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Holter monitor: हॉल्टर मॉनिटर क्या है? जानिए कब पड़ सकती है इस टेस्ट की जरूरत!

    Holter monitor: हॉल्टर मॉनिटर क्या है? जानिए कब पड़ सकती है इस टेस्ट की जरूरत!

    हार्ट हेल्थ से जुड़ी हुई कई अलग-अलग तरह की बीमारियां होती हैं और बीमारियों के बारे में समझने के लिए डॉक्टर पेशेंट से बात करते हैं और अलग-अलग टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। आज ऐसे ही एक टेस्ट के बारे में जानेंगे जिसे हॉल्टर मॉनिटर (Holter monitor) कहते हैं। हॉल्टर मॉनिटरिंग कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ (Cardiovascular Health) की जानकारी के लिए एक मशीन है। हॉल्टर मॉनिटरिंग (Holter Monitoring) एक ऐसी मशीन है, जिससे किसी प्रकार का दर्द नहीं होता है और यह दिल की गतिविधियों को समझने में सक्षम भी है। इसलिए आज इस आर्टिकल में हॉल्टर मॉनिटर (Holter monitor) से जुड़ी सभी जानकारी शेयर करने जा रहें हैं।

    • हॉल्टर मॉनिटर क्या है?
    • दिल की धड़कन की गति कितनी होनी चाहिए?
    • हॉल्टर मॉनिटरिंग मशीन कैसे काम करती है?
    • हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट रिपोर्ट से क्या जानकारी मिलती है?
    • हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट की जरूरत कब पड़ सकती है?
    • हॉल्टर मॉनिटरिंग टेस्ट के बाद और कौन-कौन से टेस्ट किये जा सकते हैं?

    चलिए अब हॉल्टर मॉनिटर (Holter monitor) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

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    हॉल्टर मॉनिटर (Holter monitor) क्या है?

    हॉल्टर मॉनिटर (Holter monitor)

    हॉल्टर मॉनिटर एक छोटा सा मेडिकल डिवाइस है, जिसे 24 से 48 घंटों के हार्ट की एक्टिविटी को रिकॉर्ड करने के लिए लगाया जाता है। इस डिवाइस की सहायता से हृदय गति को समझने में आसानी होती है। सिर्फ यही नहीं 24 से 48 घंटों में हार्ट की पूरी एक्टिविटी ईसीजी (ECG) की तरह रिकॉर्ड होती है। अगर हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट (Holter monitor) को आसान शब्दों में समझें तो इससे 24 से 48 घंटों के बीच हार्टबीट (Heartbeat) कितनी रहती है यह सभी स्थिति रिकॉर्ड हो जाती है। यहां अब हार्टबीट की चर्चा हो रही है, तो ऐसे में हार्ट रेट (Heart Rate) को सबसे पहले समझते हैं।

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    दिल की धड़कन की गति कितनी होनी चाहिए? (Normal Heart rate according to age)

    यू.एस. डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमन सर्विसेस ( U.S. Department of Health and Human Services) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार दिल की धड़कन उम्र के अनुसार अलग-अलग होती है। जैसे:

    • न्यू बोर्न बेबी से 1 महीने तक के नवजात शिशुओं में 70 से 190 बीट्स प्रति मिनट।
    • 1 महीने से 11 महीने के नवजात शिशुओं में हार्ट रेट 80 से 160 बीट्स प्रति मिनट।
    • 1 साल से 2 साल के बच्चों में हार्ट रेट 80 से 130 बीट्स प्रति मिनट।
    • 3 साल से 4 साल के बच्चों में हार्ट रेट 80 से 120 बीट्स प्रति मिनट।
    • 4 साल से 5 साल के बच्चों में हार्ट रेट 75 से 115 बीट्स प्रति मिनट।
    • 6 से 15 साल के बच्चों में हार्ट रेट 70 से 100 बीट्स प्रति मिनट।
    • 18 या इससे ज्यादा उम्र के लोगों में हार्ट रेट 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट।

    ये हैं उम्र के अनुसार दिल के धड़कने की गति। अगर दिल के धड़कने की गति इससे कम या इससे ज्यादा होती है, तो इसका शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

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    हॉल्टर मॉनिटरिंग मशीन कैसे काम करती है? (Working process of Holter Monitoring)

    फोन या फिर कॉम्पैक्ट कैमरे की तरह दिखने वाला हॉल्टर मॉनिटरिंग मशीन से कई अलग-अलग तार निकली होती है और तार के आखरी में जिसे शरीर पर चिपकाया जाता है वहां एलेक्ट्रॉड्स होते हैं। अब इसे चेस्ट के आसपास अगल-अलग जगहों जेल की सहायता से चिपकाया जाता है। इस वायर में लगे मेटल एलेक्ट्रॉड्स हार्ट की एक्टिविटी को रिकॉर्ड करते हैं। इस टेस्ट के दौरान किसी भी तरह का दर्द नहीं होता है, लेकिन टेस्ट करवा रहे व्यक्ति को थोड़ा अनकम्फर्टेबल महसूस कर सकते हैं।

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    हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट रिपोर्ट से क्या जानकारी मिलती है? (Holter Monitoring Test indicates-)

    हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट रिपोर्ट से पेशेंट की दिल की धड़कन सामान्य से कम है, ज्यादा है या सामान्य है इसकी जानकारी मिलती है। वहीं टेस्ट से हार्ट के फंक्शन (Heart function), एरिथमिया (Arrhythmia) एवं ऑक्सिजन (Oxygen) की कमी से जुड़ी जानकारी भी मिलती है।

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    हॉल्टर मॉनिटरिंग टेस्ट (Holter Monitoring Test) से पहले क्या किया जाता है?

    हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट के पहले पेशेंट की स्किन पर पैच लगाये जाते हैं और फिर इन्हें रिकॉर्डिंग डिवाइस के साथ जोड़ दिया जाता है। इस दौरान पेशेंट को ढ़ीले कपड़े पहनने चाहिए। वहीं हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट के दौरान किसी भी तरह के क्रीम या लोशन जैसे प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हॉल्टर मॉनिटरिंग टेस्ट के दौरान डॉक्टर व्यक्ति को किसी भी तरह के आभूषण या मेटल की चीजों को पहनने नहीं देते हैं। इसलिए टेस्ट से पहले ज्वेलरी ना पहनें।

    नोट: कुछ टेस्ट के पहले डॉक्टर पेशेंट को भूखे रहने की सलाह देते हैं, लेकिन हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट के पहले पेशेंट अपनी इच्छा अनुसार डायट फॉलो कर सकते हैं।

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    हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट (Holter Monitor Test) की जरूरत कब पड़ सकती है?

    मायो फॉउंडेशन फॉर मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (Mayo Foundation for Medical Education and Research) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट की जरूरत निम्नलिखित स्थितियों में पड़ सकती है। जैसे:

    • पेशेंट में एरिथमिया (Arrhythmia) के लक्षण नजर आने पर।
    • हार्ट कंडिशन (Heart condition) जिससे एरिथमिया की संभावना बढ़ना।
    • बिना कारण व्यक्ति का बेहोश (Unexplained fainting) होना।

    इन स्थितियों में हॉल्टर मॉनिटर टेस्ट (Holter Monitor Test) की जरूरत पड़ सकती है।

    नोट: टेस्ट के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (Electronic device) से दूरी बनाये रखें, क्योंकि इससे रिपोर्ट गलत आने की संभावना बनी रहती है।

    हॉल्टर मॉनिटरिंग टेस्ट के बाद और कौन-कौन से टेस्ट किये जा सकते हैं? (Required tests after Holter Monitoring test)

    हॉल्टर मॉनिटरिंग टेस्ट के बाद निम्नलिखित टेस्ट करवाने की सलाह दी जा सकती है। जैसे:

    • कार्डियक स्ट्रेस टेस्ट (Cardiac Stress Test)।
    • इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी (Electrophysiology Study)।
    • कार्डियक इवेंट मॉनिटरिंग (Cardiac Event Monitoring)।
    • ईसीजी (ECG)।

    पेशेंट की हेल्थ कंडिशन (Health Condition) एवं बीमारी की गंभीरता को समझने के लिए ये ऊपर बताये गए टेस्ट भी किये जा सकते हैं।

    नोट: अगर हॉल्टर मॉनिटरिंग डिवाइस से इर्रेगुलर हार्टबीट (Irregular heartbeat) की जानकारी नहीं मिल पाती है, तो ऐसी स्थिति में इवेंट मॉनिटर (Event monitor) टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है, जिससे तकरीबन एक सफ्ताह के हार्टबीट को रिकॉर्ड किया जाता है।

    अगर आप हॉल्टर मॉनिटर (Holter monitor) या हार्ट डिजीज (Heart disease) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर पूछ सकते हैं। हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देने की कोशिश करेंगे। हालांकि अगर आप किसी हेल्थ या हार्ट कंडिशन (Heart condition) के शिकार हैं, तो डॉक्टर से कंसल्टेशन करें, क्योंकि ऐसी स्थिति में डॉक्टर आपके हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर इलाज कर सकते हैं।

    स्वस्थ्य रहने के लिए अपने दिनचर्या में नियमित योगासन शामिल करें। योग की शुरुआत करने से पहले नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें और योग के फायदे (Benefits of yoga) और योग करने के लिए क्या है सही तरीका इसे समझें। ध्यान रखें गलत तरीके से योग करने से शारीरिक परेशानी बढ़ सकती है।

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    सूत्र

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    लेखक की तस्वीर badge
    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/05/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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