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कपिंग थेरिपी क्या है? जान लीजिए इसके फायदे

कपिंग थेरिपी क्या है? जान लीजिए इसके फायदे

कस्वस्थ्य रहने के लिए आहार और उपचार का तो हम सभी ध्यान रखते हैं, लेकिन इन दिनों हेल्थ एक्सपर्ट कुछ विशेष थेरिपी लेने की भी सलाह देते हैं। थेरिपी कई अलग-अलग तरह की होती है, जिनमें से फिजियोथेरिपी की चर्चा ज्यादा होती है। बॉलीवुड की अभिनेत्रियां अक्सर एक खास थेरिपी की फोटो शेयर करती रहती हैं। जिसे कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) के नाम से जाना जाता है। आज इस आर्टिकिल में समझेंगे कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) क्या है? इसकी इंपोर्टेंस क्या है? और इससे जुड़े फैक्ट्स क्या हैं?

कपिंग थेरिपी

कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) क्या है?

कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) की मदद से बॉडी पेन से छुटकारा पाया जा सकता है। रिसर्च के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को मसल्स से जुड़ी परेशानी है या टिशू से जुड़ी कोई समस्या है, तो उसे दूर करने के लिए ऑल्टरनेट थेरिपी की मदद ली जा सकती है। इसमें स्किन पर कप प्लेस कर सक्शन क्रिएट किया जाता है। सक्शन ब्लड फ्लो के साथ हीलिंग और चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकता है। इससे शरीर के मसल्स ढ़ीले होते हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार बॉडी में होने वाली सूजन संबंधी परेशानी भी कपिंग थेरिपी की मदद से ठीक की जाती है। ऐसा नहीं है कि कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) कोई नई थेरिपी है बल्कि यह काफी पुरानी थेरिपी है। चायना में इस थेरिपी का इस्तेमाल विशेष रूप से किया जाता है। कपिंग थेरिपी को हिजामा भी कहा जाता है। कपिंग थेरिपी के लिए ग्लास (कांच) , बैम्बू (बांस), सिलिकॉन और मिट्टी के बर्तन (कप) का इस्तेमाल किया जाता है।

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कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) कितनी तरह की होती है?

कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) या ऑल्टरनेट थेरिपी दो अलग-अलग तरह की होती है।

  1. ड्राई कपिंग थेरिपी (Dry cupping therapy)

  2. वेट कपिंग थेरिपी (Wet cupping therapy)

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1. ड्राई कपिंग थेरिपी (Dry cupping therapy)

ड्राई कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) के दौरान गर्म कप को ऑयल में डुबो कर स्किन (बॉडी) पर विशेषकर एक्यूप्रेशर पॉइंट पर लगाया जाता है। ऐसा करने से वैक्यूम क्रिएट होता है और अंदर मौजूद हवा ठंडी हो जाती है। दरअसल अगर इसे सामान्य भाषा में समझा जाए तो कपिंग के दौरान स्किन खिंच जाती है। इसी तरह से ड्राई कपिंग थेरिपी की जाती है, जिससे शारीरिक परेशानी दूर होती है। कई बार ड्राई कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) के दौरान रुई (कॉटन) को एल्कोहॉल में भिगोकर जलाया जाता है और फिर इससे कप को गर्मकर कप से थेरिपी दी जाती है। ड्राई कपिंग थेरिपी को कुछ लोग फायर कोइंग थेरिपी के नाम से भी जानते हैं। कप से की जाने वाली इस थेरिपी के दौरान गर्म कप को त्वचा पर 10 मिनट तक रखा जाता है।

कपिंग थेरिपी

2. वेट कपिंग थेरिपी (Wet cupping therapy)

ड्राई कपिंग थेरिपी के दौरान कप को त्वचा पर रखा जाता है। लेकिन, वेट कपिंग थेरिपी के दौरान कप को तुरंत शरीर से अलग कर लिया जाता है। रिसर्च के अनुसार वेट कपिंग थेरिपी के दौरान स्किन से खून भी निकाला जाता है। खून निकालने के लिए सुई की जैसी प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

कपिंग थेरिपी

कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) के फायदे क्या हैं?

साल 2015 में जर्नल ऑफ ट्रेडिशनल एंड कॉम्प्लिमेंटरी मेडिसिन द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) से दर्द, एक्ने की समस्या और हर्पीज जॉस्टर जैसी परेशानी को दूर करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही इससे होने वाले फायदे निम्नलिखित हैं। जैसे-

ब्लड सर्कुलेशन (Blood circulation) बेहतर होता है

कपिंग थेरिपी या ऑल्टरनेट थेरिपी की मदद से शरीर में रक्त संचार बेहतर तरीके से होता है। अगर शरीर के किसी हिस्से में किसी कारण ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो पा रहा है, तो ग्लास (कांच) , बैम्बू (बांस), सिलिकॉन और मिट्टी के बर्तन से बने कप से थेरिपी दी जाती है। ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने के साथ-साथ नर्व भी स्ट्रॉन्ग होती है। इसलिए अगर आपको सर्कुलेशन संबंधी कोई परेशानी है, तो थेरिपी एक्सपर्ट या स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह से कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) ले सकते हैं।

बॉडी होती है डिटॉक्स (Body detox)

शरीर को फिट रखने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन किया जाता है लेकिन, वातावरण के प्रदूषित होने की वजह से शरीर में टॉक्सिन आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। ऐसी स्थिति में शरीर से टॉक्सिन निकालने के लिए भी ऑल्टरनेट थेरिपी (Cupping therapy) दी जाती है। दरअसल कपिंग थेरिपी की मदद से शरीर का रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे शरीर के हर हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन सही तरह से होता है।

सूजन की समस्या (Swelling problem) दूर होती है

किसी कारण शरीर में हुई सूजन को दूर किया जा सकता है। दरअसल बॉडी में इंफ्लमेशन की समस्या ब्लड सर्कुलेशन ठीक तरह से नहीं होने के कारण होती है। ऑल्टरनेट थेरिपी लेने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने के साथ ही सूजन धीरे-धीरे ठीक होने लगती है।

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स्किन प्रॉब्लम (Skin problem) कम होती हैं

अगर त्वचा संबंधी परेशानी होती है, तो इस परेशानी को भी इस थेरिपी की मदद से दूर किया जा सकता है। रिसर्च के अनुसार ऑल्टरनेट थेरिपी बैड बैक्टीरिया को दूर करने में मददगार होती है। इसलिए स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा मिल जाता है।

एंटी एजिंग (Anti aging) में मददगार

एंटी एजिंग से बचने के लिए कई फेशियल जैसे अन्य विकल्प अपनाए जाते हैं, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार ऑल्टरनेट थेरिपी का भी विकल्प अपनाया जा सकता है। इससे स्किन दाग-धब्बों से फ्री और झुर्रियों से मुक्त मिलती है।

एंटी स्ट्रेस भी है ये थेरिपी

बदलती जीवनशैली और खान-पान की वजह से आजकल तनाव का दस्तक देना आसान हो चुका है। कई बार हम सभी स्ट्रेस से बचने के लिए मसाज का ऑप्शन अपनाते हैं। वैसे अब कपिंग थेरिपी से तनाव को दूर किया जा सकता है।

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डायजेशन बेहतर

अगर आपको डायजेशन से जुड़ी परेशानी रहती है या अगर आपको कब्ज की समस्या है, तो कपिंग थेरिपी आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। यह भी ध्यान रखें की अगर आपको कब्ज की समस्या रहती है और अगर यह परेशानी लंबे वक्त तक बनी रहती तो इसका इलाज जल्द से जल्द करें क्योंकि कब्ज की समस्या कई अन्य बीमारियों को दस्तक दे सकती है।

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जानिए कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) से जुड़ी कुछ अहम जानकारी

कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) की वजह से शरीर में जलन, चोट या इंफेक्शन का खतरा भी बना रहता है। इसलिए इस थेरिपी के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए डॉक्टर और थेरिपी एक्सपर्ट से सलाह लें। नुकसान से बचने के लिए अपनी मर्जी से इस थेरिपी का सहारा न लें। अगर आप इस थेरिपी का सहारा ले रहें हैं, तो एक्सपर्ट से यह अवश्य जाने कि आपको कब-कब इस थेरिपी को लेने की जरूरत है। बेहतर होगा की कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) एक्सपर्ट से ही लें।

अगर आप कपिंग थेरिपी (Cupping therapy) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 02/05/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड