ये लक्षण आपमें हो सकते हैं मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant Hypertension) के, हो जाएं अलर्ट!

    ये लक्षण आपमें हो सकते हैं मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant Hypertension) के, हो जाएं अलर्ट!
    हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) को हाइपरटेंशन (Hypertension) भी कहा जाता है, यह एक ऐसी स्थिति से है, जिसमें हार्ट की आर्रटरीज में ब्लड का फ्लो (Blood flow) काफी तेज हो जाता है। बॉडी में रक्त का तेज संचार काफी खतरनाक हो सकता है। हायपरटेंशन की इस गंभीर स्थिति को मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant Hypertension) कहते हैं। इसका समय रहते इलाज बहुत जरूरी है, नहीं तो इसकी वजह से पेशेंट की जान भी जा सकती है। हाय बीपी शरीर में बहुत सारी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इस आर्टिकल में बात करेंगे हायपरटेंशन के एडवांस स्टेज, यानि कि मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant Hypertension) के बारे में, जानिए यहां:

    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant Hypertension) क्या होता है ?

    आपको बता दें क‍ि 140-159/90-99 और इससे ज्यादा प्रेशर, हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) और मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant Hypertension) माना जाता है। सामान्य ब्लड प्रेशर की सीमा 120/80 तक होती है। ब्लड प्रेशर में 120 सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (Systolic blood pressure) है, तो वहीं 80 डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (Diastolic blood pressure) को बताता है। यदि किसी का ब्लड प्रेशर 180/120 एमएम एचची से ऊपर है, तो उस स्थिति को मैलिग्नेंट हायपरटेंशन या हायपरटेंसिव क्राइसिस कहते हैं। हाय ब्लड प्रेशर की समस्या को संभाला और कंट्रोल किया जा सकता है, यदि आप समय रहते डाॅक्टर की सलाह लें:

    यदि किसी का बीपी 180/120 मिमी एचजी है या उससे अधिक है, तो उसका बुरा प्रभाव कई बार आंखे, हार्ट या ब्रेन पर पड़ सकता है। यानि कि हायपरटेंशन के दौरान लागों में हार्ट अटैक (heart attack) और स्ट्रोक (Stroke) का कारण बन सकता है। यदि आपको इनमें कोई दिक्कत हो रही है यानि कोई लक्षण नजर आ रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में इमरजेंसी मेडिकेशन की जरूरत होती है। हाय डायबिटीज (High diabetes) के साथ इसके होने का खतरा और भी बढ़ सकता है। यदि आप समय रहते इलाज नहीं ले रहे हैं, तो आपमें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जैसे:

    कई स्थितियों में उच्च रक्तचाप से ग्रस्त व्यक्ति की जान भी जा सकती है। इसलिए ऐसे में समय रहते मेडिकेशन बहुत जरूरी है।

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    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन के लक्षण (Symptoms of a Malignant Hypertension)

    उच्च रक्तचाप (high blood pressure) यानि कि हाय ब्लड प्रेशर को आमतौर पर “साइलेंट किलर” (Silent Killer) भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसमें जरूरी नहीं है कि हमेशा कोई लक्षण नजर आए। लेकिन कई लोगों में इसके कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं। उन लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

    • सीने में दर्द (Chest pain)
    • दृष्टि में परिवर्तन या धुंधला दिखाई देना (Blurred vision)
    • मतली या उल्टी महसूस होना (Nausea or vomiting)
    • हाथ, पैरों में कमजोरी (Weakness)
    • सांस लेने में दिक्कत होना (Breathing problems)
    • सिर में दर्द होना (Headache)

    हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) से शिकार लोगों की यह स्थिति उनमें इन्सेफैलोपैथी नामक कंडिशन (Condition called encephalopathy) का कारण में भी हो सकती है, इस विकार के लक्षणों में शामिल हैं:

    • तेज सिरदर्द होना (Headache)
    • धुंधला दिखायी देना (Blurred vision)
    • दौरा (Seizure)

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    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant Hypertension)

    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन के कारण (Causes of Malignant Hypertension)

    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन का सबसे बड़ा कारण आपका हाय ब्ल्ड प्रेशर की हिस्ट्री (Patient History) होना। यह दिक्कत आजकल युवाओं में भी ज्यादा देखी जा रही है। इसके अलावा कुछ हेल्थ कंडिशन (Health Condition) भी इसके होने का कारण हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

    • गुर्दे की बीमारी होने पर (kidney disorders)
    • मेडिकेशन के तौर पर कुछ विशेष ड्रग्स लेने पर जैसे कि एम्फैटेमिन (Amphetamines), बर्थ कंट्रोल पिल्स (birth control pills )या
    • मोनोअमीन ऑक्सीडेज इनहिबिटर (MAII) (Monoamine oxidase inhibitors) जैसी दवाओं का उपयोग
    • गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान
    • प्रीक्लेम्पसिया (Preeclampsia), जो 20 सप्ताह के गर्भधारण के बाद होने वाली आम समस्या है
    • रीढ़ की हड्डी की चोट (Spinal cord injuries) के कारण तंत्रिका तंत्र के हिस्से अतिसक्रिय हो जाते हैं
    • किड्नी में स्टेनोसिस
    • ऑटोइम्यून डिजीज (Autoimmune diseases) होने पर

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    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन: अन्य कारण

    • हाय बीपी (High BP) की समस्या उन लोगों में होने की संभावना होती है, जो लोग अधिक धूम्रपान करते हैं।
    • जिन लोगों का वजन अधिक होता है, उनमें भी इसका रिस्क बढ़ जाता है। क्योंकि मोटापे के कारण भी शरीर में कई तरही की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
    • खराब लाइफस्टाइल और डायट (Diet) भी इसके रिस्क को बढ़ाता है, खासतौर पर जो तेज नमक और ऑयली फूड खाते हैं।
    • यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से व्यायाम नहीं करता है, तो उसे भी हायपरटेंसिव क्राइसिस (Hypertensive crisis) हो सकता है।
    • तनाव भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है।

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    अन्य अंगों की जरूरी जांच

    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन (Malignant hypertension) का प्रभाव आपके शरीर के किसी अन्य हिस्से पर तो नहीं पड़ रहा है। डॉक्टर यह जानने के लिए समय-समय पर कुछ जांचों की भी सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर द्वारा अन्य परीक्षणों काे इसलिए किया जाता है कि भविष्य में आपके शरीर के ऑर्गेन को रिस्क (Risk) से बचाया जा सके, उदाहरण के लिए, रक्त में यूरिया नाइट्रोजन (Urea nitrogen) (BUN) का लेवल और क्रिएटिनिन के स्तर के रक्त परीक्षण के लिए बोल सकते हैं।

    BUN परीक्षण, शरीर में रक्त में नाइट्रोजन के लेवल को चैक करने के लिए किया जाता है। जिसका प्रभाव किड्नी पर भी पड़ता है। क्रिएटिनिन (Creatinine) मांसपेशियों से उत्पन्न एक रसायन है। जो आपके गुर्दे आपके रक्त को साफ करते हैं। जब गुर्दे सामान्य रूप से काम नहीं करेंगे, तो इन परीक्षणों के असामान्य परिणाम होंगे।

    इसके अलावा, डॉक्टर आपको अन्य कुछ जांच के लिए बोल सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

    • भविष्य में दिल के दौरे के खेतरे की जांच के लिए रक्त परीक्षण (Blood tests)
    • हार्ट फंक्शन को देखने के लिए इकोकार्डियोग्राम या अल्ट्रासाउंड (Echocardiogram or Ultrasound)
    • गुर्दे की जाँच करने के लिए यूरिन टेस्ट (Urine test)
    • दिल की स्थिति जानने के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी या ईकेजी) (Electrocardiogram (ECG or EKG)
    • किड्नी फंक्शन टेस्ट (Kidney Function Test)
    • आंखों की जांच (eye test)
    • ब्रेन में किसी प्रकार की ब्लीडिंग या स्ट्रोके के खतरे की जांच के लिए सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन (CT scan or MRI scan)
    • फेफड़ों की जांच के लिए सीने का एक्स-रे (Chest X-ray)

    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन का उपचार (Treatment)

    उच्च रक्तचाप आपके जीवन के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए ऐसे में तत्काल चिकित्सा की ओर ध्यान देना आवश्यक है। इसी के साथ उन जटिलताओं से भी बचना चाहिए, जो इसके रिस्क को बढ़ा सकते हैं।

    डाॅक्टर उपचार के तौर पर आपको हाय ब्ल्ड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली दवाएं देंगे। कुछ इमरजेंसी स्थितियों में आइवी की सलाह देंगे। जब एक बार हाय बीपी कंट्रोल में आ जाएगा, तो डॉक्टर आपकी ओरल मेडिकेशन शुरु कर देंगे। ताकि कोई कॉम्लिकेशन न हो। इसी के साथ घर पर भी कुछ खास बातों का ध्यान रखने की सलाह देंगे। जैसे कि खानपान, समय पर मेडिसन के साथ बीपी को मॉनिटर करते रहना जरूरी है।

    मैलिग्नेंट हायपरटेंशन: अन्य टिप्स

    अगर आपको हाय ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम से बचना है, तो डॉक्टर द्वारा बताए गए मेडिकेशन के अलावा अपने लाइफस्टाइल में भी बदलाव लाएं। इसी के साथ कि आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं, जैसे कि:

    • अपने डायट में फल (Fruit), सब्जियां, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद (Low Fat Dairy Product), उच्च पोटेशियम वाले खाद्य पदार्थ (High potassium foods) और साबुत अनाज खाना शामिल करें।
    • खाने में सोडियम (Sodium) की कम मात्रा लें।
    • वजन कम (Weight Loss) करें।
    • अपने रक्तचाप को कम करने के लिए स्वस्थ आहार अपनाएं।
    • दिनभर में 30 मिनट एक्सरसाइज (Exercise) जरूर करें।
    • शराब (Alcohol) के सेवन से बचें।
    • स्मोकिंग से बचें (Smoking)।

    यह सभी आपके हाय ब्लड प्रेशर की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसे कोई उपचार न मानें। बस आप इस तरह अपने लाइफस्टाइल में बदलाव कर कर के इस समस्सा में राहत पा सकते हैं। लेकिन यह मैलिग्नेंट हायपरटेंशन का काई स्थायी ट्रीटमेंट नहीं है। डॉक्टर द्वारा इसका समय पर मेडिकेशन बहुत जरूरी है, नहीं तो हाय ब्लड प्रेशर आपमें भी कई बड़ी और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। सबसे लक्षणों के देखते हुए अलग-अलग प्रकार के मेडिकेशन की जरूरत हो सकती है। बस इसके रिस्क के कारको को कम करने की कोशिश करें। इसी के साथ ही यह टिप्स अपना कर के इस समस्या में थोड़ी राहत भी पा सकते हैं। इमरजेंसी केस पर घर पर उपचार की कोशिश न करें, तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    डॉ. प्रणाली पाटील

    फार्मेसी · Hello Swasthya


    Niharika Jaiswal द्वारा लिखित · अपडेटेड 31/05/2022

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