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Pericardium: जानिए कैसे हार्ट को प्रोटेक्ट करता है पेरिकार्डियम!

    Pericardium: जानिए कैसे हार्ट को प्रोटेक्ट करता है पेरिकार्डियम!

    पेरिकार्डियम (Pericardium), दो शब्दों से बना है पेरी (Peri) और कार्डिया (kardia)। इसमें पेरी का अर्थ होता है अराउंड (Around) और कार्डिया का मतलब है हार्ट (Heart)। यानी, यह एक ऐसी सरंचना है, जो हार्ट को ढंकती या एंक्लोज करती है। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो यह एक फ्लूइड सैक के जैसे स्ट्रक्चर को कहा जाता है, जो हार्ट को चारों तरफ से ढकता है। आज हम पेरिकार्डियम के बारे में ही आपको जानकारी देने वाले हैं। आइए जानें क्या है पेरिकार्डियम (Pericardium) और इसकी लेयर्स व फंक्शन्स के बारे में भी जानें।

    पेरिकार्डियम (Pericardium) क्या है?

    जैसा की पहले ही कहा गया है कि यह वो स्ट्रक्चर है, जो हार्ट के चारों तरफ होता है। यह आपके हार्ट को प्रोटेक्ट व लुब्रिकेट करता है और इसे चेस्ट में प्लेस कर के रखता है। लेकिन, समस्या तब होती है जब पेरिकार्डियम (Pericardium) इंफ्लेमड हो जाता है या फ्लूइड से भर जाता है। सूजन के कारण हार्ट डैमेज हो सकता है और यह इसके फंक्शन को प्रभावित करता है। इसके अलावा यह इन चीजों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:

    • पेरिकार्डियम (Pericardium), चेस्ट कैविटी में हार्ट को अपनी जगह पर फिक्स रखता है।
    • यह आपके दिल को बहुत अधिक स्ट्रेचिंग और खून से भरने से रोकता है।
    • पेरिकार्डियम (Pericardium) दिल के धड़कते समय अपने आस-पास के टिश्यूज के साथ फ्रिक्शन को रोकने के लिए आपके दिल को लुब्रिकेट करता है।
    • यह आपके दिल को संक्रमण से बचाता है, जो लंग्स जैसे आस-पास के अंगों से फैल सकता है। अब जानिए इसके स्ट्रक्चर के बारे में।

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    पेरिकार्डियम (Pericardium) का स्ट्रक्चर

    पेरिकार्डियम (Pericardium) में दो लेयर्स होती हैं, जो इस प्रकार हैं:

    फाइबर्स पेरिकार्डियम (Fibrous pericardium)

    फाइबर्स पेरिकार्डियम आउटर लेयर है। यह थिक कनेक्टिव टिश्यू से बनी होती है और डायाफ्राम से अटैच होती है। यह आपके दिल को चेस्ट कैविटी में रखती है और संक्रमण से बचाती है।

    सीरस पेरिकार्डियम (Serous pericardium)

    सीरस पेरिकार्डियम (Serous Pericardium) इनर लेयर है। यह दो और लेयर्स में डिवाइड हो जाती है। जिन्हें विसेरल (Visceral) और पेरिएटल (Parietal) के नाम से जाना जाता है। सीरस पेरिकार्डियम हार्ट को लुब्रिकेट करने में मदद करता है। इन दोनों लेयर्स के बीच में फ्लूइड-फिल्ड पेरिकार्डियल (Fluid filled Pericardial) कैविटी होती है। यह भी हार्ट को लुब्रिकेट करती है और इसे इंजरी से बचती है। विसेरल (Visceral) और पेरिएटल (Parietal) लेयर्स दोनों मेसोथेलियम से बनी होती हैं, जो एपिथेलियल कोशिकाओं (Epithelial cells) से युक्त होता है। मेसोथेलियम (Mesothelium) के दो मुख्य कार्य हैं। एक यह प्रोटेक्टिव बैरियर को बनाता है और अंगों व टिश्यूज की फ्री मूवमेंट के लिए एक फ्रिक्शनलेस सर्फेस प्रदान करता है। अब जानते हैं इससे संबंधित समस्याओं के बारे में।

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    पेरिकार्डियल (Pericardial) से संबंधित समस्याएं कौन सी हैं

    इस कंडिशन में होने वाली परेशानियों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। यह समस्याएं इस प्रकार हो सकती हैं।

    पेरिकार्डियल इफ्यूजन (Pericardial effusion)

    पेरिकार्डियल इफ्यूजन, पेरिकार्डियम (Pericardium) और हार्ट के बीच में बहुत अधिक फ्लूइड के बिल्ड-अप को कहा जाता है। ऐसा पेरिकार्डियम के डैमेज होने या उसमें कोई समस्या होने पर हो सकता है। फ्लूइड तब भी बिल्ड हो सकता है, अगर इंजरी के बाद पेरिकार्डियम (Pericardium) में ब्लीडिंग हो। पेरिकार्डियल इफ्यूजन ((Pericardial effusion) के कारण इस प्रकार हैं:

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    पेरिकार्डियल इफ्यूजन के लक्षण इस प्रकार हैं (Symptoms of pericardial effusion)

    पेरिकार्डियल इफ्यूजन से अधिक फ्लूइड के कारण हार्ट में इंटेंस प्रेशर का कारण बन सकता है और उसे डैमेज कर सकता है।

    पेरिकार्डियम, Pericardium

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    पेरिकार्डियल सिस्ट (Pericardial cyst)

    पेरिकार्डियल सिस्ट, पेरिकार्डियम (Pericardium) में नॉन-कैंसरस, फ्लूइड फिल्ड ग्रोथ को कहा जाता है। हालांकि, इस तरह का सिस्ट बहुत दुर्लभ है। किंतु, इस समस्या से पीड़ित अधिकतर लोग इस सिस्ट के साथ पैदा होते हैं। लेकिन, उनमें इसका निदान तब तक नहीं हो पाता है जब तक वो 20 या 30 की उम्र तक नहीं पहुंच जाते। इस सिस्ट का निदान अक्सर चेस्ट एक्स-रे के दौरान होता है, जिसे किसी अन्य बीमारी की स्थिति में किया जाता है। इसका कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। इसके लक्षण केवल तभी प्रकट हो सकते हैं जब सिस्ट आस-पास के अंगों या स्ट्रक्चर पर दबाव डालता है, और यह लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

    पेरीकार्डियल सिस्ट कोई भयानक समस्या नहीं है। लेकिन, इसके कारण कुछ कॉम्प्लीकेशन्स हो सकती हैं जैसे इंफ्लेमेशन या गंभीर ब्लीडिंग। दुर्लभ मामलों में पेरीकार्डियल सिस्ट, हार्ट फेलियर का कारण बन सकते हैं। अब जानते हैं पेरिकार्डियम (Pericardium) से संबंधित अन्य समस्याओं के बारे में।

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    पेरिकार्डियम (Pericardium) से संबंधित अन्य समस्याएं

    कुछ अन्य समस्याएं या कॉम्प्लीकेशन्स भी पेरिकार्डियम (Pericardium) पर असर डाल सकती हैं। यह समस्याएं इस प्रकार हैं:

    पेरिकार्डिटिस (Pericarditis)

    पेरिकार्डियम (Pericardium) में सूजन को पेरिकार्डिटिस कहा जाता है, जिसके पॉसिबल कारण इस प्रकार हैं:

    • वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण इंफेक्शन (Infection)
    • ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स जैसे ल्यूपस (lupus) , रयूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid arthritis) और स्क्लेरोसिस (Scleroderma)
    • हार्ट अटैक (Heart attack)
    • हार्ट सर्जरी (Heart surgery)
    • इंजरी (Injury) जैसे कार एक्सीडेंट
    • किडनी फेलियर (Kidney failure)
    • ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis)
    • मेडिकेशन्स जैसे फेनीटोइन (Phenytoin), वार्फरिन (Warfarin) और प्रोकेनामाइड (Procainamide)

    एक्यूट पेरिकार्डिटिस की समस्या एकदम शुरू होती है और एक हफ्ते तक रह सकती है। क्रॉनिक पेरिकार्डाइटिस धीरे धीरे विकसित होती है और अधिक समय तक रह सकती है। समय के साथ यह समस्या ठीक हो जाती है। कई बार यह पर्याप्त आराम से भी सुधर सकती है। लेकिन, इसकी गंभीर स्थिति में दवाइयों और सर्जरी की सलाह दी जा सकती है ताकि हार्ट को डैमेज से बचाया जा सके।

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    कार्डिएक टैम्पोनेड (Cardiac tamponade)

    कार्डिएक टैम्पोनेड को कंडिशन है, जो पेरीकार्डियल कैविटी में फ्लूइड, ब्लड, गैस या ट्यूमर के बिल्ड-अप के कारण होती है। इस बिल्ड-अप के कारण हार्ट पर प्रेशर पड़ता है, जिससे इसे ठीक से भरने और खाली करने में समस्या होती है। कार्डिएक टैम्पोनेड की समस्या, पेरिकार्डियल इफ्यूजन के समान नहीं होती है। हालांकि, यह पेरिकार्डियल इफ्यूजन से फ्लूइड बिल्ड-अप की कॉम्प्लिकेशन हो सकती है। इसका सबसे पड़ा लक्षण हो सकता है ब्लड प्रेशर में बहुत अधिक ड्राप होना। यह एक मेडिकल एमरजेंसी है। अगर इसका जल्दी उपचार न हो तो यह जानलेवा हो सकती है।

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    यह तो थी पेरिकार्डियम (Pericardium) के बारे में पूरी जानकारी। आप यह तो समझ ही गए होंगे कि यह हार्ट को प्रोटेक्ट करता है। जब इसमें फ्लूइड और अन्य सब्सटांस बिल्ड-अप हो जाते हैं, तो इससे हार्ट पर प्रेशर बढ़ सकता है। जिससे हार्ट की ब्लड पंप करने की क्षमता प्रभावित होती है। कुछ कंडिशंस जो पेरिकार्डियम को प्रभावित करती हैं, आमतौर पर गंभीर नहीं होती है और खुद ही ठीक हो जाती हैं। अन्य कंडिशंस हार्ट को डैमेज कर सकती हैं और उनमें मेडिकल एमरजेंसी की जरूरत होती है। अगर आपको कुछ लक्षण नजर आएं, जैसे छाती में दर्द, सांस लेने में समस्याएं आदि तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इस बारे में कोई भी सवाल होने पर भी डॉक्टर से बात करें।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/04/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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