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सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा की वजह से हो सकती है सांस लेने में है परेशानी

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा की वजह से हो सकती है सांस लेने में है परेशानी

वातस्फीति यानी एम्फसीमा हमारी लंग्स से जुड़ी हुई एक समस्या है जिसके कारण सांस लेने में मुश्किल हो सकती है। यह परेशानी तब होती है जब लंग्स में मौजूद छोटे एयर सैक्स (Air Sacs) को नुकसान होता है। एयर सैक्स के बीच में मौजूद नाजुक टिश्यूज नष्ट हो जाते हैं और लंग्स में एयर पॉकेट्स बन जाते हैं। इन डैमेज टिश्यू के पाउचिज में हवा भर जाती है और लंग्स धीरे-धीरे बड़े हो जाते हैं। जिससे सांस लेने में समस्या होती है।हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग (Harvard Health Publishing) के अनुसार एम्फसीमा एक प्रोग्रेसिव डिजीज है।

जिसका अर्थ यह है कि जैसे यह स्थिति बढ़ती है, वैसे ही फेफड़ों की ऑक्सीजन ओब्सोर्ब करने और कार्बन डाइऑक्साइड को रिलीज करने की क्षमता कम हो जाती है। यही नहीं, सांस लेना भी मुश्किल हो जाता। क्योंकि, वो पर्याप्त एयर प्राप्त नहीं कर पाते हैं। एम्फसीमा के कई प्रकार होते हैं उनमें से एक है सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा। आइए जानते हैं सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) के बारे में विस्तार से:

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा क्या है? (What is Centrilobular Pulmonary)

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) का ही एक प्रकार है। सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा, एम्फसीमा के अन्य प्रकारो से केवल लंग्स में इसकी लोकेशन की वजह से अलग होता है। इसे सेंट्रियासिनार एम्फसीमा (Centriacinar Emphysema) भी कहा जाता है। पचास साल से अधिक उम्र और जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उनमें यह समस्या सामान्य है। सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा का अर्थ है वो बीमारी जो लंग्स के फंक्शनल यूनिट्स के सेंटर्स में होती है, जिसे सेकेंडरी पल्मोनरी लोब्यूल्स (Secondary Pulmonary Lobules) कहा जाता है।

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सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा के लक्षण (Symptoms of Centrilobular Pulmonary)

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा रोग रेस्पिरेटरी पैसेज (Respiratory Passages) में हुए नुकसान के कारण होता है। यह अधिकतर फंक्शनिंग लंग यूनिट के केंद्र में अपर लोबस को प्रभावित करता है। इस नुकसान के कारण फेफड़ों में एयर फ्लो में बाधा आ सकती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो सकता है। इस समस्या के लक्षण रोगी के संपूर्ण स्वास्थ्य पर निर्भर करते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

अगर रोगी को कोई अतिरिक्त कॉम्प्लीकेशन्स हों तो कई अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं और समय के साथ यह बदतर भी हो सकते हैं। यह तो थे सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) के लक्षण, अब जानते हैं इसके कारणों के बारे मे

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सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा के कारण क्या हैं? (Causes of Centrilobular Pulmonary)

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) की समस्या पचास साल से अधिक उम्र के लोगों में देखी जा सकती है। स्मोकिंग भी इस समस्या का मुख्य कारण है। सिगरेट से निकलने वाले हानिकारक केमिकल हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम पर यह प्रभाव डालते हैं:

ये प्रभाव तब भी हो सकते हैं जब आप बार-बार जहरीले धुएं, जैसे चारकोल डस्ट में सांस लेते हैं। प्रदूषण और सेकंडहैंड स्मोक के सम्पर्क में आना भी इस बीमारी को बढ़ाता है। अन्य टॉक्सिक इन्हेलन्ट्स (Toxic Inhalants) भी जोखिम को बढ़ा सकते हैं। नियमित रूप से गाड़ियों या मशीनरी और फ्यूल के धुएं में रहना भी इस समस्या को बढ़ता है।

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रिस्क फैक्टर्स (Risk Factors)

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) से पीड़ित व्यक्ति को इन समस्याओं के होने का जोखिम अधिक होता है:

यह तो थे इस बीमारी के रिस्क फैक्टर। अब जान लेते हैं इसके निदान और उपचार के बारे में।

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सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा का निदान कैसे संभव है? (Centrilobular Emphysema Diagnosis)

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) के निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले रोगी के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानते हैं। इस समस्या की गंभीरता हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। कुछ लोगों को इसके हल्के लक्षण होते हैं तो कुछ को मॉडरेट या गंभीर लक्षण भी हो सकते हैं। जिसके कारण फेफड़ों का काम करना मुश्किल हो सकता है। इसके निदान के लिए डॉक्टर आपको कई टेस्ट कराने के लिए कह सकते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • स्पिरोमेट्री टेस्टिंग (Spirometry Testing) : लंग फंक्शन को जांचने के लिए यह टेस्ट किया जाता है। इसमें प्रयोग दोने वाला डिवाइस यह जांचता है कि प्रभावित व्यक्ति फेफड़ों में से कितनी एयर पुश कर सकता है और कितनी स्पीड से होती है।
  • प्लेथिस्मोग्राफी (Plethysmography) : फेफड़ों की क्षमता को जांचने के लिए यह तरीका अपनाया जाता है।
  • पल्स ऑक्सीमीट्री टेस्ट (Pulse Oximetry Test) : खून में ऑक्सीजन की मात्रा फेफड़ों की कार्यक्षमता को बताती है। इसके लिए डॉक्टर पल्स ऑक्सीमेट्री टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। जिसमें एक क्लिप को कान या उंगली से लगाया जाता है और खून में ऑक्सीजन के लेवल को जांचा जाता है।
  • इमेजिंग टेस्ट (Imaging Test) : इमेजिंग टेस्ट जैसे छाती का एक्स-रे या कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन ताकि क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) की जटिलताओं की जांच की जा सके। इन जटिलताओं में लंग एंलार्जेमेंट (Lung Enlargement), एंलार्जड आर्टरीज (Enlarged Arteries) और अन्य शारीरिक बदलाव शामिल हैं। पीड़ित व्यक्ति के सही और प्रभावी उपचार के लिए सही निदान बेहद जरूरी है। जानिए कैसे होता है इस समस्या का उपचार?

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा का उपचार कैसे किया जाता है? (Treatment of Centrilobular Pulmonary)

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) का उपचार इसकी गंभीरता और फेफड़ों की फंक्शनिंग पर निर्भर करता है। हालांकि, सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) के कारण लंग टिश्यूज को जो नुकसान होता है, उसे रिवर्स नहीं किया जा सकता। इसलिए इसके ट्रीटमेंट का उद्देश्य होता है लक्षणों को मैनेज करना, कॉम्प्लीकेशन्स को दूर करना और रोग को बढ़ने से रोकना। समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है और बदतर स्थितियों में यह बीमारी जान के लिए भी जोखिम बन सकती है। इसके उपचार के विकल्प इस प्रकार हैं:

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दवाइयां (Medicines)

इस रोग की स्थिति में रोगी को इनहेलर में कोर्टिकोस्टेरॉइड्स (corticosteroids) लेने की सलाह दी जा सकती है। स्टेरॉइड्स फेफड़ों में सूजन को कम करके लक्षणों में आराम दिलाती है। इससे एक्यूट समस्याएं भी कम हो सकती हैं, जिससे सांस लेने में आसानी होती है।

डॉक्टर ब्रोन्कोडायलेटर्स(Bronchodilators) की सलाह भी दे सकते हैं। यह दवाई ब्रोन्कियल मसल्स को आराम पहुंचाती है। ये दवाएं एयरवेज को चौड़ा करती हैं और फेफड़ों में एयर फ्लो में सुधार करने के लिए ब्रोन्कियल मांसपेशियों को आराम देती हैं। उनका उपयोग शार्ट-टर्म रिलीफ लिए किया जा सकता है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म मैनेजमेंट विकल्प के रूप में दैनिक उपयोग के लिए भी यह उपयुक्त हैं।

Centrilobular Emphysema

कुछ मामलों में पीड़ित लोगों को ब्रोन्कोडायलेटर्स (Bronchodilators) और कॉर्टिकोस्टेरॉइड (corticosteroid) दोनों को मिला कर इसका प्रयोग करने की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, स्टेरॉइड्स सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) के उपचार का विकल्प है, लेकिन समय के साथ इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं:

ऐसे में, अपने लिए खास ट्रीटमेंट विकल्पों के लिए डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर आपके हर उपचार के रिस्क और फायदों के बारे में जान कर आपके लिए सही उपचार निर्धारित करेंगे। अन्य उपचार के तरीके इस प्रकार हैं।

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ऑक्सीजन सप्लीमेंट्स (Oxygen Supplementation)

कुछ लोगों को अपने शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को पूरा करने के लिए एक डिवाइस का उपयोग करने की आवश्यकता हो सकती है। इसके लिए एक ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर (Oxygen Concentrator) का प्रयोग किया जाता है। लेकिन, अगर इससे भी मरीज की जरूरतें पूरी नहीं होती हैं, तो डॉक्टर ऑक्सीजन टैंक के प्रयोग की सलाह दे सकते हैं। सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) यानी सेंट्रियासिनार एम्फसीमा के लिए अन्य उपचार इस प्रकार संभव हैं:

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क्या सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा से बचाव संभव है? (Centrilobular Emphysema Prevention)

सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) से बचाव पूरी तरह से संभव है। यह समस्या कुछ ऐसे एक्सटर्नल फैक्टर्स के कारण होती है जिन्हें आप कंट्रोल कर सकते हैं। जैसे धूम्रपान न करना, हानिकारक धुएं या प्रदूषण के संपर्क में न आना आदि। अगर आप ऐसी जगह पर काम करते हैं जहां आप बार-बार धुएं या हानिकारक तत्वों के संपर्क में आते हैं तो प्रोटेक्शन मास्क का प्रयोग करें। इसके साथ ही अपने आपको हेल्दी बनाए रखने के लिए अच्छी आदतों को अपनाएं। जैसे अच्छा खाएं, अधिक पानी पाएं, धूम्रपान करने से बचें, व्यायाम करें, तनाव से बचें और सही नींद लें। इससे आपको अच्छा महसूस होगा और आपको स्वस्थ रहने में भी मदद मिलेगी।

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सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा के लिए कई उपचार के विकल्प उपलब्ध हैं। जिनसे आप लक्षणों को मैनेज कर सकते हैं। अगर आप धूम्रपान करते हैं और उसे छोड़ने के बाद आपको इस समस्या के लक्षणों को कम करने में सहायता मिल सकती है। सेन्ट्रीलोब्यूलर एम्फसीमा (Centrilobular Pulmonary) के निदान के बाद रोगी के लिए सही उपचार हमेशा प्राथमिकता होना चाहिए। इसका जल्दी निदान होने से लक्षणों को जल्दी मैनेज करने में भी मदद मिलेगी। इसलिए, इस समस्या के लक्षणों को पहचानें और तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/05/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड