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बच्चों में होने वाली बीमारियों के बारे में पाएं पूरी जानकारी

बच्चों में होने वाली बीमारियों के बारे में पाएं पूरी जानकारी

यह बात सच है कि स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने का परिणाम भविष्य में भयानक हो सकता है। यह बात बच्चों की हेल्थ (Kid’s Health) के लिए भी लागू होती है। हर माता-पिता के लिए उनके बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s Health) सबसे महत्वपूर्ण है। लेकिन, कमजोर इम्युनिटी होने के कारण बच्चे बहुत जल्दी बीमारी पड़ सकते हैं, खासतौर पर स्कूल या डे केयर में जाने वाले बच्चे। कुछ चीज़ों का ध्यान रख कर हम न केवल अपने बच्चों को स्वस्थ रख सकते हैं बल्कि उनमें अच्छी आदतों की शुरुआत भी कर सकते हैं। जानिए बच्चों की हेल्थ (Kid’s Health) से जुडी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां।

बच्चों का स्वास्थ्य: बच्चों में कॉमन हेल्थ कंडिशन (Common Health Conditions in Kids) और उनके लक्षण

कुछ बीमारियां बच्चों को होना बहुत सामान्य हैं। जानिए बच्चों में सामान्य हेल्थ कंडीशंस कौन सी हैं:

बुखार (Fever)

बच्चों और शिशुओं में 38°C या इससे अधिक बुखार चिंता का विषय हो सकता है। अधिक तेज बुखार इंफेक्शन जैसे खांसी या जुकाम से लड़ने के लिए शरीर का प्राकृतिक रेस्पोंस है। अगर शरीर का तापमान 100.4°F (38°C ) से अधिक हो, तो उसके लक्षण इस प्रकार हैं:

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सर्दी-जुकाम (Cold )

बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s Health) से सम्बन्धित समस्याओं में एक है, सामान्य सर्दी-जुकाम जो बच्चों में सामान्य है। इसके लक्षण हैं गले में खराश, नाक का बहना या बंद होना और छींक आना आदि। इससे बच्चे थकावट, सिरदर्द और अन्य समस्याएं भी महसूस करते हैं। खांसी जुकाम में होने वाली सबसे सामान्य समस्या है। इसके लिए घरेलू नुस्खों के साथ ही डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।

बच्चों का स्वास्थ्य

खांसी (Cough)

खांसी, जुकाम के कारण होने वाली सबसे सामान्य समस्या है। इसके लक्षण हैं गला बैठना, घरघराहट, सांस लेने की तकलीफ होना और गले में दर्द। आमतौर पर एंटीबायोटिक्स से इस समस्या में आराम पहुंचता है, लेकिन एंटीबायोटिक्स वायरस के कारण होने वाली खांसी में मदद नहीं करते हैं।

कोलिक (Colic)

कोलिक स्वस्थ शिशु में लगातार, लम्बे समय तक और जोर-जोर से रोने की प्रक्रिया है। इसके लक्षण हैं :

  • बच्चे का बहुत अधिक रोना या चिल्लाना, जिसका कारण स्पष्ट न हो।
  • अक्सर शाम को यह समस्या अधिक होती है।
  • इस दौरान चेहरे का रंग अलग हो जाता है, जैसे चेहरे का लाल होना या मुंह के आसपास की त्वचा का पीला पड़ना।

उलटी (Vomiting)

शिशुओं और बच्चों को कभी-कभी उल्टी होना सामान्य है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं: उल्टी के कारण बच्चे को डीहाइड्रेशन हो सकता है। डीहाइड्रेशन के लक्षण हैं रूखे होंठ और मुंह, सामान्य से कम मूत्र त्याग या गहरे रंग का मूत्र, कम एनर्जी लेवल, बच्चों का कमजोर लगना, रोते हुए आंसू न आना, भूख न लगना आदि।

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सिरदर्द

बच्चों में सिरदर्द आम है और आमतौर पर यह गंभीर नहीं होती। वयस्कों की तरह, बच्चों में भी अलग-अलग तरह की सिरदर्द हो सकती है, जैसे वयस्कों में माइग्रेन का दर्द अक्सर कम से कम चार घंटे तक रहता है, लेकिन बच्चों में, दर्द इससे बहुत कम हो सकता है।

इस बारे में फोर्टिस अस्पताल मुलुंड के न्यूरोलॉजी विभाग के सलाहकार डॉ धनुश्री चोंकर का कहना है कि बच्चों का मन बहुत कोमल होता है। उनके मन में कोई भी बात बहुत जल्दी लग जाती है। आजकल बच्चों में भी तनाव की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। इस कारण कई बच्चें परेशान हो कर सुसाइड जैसे विचारों की तरफ अपने कदम बढ़ाने लगते हैं। बच्चों को पढ़ाई से ज्यादा सोशल ग्रुप का प्रेशर इतना ज्यादा बढ़ता जा रहा है कि वो बदलाव उनके व्यवहार देखने को मिलता है। जिसमें सबसे पहले उनका चिड़चिड़ा व्यवहार और किसी से बात न करना शामिल है।

बच्चों में होने वाली प्रमुख इंफेक्शियस डिजीज

जानिए, कौन से है बच्चों में होने वाली इंफेक्शियस डिजीज :

चिकनपॉक्स (Chickenpox)

चिकनपॉक्स वेरिसेला-जोस्टर वायरस (Varicella-Zoster Virus) के कारण होने वाला एक बहुत ही संक्रामक संक्रमण है। यह मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है। चिकनपॉक्स होने पर अधिकांश बच्चों को हल्के लक्षण देखने को मिलते हैं। यह लक्षण आमतौर पर खुजली, छाले जैसे दाने होते हैं। बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s Health) के लिए इस रोग के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

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खसरा (measles)

खसरा एक वायरस के कारण होने वाला संक्रमण है। खसरे को वैक्सीन से रोका जा सकता है। खसरे के संक्रमण के लक्षण आमतौर पर खांसी, नाक का बहना, तेज बुखार और आंखों का लाल होना है।

मम्प्स (Mumps)

कण्ठमाला यानी मम्प्स एक वायरस के कारण होने वाला संक्रमण है। यह आमतौर पर बच्चों में अधिक गंभीर नहीं होता। इसके सामान्य लक्षणों में गाल और मुंह में ग्रंथियों की सूजन शामिल है। अन्य लक्षणों में बात करने और चबाने में समस्या, कान दर्द और बुखार शामिल हैं।

रूबेला (Rubella)

रूबेला एक वायरल बीमारी है जो हल्के बुखार और त्वचा में दाने होने से शुरू होती है। इसमें हल्का बुखार, बहती नाक और दस्त भी हो सकते हैं। इसके उपचार में आराम करना और बहुत सारे तरल पदार्थों का सेवन करना शामिल हैं।

डिप्थीरिया (Diphtheria)

डिप्थीरिया एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो आसानी से फैलता है। यह मुख्य रूप से नाक और गले को प्रभावित करता है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों को संक्रमण का खास जोखिम होता है।

बच्चों का स्वास्थ्य

पोलियो (Polio)

पोलियो मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। हालांकि, जिस बच्चे को इसका टीका नहीं लगा होता है, उसमे इस बीमारी के विकसित होने का खतरा अधिक रहता है। पोलियो एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, जिसके परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क में लकवा हो सकता है।

HFMD (Hand, Foot and Mouth Disease)

हाथ-पैर-मुंह की बीमारी छोटे बच्चों में संक्रामक वायरल संक्रमण के कारण हो सकती है। इसके लक्षण हैं मुंह में घाव और हाथों और पैरों रैशेज का होना शामिल है। यह रोग आमतौर पर एक कॉक्सैसिएवायरस (Coxsackievirus)के कारण होता है।

पैरासाइट इन्फेक्शन (Parasite Infection)

