नॉर्मल डिलिवरी के लिए बरतें यह सावधानियां

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Update Date जुलाई 3, 2020 . 2 मिनट में पढ़ें
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नॉर्मल डिलिवरी के लिए बरतें यह सावधानियां

हर प्रेग्नेंट महिला के मन में कहीं न कहीं अपनी डिलिवरी को लेकर डर बना रहता है। खासतौर पर पहली बार मां बनने वाली महिलाओं के मन में। कई महिलाएं केवल डर की वजह से ही सिजेरियन डिलिवरी का चुनाव करती हैं। लेकिन, बहुत-सी महिलाएं नॉर्मल डिलिवरी ही करवाना चाहती हैं। 

नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में देश के शहरी इलाकों में सिजेरियन डिलिवरी में 28.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में 12.9 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। जबकि, पिछले 10-15 सालों में इसका कुछ आंकड़ा महज 8.5 प्रतिशत ही था। लेकिन, देखा जाए तो अगर महिला और शिशु पूरी तरह से स्वस्थ हैं, तो डॉक्टर नॉर्मल डिलिवरी करवाने की सलाह देते हैं। 

भले ही यह कुछ समय का दर्द देती है, लेकिन इसके दर्द से महिलाएं जल्दी उबर भी जाती हैं। इस आर्टिकल में हम आपको नॉर्मल डिलिवरी करवाने के लिए कुछ सावधानियां बताने जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें : Kidney Stones : गुर्दे की पथरी क्या है?जाने इसके कारण लक्षण और उपाय

नॉर्मल डिलिवरी क्या है?

नॉर्मल डिलिवरी के दौरान शिशु का जन्म महिला के योनि मार्ग से प्राकृतिक तरीके से होता है। यह प्रसव का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

नॉर्मल डिलिवरी में मदद करेंगे यह टिप्स

स्वास्थ्य का रखें ख्याल :

स्वस्थ मां की गर्भ में ही स्वस्थ बच्चे का विकास होता है। ऐसे में मां को अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए। शारीरिक और मानसिक तौर पर भी खुद को तैयार रखना चाहिए। जिसके लिए अच्छा खाएं और अच्छा सोचें। इस दौरान, शारीरिक और मानसिक तौर पर भी कई बदलाव आते हैं। जिसके कारण कई बार कुछ खाने-पीने का मन नहीं करता। लेकिन, इस बात का ख्याल रखें कि आपको अपने भोजन में नियमित रूप से पौष्टिक आहार लेने होंगे।

पानी की उचित मात्रा :

मां की गर्भ के अंदर बच्चा एक थैली में रहता है। जिसके अंदर वो घूमता रहता है। इस थैली को एमनियोटिक थैली कहते हैं। इससे ही बच्चे को सारी ऊर्जा मिलती है। जिसे स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है कि मां हर दिन भरपूर मात्रा में पानी पिएं। पानी की मात्रा बराबर होने से शरीर के कीटाणु युरिन (मूत्र) के जरिए बाहर निकल जाते हैं।

और पढ़े- प्रेग्नेंसी के दौरान अल्फा फिटोप्रोटीन टेस्ट(अल्फा भ्रूणप्रोटीन परीक्षण) करने की जरूरत क्यों होती है?

तनाव से दूरी :

प्रेग्नेंसी के दौरान तनाव से जितना हो सके दूर रहें। तनाव का सारा असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है, जो उसके मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा डाल सकता है। यहां तक कि तनाव कई बार गर्भपात की भी वजह बन सकता है।

व्यायाम करें :

नॉर्मल डिलिवरी के लिए खुद को हमेशा एक्टिव रखें। इसके लिए आप दिन का थोड़ा समय व्यायाम के लिए जरूर निकालें। साथ ही, सुबह उठने के बाद थोड़ी देर के लिए बाहर खुली हवा में टहलने के लिए भी जाएं। आप चाहें तो, ट्रेनर की निगरानी में रहकर प्रग्नेंसी में किए जाने वाले व्यायाम भी कर सकती हैं।

और पढ़े-डिलीवरी के बाद सेक्स करने का सही समय क्या है?

वजन पर रखें ध्यान :

कभी-कभी जरूरत से ज्यादा वजन भी सिजेरियन डिलिवरी का कारण बन सकता है। इसलिए, नॉर्मल डिलिवरी के लिए आप अपने वजन को संतुलित रखने की कोशिश करें। इसके लिए आप पूरे दिन एक ही जगह पर बैठें या लेटें नहीं रहें। थोड़ी-बहुत शारीरिक गतिविधि भी करती रहें।

इन बातों के अलावा, आपको अपने डॉक्टर से भी बात करनी चाहिए। ताकि आप अपने बच्चे के नॉर्मल डिलिवरी को लेकर निश्चिंत हो सकें। साथ ही, अगर किसी भी तरह की कोई परेशानी महसूस करें, तो घरवालों से भी मिलकर बात करें।

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