने और एक सामान्य जीवन जीने के लिए आपके लिए नियमित डॉक्टर की सलाह लेना और नियमित जांच कराना जरूरी है।

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    NIDDM रोगियों में व्यायाम के बाद ग्लूकोज टॉलरेंस इम्प्रूवमेंट (Glucose tolerance improvement after exercise in NIDDM patients) के बारे में यह जानकारी आपको अवश्य पसंद आई होगी। अपने शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को सही बनाए रखने के लिए व्यायाम को बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसलिए, अगर आपको यह समस्या है तो आप दिन में कुछ समय एक्सरसाइज के लिए अवश्य निकालें। इस दौरान कौन सी एक्सरसाइज करना आपके लिए फायदेमंद है, इसके बारे में भी अपने डॉक्टर या एक्सपर्ट से अवश्य जान लें। डायबिटीज ही नहीं बल्कि संपूर्ण रूप से हेल्दी रहने के लिए भी एक्सरसाइज करना फायदेमंद है।

    अगर आपके मन में इस बारे में कोई भी सवाल है, तो आप अपने डॉक्टर से इस बार में अवश्य पूछें। आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड