कब्ज या कांस्टिपेशन को आमतौर पर एक सामान्य समस्या के रूप में जाना जाता है। चिकित्सीय रूप कांस्टिपेशन मल त्याग में होने वाली परेशानी है। सप्ताह में तीन से कम बार मल त्याग को कब्ज और सप्ताह में एक से कम बार मल त्याग को गंभीर कब्ज के रूप में परिभाषित किया गया है, लेकिन, क्या आपको पता है कि महिलाओं को कई बार इस समस्या का सामना करना पड़ता है जैसे मासिक धर्म के पहले, मासिक धर्म के बाद या मेनोपॉज के बाद। इसे हार्मोनल कांस्टिपेशन (Hormonal constipation) कहा जाता है। कई महिलाएं मासिक धर्म के समय कब्ज, ब्लोटिंग, डायरिया या इन सब का सामना करती हैं। ऐसा हार्मोन्स के असंतुलन के कारण होता है जानिए हार्मोनल कांस्टिपेशन (Hormonal constipation) क्या है? जानिए इसके लक्षणों और उपचार के बारे में।
हार्मोनल कांस्टिपेशन (Hormonal constipation) क्या है?
ऐसा माना जाता है कि महिलों को पुरुषों की तुलना में कब्ज की समस्या से अधिक गुजरना पड़ता है। लेकिन, कांस्टिपेशन का एक बड़ा हार्मोनल लिंक भी है। महिलाएं जो गर्भवती हैं या जो मेनोपॉज से गुजर रही होती हैं, उनके शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण वो हार्मोनल कांस्टिपेशन (hormonal constipation) का शिकार अधिक होती हैं। हालांकि, आप पीरियडस से पहले कांस्टिपेशन और पीरियड के बाद कांस्टिपेशन की समस्या का सामना कर सकती हैं। यानी हार्मोन्स के अंसतुलन के कारण कांस्टिपेशन की समस्या को हार्मोनल कांस्टिपेशन(hormonal constipation) कहा जाता है।

हार्मोनल कांस्टिपेशन के कारण (Hormonal constipation causes)
एस्ट्रोजेन को हार्मोनल कांस्टिपेशन का कारण (Hormonal constipation cause) माना जाता है, खासकर जब मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट आती है। पहले ऐसा माना जाता था कि प्रोजेस्टेरोन गर्भावस्था के दौरान कब्ज का कारण है, लेकिन नए शोध से पता चल रहा है कि संभवतः एस्ट्रोजन के कारण ऐसा होने की संभावना अधिक है। अध्ययनों से पता चला है कि एस्ट्रोजन वास्तव में गैस्ट्रिक एम्प्टयिंग करने में देरी करता है, जो संक्रमण को बढ़ाता है और कब्ज पैदा करता है। एस्ट्रोजेन पेल्विक फ्लोर को भी कमजोर करता है, जिससे मल त्याग करना कठिन हो जाता है। एस्ट्रोजेन ही वो कारण है जिससे पीरियड से पहले, पीरियड के बाद में, गर्भावस्था और मेनोपॉज के बाद हार्मोन्स में परिवर्तन आता है और यह हार्मोनल कांस्टिपेशन का कारण बनते हैं।
मासिक धर्म के दौरान आपके शरीर के रिलीज होने वाले हार्मोन सूजन, वाटर रिटेंशन और पेट में ऐंठन का कारण हो सकते हैं। प्रोस्टाग्लैंडिंस, या फैटी एसिड, सूजन का कारण बनते हैं। यह सूजन और ऐंठन आपके पेट में महसूस हो सकती है, लेकिन यह वास्तव में गर्भाशय में है। हार्मोन प्रोजेस्टेरोन का निर्माण होना भी कांस्टिपेशन पैदा कर सकता है। यह हार्मोन गर्भाशय की दीवारों की वृद्धि और थिक होने के लिए जिम्मेदार हैं, और ऐसा ओवुलेशन से ठीक पहले अधिक होता है। यह कांस्टिपेशन को बढ़ावा देता है। हालांकि,ओवुलेशन के बाद कांस्टिपेशन(constipation after ovulation) होना भी सामान्य है।
मेनोपॉज और हार्मोनल कांस्टिपेशन (Menopause and hormonal constipation)
कब्ज होना मेनोपॉज में सामान्य है। मेनोपॉज तब होता है जब आपके मासिक धर्म चक्र कम से कम एक वर्ष के लिए समाप्त हो जाता है। ऐसा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महिला हार्मोन में गिरावट के कारण होता है। ये हार्मोन पाचन तंत्र सहित शरीर के कई क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं। इस हार्मोन ड्रॉप के परिणामस्वरूप, कुछ पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं को कांस्टिपेशन का अनुभव होता है। हालांकि, मेनोपॉज से पहले बोवेल रूटीन में बदलाव, प्रीमेनोपॉज के दौरान भी शुरू हो सकते हैं।
यही नहीं, कोर्टिसोल के स्तर को कम रखने सहित कई चीजों के लिए एस्ट्रोजेन जिम्मेदार है। कोर्टिसोल तनाव से जुड़ा एक हार्मोन है। जब एस्ट्रोजन में गिरावट आती है, तो कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। यह पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है और भोजन को टूटने में लगने वाले समय को लंबा कर देता है। यह मल को पास करने के लिए और अधिक कठिन बना सकता है जिससे हार्मोनल कांस्टिपेशन(hormonal constipation) हो सकती है।
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प्रोजेस्टेरोन कोलन को कम करने का कारण बन सकते हैं। हमारे कोलन में लंबे समय तक भोजन का वेस्ट रहता है। जब एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम होता है तो मल भी ड्राय हो जाता है इनसे महिलाओं की पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों कमजोर हो जाती हैं। जिससे यह कठोर और सूखा होता है और कांस्टिपेशन का कारण बनता है।
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हार्मोनल कांस्टिपेशन का उपचार (Hormonal constipation treatment)
हार्मोनल कांस्टिपेशन का उपचार((hormonal constipation treatment)) या उससे राहत पाने के लिए आप इन तरीकों को अपनाएं:
अधिक फाइबर युक्त आहार जैसे फल, सब्जियां, सेब, संतरे, केले , मेवे और बींस और होल ग्रेन ब्रेड आदि का सेवन करने से आपको हार्मोनल कांस्टिपेशन(hormonal constipation) या कब्ज से बचने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही अपने आहार में अधिक बसा, चीनी, स्टार्ची फूड को शामिल न करें। कुछ आहार भी कब्ज को बढ़ाते हैं जैसे हाई फैट युक्त चीजें, डेरी प्रोडक्ट आदि। इन को भी अपने आहार में शामिल न कर के आप हार्मोनल कांस्टिपेशन(hormonal constipation) से बच सकते हैं। अधिक तले-भुने, मिर्च-मसाले या फास्ट-फूड से भी दूर रहने में ही भलाई है।

अगर आप हार्मोनल कांस्टिपेशन(hormonal constipation) से बचना चाहते हैं तो पानी और अन्य तरल पदार्थों से दोस्ती जरूरी है। जितना अधिक हो सके तरल पदार्थों का सेवन करें। अधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन करने से आपका मल सॉफ्ट होगा। जिससे उसे पास करने में आसानी होगी। अगर आप अधिक मात्रा में तरल नहीं लेते हैं तो आपका मल सख्त और रुखा होगा। जिससे मल त्याग में मुश्किल हो सकती है।
शारीरिक एक्टिविटी करने से पाचन तंत्र के माध्यम से भोजन को स्थानांतरित करने में मदद मिलती है। ऐसे में पर्याप्त शारीरिक व्यायाम करना आवश्यक है। यह नहीं योगा के कुछ आसन भी इसमें आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं। शारीरिक गतिविधियां कम करने या व्यायाम आदि न करने से आपकी कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। यही नहीं, इससे आपको कई अन्य बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
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नियमित भोजन का समय निर्धारित करें
आजकल की फास्ट दुनिया में किसी के पास समय नहीं है। ऐसे में भोजन का भी कोई टाइम नहीं है। जब भूख लगी तब कुछ खा लिया। इसके साथ ही आजकल लोग फास्ट फूड को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं। लेकिन, यह रवैया हमारे स्वास्थ्य और पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। कुछ भी खाना आंतों के लिए एक नेचुरल स्टीमुलेंट है, इसलिए सही समय पर भोजन करना आपको आंत्र की आदतों को विकसित करने में मदद कर सकता है। ऐसे में आप अपने भोजन का समय निर्धारित करना चाहिए और सही समय पर ही आहार ग्रहण करना चाहिए। इससे भी आपको हार्मोनल कांस्टिपेशन (hormonal constipation) से राहत मिल सकती है।
मल त्याग की आदतें सुधारें
अक्सर लोगों की मल त्याग की आदतें भी उनकी कब्ज या अन्य पेट की समस्याओं का कारण बन सकती हैं। कई बार मल त्याग की इच्छा होने के बाद भी वो मल त्याग नहीं करते या उसे कुछ समय के लिए टाल देते हैं। मल त्याग की इच्छा होने के बाद भी उसे न करना आपके लिए खतरे का सिग्नल हो सकता है।
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कुछ दवाईयां भी कब्ज का कारण हो सकती है
कुछ दवाईयां भी कब्ज का कारण हो सकती है। कुछ यह ऐसी दवाएं हैं जो अवसाद और एंटासिड का इलाज करती हैं। इनमें एल्यूमीनियम या कैल्शियम होता है। कुछ एलर्जी दवाएं (एंटीहिस्टामाइन) और दर्द निवारक दवाएं जो उच्च रक्तचाप और पार्किंसंस रोग का इलाज करने के लिए उपयोग की जाती हैं। यह सभी हार्मोनल कांस्टिपेशन(hormonal constipation) या कब्ज का कारण बन सकती हैं। इनका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें। इस सूची में सेडेटिव, मूत्रवर्धक, आयरन सप्लीमेंटस और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाईयां भी शामिल हैं।
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इन स्थितियों में मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है:
- अगर पेट में भयानक दर्द हो
- वजन का कम होना
- अन्य सभी कब्ज विरोधी उपाय विफल हो जाते हैं
- बोवेल मूवमेंट में अचानक परिवर्तन आना
अगर आपको अपने पीरियड के समय हार्मोनल कांस्टिपेशन (Hormonal constipation) के साथ ही क्रैम्पिंग आदि महसूस कर रहे हों। तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अगर आपको मल के साथ खून और दर्द की शिकायत हो। तो यह कोई गंभीर समस्या भी हो सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।