पैरासाइट इन्फेक्शन सभी उम्र के बच्चों में हो सकता है। शिशुओं, बच्चों को जीयार्डियासिस (giardiasis) नामक परजीवी रोग का खतरा होता है। जो दस्त का कारण बनता है और दूषित मल के माध्यम से फैलता है। बीमार होने वाले बच्चों में पतले दस्त, थकान और मतली जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

इन्फ्लुएंजा (Influenza)

इन्फ्लुएंजा (फ्लू) श्वसन तंत्र का एक बहुत ही संक्रामक वायरल संक्रमण है। इसके लक्षण है अधिक बुखार, शरीर में दर्द, खांसी आदि। इन्फ्लुएंजा के कारण अधिकांश बच्चे एक सप्ताह या इससे कम समय तक फ्लू से पीड़ित रहते हैं। लेकिन कुछ बच्चों में अगर यह समस्या अधिक गंभीर बीमारी हो जाए तो उन्हें अस्पताल में भर्ती और डॉक्टर की सलाह की जरूरत हो सकती है।

बच्चों में होने वाले बिहेवियरल और डेवलपमेंट डिसऑर्डर (Behavioral and Development Disorders)

बच्चों में होने वाले बिहेवियरल और डेवलपमेंट डिसऑर्डर में इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी, सीखने की अक्षमता, ध्यान लगाने में परेशानी होना जैसी समस्याएं शामिल है। जानिए कौन से है यह डिसऑर्डर जो बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s Health) प्रभावित करते है।

और पढ़ें: ये लाइफ स्किल टीचिंग बच्चों को बनाएंगी आत्मनिर्भर

अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (Attention deficit hyperactivity disorder)

यह एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है जो हाइपरएक्टिव और आवेगशील व्यवहार के कारण हो सकता है। ADHD से पीड़ित बच्चों को एक काम में अपना ध्यान केंद्रित करने या लंबे समय तक बैठे रहने में परेशानी हो सकती है। ADHD की समस्या अक्सर बचपन में शुरू होती है और वयस्कता में जारी रह सकती है।

आटिज्म (Autism)

आटिज्म विकार वाले बच्चे को कम्युनिकेशन व सामाजिक कौशल में कमी और प्रतिबंधित या रेपेटिटिव व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। इसके गंभीर मामलों में, एक ऑटिस्टिक बच्चा कभी भी बोलना या आंखों को मिला कर बात करना नहीं सीख पाता या उसे ऐसा करने में समस्या होती है।

डिस्लेक्सिया (Dyslexia)

डिस्लेक्सिया आमतौर पर पढ़ने की परेशानी से जुड़ा विकार है। यह बच्चे की भाषा में ध्वनियों को पहचानने की क्षमता को प्रभावित करता है। डिस्लेक्सिया के लक्षण हर बच्चे के लिए अलग होते हैं।

बच्चों में होने वाली डायजेस्टिव प्रॉब्लम्स (Digestive problems in children)

बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s Health) उनके पेट पर भी निर्भर करता है। क्योंकि, बच्चों को पेट से संबंधित समस्याएं होना सामान्य है। इन समस्याओं से भी बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s Health) प्रभावित होता है।

डायरिया (Diarrhea)

डायरिया भी एक सामान्य परेशानी है। डायरिया की समस्या एक या दो दिन में खुद ठीक हो जाती है लेकिन अगर यह अधिक समय तक रहती है तो गंभीर हो सकती है। इसका उपचार इसके लक्षण, पीड़ित की उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार होता है। डीहाइड्रेशन डायरिया से संबंधित सबसे बड़ा खतरा है।

कब्ज (Constipation)

कब्ज मल त्याग में होने वाली समस्या है। बच्चों में इसके लक्षण वयस्कों की तुलना में अलग होते हैं। इसके उपचार के साथ साथ अधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन और फाइबर युक्त आहार लेने की सलाह दी जाती है।

फूड इनटॉलेरेंस (Food Intolerance)

फूड इनटॉलेरेंस जो भोजन हम खाते हैं, उसका रिएक्शन है। सामान्य फूड इन्टॉलरेंसेस इस प्रकार है

  • लैक्टोज
  • मोनोसोडियम ग्लूटामेट (Monosodium glutamate) जैसे स्वाद बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ के कारण
  • फ्रुक्टोज

मल में खून आना (Rectal Bleeding)

रेक्टल ब्लीडिंग बच्चों में उतनी आम नहीं है। लेकिन, ऐसा होने से माता-पिता का परेशान होना स्वभाविक है। इसके कारण अलग -अलग हो सकते हैं जैसे:

  • एनल फिशर (Anal Fissure)
  • स्ट्रेप स्किन इन्फेक्शन (A Strep skin infection)
  • एनस के आसपास स्किन इंफेक्शन (Skin infection around Anas) के कारण भी खून आ सकता है
  • बैक्टीरियल डायरिया (Bacterial diarrhea)

ब्लोटिंग (Bloating)

ब्लोटिंग का आमतौर पर कारण होता है गैस होना। गैस होने का कारण होता है बच्चे का आहार। इससे कोई नुक्सान नहीं होता। लेकिन, फिर भी इस समस्या से बचने के लिए आप बच्चे के आहार में बदलाव करें।

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बच्चों में होने वाली त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Problems in Kids)

बच्चों की त्वचा बेहद संवेदनशील और कोमल होती है। बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s Health) कैसा है, यह बात उसकी त्वचा पर भी निर्भर करती है। जानिए बच्चे को त्वचा संबंधी कौन सी समस्याएं हो सकती है:

रैशेज (Rashes)

रैशेज को डर्मेटाइटिस (dermatitis) भी कहा जा सकता है, जो त्वचा में होने वाली सूजन या परेशानी है। इसके कारण त्वचा लाल, रूखी, खुजली वाली हो सकती है। बच्चों में डायपर रैशेज होना सामान्य है यह बच्चे के बॉटम में होते हैं।

एक्जिमा (Eczema)

एक्जिमा के कारण कोहनी या घुटने की त्वचा रूखी और खुरदरी हो सकती है या गंभीर स्थिति में त्वचा लाल या सूजन वाली भी हो सकती है। इसके उपचार के लिए इससे होने वाली समस्याओं का इलाज किया जाता है जैसे ड्राईनेस, खुजली, जलन और इंफेक्शन आदि।

और पढ़ें: बच्चों में डर्मेटाइटिस के क्या होते है कारण और जानें इसके लक्षण

बच्चों में होने वाली श्वसन तंत्र संबंधी समस्याएं (Respiratory tract problems in kids)

बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s Health) सही रहे। इसके लिए उसमें होने वाली श्वसन तंत्र संबंधी समस्याओं के बारे में जानना भी जरूरी है, जैसे:

अस्थमा (Asthma)

छोटे बच्चों में अस्थमा के लक्षण वयस्कों की तुलना में अलग हो सकते हैं। अगर आपके बच्चे को अस्थमा है, तो जब उन्हें सर्दी-जुकाम होता है या पराग जैसी चीजें उनके आसपास होती है, तो उनके फेफड़े और एयरवेज में आसानी से सूजन हो सकती हैं।

निमोनिया (Pneumonia)

निमोनिया फेफड़ों में होने वाला इंफेक्शन है। पांच साल या उससे कम उम्र के बच्चों में यह समस्या सामान्य है। निमोनिया बैक्टीरिया या वायरस के कारण होता है। निमोनिया के उपचार में एंटीबायोटिक शामिल हो सकते हैं।

गले में खराश (Sore Throat)

गले में खराश का सबसे आम कारण एक वायरल संक्रमण है जैसे सामान्य सर्दी, फ्लू या ग्रंथि संबंधी बुखार। बैक्टीरियल इंफेक्शन बहुत कम सामान्य है। यदि आपके बच्चे के टॉन्सिल सूजे हुए और लाल हैं, तो संभव है कि टॉन्सिलिटिस गले में खराश पैदा कर रहा है।

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ट्यूबरक्लोसिस (TB in children)

ट्यूबरक्लोसिस (TB) बैक्टीरिया के कारण होने वाला इंफेक्शन है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। लेकिन, इससे अन्य अंग जैसे किडनी, स्पाइन या दिमाग पर भी असर हो सकता हैं। टीबी हवा में सांस लेने या खांसने से फैल सकता है।

बच्चों में होने वाली दूसरी हेल्थ से जुड़ी समस्याएं

डायबिटीज (Diabetes)

बच्चे भी डायबिटीज का शिकार हो सकते हैं। हाल ही में पाया गया है कि बच्चों और किशोरों में डायबिटीज टाइप 1 सबसे सामान्य है। इसे जुवेनाइल डायबिटीज भी कहा जाता है। इसके कारण अग्न्याशय इंसुलिन नहीं बनाता है। लेकिन छोटे बच्चों में टाइप 2 की डायबिटीज भी हो सकती है। इसका मुख्य कारण है बच्चों में मोटापे की समस्या। टाइप 2 डायबिटीज के साथ, शरीर इंसुलिन को अच्छी तरह से नहीं बनाता या उपयोग नहीं कर पाता है।

कैंसर (Cancer)

हमारे शरीर की कोशिका का एक सिस्टम होता है, जिसके अनुसार उनकी हर एक्टिविटी कंट्रोल होती है। जब कोशिकाओं का विकास अनियंत्रित हो जाता है जिसे कैंसर कहा जाता है। बच्चों में कैंसर के प्रकार वयस्कों की तुलना में अलग होते हैं। बच्चों में पाएं जाने वाले सामान्य कैंसर इस प्रकार है:

  • ल्यूकेमिया (Leukemia)
  • दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर्स (Brain and spinal cord tumors)
  • न्यूरोब्लास्टोमा (Neuroblastoma)
  • विल्म्स ट्यूमर (Wilms tumor)
  • राबडोमयोसारकोमा (Rhabdomyosarcoma)
  • रेटिनोब्लास्टोमा (Retinoblastoma)
  • बोन कैंसर (Bone cancer)

दिल संबंधी समस्याएं (Heart Problems)

ऐसा माना गया है कि हर 100 में से एक बच्चे को दिल संबंधी समस्या होती है। आमतौर पर इस रोग से भी बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s health) प्रभावित होता है। अधिकतर बच्चों में हार्ट संबंधी समस्याओं का कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।

एलर्जी (Allergy)

एलर्जी की समस्या किसी भी बच्चे में हो सकते है। लेकिन, ऐसे बच्चों में यह सामान्य है जिसके परिवार की हिस्ट्री में यह समस्या है। बच्चों में इसके लक्षण हैं त्वचा में रैशेस होना, सांस लेने में समस्या, आंखों में खारिश, छींके या खांसी, पेट का खराब होना आदि।

क्लेफ्ट पेलेट (Cleft pellet)

गर्भ में पल रहे शिशु के मुंह की रूफ जिसे पेलेट कहते हैं, वो छठे से लेकर नौवे महीने में बनती है। लेकिन अगर यह इस रूफ को बनाने वाले टिश्यू आपस में नहीं मिलते हैं, तो यह क्लेफ्ट पेलेट हो सकता है। इससे नाक और मुंह के बीच में एक छेद बन जाता है

और पढ़ें: शिशुओं में गैस की परेशानी का घरेलू उपचार

बच्चों का स्वास्थ्य (Kid’s health) किन रोगों से प्रभावित होता है, इस बारे में तो आप जान ही चुके होंगेबच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए सबसे पहले उन्हें साफ-सफाई और हाइजीन के बारे में जागरूक करें और खुद भी इनका ध्यान रखें। इसके साथ ही किसी भी रोग का लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें ताकि, सही समय पर इलाज हो सके।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/09/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड