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इन12 प्रकार की दालों में मौजूद हैं सभी पोषक तत्व, जानें इसके फायदे!

इन12 प्रकार की दालों में मौजूद हैं सभी पोषक तत्व, जानें इसके फायदे!

दाल हम सभी के आहार में शामिल होने वाला कॉमन खाद्य पदार्थ है और इसमें महत्वपूर्ण पौष्टिक तत्व होते हैं। दाल में मौजूद पौष्टिकता की वजह से ही शिशु के जन्म के 6 महीने बाद दूध के अलावा दाल का पानी (पतली दाल) दिया जाता है। दाल के अलग-अलग प्रकार होते हैं और दाल के फायदे (Benefits of lentils) भी होते हैं। कई डॉक्टरों का भी मानना है कि जितना प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व नॉनवेज में पाया जाता है, उससे ज्यादा प्रोटीन इन मिक्स दालों में पाया जाता है। वेजिटेरियन लोगों के लिए ये प्रोटीन का सबसे अच्छा माध्य है।

दालों के प्रकार

  1. हरी मूंग दाल (Split green gram)
  2. साबुत मूंग दाल (Green gram)
  3. पीली मूंग दाल (Moong yellow dal)
  4. उड़द (Black gram)
  5. उड़द की दाल (Black gram split)
  6. उड़द की धुली दाल (Urad Dal White Lentil)
  7. चने की दाल (Chickpeas split)
  8. मसूर (Lentil)
  9. मसूर की दाल (Red Lentil)
  10. मलका मसूर (Whole red lentil)
  11. अरहर की दाल या तुअर दाल (Red gram or Pigeon pea)
  12. कुल्थी की दाल (Horse gram)

ऊपर बताई गई दाल के अलग-अलग प्रकार हैं। इन दालों में मौजूद विटामिन्स और मिनिरल्स की मौजूदगी शरीर को फिट रखने में मदद करते हैं।

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पीली मूंग दाल, हरी मूंग दाल और साबुत मूंग दाल के फायदे (Benefits of lentils) क्या हैं?

मूंग दाल में मौजूद निम्नलिखित पौष्टिक तत्व सेहत के लिए लाभदायक होते हैं।

एक कप मूंग दाल में:-

  • कैलोरी
  • फैट
  • प्रोटीन
  • कार्ब्स
  • फाइबर
  • फोलेट (B9)
  • मैंगनीज
  • मैग्नेशियम
  • विटामिन-बी 1
  • फॉस्फोरस
  • आयरन
  • पोटैशियम
  • जिंक
  • विटामिन-बी 2, बी 3, बी 5, बी 6 और सेलेनियम पाया जाता है।

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क्या हैं मूंग दाल के फायदे ?

मूंग दाल के फायदे (Benefits of lentils) निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे-

  • कैंसर- मूंग दाल में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट कई प्रकार की बीमारी जैसे हार्ट डिजीज, डायबिटीज या कोई विशेष प्रकार के कैंसर पेशेंट के लिए लाभकारी मानी जाती है-।
  • हीट स्ट्रोक- मूंग बीन्स में एंटी-ऑक्सिडेंट जैसे कि विटेक्सिन और आइसोविटेक्सिन मौजूद होते हैं, जो गर्म मौसम के दौरान होने वाले हीट स्ट्रोक से बचाने में मददगार होते हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल- मूंग का सेवन अगर नियमित रूप से किया जाए तो इससे बैड कोलेस्ट्रॉल का खतरा टल सकता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल बैलेंस्ड रह सकता है।
  • ब्लड प्रेशर- मूंग में पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर का एक अच्छा सोर्स माना जाता है, जो कि हाई ब्लड प्रेशर के साथ-साथ वयस्कों में होने वाले हाई ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने में मददगार होता है।
  • डायजेशन- मूंग दाल के सेवन से डायजेशन बेहतर रहता है
  • वजन- इसमें फाइबर की मात्रा और प्रोटीन की मात्रा दोनों उच्च होती है। नियमित एक कप या एक कटोरी मूंग दाल के सेवन से बार-बार भूख लगने की परेशानी कम होती है और वजन भी संतुलित रह सकता है।
  • महिलाओं को मूंग दाल का सेवन अवश्य करना चाहिए। हालांकि गर्भवती महिलाओं को रॉ मूंग का सेवन नहीं करना चाहिए। रिसर्च के अनुसार कच्चे मूंग में हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होते हैं।
  • अगर किसी व्यक्ति को बुखार हो, पेट दर्द की समस्या हो, दस्त की परेशानी हो या फिर डायजेशन की समस्या हो तो पीली मूंग दाल का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। बुखार, पेट दर्द या दस्त की समस्या होने पर बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी मूंग दाल दी जा सकती है। मूंग दाल के फायदे (Benefits of lentils) के लिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना जरूरी है।

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उड़द दाल के फायदे (Benefits of lentils) क्या हैं?

उड़द दाल तीन अलग-अलग वैरायटी जैसे काली उड़द दाल, स्प्लीट उड़द दाल और धुली उड़द दाल (सफेद उड़द) होती है। उड़द दाल में मौजूद निम्नलिखित तत्व इसकी पौष्टिकता को बढ़ा देते हैं।

  • कार्बोहाइड्रेट
  • डाइट्री फाइबर
  • प्रोटीन
  • फैट
  • विटामिन-बी 1, बी 2, बी 3, बी 5, बी 6, बी 9
  • विटामिन-सी
  • विटामिन-ई
  • विटामिन-के
  • कैल्शियम
  • आयरन
  • मैग्नेशियम
  • मैग्नीज
  • फॉस्फोरस
  • पोटैशियम
  • सोडियम
  • जिंक

उड़द दाल के फायदे (Benefits of lentils) निम्नलिखित हैं-

  • पेट संबंधी परेशानी- उड़द दाल में मौजूद फाइबर की उच्च मात्रा कब्ज, डायरिया, पेट फूलने की परेशानी या क्रैंप जैसी अन्य परेशानी को दूर करने में सहायक होते हैं। यही नहीं उड़द गट संबंधित किसी भी परेशानी को दूर करने में सहायक है। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि उड़द दाल के फायदे (Benefits of lentils) कितने हैं। भारतीय व्यंजनों में उड़द दाल से बने दही वड़े अवश्य शामिल किए जाते हैं। खाने के बाद दही वड़े खाने से पाचन बेहतर होता है।
  • बढ़ती उम्र- उड़द दाल में मौजूद कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, आयरन और मैग्नेशियम बुजुर्गों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ शुरू होने वाली हड्डी से जुड़ी परेशानी जैसे अर्थराइटिस या ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से बचा जा सकता है।
  • डायबिटीज- इस दाल में मौजूद फाइबर की उच्च मात्रा डायबिटीज के पेशेंट के लिए अत्यंत लाभकारी होती है। डायबिटीज की वजह से शरीर में अन्य डिसऑर्डर की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके संतुलित मात्रा में सेवन से ब्लड में इंसुलिन और ग्लूकोज लेवल बैलेंस्ड बना रहता है।
  • त्वचा संबंधी परेशानी- आयुर्वेद के अनुसार उड़द दाल का पेस्ट चेहरे पर लगाने से त्वचा संबंधी परेशानी जैसे कील, मुंहासे, टैन या चेहरे पर हुए दाग-धब्बों से छुटकारा पाया जा सकता है। रिसर्च के अनुसार सनबर्न होने पर भी उड़द दाल का पेस्ट काफी लाभकारी माना जाता है।
  • ह्रदय रोग- इस दाल में मौजूद फाइबर, पोटैशियम और मैग्नेशियम हार्ट पेशेंट के लिए हेल्दी माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इसमें मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को बैलेंस्ड रखने में मददगार होता है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर लेवल को सामान्य बनाए रखने में भी मददगार होता है। इसलिए हृदय से जुड़ी बीमारी से बचने के लिए इस दाल के सेवन से लाभ मिल सकता है।
शरीर के लिए हेल्दी दालों की लिस्ट में शामिल उड़द दाल के फायदे (Benefits of lentils) तो कई हैं लेकिन, इसके सेवन से शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की संभावना बनी रहती है। वैसे लोग जिन्हें किडनी स्टोन या गॉलस्टोन की समस्या है, तो उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए। इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेकर इसका सेवन करना चाहिए।

क्या हैं चने की दाल के फायदे (Benefits of lentils)?

चने की दाल के फायदे (Benefits of lentils) निम्नलिखित पौष्टिक तत्वों की मौजूदगी के कारण होते हैं। इनमें शामिल है

  • कैल्शियम
  • पोटैशियम
  • विटामिन-ए
  • आयरन
  • फाइबर
  • सोडियम कार्बोहाइड्रेट
  • प्रोटीन
इन पौष्टिक तत्वों की मौजूदगी शरीर के लिए लाभकारी मानी जाती है। चना की दाल के फायदे (Benefits of lentils) आइए जानते हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल- चने की दाल में फाइबर की मौजूदगी कोलेस्ट्रॉल की समस्या को कम करने में सहायक होती है। शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल लेवल को बनाए रखने में मददगार होने की वजह से इसके सेवन करने वालों को दिल से जुड़ी बीमारी होने का खतरा कम हो सकता है।
  • बॉडी रहती है फिट- शरीर को फिट रखने के लिए जिंक, प्रोटीन, कैल्शियम और फोलेट की मौजूदगी आवश्यक होती है और चने की दाल में यह प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • डायबिटीज- चने की दाल में मौजूद फाइबर की उच्च मात्रा डायबिटीज के पेशेंट के लिए हेल्दी होता है। इसके संतुलित मात्रा में सेवन से ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन की मात्रा संतुलित बनी रहती है।
  • वजन- अगर आप वजन कम करने के की कोशिश कर रहें हैं, तो आपको चने की दाल का सेवन करना चाहिए। चने की दाल में फैट की मात्रा बेहद कम होती है, इसलिए वजन कम करने के लिए या वजन संतुलित बनाए रखने के लिए चने के दाल के फायदे (Benefits of lentils) हो सकते हैं अगर इसका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए तो।
  • डायजेशन- बेहतर डायजेशन के लिए चने के दाल का सेवन किया जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यह आसानी से डायजेस्ट हो जाती है क्योंकि इस दाल में फाइबर की मात्रा उच्च होती है। अगर आपको कब्ज की समस्या रहती है, तो इसका सेवन करना लाभकारी हो सकता है। कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए घरेलू उपाय भी अपनाए जा सकते हैं लेकिन, अगर परेशानी लगातार बनी हुई है तो ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक होता है। क्योंकि कब्ज की समस्या की वजह से अन्य शारीरिक परेशानी शुरू हो सकती है।
  • वीकनेस- चने की दाल में मौजूद प्रोटीन की उच्च मात्रा शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होते हैं। इसलिए इसके सेवन से शरीर में कमजोरी या थकावट जैसे परेशानी महसूस नहीं होती है।
  • सेल्स होते हैं स्ट्रॉन्ग- बॉडी सेल्स को मजबूती प्रदान करने में चने की दाल की अहम भूमिका होती है क्योंकि इसमें मौजूद एमिनो एसिड कोशिकाओं को स्ट्रॉन्ग बनाए रखता है।
  • एनीमिया शरीर में आयरन की कमी कई सारी बीमारियों जैसे हीमोग्लोबिन की कमी या एनीमिया की समस्या को शुरू होने में मदद कर सकता है लेकिन, चने की दाल की सेवन इन परेशानियों से बचा जा सकता है।
  • मेंटल हेल्थ- रिसर्च के अनुसार चने की दाल में 69.7 mg कोलीन मौजूद होता है जो ब्रेन और नर्वस सिस्टम को सही तरह से काम करने में सहायता प्रदान करता है। कोलीन की मौजूदगी मूड स्विंग की परेशानी से बचाए रखने में मददगार होता है। इसके साथ ही याददाश्त अच्छी रहती है, सीखने की क्षमता बेहतर होती है। रिसर्च के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति को 400 से 550mg कोलीन का सेवन रोजाना करना चाहिए। इसलिए मेंटल हेल्थ की समस्या न हो इसलिए चने की दाल का सेवन करना चाहिए।
  • कैंसर- एक कप चने की दाल में 6.1mcg सेलेनियम (Selenium) मौजूद होता है। ऑफिस ऑफ डाइट्री सप्लिमेंट्स (ODS) के अनुसार वयस्क व्यक्ति को रोजाना 55 mcg सेलेनियम का सेवन करना चाहिए। दरअसल चने की दाल में मौजूद सेलेनियम और एंटीऑक्सिडेंट कैंसर की बीमारी से बचाए रखने में मददगार हो सकता है। यही नहीं इस दाल में मौजूद फाइबर कोलैटरल कैंसर के भी खतरे को कम करने में मददगार होता है।
  • हड्डियां होती हैं मजबूत- चने की दाल में मौजूद कैल्शियम की मात्रा हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से बचा जा सकता है।
चने के दाल के फायदे (Benefits of lentils) तो हैं लेकिन, अगर इसका सेवन कच्चा किया जाए तो नुकसान भी हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार चने की दाल या चने को कच्चा नहीं खाना चाहिए। कच्चे चने के सेवन से डायजेशन की समस्या हो सकती है।

अरहर की दाल या तुअर दाल के फायदे (Benefits of lentils) क्या हैं?

तुअर दाल के फायदे (Benefits of lentils) निम्नलिखित पौष्टिक तत्वों की वजह से बढ़ जाते हैं। इन पौष्टिक तत्वों में शामिल है-

  • प्रोटीन
  • कार्बोहाइड्रेट
  • फाइबर
  • कैल्शियम
  • आयरन
  • पोटैशियम
  • मैग्नेशियम

इन सभी पौष्टिक तत्वों के सेवन से निम्नलिखित शारीरिक लाभ मिलते हैं।

तुअर दाल के फायदे (Benefits of lentils)-

  • ब्लड प्रेशर- तुअर या अरहर की दाल में पोटैशियम की मौजूदगी शरीर में ब्लड प्रेशर को नॉर्मल बनाए रखने में मददगार होती है। हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित लोगों के साथ-साथ हाइपरटेंशन या कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से बचाए रखने में भी तुअर दाल मददगार है। अपने आहार में संतुलित मात्रा में नियमित रूप से इसे शामिल करके में इन सभी बीमारियों से बचा जा सकता है।
  • सेल्स होते हैं मजबूत- एक कप पके हुए तुअर दाल में प्रोटीन की मात्रा तकरीबन 11 ग्राम होती है। शरीर के विकास के लिए प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना अनिवार्य होता है। चोट लगने या कटने-फटने पर इसे जल्द ठीक होने में भी मददगार होता है। इसके संतुलित मात्रा में सेवन से कोशिकाओं का निर्माण होता है।
  • एनीमिया- शरीर में फोलेट की कमी की वजह से एनीमिया की समस्या हो सकती है। गर्भवती महिलाओं में फोलेट की कमी की वजह से न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स की समस्या गर्भ में पल रहे शिशु को हो सकती है। इसलिए एक कप या एक कटोरी तुअर दाल के सेवन से शरीर को आवश्यक विटामिन की पूर्ति होती है।
  • हार्ट प्रॉब्लम- तुअर दाल में मौजूद पोटैशियम और फाइबर दिल को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। दरअसल पोटैशियम ब्लड प्रेशर को संतुलित बनाए रखने में सहायक होता है, तो वहीं अरहर की दाल में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को मेंटेन रखता है। इसलिए इसका सेवन दिल की समस्या से बचने के लिए काफी मददगार होता है।
  • डायजेशन- तुअर दाल में फाइबर की मात्रा प्रचुर होने की वजह से इसे डायजेशन को ठीक रखने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। कब्ज, ब्लोटिंग, क्रैंप या डायरिया जैसी बीमारियों को दूर करने का रामबाण उपाय भी तुअर दाल को माना जाता है।

नियमित रूप खाने से अरहर या तुअर दाल के फायदे (Benefits of lentils) तो हो सकते हैं लेकिन, सामान्य से ज्यादा सेवन करने पर पेट दर्द के साथ अन्य परेशानी भी शुरू हो सकती है।

और पढ़ें: सोने से पहले ब्लड प्रेशर की दवा लेने से कम होगा हार्ट अटैक का खतरा

क्या हैं मसूर दाल के फायदे (Benefits of lentils)?

दाल के फायदे (Benefits of lentils) चाहिए, तो आपको मसूर की दाल खानी चाहिए। मसूर दाल के फायदे (Benefits of lentils) इसमें मौजूद निम्नलिखित पौष्टिक तत्वों की वजह से होते हैं। इन पौष्टिक तत्वों में शामिल है-
  • फाइबर
  • प्रोटीन
  • फोलेट
  • पॉलीफेनॉल्स
  • कैल्शियम
  • मैग्नेशियम
  • फॉस्फोरस
  • विटामि-बी
  • विटामिन-सी

मसूर दाल के फायदे (Benefits of lentils) निम्नलिखित हैं-

  • वजन- वजन संतुलित रखने में मसूर दाल काफी मददगार है। मसूर दाल में मौजूद फाइबर और प्रोटीन बार-बार भूख लगने की समस्या को कम कर वजन संतुलित रखता है। वजन बढ़ने के कई कारणों में एक कारण बार-बार खाना भी शामिल है। इसलिए इसका सेवन नियमित रूप से करें। तभी दाल के फायदे (Benefits of lentils) मिलेंगे।
  • हार्ट और कोलेस्ट्रॉल- मसूर दाल में मौजूद फाइबर और फोलेट का मिश्रण दिल को स्वस्थ रखने के लिए कुंजी मानी जाती है। रिसर्च के अनुसार फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने में सहायक है तो फाइबर और फोलेट दिल को। इसलिए यह हार्ट को हेल्दी और गुड कोलेस्ट्रॉल दोनों के लिए हेल्दी माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार हार्ट अटैक जैसी संभावनाओं को भी कम करने में सहयक है।
  • शुगर लेवल-मसूर की दाल में मौजूद फाइबर की उच्च मात्रा डायबिटीज के पेशेंट के लिए हेल्दी होता है। इसके संतुलित मात्रा में सेवन से ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन की मात्रा संतुलित बनी रहती है, जिससे डायबिटीज के मरीज के लिए यह बेहद लाभकारी माना जाता है।
  • डायजेशन- कुछ गलत खाने-पीने से हमारी पाचन क्रिया पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में मसूर की दाल पाचन क्रिया को ठीक करने में सहायक हो सकती है, क्योंकि इसमें मौजूद फाइबर आपके डायजेशन को बेहतर करता है। यही नहीं अगर पाचन संबंधी परेशानी से पीड़ित हैं या परेशान रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में भी मसूर की दाल फायदेमंद हो सकती है।
  • इम्यूनिटी पावर- मसूर दाल में मौजूद मिनरल्स बॉडी की इम्यूनिटी पावर को स्ट्रॉन्ग करने में मददगार होते हैं। इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होने पर किसी भी बीमारी से आसानी से लड़ा जा सकता है या आप यह भी कह सकते हैं कि इम्यून पावर स्ट्रॉन्ग होने की वजह से बीमारी आपसे दूर ही रहेगी।
  • कैंसर- शोध के अनुसार मसूर दाल में मौजूद पॉलीफेनॉल्स कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने में सहायक है। पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी मसूर की दाल का सेवन करना चाहिए क्योंकि इससे ब्रेस्ट कैंसर और पेट के कैंसर से बचा जा सकता है।
  • दांत और हड्डियां- हम शरीर के हर एक हिस्से को मजबूत बनाने की कोशिश करते हैं। इन शरीर के हिस्सों में दांत और हड्डियां दोनों शामिल हैं। इन्हें भी स्ट्रॉन्ग बनाने में मसूर दाल की अहम भूमिका है। दरअसल मसूर दाल में मौजूद कैल्शियम, मैग्नेशियम और फॉस्फोरस हड्डियों और दांतों को हेल्दी बनाए रखते हैं। इसके साथ ही मसूर दाल के सेवन से जोड़ों में दर्द की समस्या से भी राहत मिल सकती है।
  • स्ट्रेस बस्टर- बदलते वक्त और इस भागती दौड़ती लाइफस्टाइल में स्ट्रेस में बढ़ता जा रहा है, लेकिन, मसूर की दाल में मौजूद फोलेट आपके स्ट्रेस को कम करने में मददगार होने के साथ-साथ आपकी याददाश्त को बेहतर बनाए रखने में आपकी मदद करता है।
  • प्रेग्नेंसी में लाभकारी- गर्भावस्था में गर्भवती महिलाओं को कमजोरी महसूस होना सामान्य है लेकिन, ज्यादा कमजोरी होने पर परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि गर्भावस्था में मसूर की दाल का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए तो यह गर्भधारण कर चुकी महिला के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार मसूर की दाल गर्भ में पल रहे शिशु को न्यूरल ट्यूब दोष और अन्य बीमारियों से बचाने में मददगार है। हालांकि अगर गर्भवती महिला को मसूर की दाल से एलर्जी है, तो इसका सेवन न करें और डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही करें।
  • त्वचा- मसूर की दाल आहार में तो शामिल करना चाहिए लेकिन, इसके साथ ही मसूर की दाल को पानी में डुबोकर सॉफ्ट होने दें और इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा संबंधी परेशानी दूर होती है। आप चाहें तो मसूर को दूध के साथ पेस्ट बनाकर भी चेहरे पर लगा सकती हैं।
  • बाल- त्वचा के साथ-साथ मसूर की दाल बालों को भी हेल्दी बनाने में मददगार है। मसूर की दाल में विटामिन-बी और विटामिन-सी की मौजूदगी बालों को स्ट्रॉन्ग करती है। बाल झड़ने की समस्या हो या कोई और बालों से जुड़ी परेशानी को दूर करने के लिए नियमित और संतुलित मात्रा में मसूर की दाल का सेवन करें।
मसूर की दाल के कई फायदे हैं लेकिन, अगर इसका सेवन ज्यादा किया जाए तो पेट में गैस की परेशानी हो सकती है। इसलिए संतुलित मात्रा में सेवन करें।

क्या हैं कुलथी दाल के फायदे (Benefits of lentils)?

कुलथी दाल के फायदे (Benefits of lentils) इसमें मौजूद निम्नलिखित पौष्टिक तत्वों की वजह से हैं। जैसे-
  • एंटीऑक्सिडेंट
  • कैल्शियम
  • फॉस्फोरस
  • आयरन
  • फाइबर
  • प्रोटीन
  • कार्बोहाइड्रेट

कुलथी दाल के फायदे (Benefits of lentils) –

  • स्टोन- किडनी स्टोन की परेशानी को दूर करने में कुलथी की दाल बेहद फायदेमंद है। दरअसल इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट शरीर में मौजूद होने वाली गंदगी को बाहर निकालने में मददगार होते हैं। इसलिए किडनी स्टोन की समस्या होने पर कुलथी की दाल को पानी में उबालें और जब पानी की मात्रा आधी हो जाए तो पानी को छान लें और पानी का सेवन रोजाना सुबह खाली पेट में करें।
  • डायबिटीज- इस दाल में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और फाइबर की मात्रा डायबिटीज के मरीज के लिए लाभकारी मानी जाती है। इसके संतुलित मात्रा में सेवन से टाइप-2 डायबिटीज की समस्या से भी बचा जा सकता है।
  • वजन- कुलथी दाल के फायदे (Benefits of lentils) वजन संतुलित रखने में भी है। कुलथी की दाल में मौजूद फाइबर और प्रोटीन बार-बार भूख लगने की समस्या को कम कर वजन संतुलित रखता है। वजन बढ़ने के कई कारणों में एक कारण बार-बार खाना भी शामिल है। इसलिए इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।
  • अल्सर- कुलथी की दाल में फ्लेवोनॉयड मौजूद होता है और फ्लेवोनॉयड एंटी-अल्सर की भूमिका निभाता है। अगर आपको अल्सर की समस्या है तो इसके सेवन से आपकी परेशानी कम हो सकती है। इसमें मौजूद फाइबर अल्सर की समस्या शुरू नहीं होने में भी सहायक है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार अल्सर के पेशेंट को कुलथी के दाल का सेवन करना चाहिए। अगर आपको पेट की सूजन या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में दर्द की समस्या रहती है, तो ऐसी स्थिति में भी इसका सेवन लाभकारी माना जाता है।
  • सर्दी-जुकाम अगर आप सर्दी-जुकाम या बुखार से पीड़ित हैं, तो आपको कुलथी के दाल का सेवन करना चाहिए। यही नहीं इसके सेवन से गले के संक्रमण से भी बचा जा सकता है।
कुलथी की दाल में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है और अगर शरीर में कैल्शियम की मात्रा जरूरत से ज्यादा होती है, ऐसे में पेट में सूजन और गैस के साथ कब्ज की समस्या भी हो सकती है। इसलिए दाल के फायदे (Benefits of lentils) लेने के लिए इसका संतुलित मात्रा में उपयोग करना जरूरी है।

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि दाल के फायदे (Benefits of lentils) कितने सारे हैं। अपने भोजन में नियमित रूप से दाल को शामिल कर आप दाल के फायदे प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप दाल के फायदे से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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सूत्र

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 24/08/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड