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Anti-Glomerular Basement Membrane: एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट क्या है?

परिभाषा|सावधानियां|प्रक्रिया|परिणामों को समझें
Anti-Glomerular Basement Membrane: एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट क्या है?

परिभाषा

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट (Anti-Glomerular Basement Membrane) क्या है?

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट गुडपोस्चर सिंड्रोम और नेफ्रैटिस को डायग्नोस करने के लिए किया जाता है। गुडपोस्चर सिंड्रोम एक इम्यून डिसऑर्डर है जो एंटीबॉडीज को ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन और पल्मोनरी एल्वियोली के खिलाफ कर देता है। ये एंटीबॉडीज थिनए इम्यून सिस्टम को सक्षम बनाता है जिससे किडनी और फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है।

मरीज एक ही समय में तीन समस्याओं से पीड़ित होते हैं- ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस, पल्मोनरी हेमोरेज और ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन एंटीबॉडी की मौजूदगी। इम्यून ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस से पीड़ित करीब 60 से 75 प्रतिशत मरीजों को फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं होती हैं।

और पढ़ेंः Intravenous Pyelogram: इंट्रावेनस पायलोग्राम टेस्ट क्या है?

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट क्यों किया जाता है?

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट आपके डॉक्टर को गुर्दे और फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारियों का निदान करने में मदद कर सकता है। इन्हें एंटी-जीबीएम रोगों के रूप में माना जाता है।

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट की सलाह डॉक्टर तब देते हैं जब उन्हें संदेह होता है कि आपको गुडपोस्चर सिंड्रोम या लुपस नेफ्राइटिस की स्वास्थ्य स्थिति हो सकती है। इन दोनों बीमारियों के लक्षण निम्न हो सकते हैंः

  • वजन कम होना (Weight loss)
  • ठंड लगने के साथ ही बुखार होना (Chills and Fever)
  • हेमोप्टाइसिस (Hemoptysis)
  • मितली या उल्टी (Nausea or vomiting)
  • सीने में दर्द (Chest pain)
  • फफड़े और किडनी से रक्तस्राव के कारण एनिमिया (Anemia due to fungal and kidney bleeding)
  • कमजोर फेफड़े (रेस्पायरेट्री डिसीज) (Respiratory disease)
  • खराब किडनी (Kidney damage)
  • खांसी में खून आना (coughing up blood)
  • थकान महसूस होना (Fatigue)

सावधानियां

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट से पहले मुझे क्या पता होना चाहिए?

आपका डॉक्टर इम्यूनोहिस्टोकेमिकल तकनीकों का उपयोग करके एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट से निरीक्षण करने के लिए व्यक्ति के फेफड़े या गुर्दे की बायोप्सी कर सकते हैं। गुडपोस्चर सिंड्रोम के डायग्नोस के लिए सेरोलॉजी अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय प्रक्रिया मानी जाती है, खासतौर पर तब जब मरीज के लिए बायोप्सी करना मुश्किल हो या कॉन्ट्राइंडिकेटेड हो।

सिरम एंटीबॉडी लेवल इस बात की निगरानी में मदद करता है कि मरीज उपचार के प्रति कितनी अच्छी प्रतिक्रिया दे सकता है।

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट कराने से पहले इससे जुड़ी चेतावनियों और बरते जाने वाले एहतियातों को समझना जरूरी होता है। इससे संबंधित किसी भी तरह के प्रश्न या जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं।

और पढ़ेंः Fetal Ultrasound: फेटल अल्ट्रासाउंड क्या है?

प्रक्रिया

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट के लिए कैसे तैयारी करनी चाहिए?

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट कराने से पहले आपको किस तरह की तैयारी करनी चाहिए, इसके लिए आपके डॉक्टर और उचित सलाह दे सकते हैं, जिनमें शामिल हो सकते हैंः

जब भी आपको डॉक्टर एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट की सलाह दें, तो उस दौरान आपको अपने डॉक्टर के द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों और स्पष्टीकरण को ध्यान से सुनना चाहिए। आपके डॉक्टर टेस्ट से पहले आपके आपको कुछ घंटे का उपवास रखने के लिए भी कह सकते हैं। सामान्य तौर पर इस टेस्ट को कराने से पहले आपको छह से आठ घंटे का उपवास रखना पड़ सकता है। हालांकि, इस दौरान आप पानी या कुछ तरह के तरल पदार्थ अपने डॉक्टर की सलाह पर पी सकते हैं।

यदि आपको फेफड़े या किडनी की बायोप्सी करके टिशू सैंपल देना है तो इसकी प्रक्रिया कैसे की जाएगी, इस बारे में अपने डॉक्टर के स्पष्टकीकरण को ध्यान से सुनना चाहिए। टेस्ट से पहले आपके डॉक्टर आपको इस बात की जानकारी देंगे कि आपके टेस्ट की प्रक्रिया कैसे पूरी की जाएगी। इसमें कितना समय लग सकता है और आपको इस दौरान कैसा महूसस हो सकता है।

आपके डॉक्टर टेस्ट के दौरान आपको शॉर्ट स्लीव के कपड़े पहन कर आने की सलाह दे सकते हैं, ताकि डॉक्टर को आपके शरीर से खून का नमूना लेने में आसानी हो।

और पढ़ें : Allergy Blood Test : एलर्जी ब्लड टेस्ट क्या है?

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट के दौरान क्या होता है?

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट के दौरान निम्न प्रक्रिया की जाती है, जिनमें शामिल हैंः

  • इंजेक्शन लगाने से पहले इंजेक्शन वाली जगह को दवा से साफ किया जाता है। ताकि, किसी तरह का इंफेक्शन न हो और खून का नमूना पूरी तरह से स्वच्छ हो।
  • इसके बाद आपकी बाजू के ऊपर एक एलास्टिक बैंड लगाया जाएगा, ताकि आपकी नसों में ऊभार आ जाए।
  • इसके बाद नस में सुई डाली जाती है। यदि जरूरत हुई तो एक से अधिक बार सुई लगाई जा सकती है।
  • सुई के साथ एक छोटी ट्यूब अटैच होती है जिसमें ब्लड जमा होता है।
  • ब्लड निकालने के बाद बांह के ऊपर बंधा एलास्टिक बैंड निकाल दिया जाता है।
  • आपकी बाजू से खून का नमूना लने के बाद इंजेक्शन लगाए गए स्थान से खून के बहाव को रोकने के लिए आपकी बांह के ऊपर बैंडेज लगाया जा सकता है या कॉटन बॉल की मदद से उस जगह पर प्रेशर दिया जा सकता है, जिससे खून का बहाव कम हो जाए।
  • बाजू से खून का नमूना लेने की प्रक्रिया के दौरान आपको दर्द का भी अनुभव हो सकता है। आपका या अनुभव आपके डॉक्टर या नर्स के अनुभव और आपकी संवेदनशीलता पर निर्भर कर सकता है।

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट के बाद क्या होता है?

एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निम्न प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिनमें शामिल हो सकते हैंः

  • नसों से खून निकालने के बाद इंदेक्शन लगाए गए जगह पर थोड़ा दवाब डालकर बैंडेज लगाया जाता है। ताकि, खून न बहे। खून का नमूना देते ही आप सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू कर सकते हैं। इससे आपके शरीर पर किसी भी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट के बारे में किसी तरह का संदेह होने और दी गई सलाह को अच्छी तरह समझने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
  • कुछ स्थितियों में इंजेक्शन लगाई गए स्थान में दर्द, सूजन, लालिमा या खुजली की समस्या हो सकती है। अगर आपको यह समस्या 10 से 12 घंट के बाद भी बनी रहती है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
और पढ़ें : HCG Blood Test: जानें क्या है एचसीजी ब्लड टेस्ट?

परिणामों को समझें

मेरे परिणामों का क्या मतलब है?

सामान्य परिणाम:

  • टिशू:
  • निगेटिव: इम्यूनोफ्लोरेसेंस का कोई निशान नहीं, जो किडनी और फेफड़ों के सेल मेंब्रेन में पाया जाता है।
  • ब्लड: एंजाइम इम्यूनोसाय (EIA) द्वारा
  • निगेटिव: <20 यूनिट;
  • फल्कचुएशन (बॉर्डलाइन): 20-100 यूनिट

असामान्य परिणाम: ब्लड (EIA)> 100 यूनिट

  • गुड पोस्चर सिंड्रोम (Good posture syndrome)
  • ओटोइम्यून ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस डिसीज (Autoimmune Glomerulonephritis Disease)
  • लुपस नेफ्राइटिस (Lupus Nephritis)

सभी लैब और अस्पताल के आधार पर एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट की सामान्य सीमा अलग-अलग हो सकती है। परीक्षण परिणाम से जुड़े किसी भी सवाल के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

और पढ़ें: Coronary Calcium Scan: कोरोनरी कैल्शियम स्कैन क्या है?

उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में एंटी ग्लोमेरूलर बेसमेंट मेंब्रेन टेस्ट से जुड़ी जानकारी दी गई है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो कृपया इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

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बीएमआई कैलक्युलेटर

अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें और पता करें कि क्या आपका वजन हेल्दी है। आप इस उपकरण का उपयोग अपने बच्चे के बीएमआई की जांच के लिए भी कर सकते हैं।

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सूत्र

Pagana, Kathleen D, and Timothy J. Pagana. Mosby’s Manual of Diagnostic and Laboratory Tests. St. Louis, Mo: Mosby/Elsevier, 2010. Printed. Page 80 – 81.

Goodpasture Syndrome (Anti-glomerular Basement Membrane Antibody Disease). https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK459291/. Accessed on 18 May, 2020.

Anti-GBM Disease. https://unckidneycenter.org/kidneyhealthlibrary/glomerular-disease/anti-gbm-disease/. Accessed on 18 May, 2020.

Anti-Glomerular Basement Membrane Disease. https://cjasn.asnjournals.org/content/12/7/1162. Accessed on 18 May, 2020.

Anti-glomerular basement membrane blood test. https://medlineplus.gov/ency/article/003524.htm. Accessed on 18 May, 2020.

anti-gbm-antibody.pdf. https://www.childrensmn.org/references/Lab/serology/anti-gbm-antibody.pdf. Accessed on 18 May, 2020.

Glomerular Basement Membrane Antibody. https://pathwest.health.wa.gov.au/testdirectory/testdetail.aspx?TestID=502. Accessed on 18 May, 2020.

लेखक की तस्वीर badge
Kanchan Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 01/09/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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