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कॉन्टैक्ट लैंस (Contact lenses) लगाने का रखते हैं शौक तो जान लें ये 9 बातें

कॉन्टैक्ट लैंस (Contact lenses) लगाने का रखते हैं शौक तो जान लें ये 9 बातें

कॉन्टैक्ट लैंस क्या है?

कॉन्टैक्ट लैंस (Contact lenses) आंखों के लिए एक ऐसा विकल्प है जिससे देखने की क्षमता को ठीक किया जा सकता है। जिस तरह हम चश्मे का इस्तेमाल करते हैं ठीक वैसे ही इसे आंखों की कॉर्निया पर लगाया जाता है या पहना जाता है। जिन्हें चश्मा पहनना पसंद नहीं या किसी कारण चश्मा इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं, वे कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करते हैं या कर सकते हैं। कॉन्टैक्ट लैंस छोटी सी कटोरी जैसा होता है, जिसे आंखों की कॉर्निया पर लगाया जाता है। हालांकि आंखों के इस लैंस को बेहद ही सावधानी पूर्वक लगाया जाता है। कॉन्टैक्ट लैंस कई तरह के होते हैं।

कॉन्टैक्ट लैंस के प्रकार:

1. सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस (Soft contact lenses)-

सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस सॉफ्ट और फ्लेक्सिबल प्लास्टिक के बने होते हैं। सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस में इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक से ऑक्सिजन का आसानी से आदान प्रदान होता है। सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस को आसानी से एडजस्ट भी किया जा सकता है। आजकल सिलिकॉन-हाइड्रोजेल सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस भी काफी ट्रेंड में हैं और सामान्य सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस की तुलना में ज्यादा बेहतर माने जाते हैं। क्योंकि सिलिकॉन-हाइड्रोजेल सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस आंखों को सामान्य सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस से ज्यादा ऑक्सिजन प्रदान करते हैं।

2. रिजिड गैस परमिएबल (RGP) कॉन्टैक्ट लैंस (Rigid Gas Permeable (RGP) Contact Lenses)-

रिजिड गैस परमिएबल लैंस अन्य आंखों के लैंस की तुलना में अब उपयोग कम किए जाते हैं। रिजिड गैस परमिएबल कॉन्टैक्ट लैंस अन्य आंखों के लैंस की तुलना में किफायती माने जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस लैंस का इस्तेमाल करना ज्यादा आसान होता है और यह जल्दी टूटते भी नहीं हैं। रिजिड गैस परमियबल कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करना शुरुआत में थोड़ा कठिन हो सकता है। ये धीरे-धीरे अन्य लैंस की तरह सॉफ्ट भी नहीं होते हैं, लेकिन कुछ सप्ताह लगातार इस्तेमाल करने से यह भी आरामदायक हो जाते हैं।

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3. एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस (Extended wear contact lenses)-

एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस इसलिए बेहतर माने जाते हैं क्योंकि इस लैंस को सोने के दौरान भी पहना जा सकता है। ऐसे लैंस का इस्तेमाल एक हफ्ते से 30 दिनों तक लगातार भी किया जा सकता है। एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस काफी सॉफ्ट माने जाते हैं। इसलिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। फ्लेक्सिबल प्लास्टिक से बने एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस से भी ऑक्सिजन का आदान-प्रदान बेहतर तरीके से होता है। हालांकि अगर लैंस को लगातार पहनना है, तो यह लैंस की क्वॉलिटी पर भी निर्भर करता है, लेकिन रिसर्च के अनुसार आंखों को बिना लैंस के आराम करना भी जरूरी होता है। इसलिए कुछ घंटे पहनने के बाद कोशिश करें कि सोने के पहले इसे निकाल दें।

4. डिस्पोजेबल (रिप्लेसमेंट शेडूअल) एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस (Disposable extended wear contact lenses)-

डिस्पोजेबल एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस यूज एंड थ्रो होते हैं। डिस्पोजेबल एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस का चयन अपनी आवश्यकतानुसार नहीं करना चाहिए। डिस्पोजेबल एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस जब तक ऑप्थल्मोलॉजिस्ट सलाह न दें तब तक इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। डिस्पोजेबल एक्सटेंडेड वियर कॉन्टैक्ट लैंस को रिप्लेसमेंट शेडूअल भी कहा जाता है क्योंकि इसका इस्तेमाल एक बार करने के बाद फिर से नहीं किया जाता है।

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कॉन्टैक्ट लैंस पहनने के फायदे

  • कॉन्टैक्ट लैंस को खेलने के दौरान भी पहना जा सकता है।
  • चश्मे की वजह से चेहरे, कान और नाक पर हमेशा दवाब पड़ता है जबकि कॉन्टैक्ट लैंस की वजह से ऐसी समस्या नहीं होती है।
  • कार या अन्य गाड़ी ड्राइव करने के दौरान AC की वजह से चश्मे पर भाप आ जाती है, जिससे धुंधला दिखाई देता है। ऐसी स्थिति में लैंस का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। क्योंकि लैंस की वजह से साफ दिखाई देता है और ड्राइविंग के दौरान कोई परेशानी भी नहीं होती।
  • अगर धूप में ट्रैवल कर रहें हैं या बाहर निकले हैं, तो कॉन्टैक्ट लैंस के साथ-साथ गोगल्स भी पहन सकते हैं।
  • कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल 12 से 13 वर्ष से ज्यादा के बच्चे आसानी से कर सकते हैं।
  • ऐसे भी लैंस बनाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल सिर्फ एक बार किया जाए। अगर सावधानी से कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करते हैं, तो इसका नुकसान नहीं होगा।
  • कॉन्टैक्ट लैंस आंखों से अपने आप निकल या गिर नहीं सकते।

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कॉन्टैक्ट लैंस के क्या हैं नुकसान?

कॉन्टैक्ट लैंस से निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं। जैसे-

  • आंखों में दर्द महसूस होना
  • कभी-कभी लैंस की वजह से देखने में परेशानी होना
  • अत्यधिक तेज रोशनी में कॉन्टैक्ट लैंस की वजह से परेशानी होना
  • आंखों से आंसू आना या पानी आना
  • आंखें लाल होना
  • आंखों में अल्सर की समस्या हो सकती है

इन परेशानियों से बचने के लिए कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल ध्यानपूर्वक करना चाहिए।

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कैसे करें कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल?

कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल अगर ठीक से न किया जाए तो आंखों से संबंधित परेशानियां हो सकती है। इसलिए आंखों के लैंस का इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए। कोई परेशानी न हो इसलिए निम्नलिखित तरह से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे:-

स्टेप 1: हाथों की सफाई करें

कॉन्टैक्ट लैंस आंखों में लगाने से पहले सबसे पहले हाथों की अच्छी तरह से सफाई करें। हाथ को साबुन से क्लीन करें। अब अपने दोनों हाथों को अच्छी तरह से टॉवेल की मदद से पोछ लें। बेहतर होगा की हाथ को सुखाने के लिए पोछते वक्त टॉवेल या एयर ड्रायर का इस्तेमाल करें। इस दौरान टिशू पेपर के इस्तेमाल से बचें क्योंकि यह हाथों में चिपक सकता है और कई बार हम इसे देख भी नहीं पाते।

स्टेप 2: दाहिने और बाएं आंख के लैंस का ध्यान रखें

अगर आपके दोनों आंखों के लैंस का नंबर एक समान है, तो फिर कोई परेशानी की बात नहीं है, लेकिन अगर आपके दोनों आंखों की पावर अलग-अलग है तो आंखों में लैंस लगाने से पहले लैंस को ठीक तरह से चेक कर लें।

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स्टेप 3: लैंस लगाने के लिए सही उंगली का करें चयन

कॉन्टैक्ट लैंस आंखों में लगाने से पहले उसे अपनी उस उंगली की टिप पर रखें जिससे आप आसानी से कॉन्टैक्ट लैंस आंखों में लगा सकें। इस दौरान यह ध्यान रखें कि लैंस आपके नाखून पर नहीं होनी चाहिए। बेहतर होगा कि आप इस दौरान अपनी उंगली पर लैंस सल्यूशन को लगाएं। अगर आपका लैंस सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस है, तो यह हमेशा ध्यान रखें कि लैंस आपने अपनी उंगली पर सीधा या उल्टा रखा है। जिस उंगली से लैंस पहन रही हैं या पहन रहें हैं वह कटी या फटी हुई नहीं होनी चाहिए।

स्टेप 4: पलक को धीरे से ऊपर करें

एक हाथ की उंगली पर लैंस और दूसरे हाथ से अपनी पलकों को ऊपर की ओर उठाएं और आसानी से लैंस लगा लें।

स्टेप 5: आंख न झपकाएं

कॉन्टैक्ट लैंस जब आप अपनी आंखों पर लगा रहें होंगे तब आंखे बार-बार न झपकाएं। आंखें बार-बार झपकाने से लैंस ठीक से नहीं लग पाएगा और आंखों से पानी आने की समस्या हो सकती है।

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स्टेप 6: कॉर्निया पर प्रेशर न डालें

जब आप कॉन्टैक्ट लैंस लगा रहें हो तो उस उंगली से कॉर्निया पर तेज प्रेशर न डालें। यह आसानी से लग जाता है।

स्टेप 7: लैंस लगाने के बाद आंख को धीरे से झपकाएं

जब आप लैंस लगा चुके होते हैं तो तुरंत उसी वक्त आंखों को तेजी से झपकाने से बचें। हमेशा लैंस लगाने के बाद आंखों को धीरे से झपकाएं। ऐसा करने से आपको भी परेशानी महसूस नहीं होगी।

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स्टेप 8: कॉन्टैक्ट लैंस उतारने या निकालने में बरतें सावधानी

कॉन्टैक्ट लैंस आंखों से निकालते वक्त जल्दबाजी न करें और सबसे पहले ऐसे आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें जिससे आंखें नम होती हों। इस आईड्रॉप को डालने के बाद ही लैंस को निकालें। इस दौरान आंखों को ऊपर की ओर देखें और फिर उंगली की सहायता से कॉन्टैक्ट लैंस को आराम से बिना प्रेशर के निकाल लें।

स्टेप 9: कॉन्टैक्ट लैंस के साथ लापरवाही न बरतें

कॉन्टैक्ट लैंस को हमेशा ही उसके बॉक्स में रखें। अगर आप डिस्पोजेबल कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे एक बार यूज करके फिर से यूज न करें। वैसे कुछ कॉन्टैक्ट लैंस को सिर्फ एक हफ्ते या सिर्फ एक महीने ही लगाने की सलाह दी जाती है। अगर आप भी ऐसे ही कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करते हैं, समय-समय पर इसे बदलते रहें। कॉन्टैक्ट लैंस को जब ही निकाल कर रखें तो उस वक्त आप उसे लैंस सल्यूशन में ही रखें। ऐसे करने से कॉन्टैक्ट लैंस की क्वॉलिटी बनी रहेगी और इसमें इंफेक्शन का खतरा भी नहीं हो सकता है।

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कॉन्टैक्ट लैंस को इन ऊपर बताए गए स्टेप्स को फॉलो कर आसानी पहना जा सकता है, लेकिन लैंस पहनने के पहले आपके पास क्या-क्या होना आवश्यक है?

निम्नलिखित चीजें अपने पास रखें। जैसे:-

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कॉन्टैक्ट लैंस लगाने वाले लोगों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

कॉन्टैक्ट लैंस पहनने वाले लोगों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए। इन बातों में शामिल हैं-

  • मेकअप करने के पहले कॉन्टैक्ट लैंस लगा लें और मेकअप रिमूव करने से पहले कॉन्टैक्ट लैंस को निकाल दें। ऐसा इसलिए करना चाहिए क्योंकि जब मेकअप करती हैं तो कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती हैं। जो लैंस में लग सकता है और लैंस खराब होने के साथ-साथ आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है। मेकअप रिमूव करने के पहले कॉन्टैक्ट लैंस इसलिए निकालना चाहिए क्योंकि इस दौरान पानी का इस्तेमाल किया जाता है और मेकअप की वजह से चेहरे के साथ-साथ आंखों पर दवाब पड़ता है।
  • कॉन्टैक्ट लैंस कई बार लगाना मुश्किलभरा हो सकता है, लेकिन आराम से पहनने की आदत डालें। शुरुआत में सिर्फ कुछ घंटों के लिए ही कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करें।
  • अगर आप पहली बार कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल कर रहीं हैं, तो कुछ दिनों तक आप कंफर्टेबल महसूस नहीं कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में परेशान न हों क्योंकि कुछ दिनों में आपकी परेशानी दूर हो जाएगी। हालांकि अगर कुछ दिन इस्तेमाल के बाद कोई भी परेशानी महसूस होती है तो कॉन्टैक्ट लैंस न लगाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।
  • जब कभी भी लैंस किसी कारणवश कुछ देर के लिए निकलना पड़े तो कॉन्टैक्ट लैंस सल्यूशन का अवश्य इस्तेमाल करें।
  • कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल ऐसे वक्त में न करें जब आप स्नान कर रहीं हों, किसी धुएं वाली जगह पर हों या स्विमिंग के दौरान।
  • कॉन्टैक्ट लैंस वैसे को कॉर्निया की साइज का होती है, लेकिन अगर आपको कोई परेशानी हो तो इसे न लगाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।
  • कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करें या चश्मे का दोनों ही स्थिति में आपको समय-समय पर जांच करवाते रहें।
  • कॉन्टैक्ट लैंस को कभी भी पानी से साफ न करें।
  • हाथों को क्लीन करने के लिए कई बार हम सभी सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं लेकिन, कॉन्टैक्ट लैंस लगाने या निकालने के दौरान सैनिटाइजर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • सोने के दौरान कॉन्टैक्ट लैंस अवश्य निकाल दें। ऐसा नहीं करने पर आंखों से पानी आना, आंखें लाल होना, जलन महसूस होना या फिर कोई भी परेशानी होने की संभावना बनी रहती है।
  • कॉन्टैक्ट लैंस का चयन खुद से न करें पहले डॉक्टर से संपर्क करें। बाजार में इन दिनों आकर्षक दिखने वाले कॉन्टैक्ट लैंस बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से भी मिल जाते हैं और इनकी कीमत भी ( 200 से 300 रुपए) कम होती है, लेकिन आंखों को स्वस्थ रखने के लिए आप अपनी मर्जी से इसका इस्तेमाल न करें। नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करें।
  • अगर आपको आंखों से जुड़ी हुई कोई परेशानी जैसे आंखों में दर्द, आंखों के आसपास दाने, जलन या कोई और परेशानी होने पर कॉन्टैक्ट लैंस न लगाएं।
  • अगर आप फेस या बालों में किसी तरह का कोई स्प्रे कर रहीं और आपने कॉन्टैक्ट लैंस लगा रखा है तो दोनों आंखें बंद कर स्प्रे करें।
  • कॉन्टैक्ट लैंस को कॉन्टैक्ट लैंस बॉक्स या जिस किसी भी बॉक्स में आप रख रहें हैं उसे उल्टा न रखें।

इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करें। अगर आप कॉन्टैक्ट लैंस से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 29/07/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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