क्या बच्चों को ब्राउन राइस खिलाना चाहिए?

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Update Date मई 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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बच्चों को ब्राउन राइस खिलाना कितना फायदेमंद हो सकता है, यह सवाल अभी भी कई माता-पिता के लिए एक बड़ी उलझन हो सकती है। अधिकतर लोग इस बात से वाकिफ हैं कि ब्राउन राइस में वाइट राइस के मुकाबले कहीं ज्यादा फाइबर की मात्रा पाई जाती है। साथ ही, हेल्थ एक्सपर्ट भी वयस्क लोगों को वाइट राइस की जगह पर ब्राउन राइस खाने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या बड़े लोगों की तरह ही छोटे बच्चों को ब्राउन राइस खिलाना भी उतना ही सेहतमंद हो सकता है, आज हम इसी के बारे में जानने वाले हैं।

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ब्राउन राइस क्या है?

ब्राउन राइस बिना रिफाइंड किए हुए चावल के प्राकृतिक रूप को ही कहा जाता है। इसका प्राकृतिक रंग भूरा होता है, जिस वजह से इसे ब्राउन राइस कहा जाता है। सफेद चावल के मुकाबले इसे पकने में ज्यादा समय लगता है। साथ ही, यह स्वाद में भी सफेद चावल से अगल होता है, लेकिन उससे कम स्वादिट होता है। सफेद चावल की तुलना में इसमें ज्यादा पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है, क्योंकि इसे बिना किसी रिफाइन या पॉलिश प्रक्रिया के ही छिलके से साफ किया जाता है।

जानिए बच्चों को ब्राउन राइस खिलाना कितना फायदेमंद हो सकता है?

वाइट राइस यानी सफेद चावल और अन्य अनाजों के मुकाबले ब्राउन राइस सबसे अच्छा अनाज माना जाता है। ब्राउन राइस में अन्य अनाजों के मुकाबले 349 फीसदी अधिक फाइबर की मात्रा, 203 फीसदी अधिक विटामिन ई, 185 फीसदी अधिक मात्रा में विटामिन बी6, 219 फीसदी अधिक मैग्नीशियम की मात्रा और 19 फीसदी अधिक प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है।

8000 से अधिक चावल की किस्में

चावल के फायदों की बात करें, तो यह एक मुख्य भोजन है, जो कई एशियाई देशों में सदियों से भोजन का सबसे मुख्य हिस्सा माना जाता है। कई अध्ययनों के दावों के अनुसार, भूरे रंग के चावल एंटी-डायबिटिक, एंटी-कोलेस्ट्रॉल, कार्डियोप्रोटेक्टिव और एंटीऑक्सिडेंट जैसे पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है। चावल की 8000 से अधिक किस्में और प्रजातियां होती हैं, जिनमें से सफेद चावल का खाने में इस्तेमाल सबसे अधिक किया जाता है। भारत समेत कुछ अन्य देशों में भी लोगों के लिए चावल एक प्राथमिक भोजन रहा है। भारत की बात करें, तो लगभग आधी आबादी अपने हर दिन के भोजन में चावल को शामिल करते हैं। साल 2015 में, वैश्विक चावल धान का उत्पादन 739.1 मिलियन टन था, मिलिंग के बाद 490.5 मिलियन टन सफेद चावल का उत्पादन हुआ। जिनमें एशिया में इसका हिस्सा 668.4 मिलियन टन था। आपको जानकर हैरानी होगी कि, वैश्विक उत्पादन का 90 फीसदी चावल की खपत सिर्फ एशियाई देशों में ही होती है। विश्व में भारत के साथ-साथ चीन और इंडोनेशिया भी चावल के प्रमुख उत्पादक देश माने जाते हैं।

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बच्चों को ब्राउन राइस खिलाने से पहले जानें ब्राउन राइस के प्रकार

ब्राउन राइस के दो प्रकार होते हैं, पहला अंकुरित और दूसरा बिना अंकुरित होता है।

अंकुरित ब्राउन राइस के फायदे

अंकुरित भूरा चावल अंकुरण आरंभ करने के लिए भूरे चावल के दाने को पानी में डुबो कर प्राप्त किया जा सकता है। अंकुरित भूरे रंग के चावल में पाए जाने वाले पोषक तत्व अधिक आसानी से पच जाते हैं। वहीं, पके हुए ब्राउन राइस के मुकाबले अंकुरित ब्राउन राइस में बायोएक्टिव यौगिकों का निर्माण हो सकता है, जैसे गामा-एमिनोब्यूट्रिक एसिड (जीएबीए)। इसके अलावा, कई एशियाई देशों में अंकुरित भूरे रंग के चावल की खपत बढ़ रही है क्योंकि इसकी बेहतर पैलेटेबिलिटी गुणवत्ता और संभावित स्वास्थ्य-संवर्धन कार्यों में सुधार देखा जा रहा है।

जबकि, बिना अंकुरित ब्राउन से तात्पर्य सामान्य राइस से होता है, जिसे हम पका कर खा सकते हैं।

क्या ब्राउन राइस और वाइट राइस में कोई समानता है?

यह तो आप जानते ही होंगे कि ब्राउन राइस सफेद चावल के मुकाबले अधिक पोषण देने वाले होते हैं। हालांकि, इसके अलावा सफेद चावल और भूरे रंग के चावल के बीच एक आम विशेषता भी है। वे यह कि दोनों ही चावल लस मुक्त होते हैं और इसमें कोई ट्रांस वसा या कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है। हालांकि, ब्राउन राइस का सेवन करना पोस्टप्रैंडियल ब्लड ग्लूकोज कंट्रोल के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि ब्राउन राइस में वाइट राइस की तुलना में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा होती है।

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बच्चों को ब्राउन राइस खिलाने के क्या फायदे हो सकते हैं?

बच्चों को ब्राउन राइस खिलाने के कई फायदे हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैंः

वजन घटाने में मदद करे

अगर आपके बच्चे का वजन अधिक है और बिना किसी दवा के आप उसका वजन घटाना चाहते हैं, तो ब्राउन राइस का सेवन उनके लिए सुरक्षित विकल्प हो सकता है। ब्राउन राइस में कैलोरी की कम मात्रा होती है। हालांकि, यह फाइबर की भरपूर प्रदान करती है जिससे मेटाबॉलिज्म की क्रिया बेहतर हो सकती है। यानी ब्राउन राइस आसानी से भूख को कंट्रोल कर सकती है, जो वजन घटाने में काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने में मदद करे

ब्राउन राइस की मदद से बड़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लेवल को आसानी से कम किया जा सकता है। अगर आप बच्चों को ब्राउन राइस उनके भोजन में नियमित तौर पर खिलाते हैं, तो भविष्य में उन्हें कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी स्थितियों के होने का जोखिम काफी कम हो सकता है। साथ ही, वे दिल से जुड़ी बीमारियों से भी सुरक्षित रह सकते हैं। ब्राउन राइस खाने से धमनियां ब्लॉक नहीं होती हैं।

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डायबिटीज के उपचार में मददगार

शुगर पेशेंट को एक्सपर्ट्स राइस खाने से परहेज करने की सलाह देते हैं। क्योंकि, सफेद राइस उनके शरीर में शुगर की मात्रा को बढ़ा सकता है। हालांकि, शुगर पेशेंट अपने आहार में वाइट राइस की जगह ब्राउन राइस शामिल कर सकते हैं। ब्राउन राइस खाने से ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ता है। और यह डायबिटीज के खतरे से भी बचा सकता है।

हड्डियों को बनाएं मजबूत

ब्राउन राइस में मैग्नीशियम की उच्च मात्रा पाई जाती है जो हड्डियों के बेहतर विकास के लिए जरूरी तत्व होता है। साथ ही, यह बोन मिनरल डेंसिटी को बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।

कैंसर की करे रोकथाम

ब्राउन राइस कैंसर सेल्स के विकास में बाधा बन सकता है। कुछ शोध के अनुसार, अंकुरित ब्राउन राइस में गामा-एमिनोब्यूटिरिक एसिड (GABA) पाया जाता है, जो ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) को रोकने में मदद कर सकता है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकली सलाह या उपचार की सिफारिश नहीं करता है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो कृपया इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

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