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पैरोक्सिमल कफिंग (Paroxysmal coughing) क्या है?

पैरोक्सिमल कफिंग (Paroxysmal coughing) क्या है?

पैरोक्सिमल कफिंग (Paroxysmal coughing) उसे कहते हैं, जब व्यक्ति को बहुत तेज और बार-बार खांसी आती है। खांसी के कारण सांस लेने में परेशानी होने लगती है। खांसी एक ऑटोमेटिक रिफलैक्स है। जिसमें बॉडी एक्स्ट्रा म्यूकस (Mucus), बैक्टीरिया (Bacteria) और दूसरे फॉरन सब्सटेंस (Foreign substances) को बाहर निकाल देती है। काली खांसी (Pertussis) जैसे इंफेक्शन में खांसी लंबे समय तक रहती है। ऐसे में फेफड़ों तक ऑक्सिजन का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। पैरोक्सिमल कफिंग के कारण क्या हैं और इसका ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है आगे जानते हैं।

पैरोक्सिमल कफिंग के कारण क्या हैं? (Paroxysmal coughing Causes)

पैरोक्सिमल कफिंग (Paroxysmal coughing) का कारण सामान्य तौर पर बोर्डेटेला पर्टुसिस बैक्टीरियम (Bordetella pertussis bacterium) है। यह बैक्टीरियम रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट (Respiratory tract) को इंफेक्ट करता है। जो व्हूपिंग कफ (Whooping Cough) या कहें कि काली खांसी का कारण बनता है। यह इंफेक्शन बेहद संक्रामक होता है। पैरोक्सिमल कफिंग व्हूपिंग कफ (Whooping cough) की दूसरी स्टेज है। यह स्टेज इंफेक्शन होने के दो हफ्ते के बाद आती है। पैरोक्सिमल कफिंग के सीवियर केस में खांसी बहुत तेज हो जाती है। जिसमें ब्लड में ऑक्सिजन की कमी से मरीज को उल्टी हो सकती है, होंठ और स्किन नीली पड़ सकती है। अगर ऐसे लक्षण नजर आते हैं, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। पैरोक्सिमल कफिंग के दूसरे कारण निम्न हो सकते हैं। सेंटर्स फॉस डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार काली खांसी के ज्यादातर मामले व्यस्कों में देखे गए हैं।

  • अस्थमा (Asthma)- एक ऐसी रेस्पिरेटरी कंडिशन जिमसें वायुमार्ग सूज जाते हैं और उनमें अतिरिक्त बलगम भर जाता है।)
  • ब्रोन्किइक्टेसिस (Bronchiectasis)- ऐसी कंडिशन जिसमें लंग्स के ट्यूब इंफ्लामेशन के कारण चौड़ हो जाते हैं। जिससे बैक्टीरिया और म्यूकस के बिल्डअप होता है।
  • ब्रोंकाइटिस (Bronchitis)- इसमें फेफड़ों की वायुनली (Bronchi) में सूजन आ जाती है।
  • गेस्ट्रोइसोफेगल रिफलक्स डिजीज- इस कंडिशन में स्टमक का एसिड इसोफेगस में वापस आकर गले तक आ जाता है। कई बार यह एयरवेज में भी चला जाता है।
  • टॉमा, स्मोक इंहेलेशन और ड्रग के कारण होने वाली लंग इंजरी
  • निमोनिया, एक प्रकार का लंग इंफेक्शन है।
  • टीबी (TB)- फेफड़ों में होने वाला लंग इंफेक्शन जो शरीर के दूसरे अंगों तक फैल सकता है, अगर इसका इलाज ना किया जाए तो।

समय पर अगर इस इंफेक्शन का पता चल जाए तो, इसके लक्षणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

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पैरोक्सिमल कफिंग और कफिंग फिट्स के बारे में कैसे पता किया जाता है? (Paroxysmal coughing diagnosis)

कफिंग फिट (Coughing fits) की समस्या होने पर डॉक्टर के पास जाने पर वे निम्न टेस्ट रिकमंड कर सकते हैं।

  • जिसमें नेजल और थ्रोट स्वाब (Throat Swab) टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं ताकि इंफेक्शन का कारण बनने वाले बैक्टीरिया के बारे में पता चल सके।
  • डॉक्टर ब्लड टेस्ट करने की भी सलाह दे सकते हैं जिसमें वाइट ब्लड सेल काउंट के बारे में पता करके इंफेक्शन को समझा जा सकता है। हाय वाइट ब्लड सेल काउंट इंफेक्शन की तरफ इशारा करता है।
  • सीने का एक्स रे (X-ray) या सीटी स्कैन (CT Scan) से रेस्पिरेटरी इंफेक्शन, किसी प्रकार के डैमेज और असामान्यता के बारे में पता चल जाता है।
  • लंग इंफेक्शन टेस्ट (Lung infection test) के जरिए अस्थमा या किसी दूसरी बीमारी का पता करने की कोशिश की जाती है।
  • ब्रोंकोस्कॉपी (Bronchoscopy ) के जरिए एक पतली लाइटेड ट्यूब को जिसमें कैमरा होता है के जरिए लंग्स के रियल टाइम फोटोज लिए जाते हैं।
  • अपर गेस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल एंडोस्कोपी (Gastrointestinal endoscopy) के जरिए डायजेस्टिव ट्रैक को गर्ड (GERD) के लिए चेक किया जाता है।
  • इंफेक्शन का कारण पता चलने पर डॉक्टर उसके हिसाब से ट्रीटमेंट रिकमंड करते हैं।

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पैरोक्सिमल कफिंग और कफिंग फिट्स का ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है? (Paroxysmal coughing treatment)

पैरोक्सिमल कफिंग (Paroxysmal Coughing) और कफिंग फिट्स (Coughing fits) का इलाज कई प्रकार से किया जाता है। जानते हैं उनके बारे में।

  • डॉक्टर कुछ एंटीबायोटिक दे सकते हैं, जो इम्यून सिस्टम (Immune system) को संक्रमण के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करेंगे।
  • इसके अलावा डॉक्टर डिकंजस्टेंट (Decongestant) या कफ एक्सपेक्टोरेंट (expectorant) भी दे सकते हैं। ये म्यूकल बिल्डअप को कम करने के साथ ही कफिंग और दूसरे लक्षणों में राहत पहुंचाते हैं।
  • एंटीहिस्टामाइन (Antihistamine) का उपयोग भी डॉक्टर कर सकते हैं। जो एलर्जी के लक्षणों को कम करते हैं जो खांसी को और भी बिगाड़ देते हैं। जैसे कि कंजेशन, खुजली होना और छींक आना।
  • इनहेलर (Inhaler) और नेब्युलाइज्ड ब्रोंकोडायलेटर (Nebulized bronchodilator) ट्रीटमेंट एयरवेज को ओपन करने में मदद करता है।
  • एंटासिड (Antacid) का उपयोग गर्ड के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर कर सकते हैं। इसके साथ ही स्टमक में होने वाले एसिड प्रोडक्शन को रोकने के लिए डॉक्टर प्रोटोन पंप इनहिबिटर्स का उपयोग कर सकते हैं।
  • डॉक्टर कुछ बीद्रिंग एक्सरसाइज (Breathing exercises) भी सजेस्ट कर सकते हैं, जो रेस्पिरेटरी सिस्टम को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। ऊपर बताई गई किसी भी दवा का उपयोग अपनी मर्जी से न करें। डॉक्टर की सलाह से ही इनका उपयोग करें।

और पढ़ें: Dry Cough: सूखी खांसी (ड्राई कफ) क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

क्या पैरोक्सिमल कफिंग (Paroxysmal coughing) को रोका जा सकता है?


व्हूपिंग कफिंग की वजह से यंग चिल्ड्रन्स में पैरोक्सिमल कफिंग ((Paroxysmal Coughing)) होना सामान्य है। बच्चों को डिप्थीरिया-टिटनेस-पर्टुसिस (Diphtheria-tetanus-pertussis) और टिटनेस-डिप्थीरिया-पर्टुसिस (Tetanus-diphtheria-pertussis) वैक्सीन लगवाकर उन्हें इस इंफेक्शन से बचाया जा सकता है। अगर आपके आसपास किसी को व्हूपिंग कफ है, तो उससे दूर रहें। इसके साथ ही निम्न बातों को फॉलो करें।

  • तंबाकू प्रोडक्ट्स और स्मोकिंग (Smoking) से दूर रहें।
  • रेगुलर एक्सरसाइज करें ताकि वजन कंट्रोल में रहे जिससे ब्रीदिंग में किसी प्रकार की परेशानी ना आए।
  • सिर के बल सोए ताकि पेट का एसिड गले और एयरवेज में ना जाए।
  • धीरे-धीरे और खाना अच्छी तरह चबाकर खाएं।
  • एयरवेज को ओपन करने के लिए एशेंसियल ऑयल डिफ्यूजर का उपयोग करें। अगर इससे खांसी आ रही है तो इसका उपयोग ना करें।
  • हेल्दी डायट फॉलो करें। ऐसी चीजों का सेवन करने से बचें जो आपकी तकलीफ को बढ़ाने का काम करती है। इस बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।
  • योगा, मेडिटेशन जैसी रिलैक्सेशन तकनीक का उपयोग करें। ताकि ब्रीदिंग स्टॉन्ग हो सके और इम्यून सिस्टम को ज्यादा स्ट्रेंथ मिले।

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पैरोक्सिमल कफिंग का इलाज घरेलू उपायों से संभव है? (Home remedies for Paroxysmal coughing)

पैरोक्सिमल कफिंग का इलाज तो घरेलू उपायों से नहीं किया जा सकता, लेकिन घरेलू उपाय कफिंग फिट्स में राहत दिला सकते हैं। जानते हैं इनके बारे में।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि बॉडी हायड्रेड रहे और गाला भी ना सूखे।
  • बॉडी को रेगुलर बेसिस पर क्लीन करें ताकि बैक्टीरिया ना फैलें।
  • अपने हाथों को लगातार धोते रहें ताकि हाथों के जरिए बैक्टीरिया फैल ना सके।
  • ह्यूमिडफायर का उपयोग करके आप अपने आसपास की हवा में नमी बनाए रख सकते हैं, जिससे म्यूकस लूज होता है और खांसी में आराम मिलता है।
  • ह्यूमिडफायर का उपयोग ज्यादा ना करें।
  • खांसी की वजह से वॉमिट हो रही है तो कम खाएं ताकि ज्यादा वॉमिट ना हो।
  • तंबाकू प्रोडक्ट्स के धुएं के साथ ही कुकिंग के दौरान होने वाले धुएं को भी अवॉयड करें।
  • अगर इंफेक्शन हो चुका है तो कम से कम 5 दिन तक आइसोलेशन में रहे ताकि इंफेक्शन फैले ना। मास्क का उपयोग करें।
  • बहुत ज्यादा खुशबू वाले प्रोडक्ट्स जैसे कि परफ्यूम, कैंडल्स, फ्लोर क्लीनर्स आदि का उपयोग ना करें।

उम्मीद करते हैं कि आपको पैरोक्सिमल कफिंग से संबंधित जानकारी मिल गई होगी। यह जानलेवा इंफेक्शन नहीं है। इसलिए डरें नहीं। समय पर जांच कराएं और डॉक्टर के द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करें। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

 

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सूत्र

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Detecting Paroxysmal Coughing from Pertussis Cases Using Voice Recognition Technology/
https://journals.plos.org/plosone/article?id=10.1371/journal.pone.0082971/Accessed on 13th May 2021

 

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/05/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड