जब घर में शिशु और पालतू जानवर दोनों हों तो किन-किन बातों का रखें ध्यान?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 8, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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पालतू जानवर के लिए परिवार के नए सदस्य को स्वीकार करना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में आपको अपने पालतू जानवर और बच्चे के बीच अच्छा रिश्ता बनाना होगा। जिससे पेरेंट्स को भी अपने पालतू पशु के साथ बच्चे को छोड़ने में परेशानी नहीं होती है। कुछ रिसर्च में पाया गया है कि बच्चे के विकास में पालतू जानवरों की बड़ी भूमिका होती है। साथ ही बच्चे के खेलने के लिए कई तरह से मदद कर सकता है।

शिशु और पालतू जानवर से जुड़े सवाल जब हमने मुंबई के रहने वाले 37 वर्षीय अलोक तिवारी से पूछा तो उनका कहना था कि उन्होंने काफी शौक से घर में कुत्ता पाला हुआ है और दोनों की दंपति कुत्ते को बेहद प्यार भी करते हैं। हालांकि जब उनकी पत्नी प्रेरणा तिवारी गर्भवती हुईं तो उन्हें यह निर्णय लेना काफी कठिन लग रहा था की घर नवजात शिशु और कुत्ता एक साथ कैसे रहेगा? जब इस बारे में आलोक ने एक्सपर्ट से सलाह ली तो उन्होंने कुछ टिप्स दिए जैसे शिशु के जन्म से पहले ही कुत्ते को बच्चों से मिलना जुलना और उनसे परेशानी न होने की ट्रेनिंग देनी चाहिए। आलोक ने ऐसा ही किया और जब उनका शिशु अस्पताल से घर आया तो कुछ दिनों तक परेशानी हुई थी लेकिन, धीरे-धीरे उनका पेट शिशु के करीब तो जाता था पर कभी उसे नुकसान नहीं पहुंचाता था। इसके साथ ही आलोक ने अपने पेट को वो सभी वैक्सिन लगवाते रहते थें, जिसकी सलाह उनके डॉक्टर दिया करते थें। शिशु और पालतू जानवर जब घर में एक साथ हों तो सिर्फ कुछ बातों को ध्यान रखकर दोनों को संभाला जा सकता है।

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शिशु और पालतू जानवर होने पर क्या करना चाहिए?

घर पर शिशु और पालतू जानवर दोनों होने पर निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे-

अपने पालतू जानवर (Pet Animal) का शिशु से परिचय करवाएं

इंसानों की तरह पालतू जानवर खास कर कुत्ते, घर के सदस्यों के बारे में बहुत परिचित होते हैं। इसलिए पालतू जानवर, अक्सर फैमिली में आए नए सदस्य को बहुत जल्दी एक्सेप्ट नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में किसी दुर्घटना से बचने के लिए, पहले सुनिश्चित कर लें कि परिचय करवाते वक्त पेट्स आपके शिशु से एक निश्चित दूरी पर हो। यदि पेट्स शिशु को सूंघना चाहे तो परिवार के सदस्यों की निगरानी में ही ऐसा करने दें। आपको पेशेंस के साथ काम लेना चाहिए। घर में रखे पेट्स को इस नए मेहमान को जानने और पहचानने के लिए समय दें। हालांकि इस दौरान यह अवश्य ध्यान रखें की शिशु और पालतू जानवर दोनों एक साथ किसी भी स्थान पर अकेले न हों। 

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बच्चे और आपके पेट्स की चीजें दूर हों

घर में शिशु आने वाला है, और आपने पेट्स पाल रखे हों, उस वक्त स्वच्छता को दरकिनार नहीं करना चाहिए। चूंकि शिशु और पालतू जानवर साथ रहने वाले हैं, शिशु के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता से अधिक कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। मुंबई के रहने वाले जॉनसन डैनिश कहते हैं “मैंने अपने घर में 3 कुत्ते और 5 बिल्लियां पाल रखे हैं। जब मेरे शिशु के वॉकर में खेलने का समय होता है, तो मेरे पेट्स का फूड और शिशु के खिलौने जमीन पर नहीं छोड़ता हूं। बच्चे की सुरक्षा के लिए ये बहुत जरूरी है।”

शिशु हर चीज मुंह में डाल लेते हैं, जो भी आसानी से उनके हाथ आता है। इसलिए अपने शिशु की सेहत को ध्यान में रखते हुए आपको यह भी ध्यान में रखना है, कि आपका बच्चा कभी भी पालतू जानवर की चीजों को हाथ न लगाए। 

शिशु और पालतू जानवर साथ हैं तो बच्चे की सुरक्षा प्रायोरिटी में रखें

चाहे जैसी भी स्थिति आ जाए, आपको आपके शिशु की सुरक्षा को हमेशा ऊपर रखना चाहिए। शिशु के घर के आने के बाद, जरूरत पड़े तो पेट्स को कुछ दिनों के लिए किसी रिश्तेदार या पड़ोसी के घर पर भेज दें। खास कर तब जब पेट्स बीमार हो या जब कुछ हफ्तों के शिशु और कुत्ते के साथ घर पर अकेले रहना पड़े। यह ध्यान रखें की अगर आपका पेट बीमारी है तो उसका भी सही ट्रीटमेंट करवाएं। क्योंकि ट्रीटमेंट के अभाव में इंफेक्शन की संभावना ज्यादा हो सकती है और इंफेक्शन बीमारियों को दस्तक देने में मददगार साबित हो सकता है।  

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शिशु और पालतू जानवर के रहने की स्थान को निर्धारित करना चाहिए 

अगर आपके घर में पेट्स है, तो आप जरूर जानते होंगे कि पालतू जानवरों के लिए घर के अंदर घूमने-फिरने वाले क्षेत्रों के सीमाओं का निर्धारण करना कितना जरूरी है। ऐसा न करने पर पेट्स जगह पर घूमते रहते हैं। बात जब शिशु के स्वास्थ्य की आती है, तो सीमाएं अधिक जरूरी हो जाती हैं। पेट्स के जीभ में से एक प्रकार का लार टपकता है, जो शिशु को प्रभावित कर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। जॉनसन कहते हैं कि मैं और मेरी फैमिली इस बात को हमेशा सुनिश्चित करते हैं कि हमारे पेट्स बच्चे के या हमारे बिस्तर के पास न आए। 

बच्चों की अलग-अलग आवाज की रिकॉर्डिंग रखें

घर में आने वाले नवजात शिशु के रोने की आवाज से पेट्स परेशान हो सकते हैं। इसलिए शिशु के जन्म के पहले ही अलग-अलग बच्चों की आवाज या रोने की आवाज रिकॉर्ड कर उसे समय-समय पर प्ले करते रहें। ऐसा नवजात के जन्म से पहले करें। ऐसा करने से आपके पेट को परेशानी नहीं होगी और धीरे-धीरे वो इस आवाज के लिए अपने आपको एडजस्ट कर लेगा और जब आपका बेबी घर आएगा तो आपके पेट को परेशानी नहीं होगी।

यह हमेशा ध्यान रखें की जानवरों को भी अटेंशन चाहिए होता है। इसलिए जब घर में आपका शिशु आ जाए तो अपने पेट को इग्नोर न करें। ऐसा करना आपके लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए आप जितना ध्यान अपने पेट का शिशु के जन्म के पहले रखते थें ठीक वैसे ही शिशु के जन्म के बाद भी रखें तभी शिशु और पालतू जानवर दोनों को आप अच्छी तरह से देखभाल कर सकते हैं।

जानवर हमेशा जानवर ही होते हैं। आप चाहे उन्हें कितना भी प्यार करते हों, फिर भी उन लोगों से जानवरों की प्रवृत्ति नहीं जाती है और उनकी समझ को समझा नहीं जा  सकता है। शिशु और पालतू जानवर साथ हों तो ध्यान रखें कि पेट्स के मूड का भी कोई ठीक नहीं रहता। इसलिए, सुनिश्चित कर लें कि अकेले में शिशु को पेट्स के आस-पास नहीं छोड़ें।

अगर आपके घर में शिशु और पालतू जानवर दोनों हैं तो इससे जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Bhardwaj
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