home

हम इसे कैसे बेहतर बना सकते हैं?

close
chevron
इस आर्टिकल में गलत जानकारी दी हुई है.
chevron

हमें बताएं, क्या गलती थी.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
इस आर्टिकल में जरूरी जानकारी नहीं है.
chevron

हमें बताएं, क्या उपलब्ध नहीं है.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
हम्म्म... मेरा एक सवाल है
chevron

हम निजी हेल्थ सलाह, निदान और इलाज नहीं दे सकते, पर हम आपकी सलाह जरूर जानना चाहेंगे। कृपया बॉक्स में लिखें।

wanring-icon
यदि आप कोई मेडिकल एमरजेंसी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या पास के एमरजेंसी रूम और केयर सेंटर जाएं।

लिंक कॉपी करें

इन वजहों से आ जाते हैं टॉवेल में कीटाणु, शरीर में प्रवेश कर पहुंचा सकते हैं बड़ा नुकसान

इन वजहों से आ जाते हैं टॉवेल में कीटाणु, शरीर में प्रवेश कर पहुंचा सकते हैं बड़ा नुकसान

अच्छी लाइफस्टाइल के लिए जरूरी है कि आपके रहन- सहन के साथ खानपान और दिनचर्या सही हो। कहीं भी हल्की सी भी चूक आपको बीमार कर सकती है। यदि टॉवेल को नियमित रूप से साफ न किया जाए तो यह परेशानी का कारण बन सकता है। हम सोच भी नहीं सकते उससे ज्यादा टॉवेल में कीटाणु हो सकते हैं। यदि आप टॉवेल को सप्ताह में एक बार साफ करके यह सोचते हैं कि मैं इसकी सफाई ठीक से कर रहा हूं तो बता दें कि यह नाकाफी है। आइए इस आर्टिकल में जानते हैं टॉवेल में कीटाणु से जुड़े कई अहम तथ्य।

यह भी पढ़ें :

ऐसे बढ़ते जाते हैं कीटाणु

हम सभी तभी टॉवेल का इस्तेमाल करते हैं जब नहाकर बाथरूम से बाहर निकलते हैं, ऐसे में भला टॉवेल में कीटाणु कहां होते होंगे, यह सोचना गलत है। एनवाईयू स्कूल ऑफ मेडिसिन की पैथोलॉजी व माइक्रोबायोलजी विभाग की क्लीनिकल प्रोफेसर पीएचडी फिलिप टायरनो ने कहा- जब नहाकर टॉवेल का इस्तेमाल करते हैं तो उस स्थिति में टॉवेल में कीटाणु चिपक जाते हैं। एक बार जब टॉवेल में कीटाणु चिपक जाते हैं तो वो अपनी संख्या बढ़ाते जाते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की माइक्रोबायोलॉजी प्रोफेसर डॉ. चक ग्रेबा ने कहा कि दिन ब दिन जैसे-जैसे आप उसका इस्तेमाल करते हैं टॉवेल में कीटाणु की संख्या में इजाफा होता रहता है। टॉवेल में कीटाणु के बारे में डॉ. ग्रेबा के शोध से यह भी पता चला कि नए टॉवेल की तुलना में यूज किए हुए टॉवेल में करीब हजार से भी अधिक कोलिफॉर्म बैक्टीरिया होते हैं। अंधेरा और मॉश्चर युक्त जगहों पर बैक्टीरिया काफी तेजी से पनपते हैं वहीं लंबे समय तक जीवित भी रहते हैं। वहीं यदि बाथरूम में टॉवेल को रखा जाए और दरवाजा बंद हो तो उसमें लंबे समय तक बैक्टीरिया जीवित रह सकते हैं। ऐसे में जर्म की बात करें तो आपके बाथरूम में टॉयलेट नहीं बल्कि आपके टॉवेल सबसे बड़े जर्म स्पॉट में से एक है।

इंफेक्शन और एक्ने का खतरा

डॉ. ग्रेबा के अनुसार टॉवेल में कीटाणु होने के कारण उसका इस्तेमाल करने से किसी को भी इंफेक्शन की संभावना होती है। यदि आप जोरों से या रगड़-रगड़ कर टॉवेल का इस्तेमाल करते हैं तो उस कारण आपकी स्किन में स्क्रेचेस आ सकते हैं। स्किन छिलने के कारण उसमें बैक्टीरिया जा सकता है, और यहां से वह शरीर में जा सकता है।

इंफेक्शियस डिजीज सोसाइटी ऑफ अमेरिका की स्पोकपर्सन अरोन ग्लैट ने कहा- यह सुनने में काफी अजीब लगता है कि टॉवेल का इस्तेमाल करने या टॉवेल में कीटाणु होने के कारण आप बीमार पड़ सकते हैं। सिर्फ जर्म की वजह से आप बीमार नहीं पड़ते बल्कि बीमारी होने की संभावना तब काफी बढ़ जाती है जब आप किसी दूसरे का टॉवेल इस्तेमाल करते हैं।

यदि आपको एक्ने की बीमारी है तो यह स्वभाविक है कि आप बार-बार स्किन को धोने के बाद टॉवेल का इस्तेमाल करते होंगे। वहीं किसी दूसरे का या टॉवेल में कीटाणु होने के कारण उसका इस्तेमाल करने से वो आपकी फुंसियों के जरिए शरीर में बैक्टीरिया चला जाएगा, वहीं अंदर ही अंदर काफी कीटाणुओं को बढ़ाएगा।

यह भी पढ़ें: पेपर टॉवेल (टिश्यू पेपर) या हैंड ड्रायर्स: कोरोना महामारी के समय हाथों को साफ करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

गंदे टॉवेल में होते हैं माइक्रोब्स

टॉवेल में कीटाणु की जहां तक बात है तो गंदे टॉवेल में काफी मात्रा में माइक्रोब्स होते हैं, इसके कारण इंफेक्शन हो सकता है। टॉवेल में कीटाणु इसलिए भी होते हैं क्योंकि जितनी बार भी आप टॉवेल से स्किन साफ करते हैं उतनी बार आपके स्किन के कीटाणु उसमें आ जाते हैं। अपने ही शरीर से कीटाणु के आने के कारण उनमें मौजूद कई कीटाणु के कारण कोई बीमारी नहीं होती। यूनिवर्सिटी ऑफ मेकहेगन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की एपडेल्मोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर एमिली मार्टिन ने कहा कि हमारे शरीर की खासियत है कि यह पर्यावरण में मौजूद माइक्रोब्स के बीच स्वस्थ रह सकता है।

टॉवेल धोने संबंधी जरूरी जानकारी

  • किसी भी टॉवेल का शरीर पर यदि एक बार भी इस्तेमाल हो तो उसे धोना चाहिए।
  • जिम टॉवेल बैग में घंटों तक रहते हैं, उसके एक बार इस्तेमल करने के बाद धोना जरूरी होता है।
  • बाथरूम में रखे टॉवेल अच्छे से नहीं सूखते हैं, उन्हें सुखाना जरूरी होता है।
  • यदि आपको एक्जिमा या स्किन संबंधी बीमारी है तो टॉवेल का एक बार इस्तेमाल करने के बाद भी धोना चाहिए।

कैसे रखा जाए अपने टॉवेल को साफ?

2013 में आए शोध में पता चला कि बाथरूम में रखे टॉवेल को यदि न धोएं व बार-बार इस्तेमाल करें तो उसमें करीब 25 फीसदी तक ई कोलाई बैक्टीरिया हो सकते हैं। यह बात सच है कि बाथरूम में रखें 90 फीसदी टॉवेल में बैक्टीरिया होते ही हैं।

टॉवेल में कीटाणु न हो इसके लिए आपको काफी सचेत रहने की आवश्यकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि आप किसी दूसरे को टॉवेल इस्तेमाल करने के लिए न दें। वहीं कम से कम दो से तीन दिनों में इसकी सफाई करें, कोशिश करें कि अधिक समय के लिए उसे बाहर ही रखें। ऐसा करने से उसमें मौजूद माइक्रोऑर्गेनिज्म काफी हद तक मर जाएंगे। ऐसा उपाय करने से आपके बीमार होने की संभावना कम हो जाएगी। कई लोग तो नहाने के दौरान अपने अंडरवियर को टॉवेल पर रख देते हैं, उनकी इस आदत के कारण भी वो बीमार पड़ सकते हैं। जरूरी है कि अंडरवियर को भी रोजाना बदलना व साफ करना चाहिए।

यह भी पढे़ं : स्वच्छ भारत अभियान और कोरोना वायरस: क्या सिर्फ साफ-सफाई से होगा हमारा बचाव

टॉवेल की इस प्रकार करें सफाई

एक्सपर्ट की मानें तो टॉवेल को सिर्फ डिटर्जेंट से साफ करना नाकाफी होता है। डिटर्जेंस से साफ करने के बाद भी उसमें बैक्टीरिया के बचने की संभावना रहती है। ऐसे में पूरी तरह से बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए जरूरी है कि उसे ऑक्सीजन ब्लीच की मदद से साफ किया जाए। वहीं यह भी जरूरी है कि टॉवेल को धोने के बाद कुछ देरी से लिए जरूर सुखाना चाहिए। कई एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि यदि एक व्यक्ति लंबे समय तक एक ही टॉवेल का इस्तेमाल करें व नियमित साफ न करें तो उस कारण भी वो बीमार पड़ सकता है। तीन दशकों से शोध करने के बाद डॉ ग्रेबा टॉवेल में कीटाणु होने के कारण इसकी बजाय पेपर टॉवेल इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं।

90% बाथरूम टॉवेल में रहता है मानव के मल में पाए जाने वाला कीटाणु

टॉवेल में कीटाणु की बात करें तो टाइम्स मैग्जीन में छपे लेख के अनुसार यूनिवर्सिटी ऑफ एरीजोना की माइक्रोबायोलॉजिस्ट चार्ल्स ग्रेबा ने कहा- करीब 90% टॉवेल में कैलीफॉर्म बैक्टीरिया होते हैं। यह वही बैक्टीरिया है जो इंसानों के मल में पाया जाता है। वहीं करीब 14% बाथरूम टॉवेल में ई कोलाई बैक्टीरिया होते हैं।

टॉवेल धोने के बाद अच्छी तरह सुखाना है जरूरी

टॉवेल में कीटाणु न रहे इसके लिए जरूरी है कि टॉवेल को धोने के बाद उसे अच्छी तरह से सुखा लिया जाए। घर में किसी रॉड पर सुखाने की बजाय इसे खुली हवा में सुखाना काफी जरूरी होता है। ऐसा करने से टॉवेल में कीटाणु नहीं रहते। कॉटन टॉवेल में बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि बिना आलस के उसकी सफाई की जाए। गर्म पानी से यदि टॉवेल की सफाई की जाए तो बैक्टीरिया के बचने की संभावना भी नहीं बचती है। धोने के बाद कम से कम 45 मिनट तक सूखी जगह में रखें, ताकि उसके अंदर का मॉश्चर चला जाए।

अब तो आप समझ गए होंगे कि टॉवेल की सफाई न करना हमें कितना महंगा पड़ सकता है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए डाॅक्टरी सलाह लें। ।

और पढ़ें:

अस्पताल से इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ आ जाते हैं कीटाणु भी, ऐसे करें साफ

जिम में जर्म्स भी होते हैं, संक्रमण से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट बैक्टीरिया वॉशिंग मशीन के जरिए फैला सकता है इंफेक्शन

बच्चों का हाथ धोना उन्हें बचाता है इंफेक्शन से, जानें कब-कब हाथ धोना है जरूरी

 

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Your Towels Are Way Dirtier Than You Think/ https://time.com/4918624/wash-towels-bacteria/Accessed 2 May 2020

Is It Sanitary to Reuse Bath Towels? What You Need to Know/ https://www.healthline.com/health/how-often-should-you-wash-your-towels/ Accessed 2 May 2020

8 Things You’re Not Washing or Cleaning Nearly Enough, According to Doctors/ https://www.prevention.com/health/a20498131/8-things-youre-not-washing-nearly-enough/ Accessed 2 May 2020

Up to 90% of bathroom towels carry disease-causing bacteria, research shows/https://www.netdoctor.co.uk/healthy-living/wellbeing/news/a28924/dirty-towels-bacteria/ Accessed 2 May 2020

लेखक की तस्वीर badge
Satish singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 07/05/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
x