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एक्टर आमिर खान बर्थडे स्पेशल : क्या आप पर भी कहानियों का जल्दी पड़ता है असर?

एक्टर आमिर खान बर्थडे स्पेशल : क्या आप पर भी कहानियों का जल्दी पड़ता है असर?

साल 2012, में टीवी पर शुरू हुआ चैट शो ‘सत्यमेव जयते’ आपको याद ही होगा। सत्यमेव जयते को बॉलीवुड एक्टर आमिर खान होस्ट करते थे। आमिर खान अपने शो सत्यमेव जयते में सामाज में जमीनी तौर पर जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाते थे और उस पर खुल कर लोगों के सामने बात करते थे। बॉलीवुड मिस्टर प्रोफेसनिस्ट एक्टर आमिर खान अपने शो सत्यमेव जयते में शोषण का शिकार हो चुके लोगों से बात करते थे और उनके सफर का किस्सा खुद उन्हीं की बयानी सुनते थे। लेकिन इन दर्द भरी सत्य घटनाओं को सुन सुनकर वे खुद डिप्रेशन में चले गए।

एक्टर आमिर खान के डिप्रेशन की कहानी

सत्यमेव जयते के हर एपिसोड में एक नए गंभीर मुद्दे पर बात की जाती थी। हर मुद्दा इतना ज्यादा गंभीर होता था कि शो की पूरी टीम के साथ-साथ खुद एक्टर आमिर खान भी डिप्रेशन में चले जाते हैं। एक्टर आमिर खान ने खुद मीडिया के सामने इस बात को स्वीकारा है कि सत्यमेव जयते के हर एपिसोड के बाद वो और उनकी पूरी टीम एक मानसिक थेरिपी से गुजरती थी। ताकि, वो और टीम के सभी सदस्य लोगों के साथ हुए शोषण की कहानी जानकर डिप्रेशन में न आ जाएं।

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एक्टर आमिर खान की तरह क्या दूसरों की परिस्थितियां किसी को मानसिक रूप से बीमार कर सकती हैं?

यह सुनने में बड़ा अजीब लग सकता है कि भला कोई कैसे किसी व्यक्ति की परिस्थितियों के कारण डिप्रेशन या किसी तरह की मानसिक समस्या से पीड़ित हो सकता है। लेकिन, ऐसा कई लोगों के साथ देखा गया है। किसी भी व्यक्ति को मानसिक रूप से बीमार करने में दो कारक सबसे ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं, पहला- उसका मानसिक स्वास्थ्य और दूसरा- उसके आस-पास का माहौल

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एक्टर आमिर खान की तरह कैसे अपनी इमोशनल हेल्थ का ख्याल रखें?

बात चाहे जानेमाने शख्स एक्टर आमिर खान की हो या किसी भी सामान्य व्यक्ति की, सबके लिए इमोशनल हेल्थ का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है। इमोशनल तौर पर स्वस्थ्य होने पर कोई भी अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार के तौर-तरीकों पर काफी अच्छे से नियंत्रण रख सकता है। भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा होने पर कोई भी अपने जीवन की चुनौतियों का सामना बड़ी ही आसानी से कर सकता है। इमोशनल हेल्थ अच्छा होने पर लोग असफलताओं के कारण पीछे नहीं हटते, बल्कि सफलता पाने के नए तरीकों पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, एक्टर आमिर खान और उनकी टीम ने अपने डिप्रेशन के लक्षणों को बहुत जल्दी समझ लिया और सही समय पर उपचार की प्रक्रिया शुरू कर दी। लेकिन, आमतौर पर लोग इमोशनल हेल्थ के बारे में ज्यादा सोच-विचार नहीं करते हैं। ऐसे में अगर आपको लगता है कि आप या आपके आस-पास कोई भी व्यक्ति बहुत ज्यादा इमोशनल है या उनसे इमोशनल हेल्थ से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप नीचे बताए गए तरीकों से खुद की और उनकी मदद कर सकते हैं।

अपनी इमोशनल हेल्थ कैसे बेहतर रखें?

एक्टर आमिर खान के डिप्रेशन में जाने की कहानी तो आप जान ही गए होंगे। अब जानते हैं इमोशनल हेल्थ का ख्याल रखने के लिए किन बातों पर ध्यान देंः

1.खुशनुमा माहौल में रहें

शोध से पता चलता है कि भावनात्मक स्वास्थ्य हमारे आस-पास के पर्यावरण और वातावरण से जुड़ा हुआ है। आपके भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और खुश रहने के लिए आपको एक खुशनुमा माहौल में रहने की कोशिश करनी चाहिए। हमारी खुद की समस्याओं या अन्य की समस्याओं को जानकर या देखकर ही इमोशनल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको लगता है कि आप भावनात्मक तौर पर बहुत कमजोर हैं, तो कोशिश करें कि हमेशा एक खुशनुमा माहौल में रहें और कोई भी समस्या होने पर उसे परिवार और दोस्तों के साथ तुरंत शेयर करें।

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2.नई आदतें शुरू करें

अगर आपको लगता है कि आप बहुत ज्यादा इमोशनल हैं, तो कुछ नई आदतों के जरिए अपनी इस खामी को सही कर सकते हैं। उदास होने की बजाय उन गतिविधियों के बारे में सोचें जो आपको खुशी देती हों। आप चाहें तो अपने शौक के मुताबिक डांस क्लास, जिम, पेंटिंग या छोटे बच्चों को पढ़ाने या खुद ही किसी विषय से जुड़े ट्यूशन के बारे में विचार कर सकते हैं। जब भी आप कुछ नया सीखेंगे तो आपका मनोबल पहले के मुकाबले अधिक मजबूत बनता है। इसके अलावा एक नया कौशल चुनने और सीखने से एकाग्रता का स्तर भी बढ़ता है। इनकी मदद से आप आसानी से आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं।

3.डर का सामना करें

अगर किसी स्थिति या किसी की समस्या से आपको डर लगता है या आप डिप्रेशन में जाने लगते हैं, तो उस डर या स्थिति को दूर करने के लिए उसके बारे में और अधिक जानने का प्रयास करें। अगर आप अपने डर और उसके कारण का पता लगा सकते हैं, तो आसानी से उससे बाहर निकल सकते हैं। इसी तरह अगर आपको किसी की स्थिति के बारे में जानकर दुख महसूस होता है, तो उस व्यक्ति के मौजूदा जीवन के बारे में जानें। उससे बात करें कि कैसे उसने अपने जीवन की बुरी स्थितियों का सामना किया और मौजूदा जीवन पहले के मुकाबले अब कितना स्वस्थय और खुश है।

4.समय का इस्तेमाल करें

आपको अपने कामकाजी जीवन के समय और निजी जीवन के समय को प्रबंधित करना चाहिए। इमोशनल हेल्थ सामान्य तौर पर सामाजिक स्तर से ज्यादा जुड़ा होती है। जिसे बेहतर बनाने के लिए आप सप्ताह के किसी एक दिन या महीने के किसी एक दिन सामाजिक कार्यों का हिस्सा बन सकते हैं।

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इन बातों का भी रखें ख्यालः

अपनी भावनाओं और प्रक्रियाओं को समझें

आप किस बात पर खुश होते हैं या किस बात पर आप दुखी महसूस कर सकते हैं इस बिंदुओं को समझें। साथ ही, उन स्थितियों को भी नोट करें जो आपको गुस्सा दिला सकती हैं। एक बार इन सभी बिंदुओं और स्थितियों की पहचान करने के बाद आप इन्हें बदलने या इन स्थितियों से दूर रहने के विकल्प के बारे में विचार कर सकते हैं।

तनाव कम करने के तरीकों पर विचार करें

सबसे पहले उन स्थितियों को समझे जिनके कारण आपको तनाव हो सकता है। फिर उसे कम करने और तनाव के लक्षणों के प्रबंधन के तरीकों को खोजें और उस पर नियंत्रण करने की कोशिश करें। तनाव कम करने के लिए आप योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज का भी सहारा ले सकते हैं।

अपनी भावनाओं को उचित तरीकों से व्यक्त करना सीखें

अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार या बात से आपको किसी तरह की कोई समस्या होती है, तो खुलकर उस बारे में उस व्यक्ति से बात करें। अपनी भावनाओं के बारे में किसी से भी बात करने में शर्म नहीं महसूस करें। अगर आप किसी की बात को मन से लगाकर रखेंगे, तो वो आपमें डिप्रेशन का कारण बन सकता है जो धीरे-धीरे आपको इमोशनल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है।

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शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें

मानसिक स्वास्थ्य को अगर स्वस्थ रखना है, तो शारीरिक रूप से स्वस्थ होना आपके लिए बेहद जरूरी होता है। हर प्रकार की मानसिक बीमारी शारीरिक बीमारी के कारण ही शुरू हो सकती है। शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हमेशा संतुलित आहार खाएं, स्मोकिंग और ड्रिंकिंग की आदतों से दूर रहें, ऐसी गतिविधियों का हिस्सा बनें जो आपके शरीर को पोषण देने में मदद करे।

प्रतिक्रिया देने से पहले विचार करें

किसी की बातों का जवाब देने या किसी तरह के रवैये को अपनाने से पहले थोड़ा विचार करें। अगर आपको किसी की बात का बुरा लगता है तो सबसे पहले खुद को शांत रखने की कोशिश करें। भावनाएं काफी मजबूज होती हैं। इसलिए भावनाओं में बहने से पहले अपने मन के शांत होने का इंतजार करें।

सोशल बनें

परिवार और दोस्तों के साथ-साथ अपने आस-पास रहने वाले लोगों के साथ भी मेलजोल के स्तर को बढ़ाएं। उनकी छोटी-मोटी समस्याओं में उनकी जरूरत के अनुसार ही उनकी मदद करें।

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अगर कोई मानसिक बीमारी है, तो उसका निदान कैसे किया जा सकता है?

किसी भी तरह की मानसिक बीमारी की पहचान करने के लिए निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैंः

  • फिजिकल टेस्टः आपके मानसिक स्थिति को समझने के लिए आपके डॉक्टर आपकी शारीरिक गतिविधियों का परीक्षण करेंगे और लक्षणों को नोट करेंगे।
  • लैब टेस्ट आपके शरीर के ऑर्गन्स कैसे काम कर रहें है इसकी भी जांच की जा सकती है जिसके लिए डॉक्टर लैब टेस्ट भी कर सकते हैं।
  • मानसिक स्थिति का मूल्यांकनः डॉक्टर या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट आपके लक्षणों, विचारों, भावनाओं और व्यवहार के पैटर्न के बारे में आपसे बात करेंगे। वो आपके कई तरह से सवाल भी पूछ सकते हैं जिसके आधार पर वो आपकी स्थिति का आकलन करेंगे।

इमोशनल हेल्थ को बेहतर करने के लिए किस तरह की थेरिपी का सहारा लिया जा सकता है?

इमोशनल हेल्थ को बहेतर बनाने के लिए टॉक थेरिपी का प्रभाव किसी भी तरह की दवाओं के उपचार से कहीं ज्यादा प्रभावकारी पाया जाता है। इस दौरान आपके डॉक्टर थेरिपी के निम्न प्रकार अपना सकते हैंः

व्यक्तिगत थेरिपी

व्यक्तिगत थेरिपी में आपकी मनो स्थिति से जुड़ी समस्याओं के बारे में मनो चिकित्सक सिर्फ आपसे ही बात करेंगे। आपकी समस्याओं और आपकी भावनाओं को खुद आपके जरिए सुनने और समझने का प्रयास करते हैं।

ग्रुप थेरिपी

ग्रुप थेरिपी किसी भी तरह की मानसिक समस्या या इमोशनल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का सबसे सफल तरीका माना जाता है। ग्रुप थेरिपी के दौरान एक ही समय में कई लोग हिस्सा ले सकते हैं। जहां पर सभी लोग एक-एक करके अपनी समस्याओं और स्थितियों के बारे में चिकित्सक के साथ-साथ ग्रुप का हिस्सा बनें सभी लोगों के साथ बात करते हैं। ग्रुथ थेरिपी के जरिए लोगों का आत्मविश्वास काफी मजबूत बन सकता है। ग्रुप में शामिल अन्य लोगों से उन्हें प्रेरणा मिल सकती है जो उन्हें उनकी मनोस्थिति से उबरने में मदद कर सकती हैं।

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कपल थेरिपी

कपल थेरिपी में व्यक्ति और उसके साथी के साथ चिकित्सा निजि जीवन से लेकर कामकाजी और सामाजिक जीवन के बारे में दोनों से बात करते हैं।

फैमिली थेरिपी

इमोशनल हेल्थ को बहेतर बनाने के लिए एक परिवार का योगदान सबसे अहम माना जाता है। अगर व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों के साथ काफी घुला-मिला रहता है, तो वह काफी आसानी से अपनी हर समस्याओं का सामना कर सकता है।

एक्टर आमिर खान से लें सीख

बॉलीवुड एक्टर आमिन खान और आमिर खान के शो सत्यमेव जयते की टीम के सदस्यों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनके शो का हिस्सा बन रहे लोगों के अनुभव से उन्हें इमोशनल हेल्थ से जुड़ी किसी तरह की समस्या हो सकती है। अपने शो के जरिए उनका इरादा था समाज में जागरूकता लाना। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उन मुद्दों के बारे में बात करना जो कहीं न कहीं हर किसी के जीवन में इमोशनल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है। अपनी इमोशनल हेल्थ को प्रभावित होने से बचाने के लिए आपको अपने परिवार और दोस्तों के साथ-साथ अपने आस-पास होने वाली घटानओं के बारे में भी अवेयर रहने की जरूरत हो सकती है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Mental Health and Psychotherapy. https://www.webmd.com/mental-health/mental-health-psychotherapy#1. Accessed on 04 March, 2020.

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Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/03/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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