बार-बार आत्महत्या के ख्याल आते हैं? जानिए इससे बचने के तरीके

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट October 13, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

एनसीबीआई की रिसर्च के अनुसार, भारत में हर साल तकरीबन 17 हजार लोग आत्महत्या करते हैं। कभी कुछ लोग अपनी निजी समस्याओं के चलते इतने परेशान हो जाते हैं कि उनके मन में आत्महत्या तक करने के ख्याल आने लगते हैं। आत्महत्या के ख्याल आने पर जरूरी है कि आप खुद को संभालें और इस नकारात्मक विचार से खुद को दूर करने की भरपूर कोशिश करें। युवाओं में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं।

आत्महत्या के ख्याल आना दोष नहीं है और इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप पागल हैं, या कमजोर हैं। इसका केवल यह अर्थ है कि आप ज्यादा दर्द में हैं। हो सकता है आपको लग रहा हो कि ये दर्द आपके साथ हमेशा रहेगा लेकिन, समय और समर्थन के साथ, आप अपनी समस्याओं को दूर कर सकते हैं और दर्द और आत्महत्या की भावनाएं से खुद को पार ले जाएंगे।

और पढ़ें: क्या गुस्से में आकर कुछ गलत करना एंगर एंजायटी है?

आत्महत्या के विचार आने पर क्या करना चाहिए?

चाहें आप कितना भी दर्द महसूस कर रहे हों, आप अकेले नहीं हैं। दर्द का इलाज किया जा सकता है और आशा को एक नई दिशा दी जा सकती है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी स्थिति क्या है। दुनिया में ऐसे लोग हैं जिन्हें आपकी जरूरत है, ऐसी जगहें जहां आप अच्छा महसूस कर सकते हैं। आपके साथ जरूर कुछ ऐसे यादगार अनुभव होंगे, जो आपको याद दिला सकते हैं कि जीवन कितना अच्छा है।

मौत का सामना करने के लिए असली हिम्मत चाहिए। आप अपनी इसी हिम्मत और साहस का उपयोग जीवन की कठनाइयों का सामना करने के लिए कीजिए। अवसाद पर काबू पाने और अपने कौशल को जानने के लिए कीजिए।

हैलो स्वास्थ्य का न्यूजलेटर प्राप्त करें

मधुमेह, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कैंसर और भी बहुत कुछ...
सब्सक्राइब' पर क्लिक करके मैं सभी नियमों व शर्तों तथा गोपनीयता नीति को स्वीकार करता/करती हूं। मैं हैलो स्वास्थ्य से भविष्य में मिलने वाले ईमेल को भी स्वीकार करता/करती हूं और जानता/जानती हूं कि मैं हैलो स्वास्थ्य के सब्सक्रिप्शन को किसी भी समय बंद कर सकता/सकती हूं।

और पढ़ें: मेंटल स्ट्रेस कम करना है तो जानें ईवनिंग वॉक के फायदे

हमेशा याद रखिए

  • भावनाएं निश्चित नहीं हैं, वे लगातार बदलती रहती हैं। आप आज जैसा महसूस कर रहे हैं, वैसा कल महसूस नहीं किया था कल या अगले सप्ताह आपको कुछ और महसूस हो रहा होगा। इसलिए अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करना बेहद जरूरी है।
  • आपकी अनुपस्थिति मित्रों और प्रियजनों के जीवन में दुख और पीड़ा पैदा करती है। जब भी दिमाग पर नकारात्मक बातें हावी हो और आपको लगे कि आपका जीवन व्यर्थ है तो आप यह सोचें कि कितने लोग हैं जिन्हें आपसे लगाव हैं। उनकी जिंदगी में आपकी अनुपस्थिति से कितना दुख होगा।
  • कई चीजें हैं, जो आप अभी भी अपने जीवन में पूरा कर सकते हैं। कभी भी ऐसा लगे कि आपके पास जीवन में करने के लिए कुछ नहीं है तो यह सोचें कि जिन चीजों को आप करना चाहते थे। छोटी-छोटी चीजों में खुशियां ढूंढें। हर वो काम करें जिससे आपको खुशी मिले
  • जीवन में ढेर सारी जगहें, अनुभव हैं, जो आपको खुश करने की क्षमता रखते हैं। आपको इन चीजों से खुद को जोड़े रखना होगा। जब भी दिमाग में नकारात्मकता हावी हो तो उन सभी पलों के बारे में सोचें जिनमें आपको खुशी मिली हो।
  • आत्महत्या करना एक अपराध माना जाता हैं, इसका ख्याल आना एक दोष नहीं हैं। यह एक तरह की मानसिक समस्या है, क्योंकि इस टाइम आप दर्द में होते हैं। आप यह न समझें कि यह दर्द कभी खत्म नहीं हो सकता, इस समस्या से निकलने के लिए हमेशा अपने घरवालों के साथ रहें और ज्यादा से ज्यादा समय उन्हीं के साथ बिताएं। ऐसा करना आपको मानसिक तनाव से भी दूर रखता है।

और पढ़ें: चिंताग्रस्त होने के लक्षण क्या हैं और जानिये उसके उपाय

मुझे आत्महत्या के विचार क्यों आ रहे हैं?

कई तरह के भावनात्मक दर्द आत्महत्या के विचारों को जन्म दे सकते हैं। हर व्यक्ति के लिए आत्महत्या के विचार आने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनसे निपटने की क्षमता हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। बात की जाए युवाओं की, तो किसी को रिलेशनशिप टूटने के चलते, जॉब की परेशानियों के चलते या अन्य किसी निजी कारणों की वजह से सुइसाइड के विचार आने लगते हैं। इसके अलावा, हेल्थ या पैसों की समस्या के चलते भी सुइसाइड कर लेते हैं।

और पढ़ें: स्ट्रेस से बचने के लिए इसे समझना है जरूरी, क्विज खेलें बढ़ाएं अपनी जानकारी

आत्महत्या क्यों एकमात्र विकल्प की तरह लग सकता है?

अभी जो गहन भावनात्मक पीड़ा आप अनुभव कर रहे हैं, वह आपकी सोच को विकृत कर सकती है। इसलिए, समस्याओं के संभावित समाधान को समझ पाना कठिन हो जाता है। चिकित्सक, परामर्शदाता, मित्र या प्रियजन आपकी समस्या का समाधान करने में मदद कर सकते हैं। उन्हें मदद करने का मौका दें।

इस बारे में हैलो स्वास्थ्य ने डॉक्टर श्रुति श्रीधर से बात की। उन्होंने इस बारे में बताया कि जब किसी व्यक्ति के जीवन में सभी समस्याएं एक साथ आती हैं, तो उन्हें लगता है कि इन समस्या से वो कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे। उन्हें इन समस्याओं से निकलने की कोई उम्मीद नहीं दिखती, जिसके चलते लोग इन समस्याओं से भागने लगते हैं और उन्हें इनका एकमात्र विकल्प सुइसाइड लगता है।

और पढ़ें: World Crosswords And Puzzles Day : जानिए किस तरह क्रॉसवर्ड पजल मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद है

सुइसाइड के विचार हमेशा अस्थायी होते हैं

ऐसा लग सकता है कि आपका दर्द और दुख कभी खत्म नहीं होगा लेकिन, कोई भी संकट आमतौर पर अस्थायी होते हैं। समाधान अक्सर पाए जाते हैं, भावनाएं बदलती हैं और सकारात्मक घटनाएं घटती हैं। आत्महत्या किसी बात का स्थायी समाधान हो ही नहीं सकता इसलिए, चीजों को बदलने के लिए और दर्द कम होने के लिए खुद को पूरा समय दें।

और पढ़ें: चिंता और निराशा दूर करने का अचूक तरीका है गार्डनिंग

आत्महत्या का ख्याल आने पर इन बातों का रखें ध्यान

कुछ भी नहीं करने का वादा करें

भले ही आप अभी बहुत दर्द में हैं लेकिन, गलत विचारों और कुछ भी गलत करने से खुद को रोककर रखें। अपने आप से एक वादा करें कि मैं 24 घंटे इंतजार करूंगा और उस दौरान कुछ भी खुद के साथ गलत नहीं करूंगा।

powered by Typeform

दवाओं और शराब से बचें

अगर आपने ड्रग्स या एल्कोहॉल लिया है, तो आत्महत्या के विचार और भी मजबूत हो सकते हैं। जब आप निराशा महसूस करते हैं या आत्महत्या के बारे में सोच रहे हों, तो बिना पर्चे वाली दवाओं या एल्कोहॉल का उपयोग नहीं करना चाहिए।

और पढ़ें : जोकर फिल्म ने मेंटल हेल्थ के प्रति लोगों को किया अवेयर, किसी को भी हो सकते हैं ये 5 तरह के डिसऑर्डर

लोगों की बातों पर ध्यान न दें

हमारा व्यक्तित्व कैसा है, इस बात को हमसे ज्यादा कोई और बेहतर नहीं जान सकता। इसके बाद परिवार के लोगों को हमारी सभी अच्छी-बुरी आदतों के बारे में पता होता है। अक्सर हमारे आस-पास के लोग किसी न किसी तरह से हमें जज करते हैं या नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।

हमारे काम में कमी निकालना कुछ लोगों की आदत होती है, लेकिन हमें इन सभी बातों को नजरअंदाज करके खुद को स्ट्रॉन्ग बनाना चाहिए और अपनी सभी कमियों को जानकर उनको दूर करने की कोशिश करनी चाहिए, न कि हताश होकर हार मान लेनी चाहिए। जो भी व्यक्ति आपको नेगेटिव फील करवाता है, उससे हमेशा दूरी बनाकर रखें। ऐसे लोगों से दूर रहने में ही आपकी भलाई है।

और पढ़ें : लॉकडाउन में स्कूल बंद होने की वजह से बच्चों की मेंटल हेल्थ पर पड़ रहा है असर, जानिए

व्यायाम करें

शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से व्यायाम करना बहुत फायदेमंद होता है। यह आपके शरीर में सकरात्मक ऊर्जा लाता है और दिमाग में जो भी बुरे विचार आते हैं, उनको दूर करता है।

आपको हमेशा ऐसे व्यायाम करने चाहिए, जिससे आपका स्ट्रेस लेवल कम हो और शरीर में पॉजिटिव हार्मोन्स बनें। मेडिटेशन से भी स्ट्रेस को कम किया जा सकता है। आपको जानकार खुशी होगी कि आज के युग में योग ही एकमात्र ऐसा उपाय है, जिसकी मदद से आप अपनी हर बीमारी का निवारण कर सकते हैं।

और पढ़ें : प्रेग्नेंसी में इन 7 तरीकों को अपनाएं, मिलेगी स्ट्रेस से राहत

अपने घर को सुरक्षित बनाएं

उन चीजों को हटा दें, जिनका उपयोग आप खुद को चोट पहुंचाने के लिए कर सकते हैं जैसे कि गोलियां, चाकू, छुरा आदि। अगर आप ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो ऐसी जगह पर जाएं, जहां आप सुरक्षित महसूस कर सकें। यदि आप किसी दवा का ओवर डोज ले सकते हैं, तो उसे किसी साथी को देने को कहें, जो आपको जरूरत के समय उसकी सही मात्रा दे।

जब भी आत्महत्या का विचार आएं, तो किसी अपने से बात करें। किसी बेहतर माहौल में जाएं और लोगों की बात सुनें और समझें। कभी-कभी कुछ बोल देना और सुन लेने से ही दिल का बहुत भारी बोझ हल्का हो जाता है। खुद के लिए मजबूती के साथ खड़े रहें। ध्यान रहे कि कोई भी समस्या या दर्द आपके जीवन से बड़ा नहीं हो सकता।

हम आशा करते हैं कि आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में आत्महत्या के ख्याल से बचने के तरीकों के बारे में बताया गया है। यदि आप इससे जुड़ी कोई जानकारी चाहते हैं, तो आप हम से कमेंट कर पूछ सकते हैं। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा यह भी आप हमें कमेंट सेक्शन में बता सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

Was this article helpful for you ?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

International Youth Day: ऐसी 10 बीमारियां जिनके शिकार अधिकतर इंडियन यूथ हो रहे हैं

तंबाकू में 4,000 से अधिक विभिन्न रसायन पाए गए हैं. इनमें से 60 से अधिक रसायनों को कैंसर का कारण माना जाता है. इसमें मौजूद निकोटीन लोगों को तंबाकू की लत की ओर जाता है. international youth diwas 2020

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Arvind Kumar

टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार को कैसे रोका जा सकता है?

टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार और सुसाइड टेंडेंसी बढ़ती जा रही है। अमेरिका में डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सेंटर के अनुसार 10 से 24 वर्ष के आयु के लोगों में तीसरा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है। suicide tendency in teenagers in hindi

के द्वारा लिखा गया Shikha Patel
मेंटल हेल्थ, सुइसाइड प्रिवैंशन July 9, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

युवाओं में आत्महत्या के बढ़ते स्तर का कारण क्या है?

15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या के कारण मौत को गले लगा लेते हैं। युवाओं में सुसाइड के कारण और निदान क्या है? खुदकुशी से निपटने के टिप्स के लिए पढें।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Hemakshi J
के द्वारा लिखा गया Smrit Singh
मेंटल हेल्थ, स्वस्थ जीवन May 13, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

सुइसाइड प्रिवेंशन : क्योंकि हर जिंदगी है अनमोल!

Suicide prevention: सुइसाइड प्रिवेंशन कैसे करें। आत्महत्या के विचार को रोकने के लिए दूसरों की मदद कैसे करें?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Hemakshi J
के द्वारा लिखा गया Smrit Singh
मेंटल हेल्थ, स्वस्थ जीवन May 5, 2020 . 8 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

कॉलेज स्टूडेंट्स में डिप्रेशन

वर्ल्ड कॉलेज स्टूडेंट्स डे: क्यों होता है कॉलेज स्टूडेंट्स में डिप्रेशन?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shikha Patel
प्रकाशित हुआ September 9, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
सुसाइड प्रीवेंशन क्विज - suicide prevention quiz

सुइसाइड प्रिवेंशन डे: ये क्विज बताएगी, क्या आप किसी को आत्महत्या करने से रोक सकते हैं?

के द्वारा लिखा गया Surender aggarwal
प्रकाशित हुआ September 7, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार

‘नथिंग मैटर्स, आई वॉन्ट टू डाय’ जैसे स्टेटमेंट्स टीनएजर्स में खुदकुशी की ओर करते हैं इशारा, हो जाए अलर्ट

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shikha Patel
प्रकाशित हुआ September 2, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
भारत में महिला आत्महत्या women suicide prevention in india

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: क्यों भारत में महिला आत्महत्या की दर है ज्यादा? क्या हो सकती है इसकी रोकथाम?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Mousumi dutta
प्रकाशित हुआ September 2, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें