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स्ट्रेस मैनेज करने के 3 तरीके, जानिए आपके लिए कौन सा है सही?

स्ट्रेस मैनेज करने के 3 तरीके, जानिए आपके लिए कौन सा है सही?

इन दिनों सभी को तनाव का सामना करना पड़ सकता है। फिर चाहे वह ऑफिस हो, घर हो या स्कूल, कॉलेज। कई बार छोटी-छोटी बातों की वजह से तनाव हो जाता है। जैसे कि किसी से छोटी सी नोंक झोंक, ऑफिस में बहुत ज्यादा काम, ट्रैफिक में बहुत देर तक फंस जाना खासकर जब कहीं जरूरी जाना हो तो। कभी-कभी थोड़ी देर के लिए तनाव होना इतना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन क्रोनिक स्ट्रेस हमें अच्छा परफॉर्म करने से रोकता है। यह फिजिकल, मेंटल और इमोशनल हेल्थ को प्रभावित करता है। हालांकि बहुत ही कम लोगों की लाइफ स्ट्रेस फ्री होती है। इसलिए जरूरी है कि स्ट्रेस मैनेज (Stress management) किया जाए। यहां स्ट्रेस मैनेज करने के तीन आसान तरीके बताए जा रहे हैं। जो मददगार हो सकते हैं। इसके पहले जान लेते हैं कि स्ट्रेस के लक्षण क्या हैं?

तनाव के भावनात्मक लक्षण (Emotional symptoms of stress)

  • आसानी से उत्तेजित, निराश और मूडी होना
  • अभिभूत महसूस करना, जैसे कि आप खुद पर नियंत्रण खो रहे हैं या नियंत्रण लेने की आवश्यकता है
  • अपने मन को आराम देने और शांत करने में मुश्किल महसूस होना
  • अपने बारे में बुरा महसूस करना (कम आत्मसम्मान), और अकेला, बेकार और उदास महसूस करना
  • दूसरों से बचना

और पढ़ें: स्ट्रेस बस्टर के रूप में कार्य करता है उष्ट्रासन, जानें इसके फायदे और सावधानियां

तनाव के शारीरिक लक्षण (Physical symptoms of stress)

  • कम ऊर्जा
  • सिर दर्द
  • दस्त, कब्ज और मतली सहित पेट खराब होना
  • दर्द, दर्द और तनावग्रस्त मांसपेशियां
  • सीने में दर्द और तेज दिल की धड़कन
  • अनिद्रा
  • बार-बार सर्दी और संक्रमण
  • घबराहट और कांपना, कानों में बजना, और ठंडे या पसीने से तर हाथ और पैर
  • शुष्क मुंह और निगलने में कठिनाई
  • जकड़ा हुआ जबड़ा और दांत पीसना

तनाव के संज्ञानात्मक लक्षण (Cognitive symptoms of stress)

तनाव के व्यवहार संबंधी लक्षण (Behavioral symptoms of stress)

  • भूख में बदलाव – या तो ज्यादा खाना या ज्यादा खाना नहीं
  • विलंब करना और जिम्मेदारियों से बचना
  • शराब, ड्रग्स या सिगरेट का अधिक उपयोग
  • अधिक नर्वस व्यवहार करना, जैसे कि नाखून काटना, हिलना-डुलना और पेसिंग

और पढ़ें: योग से स्ट्रेस रिलीफ कैसे पा सकते हैं, जानिए एक्सपर्ट से…

1.पॉजिटिव सेल्फ टॉक (Positive Self-Talk)

हम सभी खुद से बात करते हैं। कई बार जोर से तो अक्सर अपने मन ही ये बातें चलती रहती हैं। खुद से सकारात्मक तरीके से भी बात की जा सकती है। जैसे स्थिति कभी ठीक नहीं होगी या मैं बहुत स्टूपिड हूं की जगह मैं ऐसा कर सकती हूं या सबकुछ ठीक हो जाएगा। जैसी बातें हम खुद से कह सकते हैं। निगेटिव सेल्फ टॉक स्ट्रेस को बढ़ाने का काम करती है। वहीं पॉजिटव टॉक आपको शांत रखने में मदद के साथ ही स्ट्रेस मैनेज करने में मदद करती है। निगेटिव टॉक को पॉजिटिव में बदलना आप सीख सकते हैं।

पॉजिटिव सेल्फ टॉक के उदाहरण

  • मैं इसे नहीं कर सकता कि जगह कहें कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा।
  • मैं इससे नफरत करता हूं जब ऐसा होता है कहने की बजाय ऐसा कहे कि मैं जानता या जानती हूं कि इससे डील कैसे करना है मैं ऐसा पहले भी कर चुकी हूं।
  • मैं अकेला और मजबूर महसूस करती हूं कि जगह खुद से कहें कि अगर मुझे मदद की जरूरत होगी तो मैं मदद लूंगी।
  • मुझे यकीन नहीं होता मैंने इसे बर्बाद कर दिया है ऐसा कहने की बजाय कहें कि मैं एक इंसान हूं और हमसे गलतियां होती हैं। मैं इसे ठीक कर सकता हूं।

इस तरह रोज पॉजिटिव सेल्फ टॉक करने से आपको सुधार दिखाई देगा और स्ट्रेस मैनेज (Stress manage) होगा। इसकी प्रैक्टिस की जा सकती है। कार में बैठे हुए, अपने डेस्क पर, सोने से पहले या कहीं भी अगर आपको लगता है कि निगेटिव विचार आ रहे हैं तो आप इस प्रैक्टिस को दोहरा सकते हैं। बच्चों को भी इस प्रैक्टिस को सिखाया जा सकता है।

और पढ़ें: वॉकिंग मेडिटेशन से स्ट्रेस को कैसे कर सकते मैनेज

2.इमरजेंसी स्ट्रेस स्टॉपर्स (Emergency Stress-Stoppers)

इमरजेंसी स्ट्रेस स्टॉपर्स कुछ एक्शन्स हैं जो उस मूवमेंट पर स्ट्रेस मैनेज कम कर सकते हैं। आपको अलग सिचुएशन के लिए अलग स्ट्रेस स्टॉपर्स की जरूरत हो सकती है और कई बार इन्हें कंबाइन भी करना पड़ सकता है। जो निम्न प्रकार हैं।

  • बात करने या रिएक्ट करने से पहले 10 तक गिनें
  • जब भी लगे कि तनाव हावी हो रहा है धीमे-धीमे गहरी सांसें लें
  • वॉक पर जाएं। भले ही वह कमरे के अंदर चहलकदमी करना हो। इससे आपको अच्छी तरह सोचने का अवसर मिलेगा।
  • थोड़ी देर के लिए ध्यान करें या प्रार्थना करें या कोई भजन सुन लें।
  • स्ट्रेसफुल ईमेल का तुरंत जवाब देना जरूरी नहीं है। आप थोड़ी देर के बाद या एक दिन के बाद भी रिप्लाई कर सकते हैं।
  • कुछ देर के लिए ऐसी सिचुएशन से दूर चले जाए बाद में उन्हें हैंडल करें जब ये पूरी तरह से शांत हो जाएं।
  • बड़ी समस्याओं को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ दें। एक समय पर एक ही स्टेप लें।
  • तनाव से लड़ने के लिए आप म्यूजिक या कुछ इंस्पिरेशन पोडकास्ट का भी सहारा ले सकते हैं।
  • अपने पालतू जानवर के साथ कुछ समय बिताएं। अपने किसी करीबी को गले लगाएं या किसी दूसरे की मदद करें। ये सभी तरीके स्ट्रेस मैनेज करने में मदद करते हैं।
  • वर्कआउट करें या कुछ अन्य फिजिकल एक्टिविटी। एक्सरसाइज स्ट्रेस के लिए अच्छा एंटीडोट है।

3.स्ट्रेस बस्टिंग एक्टिविटीज (Stress-Busting Activities)

ऐसी गतिविधियों करना जिन्हें आप एंजॉय करते हैं स्ट्रेस मैनेज (Stress management) करने और इसे कम करने में प्राकृतिक रूप मदद करती हैं। यहां तक कि जब आप थोड़ा लो महसूस करते हैं तो उस समय पर छोटी-छोटी चीजें करना जैसे कि वॉक पर जाना या दोस्तों से बात करना या एक अच्छी बुक पढ़ना खुशी दे सकता है। जब तनाव की वजह से आप दुखी होते हैं तो कुछ ऐसा कीजिए (10-15 मिनिट के लिए ही सही) जिससे अच्छा लगता है।

निम्न स्ट्रेस रिलीविंग एक्टिविटीज आपके लिए काम कर सकती हैं।

  • जैसे कि पसंदीदा मूवी देखना
  • किसी हरियाली वाली प्रकृति से भरपूर जगह पर वॉक करना
  • थोड़ी देर के लिए बाइक या कार राइड पर जाना
  • गार्डनिंग या फिर घर को सजाना
  • किसी दोस्त के साथ कॉफी या डिनर पर जाना

ये तीन तरीके स्ट्रेस मैनेज करने में मददगार हो सकते हैं। स्ट्रेस को मैनेज करना बेहद जरूरी है क्योंकि लंबे समय तक स्ट्रेस में रहना व्यक्ति की मेंटल के साथ ही फिजिकल हेल्थ को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

क्रोनिक स्ट्रेस का प्रभाव (Chronic stress effects on body)

क्रोनिक स्ट्रेस के चलते कई प्रकार की परेशानियां हो सकती हैं:

  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे अवसाद, चिंता और पर्सनैल्टी डिसऑर्डर
  • हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, असामान्य हार्ट रिदम, दिल के दौरे और स्ट्रोक सहित हृदय रोग
  • मोटापा और अन्य ईटिंग डिसऑर्डर
  • मेंस्ट्र्अल परेशानी
  • यौन रोग, जैसे पुरुषों में नपुंसकता और शीघ्रपतन और पुरुषों और महिलाओं में यौन इच्छा की कमी होना
  • त्वचा और बालों की समस्याएं, जैसे मुंहासे, सोरायसिस और एक्जिमा, और बालों का स्थाई रूप से झड़ना
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं, जैसे कि जीईआरडी, गैस्ट्राइटिस, अल्सरेटिव कोलाइटिस और इर्रिटेबल कोलन

और पढ़ें: Acute Stress Reaction: एक्यूट स्ट्रेस रिएक्शन क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

उम्मीद करते हैं कि आपको स्ट्रेस मैनेज (Stress management) करने से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड