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बच्चे की करियर काउंसलिंग करते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

    बच्चे की करियर काउंसलिंग करते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

    बच्चे की करियर काउंसलिंग जैसे शब्द आमतौर पर भारत में उच्च वर्ग के परिवारों के लिए माने जाते हैं। देखा जाए तो, मध्यम वर्ग के परिवार अपने बच्चों के भविष्य के लिए किसी भी तरह के करियर काउंसलिंग के बारे में कोई विचार नहीं करते हैं। अधिकतर बच्चों के करियर उनके ग्रेड और रिजल्ट के आधार पर तय कर दिया जाता है। जहां कुछ परिवार बच्चों पर किसी करियर के लिए प्रेशर बनाते हैं, वहीं कुछ माता-पिता अपने बच्चे को उसके पसंद का करियर चुनने की भी पूरी आजादी देते हैं। अगर आप भी ऐसा ही कुछ विचार रखते हैं, तो आपको अपना मन बनाने से पहले बच्चे की करियर काउंसलिंग के बारे में एक बार जरूर विचार करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले आपको यह जानना चाहिए कि बच्चे की करियर काउंसलिंग आखिर है क्या।

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    बच्चे की करियर काउंसलिंग क्या है?

    करियर काउंसलिंग एक बच्चे के भविष्य के साथ-साथ उसके माता-पिता के लिए भी बेहद खास मायने रखता है। करियर काउंसलिंग बच्चे के करियर में सफलता प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाते हैं। कुछ बोर्ड नौंवी क्लास से तो कुछ बोर्ड बच्चे को 11वीं क्लास से किसी एक स्ट्रीम से पढ़ाई कराते हैं। बच्चे को कौन-सा स्ट्रीम मिलेगा यह उसके पिछली कक्षा के ग्रेड और अंको पर निर्भर करता है। जो एक वजह भी हो सकती है कि अधिकतर माता-पिता बच्चे की करियर काउंसलिंग के बारे में सोचते ही नहीं हैं। लेकिन, अगर आप बच्चे की करियर काउंसलिंग पहले ही कर लेते हैं, तो बच्चा अपने रूचि के विषय में पढ़ाई करने और भविष्य बनाने के लिए खुद को तैयार कर सकता है। करियर काउंसलिंग बच्चे को उसकी रूचि और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानने मदद करता है। इसलिए यह हर बच्चे के लिए एक जरूरी मैटर हो सकता है।

    करियर काउंसलिंग दो से तीन घंटे या एक से दो-तीन दिनों का भी सेशन हो सकता है। क्योंकि इतने कम समय में किसी बच्चे की रूचि का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।

    बच्चे की करियर काउंसलिंग के फायदे क्या हैं?

    बच्चे की करियर काउंसलिंग के कई फायदे हैंः

    सही स्ट्रीम चुनने का मौका मिले

    बच्चे की करियर काउंसलिंग से बच्चे को अपने लिए सही स्ट्रीम चुनने का मौका मिल सकता है। काउंसलिंग के जरिए बच्चे यह जान सकते हैं कि उनकी रूचि किस विषय में हैं। कई बार बच्चे उस विषय को अपनी रूचि बनाने का फैसला कर लेते हैं जिसमें उनके नंबर सबसे ज्यादा अच्छे आते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर बच्चे को अपना स्ट्रीम चुनने से पहले अपनी रूचि वाले विषय और किस विषय में उसके ज्यादा नंबर आते हैं, दोनों के बारे में विचार करना चाहिए। तभी बच्चा अपने लिए सही स्ट्रीम चुन सकता है।

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    खुद के सवालों का जवाब मिलता है

    माता-पिता से ज्यादा बच्चे को गलत स्ट्रीम चुन लेने का डर होता है। क्योंकि, हमारे एजुकेशन सिस्टम में अगर बच्चे ने 10वीं क्लास में आर्ट्स स्ट्रीम लिया है, तो 12वीं तक उसे इसी स्ट्रीम से ही पढ़ाई करनी होगी। इसके अलावा कॉलेज के लिए भी उसके पास साइंस, मैथ या मेडिकल जैसे विषयों में पढ़ाई करने का विकल्प नहीं होता है। आमतौर पर देखा जाए, तो बच्चे उसी विषय में सबसे ज्यादा नंबर लाते हैं, जो उनके लिए बहुत आसान होता है। इसी के चलते वो इसी विषय में स्ट्रीम का चुनाव करने का फैसला भी ले सकते हैं। जिसपर आगे उन्हें पछतावा भी हो सकता है। इस पछतावे से बचने और अपने सारे सवालों के जवाब बच्चे की करियर काउंसलिंग के जरिए मिल सकती है। मान लीजिए अगर बच्चे की रूचि मैथ में हैं, लेकिन वो उसमें अच्छा नंबर नहीं लाता है और वहीं हिस्ट्री उसे बहुत ही आसान लगती है, जिसकी वजह से हिस्ट्री में उसके नंबर सबसे ज्यादा आते हैं, तो ऐसे में बच्चे का हिस्ट्री स्ट्रीम चुनना एक गलत फैसला साबित हो सकता है। क्योंकि, भविष्य में वो बहुत ही जल्दी इस विषये बोर हो सकता है और उसके नंबर भी कम आ सकते हैं।

    मार्केट ट्रेंड की जानकारी मिले

    काउंसिलिंग का एक सबसे बडा फायदा यह भी है कि काउंसलर वैसे सब्जेक्ट या उभरते क्षेत्रों के बारे में जानकारी देते हैं जो भविष्य में रोजगार का अच्छा साधन हो सकती हैं। जिसके आधार पर आपको आपके लिए सबसे अच्छा कॉलेज या इंस्टीट्यूट कौन सा हो सकता है इसके बारे में भी जानकारी दे सकते हैं।

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    अच्छी नौकरी के नए विकल्पों की जानकारी भी दें

    अगर आपको लगता है कि डॉक्टर, इंजीनियर या वकील ही भविष्य के लिए सबसे अच्छा करियर हो सकता है, तो शायद आप कई और भी जरूरी विकल्पों को कम आंक रहे होंगे। बच्चे की करियर काउंसलिंग से आपको ऐसे कई विकल्पों के बारे में जानकारी मिलती है, तो भविष्य का अच्छा विकल्प बन सकता है। मार्केट की बात करें, तो हर समय किसी एक प्रोफेशन की मांग सबसे ज्यादा हो सकती है। आज भविष्य के लिए बच्चे टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, मीडिया के साथ-साथ होटल मैनेजमेंट को एक अच्छा विकल्प मान सकते हैं।

    पेरेंट्स अपने बच्चों का करियर काउंसलिंग कैसे करना चाहिए?

    पेरेंट्स अपने बच्चों का करियर काउंसलिंग कराने के लिए किसी प्रोफेशनल काउंसलर की मदद लें सकते हैं जो मनोवैज्ञानिक तरीके से छात्र से बातचीत और सवाल-जवाब करते हैं। इस दौरान वे साइकोमेट्रिक टेस्‍ट के आधार पर छात्र की प्रतिभा को समझते हैं और उसके रूचि और भविष्य के स्कोप को देखते हुए उसके एक अच्छी सलाह देने में मददगार साबित हो सकते हैं। इसके अलावा आज ऑनलाइल भी बच्चे का करियर काउंसलिंग कराने के ढेरों विकल्प मौजूद हैं अगर विशेषज्ञ से मिलने का समय नहीं मिल पा रहा है, तो इनकी भी मदद ली जा सकती है। साथ ही, आजकल इंट्रेन्स एग्जाम शुरू होने से पहले कई विशेषज्ञ कई तरह के सेमिनार का भी आयोजन करते हैं। जहां पर भी माता-पिता अपने बच्चे के भविष्य से जुड़े सवालों के उलझन को आसानी से हल कर सकते हैं।

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    अपने स्ट्रीम को लेकर मन में खुशी होती है

    अगर बच्चा अपने लिए सही स्ट्रीम का चुनाव करता है, तो उसके मन में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। भविष्य में उसे कभी भी इस बात का पछतावा नहीं होगा कि उसने अपने लिए गलत विषय का चुनाव किया है। ऐसे में बच्चे का पूरा ध्यान अपने उस एक ही विषय पर होगा और उस विषय से जुड़ी हर बात में खुद को अपडेट रखने की पूरी कोशिश करेगा जो उसे उसके लक्ष्य को पाने में मदद भी करेगा।

    पेरेंट्स को कौन-कौन से मुख्य बिंदुओं को ध्यान रखना चाहिए?

    बच्चे की करियरस काउंसलिंग के दौरान माता-पिता को कई तरह की बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिसमें शामिल हैंः

    • बच्चे की करियर काउंसलिंग कराने से पहले एक दिन पहले ही तैयारी कर लें, जैसे- बच्चे का फेवरेट सब्जेक्ट, किस सब्जेक्ट में उसके ज्यादा और सबसे कम नंबर आते हैं, स्पोर्ट्स में बच्चे की रूचि, किस खेल में बच्चा बहुत अच्छा है, बच्चे की होब्बीस, अलग-अलग विषयों में बच्चे के विचार आदि।
    • काउंसलर के सामने बच्चे को किसी तरह से डराए या धमकाएं नहीं। ऐसा करने से बच्चा काउंसर के सामने अपने सवाल खुलकर नहीं बता पाएगा और काउंसलर के जवाब से भी उसे संतुष्टि नहीं मिलेगी।
    • बच्चे को काउंसर से हर तरह के जायज और फालतू सवाल पूछने दें। ऐसा करने से बच्चे के मन की सारी दुविधाएं दूर हो सकती है। इस बात से न डरे कि बच्चे के फालतू सवालों से काउंसलर गुस्सा हो सकता है। बल्कि, इसका ध्यान रखें कि आप अपने बच्चे के सवालों के पिटारे को खोलने के लिए ही बच्चे की करियर काउंसलिंग करा रहे हैं।
    • बच्चे की पढ़ाई की तुलना उसके दोस्तों, रिश्तेदारों के बच्चों या पड़ोंसियों के बच्चों से न करें। याद रखें कि हर किसी की अपनी-अपनी रूचि हो सकती है।
    • करियर काउंसलिंग से पहले उसके ट्यूशन टीचर और क्लास टीचर से बच्चे के बारे में बात करें। आपका बच्चा पढ़ने में कैसा है इसकी सबसे सही जानकारी इन्हीं के पास से आपको मिल सकती है। जो आपको बच्चे की करियर काउंसलिंग करने में मदद कर सकती है।

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    सूत्र

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    How to help your child navigate a route to career success. https://www.theguardian.com/careers/how-help-child-navigate-career-paths. Accessed on 04 April, 2020.

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    Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 07/04/2020 को
    डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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