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एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ : क्या आप जानते हैं दोनों के कनेक्शन के बारे में

एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ : क्या आप जानते हैं दोनों के कनेक्शन के बारे में

ये तो सभी जानते हैं कि फिजिकल रूप से फिट रखने में एक्सरसाइज का विशेष महत्व है,लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक्सरसाइज मानसिक रूप से भी स्वस्थ रखने में मदद करती है। रिसर्च से पता चलता है कि जो लोग रोज एक्सरसाइज करते हैं उनकी मेंटल हेल्थ और इमोशनल हेल्थ अच्छी होती है और उनमें मेंटल इलनेश की संभावना कम होती है। एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ (Exercise and Mental health) का क्या संबंध है इस लेख में बताया जा रहा है। साथ ही अपनी मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए इसे अपनी डेली लाइफ में कैसे शामिल करें इसकी जानकारी भी दी जा रही है।

एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ (Exercise and Mental health)

एक्सरसाइज करना मानसिक बीमारियों के रिस्क को कम कर सकता है। यह डिप्रेशन, एंजायटी जैसी कंडिशन्स के इलाज में मददगार है। बता दें कि माइल्ड से मॉडरेट डिप्रेशन में फिजिकल एक्टिविटीज को एंटीडिप्रेसेंट और साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट्स जैसे कि बिहेवियरलर थेरिपी की तरह ही प्रभावी मानी जाती है। एक्सरसाइज दूसरे ट्रीटमेंट ऑप्शन्स के साथ एक वैल्यूबल एडिशन हो सकता है। इसलिए एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ का एक अच्छा कनेक्शन है।

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एक्सरसाइज हमें मेंटली अच्छा कैसे फील करवाती हैं? (Why does exercise make us feel better, mentally?)

जो लोग रेगुलरी एक्सरसाइज करते हैं वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि इससे उन्हें अच्छा महसूस होता है। एक्सरसाइज मूड को बूस्ट करने के साथ ही फोकस करने में मदद करती हैं। ये लाइफ को एक पॉजिटिव आउटलुक देने में मदद करती हैं। एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ (Exercise and Mental health) का लिंक कॉम्प्लिकेटेड है। निष्क्रिय रहने से मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है। कई तरीके हैं जिससे एक्सरसाइज मेंटल हेल्थ को फायदा पहुंचा सकती है।

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एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ का कनेक्शन (Exercise and Mental health connection)

एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ का बेहतर कनेक्शन क्यों माना जाता है। यह नीचे बताए जा रहे कारणों से स्पष्ट हो जाएगा।

  • जब हम एक्सरसाइज करते हैं तो ब्रेन के कैमिकल्स जैसे कि सेरोटॉनिन, स्ट्रेस हॉर्मोन्स और एंड्रोफिन्स में बदलाव होता है।
  • रेगुलर एक्सरसाइज अच्छी तरह सोने में मदद करती है और एक अच्छी नींद मूड को अच्छा रखती है।
  • एक्सरसाइज आपके सेंस ऑफ कंट्रोल, कोप अप करने की क्षमता और सेल्फ इस्टीम में सुधार कर सकती है। जो लोग रोज एक्सरसाइज करते हैं वे बताते हैं कि उन्हें गोल को अचीव करने के बाद कितना अच्छा महसूस करते हैं।
  • एक्सरसाइज निगेटिव विचारों से हटाने में मदद करती है और नए अनुभवों को आनंद लेने में मदद करती है।
  • अगर व्यक्ति दूसरों के साथ मिलकर एक्सरसाइज करता है तो यह सोशल सर्पोट प्राप्त करने और सोशलाइज होने में भी मदद करती है।
  • एक्सरसाइज फस्ट्रेशन को बारह निकालने का अच्छा तरीका है।
  • यह स्केलेटल मसल टेंशन को कम करने में मददगार है, जिससे आप रिलैक्स महसूस करते हैं।

एक्सरसाइज और एडीएचडी (Exercise and ADHD)

एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ (Exercise and Mental health) में कनेक्शन कितना गहरा है अब इससे समझ सकते हैं कि यह एडीएचडी के लक्षणों को कम करने में मददगार है। साथ ही यह फोकस, मोटिवेशन और मूड को बढ़ाने का काम करती है। फिजिकल एक्टिविटी तुरंत ब्रेन के डोपामाइन, नोरेपिनेफ्रिरिन के लेवल को बूस्ट करती है। ये फोकस और अटेंशन को प्रभावित करते हैं। यह एएचडी की दवाओं की तरह काम करती है। इसलिए एडीएचडी के मरीज को एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करने का प्रयास करना चाहिए।

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एक्सरसाइज और पीटीएसडी और ट्रॉमा (Exercise and PTSD and Trauma)

साक्ष्य बताते हैं कि वास्तव में अपने शरीर पर ध्यान केंद्रित करके और व्यायाम करते समय कैसा महसूस करते है इससे आप वास्तव में अपने नर्वस सिस्टम की मदद कर सकते हैं और इमोबिलाइजेशन स्ट्रेस रिस्पॉन्स से बाहर निकलना शुरू कर सकते हैं जो पीटीएसडी या ट्रॉमा की विशेषता है। अपने दिमाग को भटकने देने के बजाय, अपने जोड़ों और मांसपेशियों में शारीरिक संवेदनाओं पर ध्यान दें, यहां तक कि आपके शरीर के हिलने-डुलने पर भी। ऐसे व्यायाम जिनमें क्रॉस मूवमेंट शामिल है और जो हाथ और पैर दोनों को जोड़ते हैं – जैसे चलना (विशेषकर रेत में), दौड़ना, तैरना, भार प्रशिक्षण, या नृत्य – आपके कुछ बेहतरीन विकल्प हैं।

मेंटल हेल्थ के लिए एक्सरसाइज (Exercise for mental health)

एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ (Exercise and Mental health) का हेल्दी कनेक्शन तो आप समझ ही गए हैं। बता दें कि अगर एक्सरसाइज आपके रूटीन का हिस्सा नहीं है तो आप सोच सकते हैं कि मेंटल हेल्थ को बूस्ट करने के लिए आपके कितनी एक्सरसाइज करने की जरूरत है।

अच्छी बात ये है कि एक्सरसाइज का मतलब खुद को थकाना नहीं है और ना ही इसमें बहुत ज्यादा समय लगता है। एक्सरसाइज की मॉडरेट इंटेंसिटी ही काफी है और यह आपके मूड और सोचने के तरीके में बदलाव लाती है। ऑस्ट्रेलिया की फिजिकल एक्टिविटी और सेंडेट्ररी गाइडलाइन्स की रिकमंडेशन के अनुसार एक व्यक्ति को हर दिन एक्टिव रहना चाहिए। जिसमें हर सप्ताह 2.5-5 घंटे की मॉडरेट फिजिकल एक्टिविटी जिसमें ब्रिस्क वॉक, स्विमिंग शामिल है। वहीं हर सप्ताह 1.25-2.5 की कठिन एक्सरसाइज को शामिल करना चाहिए। जिसमें जॉगिंग, फास्ट साइकलिंग या टीम सपोर्ट शामिल है।

हम मॉडरेट और कठिन एक्सरसाइज को कंबाइन भी किया जा सकता है। हालांकि कोई भी एक्सरसाइज किसी एक से अच्छी नहीं है। इनके अलावा आप योगा, स्ट्रेचिंग, मेडिटेशन भी कर सकते हैं। ये बॉडी और माइंड दोनों को अच्छा रखेगी। इसके अलावा घर के काम जैसे कि झाड़ू-पोछा लगाना या वैक्यूमिंग करना माइल्ड वर्कआउट हो सकता है। आप अपने अनुसार कुछ भी चुन सकते हैं।

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एक्सरसाइज की शुरूआत कैसे करें? (How to start exercise?)

एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ (Exercise and Mental health) के संबंध को जानने के लिए बाद एक्सरसाइज करना जरूर चाहेंगे, लेकिन अगर आपने पहले एक्सरसाइज नहीं की है तो एक्सरसाइज शुरू करना डराने वाला हो सकता है, लेकिन एक प्लान बनाकर आप इसे शुरू कर सकते हैं और आगे बढ़ा सकते हैं। एक्सरसाइज प्लान बनाने के लिए निम्न बातों का ध्यान जरूर रखें।

उम्मीद करते हैं कि आपको एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ (Exercise and Mental health) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड