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'नथिंग मैटर्स, आई वॉन्ट टू डाय' जैसे स्टेटमेंट्स टीनएजर्स में खुदकुशी की ओर करते हैं इशारा, हो जाए अलर्ट

'नथिंग मैटर्स, आई वॉन्ट टू डाय' जैसे स्टेटमेंट्स टीनएजर्स में खुदकुशी की ओर करते हैं इशारा, हो जाए अलर्ट

‘अब कुछ नहीं बचा है’, ‘हर चीज मेरे बिना बेहतर होगी’, ‘आई वॉन्ट टू डाय’ जैसे वाक्य अगर बच्चा बोलता है, तो यह मेलोड्रामा लगता है लेकिन ये डायलॉग्स किसी बड़ी मुसीबत की ओर इशारा हो सकते हैं।

अपने बच्चों के इन स्टेटमेंट्स को नजरअंदाज न करें बल्कि इन पर ध्यान देकर आप अपने बच्चे को सुसाइड करने से बचा सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि बच्चों में सुइसाइड टेंडेंसी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सेंटर की मानें तो आत्महत्या, 15 से 24 साल की उम्र के टीनएजर्स में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। 6 से 12 वर्ष की आयु के आठ बच्चों में से लगभग एक में आत्महत्या के विचार आते हैं।

यदि पेरेंट्स इस तरह के हादसों से पहले ही इसके कारणों और संकेतों का पता लगा लें, तो वे अपने बच्चे को आत्महत्या करने से बचा सकते हैं। वर्ल्ड सुइसाइड प्रिवेंशन डे (10 सितंबर) पर जानते हैं कि टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार को रोकने के लिए पेरेंट्स क्या उपाय कर सकते हैं?

क्या कहते हैं आंकड़ें?

  • भारत में आत्महत्या की दर सबसे ज्यादा टीनएजर्स में है।
  • नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 15 सालों में सुइसाइड के मामले 23 प्रतिशत बढ़ गए हैं। रिपोर्ट के आंकड़ें कहते हैं कि साल 2000 में लगभग एक लाख आठ हजार से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की। वहीं 2015 में यह संख्या बढ़कर एक लाख 33 हजार से भी ज्यादा हो गई।
  • इनमें से 18 साल से 30 साल के बीच करीबन 32 प्रतिशत लोग थे।
  • पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन की मानें तो दुनिया भर में महिला आत्महत्या दर को लेकर भारत छठे नंबर पर है। इसका मतलब है कि भारत देश में महिलाएं आत्महत्या ज्यादा करती हैं। इनमें से अधिकतर महिलाओं की उम्र 15-29 साल के बीच में है।

और पढ़ें : सुशांत सिंह राजपूत ने की खुदकुशी, पुलिस ने डिप्रेशन को बताई सुसाइड की वजह

टीनएज में सुसाइड (Teenage suicide) करने के लक्षण

अगर बच्चा खुद को नुकसान पहुंचाने की बाते करता है या वो इसकी कोशिश तक कर चुका है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। किसी मानसिक बीमारी या स्कूल या कॉलेज में चल रही परेशानी की वजह से बच्चा खुद से ही नफरत करने लग सकता है और इसके परिणामस्वरूप वो आत्महत्या का कदम उठा सकता है।

टीनएजर्स में आत्महत्या के क्या कारण हो सकते हैं? (What can be the causes of suicide in teenagers?)

टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार आने के पीछे जटिल कारण हो सकते हैं। टीनएजर्स के लिए किशोरावस्था एक स्ट्रेसफुल समय या दौर होता है। इस दौरान वे कई बड़े बदलावों से गुजरते हैं और कभी खुद को तो कभी अपने आसपास घट रही चीजों को समझने की उलझन में रहते हैं।

इनमें बॉडी चेंजेज, विचारों और भावनाओं में बदलाव शामिल हैं। स्ट्रेस, कंफ्यूजन, डर और संदेह की स्ट्रॉन्ग फीलिंग्स टीनएजर्स की प्रॉब्लम सॉल्विंग और डिसीजन मेकिंग की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

इसकी वजह से टीनएजर्स एक सही डिसीजन लेने में असमर्थ हो सकते हैं। नतीजन, किसी भी परिस्थिति का सामना करना उनके लिए कठिन हो जाता है और परिस्थिति के बहुत ही ज्यादा बिगड़ने पर वे आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार आने के पीछे निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे –

  • फैमिली में मनमुटाव
  • पेरेंट्स का तलाक
  • एक नए शहर में शिफ्ट होना
  • दोस्ती में बदलाव
  • स्कूल की समस्याएं
  • बेरोजगारी
  • ब्रेकअप
  • करियर में नाकामयाबी
  • जॉब की टेंशन आदि।

इन समस्याओं को दूर करना किसी-किसी के लिए बहुत कठिन हो सकता है या उन्हें बुरी परिस्थिति से निकलने में काफी समय लग सकता है। तो कुछ लोगों को आत्महत्या करना ही अपनी समस्याओं का एकमात्र समाधान नजर आता है।

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टीनएजर्स में सुइसाइड के विचार (suicidal thoughts in teenagers) वाले चेतावनी भरे संकेत क्या हैं?

युवाओं में सुसाइड टेंडेंसी के कई वार्निंग साइन देखने को मिलते हैं। पेरेंट्स का इन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते इस अनहोनी को रोका जा सके।

  • अचानक से बच्चे का इंटरेस्ट उसकी मनपसंद एक्टिविटी से हट जाना
  • फैमिली मेंबर्स और फ्रेंड्स से अलग-अलग रहना
  • खुद की उपेक्षा करना
  • एल्कोहॉल या ड्रग्स का इस्तेमाल करना
  • अपनी जान की परवाह न करना, जैसे-रोड क्रॉस करते समय असावधानी बरतना
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • काफी उदास रहना या अकेले रहना पसंद करना
  • सुसाइड से संबंधित बात करना या ऑनलाइन उसके बारे में सर्च करना
  • भूख/ नींद में बदलाव आना आदि

नोट : ध्यान रहे कि हर इंसान में सुसाइड के संकेत अलग-अलग होते हैं। जहां कुछ टीनएजर्स में इन लक्षणों के बारे में आसानी से पता लग जाता है वहीं, कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो किसी भी तरह का संकेत नहीं देते हैं।

अक्सर देखा गया है कि टीनएजर्स अपनी भावनाओं के बारे में जल्दी किसी से कोई बात साझा नहीं करते हैं इसलिए इस उम्र के बच्चों में आत्महत्या के संकेतों को पहचानना मुश्किल होता है।

और पढ़ें : टीनएजर्स के लिए लॉकडाउन टिप्स हैं बहुत फायदेमंद, जानिए क्या होना चाहिए पेरेंट्स का रोल ?

टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार (suicidal thoughts in teenagers) : क्या हैं रिस्क फैक्टर्स?

आत्महत्या के लिए एक किशोर में जोखिम उम्र, लिंग, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभावों के आधार पर अलग-अलग होता है। समय के साथ रिस्क फैक्टर्स बदल सकते हैं लेकिन, इन तरह के टीनएजर्स में आत्महत्या का रिस्क बढ़ जाता है –

  • एक या अधिक मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स
  • मादक पदार्थों के सेवन की समस्याएं
  • इंपल्सिव बिहेवियर
  • अवांछनीय जीवन की घटनाओं (जैसे-पेरेंट्स की मृत्यु हो जाना) से ग्रस्त बच्चे
  • मानसिक समस्याओं की फैमिली हिस्ट्री
  • मादक पदार्थों के सेवन की फैमिली हिस्ट्री
  • सुसाइड की फैमिली हिस्ट्री
  • पारिवारिक हिंसा (फिजिकल, सेक्शुअल, वर्बल या इमोशनल एब्यूज)
  • घर में हथियारों का होना
  • पहले भी किया गया सुइसाइड अटेम्प्ट आदि।

और पढ़ें : मानसिक तनाव के प्रकार को समझकर करें उसका इलाज

टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार को रोकने के लिए पेरेंट्स ऐसे करें मदद

बच्चे के डिप्रेशन या एंग्जायटी को पहचानें (child depression and anxiety)

टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार

10 में से 9 टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार, किसी मानसिक स्वास्थ्य विकार या मेंटल डिसऑर्डर की वजह से आते हैं और वे सुसाइड को अंजाम देते हैं।

इनमें से ज्यादातर मूड डिसऑर्डर जैसे – डिप्रेशन या एंग्जायटी का शिकार होते हैं। इसलिए यदि आप देखते हैं कि बच्चा उदास या चिंतित है तो उससे पूछें कि इसके पीछे क्या वजह है? बच्चे को आश्वासित करें कि आप उनकी हेल्प करना चाहते हैं।

और पढ़ें : शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जानें मैराथन दौड़ के फायदे

टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार (suicidal thoughts in teenagers) को समझने के लिए अनकही बातों को सुनें

अधिकांश बच्चे जिनके मन में आत्महत्या के विचार आते हैं, वे अकेले में शांत रहना पसंद करने लगते हैं। इसलिए अगर आपका बच्चा अचानक से शांत हो गया है या वह ज्यादा किसी से बात करने में इंटरेस्टेड नहीं है, तो उसकी तरफ ध्यान दें।

बच्चे से बात करने की कोशिश करें। जिन परिवारों के बच्चे आत्महत्या करते हैं उनमें एक सामान्य बात देखने को मिलती है। वह यह है कि ऐसे परिवारों में माता-पिता और बच्चे के बीच कम्यूनिकेशन गैप होता है। इसका मतलब यह है कि पेरेंट्स अपने बच्चे को पूरा समय नहीं देते हैं या बच्चा अपने मन की बात अपने पेरेंट्स को नहीं बता पता है।

यदि आपको ऐसा लगता है कि आपके बच्चे के मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं, तो उसे अकेला न रहने दें। इस स्थिति में ओवररिएक्ट करने से बचें और उससे प्यार से बात करने की कोशिश करें।

और पढ़ें : बार-बार आत्महत्या के ख्याल आते हैं? जानिए इससे बचने के तरीके

ध्यान देना है जरूरी

टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार

यदि टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार आ रहे हैं, तो उसमें जरूर कोई न कोई वॉर्निंग साइन दिखाई दे रहे होंगे। इसलिए उसके हर एक एक्शन पर ध्यान दें।

अक्सर आत्महत्या का प्रयास करने वाले बच्चे अपने माता-पिता से बार-बार कई तरह के स्टेटमेंट कहते हैं जैसे-“आई वांट टू डाय”, “अब कुछ भी मायने नहीं रखता है”, “कभी-कभी मेरी इच्छा होती है कि मैं बस सो जाऊं और कभी न उठूं” आदि।

ये सभी बातें इशारा करती हैं कि आपके बच्चे के मन में सुसाइडल थॉट्स (suicidal thoughts) आ रहे हैं। उसकी आत्महत्या की धमकियों को कभी भी मजाक में न लें, बल्कि सचेत हो जाएं।

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टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार (suicidal thoughts in teenagers) आने पर उन्हें अकेले रहने न दें

अपने बच्चे को दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें। आमतौर पर अकेले रहने की बजाय अन्य लोगों के आसपास रहना बेहतर होता है लेकिन अगर बच्चा इनकार करता है तो उसके साथ जोर जबरदस्ती न करें।

अपनी फीलिंग्स शेयर करें

टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार

अपने बच्चे को बताएं कि वे उनके मुश्किल समय में उनके साथ हैं और किसी भी हालात में उसका साथ नहीं छोड़ेंगे। उनका परिवार और फ्रेंड्स उनके साथ हैं और हमेशा रहेंगे। बच्चे को आश्वस्त करें कि बुरा समय हमेशा के लिए नहीं रहता है, चीजें वास्तव में बेहतर हो जाएंगी। आप उसके लिए चीजों को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

और पढ़ें : संयुक्त परिवार (Joint Family) में रहने के फायदे, जो रखते हैं हमारी मेंटल हेल्थ का ध्यान

प्रोफेशनल हेल्प के लिए कदम बढ़ाएं

यदि आपके बच्चे का व्यवहार आपके लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है, तो तुरंत मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से बात करें। इससे आपके बच्चे की मानसिक स्थिति का पता जल्द से जल्द लगाया जा सकता है। डॉक्टर समय रहते थेरेपी या काउंसलिंग शुरू कर सकते हैं, ताकि टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार को कम किया जा सके।

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व्यायाम की सलाह दें

फिजिकल एक्टिविटी जैसे वॉकिंग, जॉगिंग आदि से माइल्ड से मॉडरेट डिप्रेशन पर ब्रेक लगाया जा सकता है। आप बच्चे को योगा और मेडिटेशन क्लास के लिए भी भेज सकते हैं। इसके पीछे कई थ्योरी हैं जैसे-

  • वर्कआउट करने से मस्तिष्क की ग्रंथि एंडोर्फिन नामक हॉर्मोन को रिलीज करती है। यह हॉर्मोन मूड में सुधार और दर्द को कम करने के लिए जाना जाता है। साथ ही एंडोर्फिन, कोर्टिसोल की मात्रा को कम करता है। कोर्टिसोल एक हॉर्मोन है जो अवसाद से जुड़ा हुआ है।
  • व्यायाम लोगों को उनकी समस्याओं से डिस्ट्रैक्ट करता है और उन्हें अपने बारे में बेहतर महसूस कराता है।
  • एक्सपर्ट्स प्रति दिन तीस से चालीस मिनट और प्रति सप्ताह दो से पांच बार एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं।

और पढ़ें : डिप्रेशन ही नहीं ये भी बन सकते हैं आत्महत्या के कारण, ऐसे बचाएं किसी को आत्महत्या करने से

घर को सेफ बनाएं

टीनएजर्स में खुदकुशी के विचार

घर से उन सभी चीजों को हटा दें जिनका इस्तेमाल आपका बच्चा सुसाइड या खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए कर सकता है, जैसे – चाकू, दवाएं, फायरआर्म्स आदि। ब्रैडी सेंटर टू प्रिवेंट गन वायलेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 12 साल की उम्र के अमेरिकी युवाओं में 2013 में बन्दूक से सुसाइड करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा थी।

आत्महत्या के विचार रखने वाले टीनएजर्स कभी न कभी अपने सुसाइड थॉट्स को व्यक्त जरूर करते हैं। इसलिए पेरेंट्स उनके ऊपर पूरा ध्यान दें। इससे समय रहते समस्या का हल निकाला जा सकता है।

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और टीनएजर्स को आत्महत्या से कैसे रोका जाए इससे संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

 

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Suicide in Children and Teens. https://www.aacap.org/AACAP/Families_and_Youth/Facts_for_Families/FFF-Guide/Teen-Suicide-010.aspx. Accessed On 02 Sep 2020

Teen Suicide. https://www.stanfordchildrens.org/en/topic/default?id=teen-suicide-90-P02584. Accessed On 02 Sep 2020

Indian suicide data: What do they mean?. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6902359/. Accessed On 02 Sep 2020

Suicide in Teens and Children Symptoms & Causes. http://www.childrenshospital.org/conditions-and-treatments/conditions/s/suicide-and-teens/symptoms-and-causes. Accessed On 02 Sep 2020

About Teen Suicide. https://kidshealth.org/en/parents/suicide.html. Accessed On 02 Sep 2020

Suicide Prevention. https://www.helpguide.org/articles/suicide-prevention/suicide-prevention.htm. Accessed On 02 Sep 2020

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Shikha Patel द्वारा लिखित
अपडेटेड 02/09/2020
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