स्टडी: टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर पर पड़ सकता है प्रभाव!

    स्टडी: टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर पर पड़ सकता है प्रभाव!

    टाइप 2 डायबिटीज और डायस्टोलिक प्रेशर (Type 2 Diabetes and Diastolic Pressure) दो अलग-अलग तरह की शारीरिक समस्या है। कुछ लोग टाइप 2 डायबिटीज की समस्या के शिकार होते हैं, तो कुछ डायस्टोलिक प्रेशर के। लेकिन जब दोनों ही परेशानी एकसाथ शुरू हो जाए तो शारीरिक परेशानी बढ़ने के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी बढ़ जाती है कि आखिर टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes) को कैसे मैनेज किया जाए? खैर कहतें हैं चिंता करने से तकलीफ कम नहीं होती है, इसलिए आप चिंता ना करें और टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को यहां समझें और स्वस्थ रहें।

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    क्या है टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर की समस्या? (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes)

    टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes)

    टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर की समस्या को समझने से पहले टाइप 2 डायबिटीज और डायस्टोलिक प्रेशर को पहले एक-एक कर समझते हैं और फिर जानेंगे टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes) से जुड़े रिसर्च रिपोर्ट्स के बारे में।

    टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) क्या है?

    जब बॉडी में इंसुलिन लेवल लो होने लगे और बॉडी इंसुलिन का ठीक तरह से इस्तेमाल ना कर पाए, तो ऐसे स्थिति में डायबिटीज टाइप-2 (Type 2 Diabetes) की समस्या शुरू हो जाती है। टाइप-2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) सामान्य है और यह 40 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन कम उम्र के लोगों में भी टाइप-2 डायबिटीज की समस्या दस्तक दे सकती है। डायबिटीज अपने साथ कई अन्य गंभीर बीमारियों का भी रास्ता खोल देती है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज के मरीजों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular Disease) का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ब्लड शुगर लेवल बैलेंस में रखना बेहद जरूरी है। इसलिए आर्टिकल में स्टैटिन और एक्सरसाइज इंटॉलरेंस (Statins And Exercise Intolerance) को भी समझेंगे, जिससे बॉडी के इम्बैलेंस होते ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को बैलेंस में रखने में मदद मिल सकती है।

    डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure) की समस्या?

    डायस्टोलिक प्रेशर को अगर आसान शब्दों में समझें, तो जब ब्लड प्रेशर चेक किया जाता है तो दो रीडिंग दिखाई देती है और वह है 120/80 mmHg इस रीडिंग में 120 सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर है और नीचे वाली रीडिंग यानी 80 डायस्टोलिक। नीचे की रीडिंग आर्ट्रिस के प्रेशर को दर्शाती है, जब हार्ट बीट के बीच के रेस्ट करती है और यही वो समय होता है जब हार्ट को ब्लड (Blood) एवं ऑक्सिजन (Oxygen) की पूर्ति होती है। डायस्टोलिक प्रेशर को इस प्रकार समझें-

    • 80 से कम की रीडिंग नॉर्मल (Normal) मानी जाती है।
    • 80 से 89 की रीडिंग हायपरटेंशन स्टेज 1 (Stage 1 Hypertension) की स्थिति होती है।
    • 90 या इससे ज्यादा रीडिंग होना हायपरटेंशन स्टेज 2 (Stage 2 Hypertension) की स्थिति कहलाती है।
    • 120 या इससे ज्यादा रीडिंग बढ़ने पर इस हायपरटेंसिव क्राइसिस (Hypertensive crisis) कहलाती है।

    ये है टाइप 2 डायबिटीज और डायस्टोलिक प्रेशर ( Type 2 Diabetes and Diastolic Pressure) की कहानी, लेकिन टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes) से जुड़े शोध क्या हैं इसे समझते हैं आगे।

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    टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर से जुड़े क्या हैं रिसर्च रिपोर्ट्स? (Research reports on Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes)

    टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes)

    अलग-अलग रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार डायबिटीज की वजह से बॉडी में मौजूद छोटे-छोटे ब्लड वेसल्स (Blood vessels) को धीरे-धीरे डैमेज करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। इसलिए टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes) बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है, जो हार्ट अटैक (Heart attack) और स्ट्रोक (Stroke) जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार टाइप 2 डायबिटीज और डायस्टोलिक प्रेशर (Type 2 Diabetes and Diastolic Pressure) के मरीजों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि बीमारी कितनी भी गंभीर क्यों ना हो ऐसे डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह और सही देखभाल से किसी भी बीमारी को हराया जा सकता है।

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    टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण क्या हो सकते हैं? (Symptoms of Type 2 Diabetes)

    टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं ।जैसे:

    टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण नजर आने पर एक्सरसाइज (Workout) नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों को एक्सरसाइज करने से पहले भी डॉक्टर से बॉडी के अनुसार कौन-कौन से वर्कआउट किये जा सकते हैं उसे भी जरूर समझें। ये सभी डायबिटीज के लक्षण (Diabetes symptoms) भी हैं और लक्षण बढ़ने पर परेशानी भी बढ़ सकती है। इसलिए इसे इग्नोर ना करें।

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    ग्लूकोज लेवल कंट्रोल करने के लिए क्या करें? (Tips to control Blood Sugar Level)

    ग्लूकोज लेवल कंट्रोल रखने के लिए निम्नलिखित टिप्स फॉलो करें-

    • इंसुलिन (Insulin) का सेवन डॉक्टर द्वारा बताए अनुसार ही लें ।
    • एक्सरसाइज, योगासन या वॉकिंग शरीर को स्वस्थ्य रखने के साथ-साथ डायबिटीज कंट्रोल करने में भी सहायक है। इसलिए रोजाना एक्सरसाइज (Workout), योगासन (Yoga) या वॉकिंग (Walking) करें।
    • शरीर में पानी की कमी भी ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को इमबैलेंस करने का काम कर सकती है। इसलिए सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज मरीजों को जूस या डायट सोडा का सेवन ना कर ताजे पानी का सेवन करना चाहिए।
    • ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने के लिए हाई प्रोटीन फूड (High Protein Food) का सेवन करना चाहिए।
    • डायबिटीज मरीजों को डायबिटिक मील (Diabetes meal) नियमित फॉलो करना चाहिए।

    इन ऊपर बताये पांच टिप्स डायबिटीज पेशेंट्स को जरूर फॉलो करना चाहिए। ऐसा करने से ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) इमबैलेंस होने का खतरा कम हो सकता है और आप हेल्दी रह सकते हैं।

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    डॉक्टर से कब संपर्क करना है जरूरी? (Consult Doctor if-)

    निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है। जैसे:

    • बार-बार भूख (Increased hunger) लगना।
    • अधिक प्यास (Increased thirst) लगना।
    • बार-बार पेशाब (Frequent urination) जाना
    • बॉडी में एनर्जी (Energy loss) की कमी।
    • वजन कम (Weight loss) होना या ज्यादा होना।
    • थकान (Fatigue) महसूस होना
    • मुंह सूखना।
    • त्वचा में खुजली (Itching) की समस्या होना।
    • धुंधला दिखाई (Blurred vision) देना।

    अगर आप टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) या टाइप 2 डायबिटीज में डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes) से जुड़े सवालों का जवाब तलाश कर रहें थें, तो उम्मीद करते हैं कि टाइप 2 डायबिटीज और डायस्टोलिक प्रेशर (Type 2 Diabetes and Diastolic Pressure) के बारे में समझने में सुविधा हुई होगी। वैसे अगर आप या आपके कोई भी करीबी डायबिटिक हैं, तो उन्हें ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को बैलेंस बनाये रखने की सलाह दें, जिससे अन्य बीमारियों से दूर रहने में मदद मिल सकती है।

    स्वस्थ रहने के लिए अपने डेली रूटीन में योगासन शामिल करें। योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों का जवाब है नीचे दिए इस वीडियो लिंक में। वीडियो लिंक पर क्लिक कर योगासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को समझें।

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    सूत्र

    Diastolic pressure in type 2 diabetes: can target systolic pressure be reached without “diastolic hypotension”?/https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/18227493/#:~:text=Baseline%20blood%20pressure%20data%20from,of%20%3C130%2F80%20mmHg./ Accessed on 17/02/2022

    Diastolic Pressure in Type 2 Diabetes: Can target systolic pressure be reached without “diastolic hypotension”? /https://diabetesjournals.org/care/article/31/Supplement_2/S249/24832/Diastolic-Pressure-in-Type-2-DiabetesCan-target/ Accessed on 17/02/2022

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    Health matters: preventing Type 2 Diabetes/https://www.gov.uk/government/publications/health-matters-preventing-type-2-diabetes/health-matters-preventing-type-2-diabetes/ Accessed on 17/02/2022

    लेखक की तस्वीर badge
    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/02/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड