Tummy Time: आप बेबी का टमी टाइम इग्नोर तो नहीं कर रहीं? जानिए क्यों है जरूरी टमी टाइम!

    Tummy Time: आप बेबी का टमी टाइम इग्नोर तो नहीं कर रहीं? जानिए क्यों है जरूरी टमी टाइम!

    शिशुओं के हेल्थ से जुड़े बातों को समझना और उन्हें फॉलो करना हर पेरेंट्स की सबसे पहली प्रायोरिटी होती है। इसलिए आज इस आर्टिकल में बेबी का टमी टाइम (Tummy Time For Baby), इस टॉपिक पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी आपके साथ शेयर करने जा रहें हैं, जो शिशु की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। अब क्या है टमी टाइम (Tummy Time) इसे समझते हैं। वैसे अगर आप टमी टाइम (Tummy Time) को बेबी के डायट रूटीन को समझ रहीं हैं, तो ऐसा नहीं है। टमी टाइम यानी बच्चे को पेट के बल लिटाना है।

    • टमी टाइम का मतलब क्या है?
    • बेबी के टमी टाइम के फायदे क्या हैं?
    • बेबी का टमी टाइम कैसे बनायें?
    • बेबी के टमी टाइम के दौरान किन-किन बातों को ध्यान रखें?

    चलिए बेबी के टमी टाइम (Tummy Time For Baby) से जुड़े इन सवालों के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारी आपके साथ आगे शेयर करेंगे।

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    टमी टाइम (Tummy Time) का मतलब क्या है?

    टमी टाइम (Tummy Time)

    नवजात शिशु के शारीरिक विकास एवं मानसिक विकास में नींद की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। वहीं अच्छी नींद के लिए बेबी का स्लीपिंग पोजीशन का भी ध्यान रखना जरूरी है टमी टाइम भी बेबी के स्लीपिंग पोजीशन एवं उसके अन्य एक्टिविटी से जुड़ा टर्म है। अगर आसान शब्दों में टमी टाइम को समझें, तो इसका अर्थ है शिशु को पेट के बल लिटाना। पेरेंट्स को यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि बेबी का टमी टाइम सिर्फ उसके सोने के वक्त की पोजीशन ही नहीं, बल्कि शिशु के खेलने या क्रॉल करने के पोजीशन से जुड़ा हुआ है। इसलिए बेबी के टमी टाइम के फायदे को समझना जरूरी है।

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    बेबी के टमी टाइम के फायदे क्या हैं? (Benefits of Tummy Time)

    यूएसए के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलपमेंट (National Institute of Child Health and Human Development of USA) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बेबी के लिए टमी टाइम बेहद जरूरी है। तो चलिए बेबी के टमी टाइम के फायदे के बारे में-

    • गर्दन और कंधे के मांसपेशियों के विकास में बेबी के टमी टाइम के फायदे मिलते हैं।
    • बड़े मसल्स जैसे पैर (Leg), हाथ (Arms) और शरीर के धर (Torso) के विकास में भी टमी टाइम के फायदे मिलते हैं।
    • बच्चों में फ्लैट हेड सिंड्रोम (Flat Head Syndrome) का खतरा कम होता है।
    • शिशु जब क्रॉल करता है, रॉलिंग करता है या चलना शुरू करता है, तो ऐसे में बेबी के टमी टाइम के फायदे मिलते हैं। टमी टाइम की वजह से बच्चे के बॉडी को स्ट्रेंथ मिलता है।

    इन फायदों के साथ-साथ क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बेबी के टमी टाइम के फायदे से जुड़ी जानकारियों में 3 बातें प्रमुखता से बताई गई हैं। जैसे:

    • शिशु के सेंसरी डेवलपमेंट (Sensory development) में मदद मिलती है।
    • स्कल डिफॉर्मिटी (Skull deformity) में मदद मिलती है।
    • मोटर स्किल डेवलपमेंट (Motor skill development) में सहायता मिलती है।

    ये सभी हैं बेबी के टमी टाइम के फायदे, लेकिन शिशु का टमी टाइम (Tummy Time) कैसे बनायें अब इसे समझना जरूरी है।

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    बेबी का टमी टाइम कैसे बनायें? (How to Prepare Tummy Time?)

    शिशु का टमी टाइम (Tummy Time) निम्नलिखित समय पर बनाये जा सकते हैं। जैसे:

    • शिशु को स्नान (Bath) करवाने के बाद और डायपर (Diaper) चेंज करने के बाद टमी टाइम को फॉलो किया जा सकता है।
    • शिशु को पेट के बल लिटाने के लिए 3 से 5 मिनट का वक्त नय नवजात शिशुओं के लिए बेहतर माना गया है और जैसे-जैसे बच्चे बड़े होने लगें तो आप इसके साथ टमी टाइम (Tummy Time) बढ़ा सकते हैं।

    जैसे-जैसे बेबी टमी टाइम (Babies Tummy Time) पसंद करने लगेगा वैसे-वैसे उसके टमी टाइम को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। 3 महीने के बच्चे 1 घंटे तक पेट के बल लेटकर रह सकते हैं। दि अमेरिकन एकैडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (The American Academy of Pediatrics) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बेबी के टमी टाइम (Babies Tummy Time) में बदलाव होता रहता है।

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    बेबी के टमी टाइम के दौरान किन-किन बातों को ध्यान रखें? (Tips to follow during Tummy Time)

    टमी टाइम (Tummy Time)

    बच्चों को पेट के बल लेटना अच्छा लगता है, लेकिन टमी टाइम सिर्फ उनके जागे रहने के दौरान ही फॉलो करने में सहूलियत मिलती है। वहीं बेबी के सोने के दौरान अगर बच्चे को पेट के बल सुला रहीं हैं, तो इस दौरान निगरानी रखें। इसके साथ ही निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे:

    1. बेबी के टमी टाइम के दौरान शिशु को अगर नींद (Sleep) आ रही है, तो उसे पीठ के बल लिटा दें। हो सकता है बच्चे बेबी के टमी टाइम के दौरान नींद आये और वो गिर जाए।
    2. टमी टाइम के दौरान शिशु को अकेले ना छोड़ें।
    3. टमी टाइम के लिए स्पेशल तकिये मिलते हैं, जिससे आप बेबी के चेस्ट (Chest) के नीचे रख सकते हैं या आप घर में मौजूद किसी सॉफ्ट और मोटे कपड़े का इस्तेमाल कर सकते हैं।
    4. गर्मियों के दिनों में टमी टाइम (Tummy time) के दौरान ब्लैंकेट का इस्तेमाल ना करें।
    5. टमी टाइम के दौरान शिशु को अगर फर्श पर पेट के बल लिटा रहीं हैं, तो नीचे गद्देदार चादर का इस्तेमाल करें।
    6. बेड पर पेट के बल अगर बच्चा लेटा हुआ है, तो सतर्क रहें। क्योंकि बच्चा खिसकते हुए नीचे भी गिर सकता है।
    7. जब बच्चा पेट के बल लेटा रहे तो उसे देखकर हंसे (Laugh) और उनके साथ बात करें या उनकी तरह ही आपभी बोलें।
    8. बच्चे को अलग-अलग एक्सप्रेशन दें।
    9. टमी टाइम के दौरान उनके सामने या उन्हें खिलौने (Toys) दें।
    10. बच्चे को फीड करवाने के तुरंत बाद पेट के बल ना लिटाएं। ऐसा करने से वह उल्टी कर सकता है।
    11. सोने के दौरान अगर शिशु पेट के बल है, तो ऐसे में ध्यान रखें की उसे सांस लेने में परेशानी (Breathing problem) तो नहीं हो रही है। इसलिए सोने के दौरान ज्यादा वक्त तक बच्चे को पेट के बल ना रखें।

    इन 11 बातों को बेबी के टमी टाइम (Tummy Time) के दौरान फॉलो करें।

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    नोट: अगर शिशु प्रीमैच्योर (Premature) है यानी समय से पहले जन्म हुआ है, तो ऐसी स्थिति में टमी टाइम फॉलो करना सेफ नहीं माना गया है। इसके अलावा अगर बच्चे में कोई डिसएब्लिटी (Disability) या मेंटल हेल्थ कंडिशन (Mental Health Condition) और रिफ्लक्स डिजीज (Reflux Disease) की समस्या होने पर भी टमी टाइम फॉलो नहीं करना चाहिए और ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

    उम्मीद करते हैं बेबी के टमी टाइम (Babies Tummy Time) से जुड़ी जानकारी आपभी फॉलो करेंगे और इसकी जानकारी अपनी फेमली या फ्रेंड्स में भी शेयर करें, क्योंकि बच्चों के लिए टमी टाइम (Tummy Time) बेहद जरूरी है। अगर बच्चे में कोई भी शारीरिक परेशानी (Physical problem) या मानसिक परेशानी (Mental problem) है, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें।

    बच्चों के विकास के साथ-साथ मां को अपना ख्याल रखना भी जरूरी है। नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक कर एक्सपर्ट से जानें न्यू मॉम अपना ध्यान कैसे रख सकती हैं और यह उनके लिए क्यों जरूरी है।

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    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 10/02/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड