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अगर आप सोच रहीं हैं शिशु का पहला आहार कुछ मीठा हो जाए...तो जरा ठहरिये

अगर आप सोच रहीं हैं शिशु का पहला आहार कुछ मीठा हो जाए...तो जरा ठहरिये

शिशु के जन्म के बाद से लगातर 6 महीने तक ब्रेस्टफीडिंग ही करवाया जाता है। इससे शिशु को संपूर्ण पोषण मिलता है। लेकिन, 6 महीने के बाद शिशु को मां के दूध के अलावा अन्य खाद्य पदार्थ भी दिया जाना शुरू किया जाना चाहिए। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार 6 महीने या इससे बड़े शिशु को सिर्फ मां का दूध ही संपूर्ण पोषण नहीं होता है। इसलिए छह महीने के शिशु को कॉम्प्लीमेंट्री फूड देना शुरू कर देना चाहिए। ऐसा करने से फूड बोर्न डिजीज (Food-borne diseases) का खतरा कम हो सकता है। आज इस आर्टिकल में समझने की कोशिश करेंगे की शिशु को नमक, चीनी, पानी या घी कब से देना चाहिए या बच्चे का पहला आहार कैसे शुरू करना चाहिए?

कैसे समझें की शिशु का पहला आहार शुरू करना चाहिए?

शिशु का पहला आहार देने के लिए सबसे पहले शिशु के निम्नलिखित लक्षणों पर गौर करें। इन लक्षणों में शामिल है:

  1. शिशु का ठीक तरह से बैठना
  2. शिशु खाने की ओर आकर्षित होने लगे
  3. जब घर के सदस्य कुछ भी खाएं या खाना खाने के दौरान आपका शिशु खाने को देखकर खुश हो
  4. शिशु खाने को हाथ में पकड़ कर अपने मुंह के पास लाये
  5. बच्चे के मुंह (होठ) के पास खाना लाना या चम्मच लगाने पर शिशु का मुंह खोलना

इन पांच लक्षणों पर ध्यान दें शिशु का पहला आहार शुरू करने के लिए। यह पेरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए की सभी शिशु एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ बच्चे खाना पहले शुरू कर देते हैं, तो कुछ बाद में। अगर आपका शिशु इन ऊपर बताई गई एक्टिविटी को नहीं कर रहा है, तो उसे परेशान न करें और कुछ घंटे या कुछ दिनों के बाद फिर से उसे खिलाने की कोशिश करें। इस दौरान यह भी ध्यान रखना आवश्यक है की अगर आपका शिशु खाने को मुंह से निकाल देता है या वह खाना खाना नहीं चाहती है या चाहता है तो इसका मतलब यह भी होता है की शिशु अभी बाहर के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहता है।

और पढ़ें: ऐसे जानें आपका नवजात शिशु स्वस्थ्य है या नहीं? जरूरी टिप्स

शिशु का पहला आहार: नमक देना कब से शुरू करना चाहिए?

अगर आप बच्चे का पहला आहार देने पर विचार कर रहीं हैं, तो सबसे पहले नमक (Salt) के बारे में समझते हैं। रिसर्च के अनुसार बच्चों को अत्यधिक नमक नहीं खिलाना चाहिए। इससे शिशु के किडनी पर बुरा प्रभाव पड़ेगा (दरअसल बच्चों का किडनी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है)। नमक का अर्थ यहां सिर्फ दाल या सब्जी से नहीं बल्कि कुछ लोग बच्चों को नमकीन खाद्य पदार्थों में शामिल चिप्स या जंक फूड से भी है। बच्चों इन खाद्य पदार्थों से दूर ही रखें।

एक रिसर्च के अनुसार 6 महीने से 12 महीने के बच्चों को एक दिन में सिर्फ 1 ग्राम नमक की आवश्यकता होती है। इसलिए अगर आपका शिशु छह महीने का हो चुका है, तो आप सिर्फ उसे 1 ग्राम (कम से कम नमक) ही दें।

और पढ़ें: मल्टिपल गर्भावस्था के लिए टिप्स जिससे मां-शिशु दोनों रह सकते हैं स्वस्थ

शिशु का पहला आहार: चीनी कब से देना शुरू करें?

अगर आप अपने शिशु का पहला आहार प्लानिंग कर रहीं हैं, तो इस लिस्ट में चीनी को शामिल न करना ही समझदारी होगी। दरअसल चीनी को रिफाइन करने के दौरान कई अलग-अलग तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल किया जता है, जो शिशु के लिए हानिकारक होता है। इसलिए कोशिश करें की अपने एक साल से कम के शिशु को चीनी न दें।

12 महीने से कम आयु के शिशु को चीनी खिलाने से निम्नलिखित परेशानी हो सकती है। इन परेशानियों में शामिल है:

  • शिशु को कैविटी से जुड़ी परेशानी हो सकती है।
  • इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार छोटे बच्चों को ज्यादा मात्रा में चीनी देने से दिल से संबंधित परेशानी, डायबिटीज की समस्या और मोटापे जैसी परेशानी हो सकती है।

ऐसी कोई शारीरिक परेशानी आपके लाडले या लाडली को न हो इसलिए 12 महीने के बाद ही बच्चे को चीनी देना शुरू करें। चीनी के बदले आप अपने शिशु को पहला आहार अगर कुछ मीठा देना चाहती हैं, तो आप डेट्स सिरप या ताजे फल का जूस दे सकती हैं। शहद भी 12 महीने के बाद ही देना हितकारी होता है।

और पढ़ेंः क्या प्रेग्नेंसी में सेल्युलाइट बच्चे के लिए खतरा बन सकता है? जानिए इसके उपचार के तरीके

शिशु का पहला आहार: शिशु को पानी कब से पिलाना शुरू करें?

मां के दूध के अलावा शिशु के चार महीने के होने पर उसे दो से तीन चम्मच पानी दिया जा सकता है। इसके अलावा जब शिशु सॉलिड फूड खाने लगे तो उसे खाने के बाद पानी की थोड़ी मात्रा अवश्य दें। ऐसा करने से उसे कब्ज की समस्या नहीं होगी। पेरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए की जब शिशु छह महीने का हो जाए तो ब्रेस्ट मिल्क देने के साथ-साथ पानी भी देना शुरू करना चाहिए।

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार नवजात बच्चों को पानी पिलाने से उनका वजन कम हो सकता है। वजन कम होने के साथ ही शिशु को जॉन्डिस का खतरा भी सकता है, शिशु में ओरल वाटर इंटॉक्सिकेशन की भी संभावना बढ़ जाती है। हम सभी जानते हैं की शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए लेकिन, यह नवजात शिशु के लिए अलग है। इसलिए शिशु को ओरल वॉटर इंटॉक्सिकेशन या वॉटर इंटॉक्सिकेशन से बचाना बेहद जरूरी है।

और पढ़ेंः कम उम्र में प्रेग्नेंसी हो सकती है खतरनाक, जानें टीन प्रेग्नेंसी के कॉम्प्लीकेशन

शिशु का पहला आहार: शिशु को घी का सेवन कब से शुरू करवाना चाहिए?

शिशु का पहला आहार अगर आप शुरू कर चुकी हैं, तो 6 महीने के शिशु को घी का सेवन करवाया जा सकता है। आप बच्चे को दाल का पानी, खिचड़ी या बने हुए चावल के पेस्ट में गाय के घी की कुछ बूंदें मिला सकती हैं। जैसे-जैसे शिशु की डायट बढ़ती जाए तो घी की मात्रा भी बढ़ा सकते हैं। छह से दस महीने के शिशु को आधी छोटी चम्मच से एक चम्मच घी रोजाना खाने में मिलाकर दी जा सकती है। लेकिन, घी की मात्रा इससे ज्यादा न बढ़ाएं।

शिशु का पहला आहार शुरू करने वालीं हैं, तो पानी, नमक, चीनी और घी देने के दौरान सावधानी बरतें।

और पढ़ेंः प्रेग्नेंसी में कैंसर का बच्चे पर क्या हो सकता है असर? जानिए इसके प्रकार और उपचार का सही समय

शिशु का पहला आहार में क्या-क्या शामिल करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?

एक साल (12 महीने) से कम उम्र के शिशु को निम्नलिखित खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से दूर रखना चाहिए। जैसे:-

  • 12 महीने से कम उम्र के शिशु को मछली खासकर स्वॉर्डफिश, हांगर या अन्य पारा वाली मछली नहीं खिलानी चाहिए।
  • बिना मलाई की दूध, दही और कम वसा वाली चीज शिशु की सेहत के लिए ठीक नहीं है। इसलिए शिशु को वसा युक्त खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ दी जा सकती है। क्योंकि शिशुओं को भी कैलोरी की आवश्यकता होती है।
  • बच्चों को चाय या कॉफी न दें। इनमें कैफीन होता है, जो शिशु के लिए हानिकारक होता है।
  • अगर आप अपने शिशु को ड्राई फ्रूट्स देना चाहती हैं, तो काजू, किशमिश या कोई अन्य सूखे मेवे को पहले अच्छी तरह से पीस लें और फिर शिशु को दें। माता-पिता ध्यान रखें की बच्चे को ज्यादा ड्राई फ्रूट्स न खिलाएं।
  • शिशु को साबुत अनाज देने से पहले सावधानी बरतें। शिशु का पेट छोटा होता है और साबुत अनाज से पेट तुरंत भर जायेगा। ऐसे में शिशु को बार-बार भूख नहीं लग सकती है। इसलिए छे महीने के शिशु को सिर्फ दाल का पानी (पतली खिचड़ी) दें और कुछ दिनों के बाद उसे बने हुए चावल को हाथ से अच्छी तरह से पेस्ट बनाकर दाल और चावल खिलाया जा सकता है।
  • किसी भी खाद्य पदार्थों को पूरी तरह से पका कर दें। कच्चा बिलकुल भी न दें।

अगर आपके शिशु को किसी भी खाद्य पदार्थ से एलर्जी होती है, तो उसे न दें। यह ध्यान रखना आवश्यक है की अगर शिशु को फार्मूला दूध या गाय के दूध से एलर्जी होती है, तो ऐसी स्थिति में जल्द से डॉक्टर से संपर्क करें।

और पढ़ें: सामान्य प्रेग्नेंसी से क्यों अलग है मल्टिपल प्रेग्नेंसी?

अगर आप शिशु का पहला आहार देने की प्लानिंग कर रहीं तो ऊपर बताये सलाह अनुसार आने लाडले या लाडली को खाद्य पदार्थ शुरू कर सकती हैं लेकिन, अगर आप इससे जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहती हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
अपडेटेड 14/04/2020
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