बच्चों में ब्रोंकाइटिस की परेशानी क्यों होती है? जानें इसका इलाज

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अपडेट डेट June 11, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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बच्चों में कुछ हफ्तों के लिए होने वाली सूखी खांसी को एक्यूट (तीव्र) ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। आमतौर पर यह स्थिति किसी वायरस या बदलते मौसम के कारण होती है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में यह समस्या अपने आप ही ठीक हो जाती है।

बेहद दुलर्भ मामलों में बच्चों में ब्रोंकाइटिस एक क्रोनिक स्थिति का रूप लेती है। यानी की बच्चों में ब्रोंकाइटिस ज्यादा से ज्यादा 1 या उससे अधिक महीने के लिए रहता है। बच्चों में क्रोनिक ब्रोंकाइटिस अक्सर बैक्टीरिया और एंटीबायोटिक के इलाज की प्रतक्रिया के कारण होता है।

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बच्चों में ब्रोंकाइटिस क्या होता है?

बच्चों में ब्रोंकाइटिस एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें फेफड़ो की सबसे बड़ी श्वसन नलिका में सूजन आ जाती है। यह बीमारी लंबे (क्रोनिक) या थोड़े (एक्यूट) समय के लिए होती है। अक्सर बच्चों में एक्यूट ब्रोंकाइटिस के लक्षणों का मतलब होता है कि यह स्थिति जल्दी विकसित हुई है और जल्द ही ठीक भी हो जाएगी। इसके ज्यादातर मामलें माइल्ड होते हैं।

ब्रांकाई ट्यूब (वायुनालियां) बलगम बनाती हैं और सांस संबंधित प्रक्रिया में शामिल अंगों और ऊतकों को प्रोटेक्ट करती है। ब्रोंकाइटिस के कारण बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। इसके अलावा वायुनलियों के ऊतकों में इर्रिटेशन होने लगती है जिसके कारण अत्यधिक बलगम बनने लगता है। बच्चों में ब्रोंकाइटिस का सबसे सामान्य लक्षण खांसी होता है।

बच्चों में ब्रोंकाइटिस की परेशानी क्यों होती है

बच्चों में ब्रोंकाइटिस आमतौर पर वायरस के कारण होता है जिसका सामान्य लक्षण सर्दी-जुकाम होता है। इसके अलावा ब्रोंकाइटिस स्थिति एलर्जी, इर्रिटेन्ट जैसे धूल या सिगरेट का धुंआ और अस्थमा से जुड़ी होती है। बच्चों में ब्रोंकाइटिस कोल्ड के तुरंत बाद हो सकता है लेकिन आमतौर पर यह माइल्ड होता है और 1 से 3 हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है।

बच्चों में ब्रोंकाइटिस कि समस्या वायरस, बैक्टीरियल इंफेक्शन, एनवायरनमेंट और फेफड़ों की अन्य समस्या के कारण हो सकती है।

वायरस इंफेक्शन – बच्चों में ब्रोंकाइटिस के 80 से 85 प्रतिशत मामलों का कारण वायरल इंफेक्शन पाया गया है। यह वही वायरस होता है जिसके कारण बच्चों में कोल्ड या फ्लू होता है।

बैक्टीरियल इंफेक्शन – कुछ दुर्लभ मामलों में वायरल इंफेक्शन बैक्टीरियल ब्रोंकाइटिस का रूप ले लेता है। यह माइकोप्लाज्मा निमोनिया, क्लामिडिया निमोनिया और बोर्डटेला पर्टुसिसि जैसे बैक्टीरिया के परिणामस्वरूप होता है।

इर्रिटेन्ट (उत्तेजक पदार्थ) – स्मोक, स्मोग या रसायनिक हवा में सांस लेने के कारण ब्रांकाई ट्यूब में जलन हो सकती है। इसकी वजह से बच्चों में ब्रोंकाइटिस जैसी स्थिति विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है।

अन्य फेफड़ो संबंधी समस्याएं – बच्चों में क्रोनिक ब्रोंकाइटिस या अस्थमा के कारण भी एक्यूट ब्रोंकाइटिस विकसित हो सकता है। इन मामलों में ब्रोंकाइटिस खतरनाक नहीं होता है क्योंकि यह किसी  बैक्टीरिया या इंफेक्शन के कारण नहीं हुआ होता।

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बच्चों में ब्रोंकाइटिस की कैसे पहचान करें?

बच्चों में ब्रोंकाइटिस के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन ज्यादातर मामलों में निम्न लक्षणों को मुख्य रूप से देखा गया है –

  • नाक बहना
  • हल्का बुखार
  • बीमार महसूस करना
  • गले में खराश
  • मांसपेशियों में दर्द
  • खांसी
  • थकान
  • छींकना

शुरुआत में खांसी सुखी हो सकती है लेकिन आगे चल के इसके कारण पीले व हरे रंग का बलगम उतपन्न हो सकता है। म्यूकस धीरे-धीरे वायुनालियों को ब्लॉक करने लगता है और बच्चे को सांस लेने में परेशानी शुरू होने लगती है। बच्चों में ब्रोंकाइटिस कोल्ड के तुंरत बाद हो सकता है और कुछ हफ्तों तक रह सकता है।

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बच्चों में ब्रोंकाइटिस का इलाज

बच्चों में ब्रोंकाइटिस आमतौर पर 1 से 2 हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है और इसके कारण कोई जटिलताएं पैदा नहीं होती हैं। अगर आपके बच्चे की सर्दी-खांसी ठीक नहीं हो रही है तो डॉक्टर उसे कुछ समय के लिए अस्थमा-रोधक दवाएं दे सकते हैं।

अगर आपके डॉक्टर को लगता है की बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण ब्रोंकाइटिस हुआ है या खांसी ठीक नहीं हो रही है तो वह बच्चे को एंटी-बायोटिक्स का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में एंटी-बायोटिक्स कि सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि बच्चों में ब्रोंकाइटिस का मुख्य कारण वायरस होते हैं जिनपर एंटी-बायोटिक्स बेअसर होती हैं।

खांसी की दवा से ब्रोंकाइटिस का इलाज नहीं किया जा सकता है। शहद की मदद से ब्रोंकाइटिस की खांसी कि तीव्रता और समय को कम किया जा सकता है। लेकिन आपको 12 महीने से कम उम्र के बच्चे को शहद नहीं देना चाहिए। इससे नवजात में बोटुलिस्म (गंभीर प्रकार की फूड पॉइजनिंग) का खतरा बढ़ जाता है।

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बच्चों में श्वसनीशोथ के घरेलू उपचार

बच्चों में ब्रोंकाइटिस को घरेलू उपाय की मदद से घर पर ही ठीक किया जा सकता है। निम्न प्राकृतिक उपचार की मदद से कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। तो चलिए जानतें हैं बच्चों में ब्रोंकाइटिस के इलाज के बारे में –

अदरक

कुछ शोध में यह पाया गया है की अदरक के एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव से श्वसन संबंधी संक्रमण का इलाज किया जा सकता है। अदरक को आप निम्न रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं –

  • सूखी अदरक को चबाएं
  • अदरक की चाय (बेहतर परिणामों के लिए हर्बल टी)
  • कच्चा या खाने में मिलाकर खाए

अदरक को प्राकृतिक रूप में खाना सेफ होता है लेकिन अपने बच्चे को इसका सेवन करवाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। शिशु को अदरक से एलर्जी या अन्य समस्याएं भी हो सकती है।

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लहसुन

लहसुन में कई अनगिनत हीलिंग प्रॉपर्टीज होती हैं। 2016 में की गई एक स्टडी में पाया गया की यह वायरस के कारण हुए ब्रोंकाइटिस के संक्रमण को नष्ट करने में मदद करता है। शोध के अनुसार लहसुन को ब्रोंकाइटिस के घरेलू इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है।

लहसुन के बेहतर परिणामों के लिए उसे कच्चा खाना चाहिए। हालांकि, अगर आपके बच्चे को इसका टेस्ट अच्छा नहीं लगता है तो आप डॉक्टर से सलाह लेकर उसे कैप्सूल फॉर्म में भी इसका सेवन करवा सकते हैं।

बच्चों को लहसुन का कम सेवन करवाएं क्योंकि इसके कारण पेट की समस्याएं उतपन्न हो सकती हैं। बेहतर और सुरक्षित परिणामों के लिए अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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हल्दी

हल्दी एक ऐसी औषधि है जो हर भारतीय घर में आसानी से पाई जा सकती है। 2011 में किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया की हल्दी में अदरक से ज्यादा एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव होते हैं। हल्दी एंटी-ऑक्सीडेंट से भी भरपूर होती है। यानी यह न केवल जलन को कम करने बल्कि आपके बच्चे की इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करती है।

हल्दी को इस्तेमाल करने के तरिके –

  • हल्दी को सलाद या अचार बनाने में इस्तेमाल करें
  • 1/2 चम्मच हल्दी को 1 चम्मच शहद के साथ मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। बच्चे में ब्रोंकाइटिस के लक्षण खत्म होने तक उसे दिन में 1 से 2 बार इसका सेवन करवाएं।
  • गर्म पानी के साथ सेवन करवाएं

हल्दी आमतौर पर एक सेफ घरेलू उपाय होता है लेकिन बच्चे को इससे संवेदनशीलता हो सकती है। डॉक्टर से सलाह लिए बिना किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार का इस्तेमाल न करें।

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नमक का पानी

नमक के गरारे करने से बलगम और गले में दर्द को कम करने में मदद मिलती है। एक गिलास गुनगने पानी में 1 छोटा चम्मच नमक मिलाएं। अब बच्चे को इससे गरारे करने के लिए खाएं। कोशिश करें कि बच्चा गरारे करते समय पानी को गले तक ले जा सके। पानी को निगलने न दें। इसकी बजाए सिंक में थूंके। दर्द कम होने तक दिन में 2 से 3 बार बच्चे को नमक के गरारे करवाएं। गरारे करने के बाद नार्मल पानी से मुंह साफ करना न भूलें।

नींद

किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए शरीर को पर्याप्त आराम देने कि आवश्यकता होती है। हालांकि, बच्चों में ब्रोंकाइटिस की स्थिति में सोना आसान नहीं होता लेकिन किसी भी प्रकार की अनावश्यक गतिविधि से परहेज करने के लिए बच्चे का खास ध्यान रखना जरूरी होता है। गहरी नींद में बच्चों का इम्यून सिस्टम तेजी से काम करता है जिससे वायरल इंफेक्शन से लड़ने में मदद मिलती है। आपका बच्चा पार्यप्त रूप से नींद ले रहा है या नहीं इस बात को सुनिश्चित करें।

ऊपर दिए गर किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। इसके अलावा 1 से 2 हफ्तों तक घरेलू उपचार का इस्तेमाल करने से भी बच्चों में ब्रोंकाइटिस ठीक न हो तो तुरंत पीडियाट्रिक से संपर्क करें।

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पीडियाट्रिशन पर कब जाएं

आपको अपने बच्चे को पीडियाट्रिक के पास निम्न स्थितियों में ले जाना चाहिए –

  • पहले कभी अस्थमा का दौरा पड़ा हो
  • तेज बुखार
  • 7-10 दिनों से चल रही खांसी
  • सांस फूलना
  • बलगम में खून आना
  • बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही है या जोर से सांस ले रहा है

बच्चों में ब्रोंकाइटिस के रोकथाम

अच्छे से हाथ धोने से कई प्रकार के जर्म से बच्चों को बचाया जा सकता है। जर्म, बैक्टीरिया और वायरस बच्चों में ब्रोंकाइटिस का मुख्य कारण होते हैं, खासतौर से फ्लू और कोल्ड के मौसम में।

अगर परिवार में कोई धूम्रपान करता है तो उनसे ऐसा करने के लिए मना करें। बच्चों में ब्रोंकाइटिस होने या न होने पर भी उन्हें सेकंडहैंड स्मोक से बचाएं। यह उनमें वायरल इंफेक्शन और वायुनालियों में रुकावट का खतरा बड़ा देता है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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