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लंग कैंसर में निमोनिया बन सकता है जान के लिए जोखिम, कैसे? जानिए!

लंग कैंसर में निमोनिया बन सकता है जान के लिए जोखिम, कैसे? जानिए!

फेफड़े यानी लंग्स हमारे शरीर का एक बहुत अहम अंग है और रेस्पिरेटरी सिस्टम का हिस्सा है। रेस्पिरेटरी सिस्टम कई अंगों और टिश्यूज का एक समूह है, जो एक साथ काम कर के सांस लेने में हमारी मदद करते हैं । अगर हमारे फेफड़ों में कोई समस्या होती है। तो उससे कई बीमारियां हो सकती हैं जैसे ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर आदि। निमोनिया और लंग कैंसर (Pneumonia and Lung Cancer) दोनों फेफड़ों से संबंधित बीमारियां हैं। यह दोनों बीमारियां जान के लिए खतरनाक हो सकती हैं। आज हम इन दोनों बीमारियों के बारे में विस्तार से जानेंगे। निमोनिया और लंग कैंसर (Pneumonia and Lung Cancer) के बीच के लिंक के बारे में भी जानें।

निमोनिया और लंग कैंसर क्या हैं? (Pneumonia and Lung Cancer)

जैसे की आप जानते ही हैं कि निमोनिया और लंग कैंसर (Pneumonia and Lung Cancer) दोनों लंग्स में होने वाली बीमारियां है। जिनके कई लक्षण एक जैसे होते हैं। लेकिन, लंग कैंसर होने पर निमोनिया होने का जोखिम अधिक होता है क्योंकि लंग कैंसर के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। निमोनिया एक लंग इंफेक्शन है जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसके साथ ही लंग्स में फ्लूइड जमा हो सकता है। कई वायरस बैक्टीरिया और कवक निमोनिया का कारण बन सकते हैं। जबकि, लंग कैंसर फेफड़ों में होने वाली कोशिकाओं की ओवरग्रोथ के कारण होता है, जो ट्यूमर का कारण बन सकती हैं। लंग कैंसर बेहद गंभीर समस्या है, जो मृत्यु का कारण भी बन सकती है। जानिए क्या है निमोनिया और लंग कैंसर (Pneumonia and Lung Cancer) के बीच में लिंक और शरीर पर इनके प्रभाव के बारे में भी जानिए।

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निमोनिया और लंग कैंसर में क्या लिंक है? (Link Between Pneumonia and Lung Cancer)

सामान्यतया लंग कैंसर की स्थिति में तब तक मरीज में कोई लक्षण नजर नहीं आता है, जब तक की यह बीमारी अंतिम स्टेज पर न पहुंच गई हो। लंग कैंसर के कारण मरीज की इम्युनिटी बेहद कमजोर हो जाती है। इसके अतिरिक्त, कई बार गंभीर रोगों के लिए प्रयोग होने वाली थेरेपी, जिसे डॉक्टर फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए उपयोग करते हैं। यह थेरेपीज अक्सर इम्यून फंक्शन को गंभीर रूप से कम कर देती हैं। इसका मतलब है लंग कैंसर से पीड़ित लोग कमजोर इम्युनिटी के कारण संक्रामक एजेंटों (Infectious Agents) को अपने शरीर में प्रवेश करने से रोकने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। उन्हें संक्रमण से लड़ने में भी अधिक मुश्किल हो जाती हैं और इसके साथ ही उनके शरीर पर दवाईयां भी सही से काम नहीं करती हैं।

निमोनिया और लंग कैंसर

निमोनिया फेफड़ों के कैंसर की जटिलता के रूप में विकसित हो सकता है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उनमे निमोनिया होने की संभावना अधिक होती है। इस कारण से, लंग कैंसर से पीड़ित 50-70% लोग अपनी बीमारी के दौरान फेफड़ों के गंभीर संक्रमण, जैसे की निमोनिया का सामना कर सकते हैं। लंग कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए इंफेक्शंस जैसे निमोनिया एक गंभीर हेल्थ रिस्क है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों या बुजुर्गों को निमोनिया बहुत जल्दी हो सकता है। अब जानते हैं इन दोनों रोगों के बारे में। इनके लक्षणों, निदान और उपचार के बारे में जानें।

लंग कैंसर के बारे में जानें इस मॉडल के माध्यम से:

निमोनिया और लंग कैंसर के लक्षण (Symptoms of Pneumonia and Lung Cancer)

लंग कैंसर के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते हैं। लेकिन, जब यह कैंसर एडवांस स्टेज पर पहुंच जाता है तब कुछ लक्षण मरीज नोटिस कर सकता है। कुछ लंग कैंसर और निमोनिया के ऐसे लक्षण भी हैं जो ओवरलैप कर जाते हैं। आमतौर पर निमोनिया के लक्षण अधिक गंभीर होते हैं। लंग कैंसर के लक्षण धीरे -धीरे विकसित होते हैं और जब तक यह एडवांस स्टेज तक नहीं पहुंच जाते। उन्हें कोई लक्षण नजर नहीं आता है।

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यह ओवरलैपिंग लक्षण इस प्रकार हैं (Overlapping Symptoms)

  • खांसी (Coughing): यह लंग कैंसर से प्रभावित लोगों में अधिक गंभीर होती है। यह खांसी कई हफ्तों तक रह सकती है और बदतर हो सकती है।
  • बलगम (Phlegm): इन स्थितियों में कफ लाल, भूरे, पीले या हरे रंग की हो सकती है।
  • साँस न आना (Shortness of Breath): यह समस्या निमोनिया में मुकाबले लंग कैंसर से पीड़ित लोगों में अधिक गंभीर होती है। हालांकि, निमोनिया से पीड़ित लोगों को तेजी से सांस लेने में कठिनाई होती है, जो बिना उपचार के बदतर हो सकती है।
  • छाती में दर्द (Chest Pains): छाती में दर्द सांस लेने या खांसी के दौरान बदतर हो जाती है।
  • थकावट (Tiredness): लंग कैंसर से पीड़ित लोग निमोनिया से प्रभावित लोगों की तुलना में अधिक थकावट महसूस करते हैं।
  • भूख न लगना (Loss of appetite): लंग कैंसर से पीड़ित लोग इस समस्या को अधिक महसूस करते हैं, जिससे उनका वजन कम हो सकता है।
  • व्हीजिंग (Wheezing): यह लंग कैंसर और निमोनिया दोनों में दुर्लभ है।

इनके अन्य लक्षण इस प्रकार हैं (Other Symptoms Include)

डॉक्टर आमतौर पर निमोनिया और लंग कैंसर (Pneumonia and Lung Cancer) के बीच अंतर करने के लिए खास लक्षणों को नोटिस नहीं करते हैं। वो यह देखते हैं कि मरीज में लक्षण कितनी तेजी से विकसित होते हैं और उनकी शुरुआत कब से हुई है। अब इन बीमारियों से जुड़ी जटिलताओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त करना जरूरी है।

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रिस्क फैक्टर (Risk Factors of Pneumonia and Lung Cancer)

किसी भी व्यक्ति को निमोनिया और लंग कैंसर (Pneumonia and Lung Cancer) की समस्या हो सकती है। लेकिन कुछ रिस्क फैक्टर इन हेल्थ समस्याओं के विकसित होने की संभावना बढ़ा सकते हैं। यह रिस्क फैक्टर्स इस प्रकार हैं:

  • लंग कैंसर, निमोनिया का एक रिस्ट फैक्टर है। लंग कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी का प्रयोग किया जाता है। इस रोग के लिए प्रयोग होने वाले कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट से किसी भी व्यक्ति में निमोनिया का जोखिम बढ़ जाता है। क्योंकि, इससे रोगी की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है।
  • स्मोकिंग या तम्बाकू का सेवन भी लंग कैंसर का एक रिस्क फैक्टर है। समय के साथ यह निमोनिया के जोखिम को भी बढ़ा देता है।

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लंग कैंसर के अन्य रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं (Risk Factors of Lung Cancer)

लंग कैंसर एक गंभीर समस्या है। इसके कारणों के बारे में स्पष्ट कहना मुश्किल है। लेकिन, कुछ स्थीतियों में इसका जोखिम बढ़ सकता है, जैसे :

  • कार्सिनोजेनिक केमिकल (Carcinogenic Chemicals) के संपर्क में रहना जैसे ऐस्बेटस (Asbestos) या यूरेनियम (Uranium)
  • लंग कैंसर की फॅमिली हिस्ट्री होना (Family History of Lung Cancer)
  • छाती में पहले रेडिएशन थेरेपी का प्रयोग (Previous Radiation Therapy to the Chest)
  • हवा का प्रदूषण (Air Pollution)

Quiz: क्यों जरूरी है निमोनिया की रोकथाम?

निमोनिया के रिस्क फैक्टर (Risk Factors of Pneumonia)

निमोनिया भी एक सामान्य लंग्स से जुड़ी समस्या है। छोटे बच्चों को यह रोग अधिक परेशान करता है। इन स्थितियों में इसका जोखिम बढ़ सकता है:

  • क्रॉनिक लंग डिजीज (Chronic Lung Diseases) : जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) या सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis) आदि।
  • कोई गंभीर बीमारी (Chronic Illnesses) : जैसे हार्ट डिजीज (Heart Disease) या डायबिटीज (Diabetes) आदि।
  • रिप्रेस्ड इम्यून सिस्टम (Repressed Immune System) : जो कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट के कारण हो सकता है जैसे कैंसर(Cancer ), ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ Transplant)
  • हाल ही में वायरस के कारण रेस्पिरेटरी इंफेक्शन होना जैसे फ्लू (Recent Respiratory Infection with Virus, such as Flu)
  • अधिक शराब या अन्य ड्रग्स का उपयोग (Use of excess Alcohol and other Drugs)

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निमोनिया का निदान (Diagnosis of Pneumonia)

अगर किसी को लंग कैंसर है और रोगी को कुछ नए व बदतर लक्षण नजर आते हैं या ब्रीदिंग संबंधी समस्याएं हैं। तो डॉक्टर तुरंत निमोनिया के रूप में इसका निदान कर सकते हैं। ऐसे में निदान और उपचार में देरी करना जान के लिए जोखिम हो सकता है, इसलिए जल्दी निदान बहुत जरूरी है। निमोनिया के निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले सूजी हुई ग्रंथियों (Swollen Glands), असामान्य ब्रीदिंग (Abnormal Breathing) या हाय टेम्परेचर (High Temperature) के निदान के लिए शारीरिक जांच करेंगे। लंग्स में फ्लूइड बिल्ड-अप (Fluid Build-Up) के लिए एक्स-रे के लिए भी कहा जा सकता है इसके साथ ही ब्लड टेस्ट भी कराया जा सकता है।

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निमोनिया के लिए अन्य टेस्ट (Other Tests for Pneumonia)

अगर आपको पहले ही लंग कैंसर है तो आपके यह टेस्ट के रिजल्ट एब्नार्मल आ सकते हैं। क्योंकि, दोनों ही मामलों में आपकी छाती की जांच पर व्हीजिंग जैसी आवाज आ सकती है और आपकी छाती एक्स-रे में धुंधली दिखाई दे सकती है। डॉक्टर कुछ अन्य टेस्ट भी करा सकते हैं। यह टेस्ट इंफेक्शन की गंभीरता और ट्रीटमेंट ऑप्शन को निर्धारित करने के लिए आवश्यक हैं। यह टेस्ट इस प्रकार हैं

  • आर्टेरियल ब्लड गैस के लिए टेस्ट (Test for Arterial Blood Gas) : यह टेस्ट खून में ऑक्सीजन की मात्रा को मापने के लिए कराया जाता है।
  • पल्स ऑक्सीमीट्री टेस्ट (Pulse Oximetry Test) : पल्स ऑक्सीमीट्री टेस्ट इस बात को जांचने के लिए किया जाता है कि आपके लंग्स से ब्लडस्ट्रीम में कितनी ऑक्सीजन मूव कर रही है।
  • सिटी स्कैन (CT Scan) : असमान्यताओं को जांचने के लिए सिटी स्कैन कराया जा सकता है।
  • स्प्यूटम कल्चर टेस्ट (Sputum Culture) : इस टेस्ट में खांसी से निकली बलगम की जांच करके डॉक्टर इंफेक्शन के कारण को जानते हैं।
  • ब्लड कल्चर (Blood culture) : यह टेस्ट इसलिए कराया जाता है ताकि, जाना जा सके कि आपकी ब्लडस्ट्रीम तक कोई हानिकारक संक्रामक जीव (Infectious Organisms) तो नहीं पहुंच गया है

Pneumonia and Lung Cancer

निमोनिया का उपचार (Treatment of Pneumonia)

अगर किसी व्यक्ति को लंग कैंसर है और निमोनिया हो जाता है तो इस स्थिति में उनका उपचार वैसे ही किया जाता है, जैसे उस व्यक्ति का किया जाएगा जिसे लंग कैंसर नहीं है और सिर्फ निमोनिया की समस्या है। पीड़ित व्यक्ति में किस तरह का निमोनिया है या मरीज की ओवरआल हेल्थ कैसी है। इसके अनुसार ही इस समस्या का उपचार होता है। निमोनिया से पीड़ित अधिकतर लोग घर में ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन, पर्याप्त आराम या दवाईयों की मदद से ठीक हो जाते हैं। निमोनिया के उपचार के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाइयां दे सकते हैं। यह दवाइयां एजिथ्रोमायसिन (Azithromycin), लिवोफ्लॉक्सासिन (Levofloxacin), सेफ्पोडॉक्सिम (Cefpodoxime) आदि हो सकती हैं।

गंभीर निमोनिया की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है ताकि इंट्रावेनस (IV)) फ्लूइड और एंटीबायोटिक्स (Intravenous (IV) Fluids and Antibiotics) से उनका उपचार हो सके। ऐसे मरीजों को ऑक्सीजन थेरेपी (Oxygen Therapy ) या ब्रीदिंग असिस्टेंस (Breathing Assistance) की जरूरत भी पड़ सकती है।

लंग कैंसर का निदान (Diagnosis of Lung Cancer)

लंग कैंसर का निदान डॉक्टर के लिए मुश्किल हो सकता है। इसके निदान के लिए डॉक्टर चेस्ट एक्स-रे (Chest X-Ray) करा सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति में लंग कैंसर का निदान हो जाता है, तो डॉक्टर अन्य टेस्ट कराने के लिए कह सकते हैं ताकि पता चल सके कि यह कैंसर कितना फैल चुका है। इस स्थिति में बायोप्सी (Biopsy) कराई जा सकती है जिसमे पीड़ित व्यक्ति के प्रभावित क्षेत्र से छोटे टिश्यू का सैंपल ले कर उसकी जांच की जाती है। इसमें डॉक्टर नाक या मुंह के माध्यम से लंग्स में एक छोटी ट्यूब डाली जाती हैं और सैंपल लिया जाता है। इन टेस्ट्स का रिजल्ट लंग कैंसर के प्रकार, प्रायमरी ट्यूमर की लोकेशन या बीमारी की स्टेज के बारे में जानकारी देता है।

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लंग कैंसर का उपचार (Treatment of Lung Cancer)

डॉक्टर इस जानकारी का उपयोग करने के साथ-साथ व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य आदि को ध्यान में रखकर उसके लिए उपचार निर्धारित करते हैं। इस ट्रीटमेंट का उद्देश्य इन लक्षणों का उपचार करना, उन्हें कंट्रोल करना और उनसे छुटकारा पाना होता है। उपचार के यह विकल्प बेसिक सर्जिकल प्रोसीजर से लेकर कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी भी हो सकती है। यह उपचार लंग कैंसर की गंभीरता पर निर्भर करते हैं।

निमोनिया और लंग कैंसर

अमेरिकन लंग एसोसिएशन (American Lung Association) के मुताबिक अगर लंग कैंसर से पीड़ित लोगों में इसके फैलने से पहले ही इस बीमारी का निदान हो जाता है तो इसका उपचार संभव है। लंग कैंसर को शुरुआती स्टेज में पहचानने से इसे सर्जिकल तरीके से रिमूव किया जा सकता ताकि यह ट्यूमर न फैले। इससे व्यक्ति के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। इम्युनिटी के कमजोर होने के कारण लंग कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को निमोनिया होने की संभावना अधिक रहती है

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यह तो थी निमोनिया और लंग कैंसर (Pneumonia and Lung Cancer) के बारे में पूरी जानकारीवहीं निमोनिया के अधिकतर मामले गंभीर नहीं होते। लेकिन, इससे रिकवर होने में व्यक्ति को लंबा समय लग सकता है। बिना उपचार के, दिल और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती है। इससे बेचैनी, कोमा, हार्ट फेलियर या मृत्यु भी हो सकती है। लंग कैंसर बिना उपचार के निमोनिया से भी बदतर हो सकता है। दोनों ही स्थितियों में अपनी सेहत का ध्यान रखना और सही उपचार बेहद जरूरी है। इनमें पर्याप्त आराम करें, हेल्दी डायट लें और व्यायाम करें। इनसे भी आपको कई स्वास्थ्य लाभ होंगे, खासतौर पर अगर आप कैंसर जैसी भयानक बीमारी से पीड़ित हों।

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सूत्र

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 10/05/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड