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Grief Reaction: दुख की प्रतिक्रिया क्या है?

परिचय|लक्षण|कारण|जोखिम|उपचार
Grief Reaction: दुख की प्रतिक्रिया क्या है?

परिचय

दुख की प्रतिक्रिया (Grief Reaction) क्या है?

दुख की प्रतिक्रिया का अर्थ है किसी करीबी को खो देने के बाद होने वाली प्रतिक्रिया। आप किसी अपने को खो देते हैं तो दुख या शोक का अनुभव होता है यह एक अवस्था नहीं बल्कि एक प्रक्रिया है। अधिकांश लोग हानि के कुछ समय बाद ठीक हो जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों में यह दुख की प्रतिक्रिया लंबे समय तक रह जाती है और गंभीर रूप ले सकती है।

दुख की प्रतिक्रिया के प्रकार

एक्यूट ग्रीफ (Acute Grief) या दुख की प्रतिक्रिया

एक्यूट ग्रीफ रिएक्शन में अशांति, उदासी और अनिद्रा शामिल होती है और आमतौर पर उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। एक साल के भीतर यह स्थिति अपने आप ठीक हो जाती है।

इंटेंस ग्रीफ रिएक्शन या दुख की प्रतिक्रिया (Intense Grief)

किसी करीबी को खोने के कारण मायोकार्डियल इंफार्कशन (एमआई) जैसी स्थिति बन सकती है। इसमें हृदय संबंधी जोखिम हो सकता है।

किसी निजी की मौत के बाद भी जब व्यक्ति एक वर्ष से अधिक समय तक शोक मनाता रहे या उसका दर्द कम ना हो तो उसे जटिल दुख या कॉम्प्लीकेटेड ग्रीफ कहते हैं। दर्दनाक भावनाओं और दुःख के लक्षण हैं। ऐसे लोग ना ठीक से खा पाते हैं ना सो पाते हैं। अपना कोई भी काम वह सामान्य तरह से करने में उन्हें कोई रुचि नहीं रह जाती। वह डिप्रेशन का भी शिकार हो सकते हैं और सुसाइड की बारे में भी सोच सकते हैं।

लक्षण

दुख की प्रतिक्रिया (grief reaction) के लक्षण क्या हैं?

दुःख प्रतिक्रिया का स्तर हर व्यक्ति में अलग—अलग होता है। किसी नुकसान से होने वाले दुख की प्रतिक्रिया को ही दुख की प्रतिक्रिया कहा जाता है। यह जटिल दैहिक और मनोवैज्ञानिक लक्षणों को जन्म देती हैं। यही दुख की प्रतिक्रिया के लक्षण हैं।

दुख की प्रतिक्रिया के भावनात्मक लक्षण

जो व्यक्ति दुख का अनुभव करता है उसमें सदमा, स्तब्धता, उदासी, इनकार, क्रोध, अपराध, असहायता, अवसाद और तड़प सहित अनेक इसी प्रकार की भावनाएं जन्म ले लेती हैं। ऐसा व्यक्ति बिना किसी ठोस कारण के भी रो सकता है।

दुख की प्रतिक्रिया के विचारात्मक लक्षण

दुख के कारण अविश्वास, भ्रम, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, पूर्वाग्रह और मतिभ्रम जैसे लक्षण व्यक्ति में घर कर सकते हैं।

शारीरिक संवेदनाओं में दुख की प्रतिक्रिया के लक्षण

दुख की प्रतिक्रिया के रूप में शारीरिक संवेदनाएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। जैसे छाती या गले में जकड़न और भारीपन, मिचली या पेट खराब होना, चक्कर आना, सिरदर्द, सुन्न होना, मांसपेशियों में कमजोरी, तनाव या थकान। यह सभी दुख की प्रतिक्रिया के लक्षण व्यक्ति को किसी न किसी बीमारी में जकड़ लेते हैं।

दुख की प्रतिक्रिया का व्यवहारिक लक्षण

सोने में कठिनाई, दैनिक गतिविधियों में रुचि न रहना और अधिक आक्रामक या चिड़चिड़ा हो जाना दुख की प्रतिक्रया हो सकता है।

दुख की प्रतिक्रिया के दैहिक लक्षण (Somatic symptoms)

सीने में जकड़न, घुटन, सांस की तकलीफ, पेट की परेशानी, मांसपेशियों में खिचाव और सुस्ती आदि आना दुख की प्रतिक्रिया के दैहिक लक्षण हैं।

दुख की प्रतिक्रिया के मनोवैज्ञानिक लक्षण

अपराधबोध, क्रोध, बेचैनी, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता, गतिविधियों को एकरूप से सुचारू रखने में मुश्किल आना।

ताकोसुबो कार्डियोमायोपैथी (Takosubo cardiomyopathy)

सीने में दर्द और गंभीर तनाव के बाद सांस लेने में तकलीफ, मिमिक हार्ट अटैक, बाएं वेंट्रिकल में असामान्य गतिविधियां।

कारण

दुख की प्रतिक्रिया के कारण क्या हैं?

जब आप किसी करीबी को खो देते हैं उसे ही दुख की प्रतिक्रिया कहते हैं। दुख की प्रतिक्रिया उम्र, रिश्ते आदि पर आधारित होती है।

दुःख— प्रियजन को खो देने वाली भावनात्मक प्रतिक्रिया को दुख कहते हैं।

शोक— किसी करीबी की मृत्यु पर जताई जाने वाली बाहरी अभिव्यक्ति को शोक कहते हैं। इसमें सांस्कृतिक और धार्मिक रीति-रिवाज भी शामिल हैं।

बिरीवमेंट— दुख और शोक की अवधि जो नुकसान के समय और बाद में रहती है उसे बिरीवमेंट कहते हैं।

प्रत्याशात्मक दुख Anticipatory Grief — यह एक अपेक्षित नुकसान की प्रतिक्रिया है। यह बीमार व्यक्ति और उसके करीबी दोनों को ही प्रभावित करने वाला दुख है।

ताकोसुबो कार्डियोमायोपैथी Takosubo Cardiomyopathy (ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम): यह किसी भावनात्मक या शारीरिक तनाव जैसे किसी प्रियजन की अचानक मृत्यु, अचानक बीमारी, एक गंभीर दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा के कारण बाएं वेंट्रिकल का कमजोर होना है। यह कुछ समय बाद ठीक हो जाता है।

दुख की प्रतिक्रिया को प्रभावित करने वाले बहुत से कारक होते हैं।

— व्यक्ति की उम्र बहुत बड़ा कारक हो सकती है। बच्चे और वयस्क और बुजुर्ग हर किसी में दुख की प्रक्रिया का प्रभाव अलग पड़ता है।

— मृत व्यक्ति के साथ किस प्रकार का संबंध या रिश्ता था।

— मृत व्यक्ति से आपका लगाव कैसा था।

— मृत्यु कैसे हुई? बीमारी से या अचानक।

— धार्मिक या आध्यात्मिक विश्वास पर भी दुख की प्रतिक्रिया निर्भर करती है।

— सांस्कृतिक मान्यताएं

— परिवार, दोस्तों और समुदाय दुख के समय आपका कितना साथ देते हैं, इसपर भी दुख की प्रतिक्रिया निर्भर करती है।

— आर्थिक स्थिति, सामाजिक तनाव या संबंध में तनाव आदि भी प्रभाव डालते हैं।

जोखिम

दुख की प्रतिक्रिया के जोखिम क्या हैं?

  • डिप्रेशन
  • आत्मघाती विचार या व्यवहार, सुसाइड करने की इच्छा
    — चिंता
    — अनिंद्रा या इंसोम्निया
    — हृदय रोग, कैंसर या उच्च रक्तचाप जैसी शारीरिक बीमारी का खतरा बढ़ना
    — दैनिक जीवन, रिश्तों या किसी भी कार्य को करने में मुश्किल आना या मन न लगना
    — शराब, निकोटीन का उपयोग या अन्य नशीली चीजों का दुरुपयोग

उपचार

दुख की प्रतिक्रिया का उपचार क्या हैं?

योगा करें

जून 2017 के फ्रंटियर्स इन इम्युनोलॉजी Frontiers in Immunology के एक अध्ययन के अनुसार मन-शरीर की गतिविधियां आपको आराम करने में मदद तो करती ही हैं बल्कि ये आणविक स्तर पर तनाव और चिंता के प्रभावों को कम करने में भी मददगार साबित हो सकती हैं। नियमित रूप से योगा आदि करने पर लोगों में इंफ्लेमेशन की समस्या में कमी आती है। स्ट्रेस को कम करने के लिए आप घर पर या किसी योगा इंस्टीट्यूट पर योगा कर सकते हैं। यह शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के तनाव के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

हैल्दी डायट फॉलो करें

जब व्यक्ति तनाव में होता है तब चीनी और फैट से भरपूर चीजें खाने का मन होता है। उस समय आपको यह सब खाकर अच्छा लग सकता है लेकिन बाद में यह आपके शरीर पर काफी बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। खराब खान—पान के कारण हाइपरटेंशन, मोटापा आदि समस्या होने की संभावना रहती है। इसलिए कोशिश करें कि इस वक्त एक हैल्दी डायट फॉलो करें। इसमें फल, दाल, सब्जियों के साथ बहुत सारा पानी पीना न भूलें।

अच्छी नींद बहुत जरूरी

किसी करीबी की मौत के कारण अक्सर लोगों को सोने में तकलीफ होने लगती है। ऐसे में व्यक्ति रातों को बार—बार उठता रहता है, सोने में दिक्कत होती है या सो ही नहीं पाता। यह सब इंसोम्निया की तकलीफ को जन्म देते हैं। अनिंद्रा के कारण गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि समय पर सोना उठना करें और कैफीन, शराब आदि का सेवन न करें या कम करें।

एक्टीव रहें

आप अकेलेपन को जितना करीब लाएंगे समाज और जिंदगी से उतनी ही दूरी बढ़ेगी। यदि आप दुख की प्रतिक्रिया को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहते तो खुद को एक्टीव रखें। मन न कहे तो भी व्यायाम करें, जॉगिंग या अन्य किसी भी तरह की एक्टीविटी से जुड़े रहें। अकेले जाने का मन न हो तो ऐसे ग्रूप या जिम आदि को ज्वॉइन करें।

स्वास्थ्य पर नजर रखें

दुख की प्रतिक्रिया के दौरान स्वास्थ्य की अनदेखी बहुत लाजमी सी बात है। यदि आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं या किसी प्रकार की तकलीफ महसूस कर रहे हैं तो डॉक्टर से परामर्श करना न भूलें। चूंकि स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देने से आप गंभीर खतरों के शिकार हो सकते हैं।

नई जिम्मेदारियां लें

ऐसे करीबी की मौत जिसके न रहने पर आपकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं उन्हें स्ट्रेस बढ़ने का कारण न बनने दें। नई जिम्मेदारियों को अपनाएं और सफलतापूर्वक पूरा करने की ​कोशिश करें। एक तो इससे आप व्यस्त रहेंगे और दूसरा यह दुख की प्रतिक्रिया से उभरने में मददगार साबित हो सकता है।

सोशली एक्टीव रहें

सोशली एक्टीव रहने पर आपको मानसिक व शरीरिक रूप से साथ मिलता है और अकेलापन महसूस नहीं होता। यह दुख को कम करने में भी सहायक होता है। इसलिए दोस्तों को घर पर बुलाएं या परिवार वालों के साथ आउटिंग करें। इनमें से कुछ भी अच्छा न लग रहा हो तो फोन पर ही बात कर मन हल्का कर लें।

जटिल दुख चिकित्सा उपचार

यदि आपको लगता है कि आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए या अपके किसी करीबी को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए तो डॉक्टर से परामार्श लें। ऐसे में जटिल दुख का उपचार मनोचिकित्सा के साथ किया जा सकता है। इसे जटिल दुख चिकित्सा कहा जाता है। यह उपचार मनोरोगी के उपचार के समान ही है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Hema Dhoulakhandi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 08/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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